About Mohsin Khan
नॉवेल निगार मोहसिन ख़ान उर्दू फ़िक्शन के नुमाइन्दा व पुख़्ता क़लमकार की हैसियत से कई दहाइयों से फ़िक्शन लिखते आ रहे हैं| उम्दा अफ़्सानों के साथ-साथ बच्चों के लिए भी उन्होंने काफ़ी कुछ लिखा है| अफ़्साना ज़ोहरा इस नॉवेल से पहले मोहसिन ख़ान के शाहकार अफ़्साने के तौर पर पढ़ा गया| ये अफ़्साना इस क़दर पसन्द किया गया कि उमर मेमन ने इस अफ़्साने की मक़बूलियत से मुतास्सिर हो कर अंग्रेज़ी में इसका तर्जुमा किया| मोहसिन ख़ान लखनऊ के ज़बानी सलीक़े की नुमाइन्दगी करते हैं| ज़बान में सफ़ाई और आसानी बाक़ी रखना इनकी ख़ूबी है| वो रिवायतों की मुश्किलों से दूर, ज़िन्दगी के मुआमलात से सही मज़मून हासिल करते हैं और तहरीरी तर्ज़ की सतह पर किसी पेचीदगी को राह दिए बग़ैर बड़ी बारीकी से उन कोनों तक पढ़ने वाले को ले जाते हैं जो उसके देखे हुए हैं, जब वो फ़नकार की आँख की रहनुमाई पा कर इन्हें देखता है तो दम-ब-ख़ुद रह जाता है| आम सी बात उसके लिए हैरानी का वाक़िया, सानिहा और हादिसा बन जाती है|