Allah Miya Ka Karkhana
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अल्लाह मियाँ का कारख़ाना उर्दू ज़बान में लिखे जा रहे आज के कुछ अहम नॉवेलों में से एक है। इस नॉवेल में एक बच्चे के ज़रिए मुस्लिम मुआशरे के हालात और समाजी, मआशी, मज़हबी, तालीमी और घरेलू ज़िन्दगी की परेशानियों का ज़िक्र बड़े ही आम और नर्म तरीके से किया गया है। इस नॉवेल का मफ़हूम जितना संजीदा है, तर्ज़ उतनी ही तज्रबाती है।
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अल्लाह मियाँ का कारख़ाना उर्दू ज़बान में लिखे जा रहे आज के कुछ अहम नॉवेलों में से एक है। इस नॉवेल में एक बच्चे के ज़रिए मुस्लिम मुआशरे के हालात और समाजी, मआशी, मज़हबी, तालीमी और घरेलू ज़िन्दगी की परेशानियों का ज़िक्र बड़े ही आम और नर्म तरीके से किया गया है। इस नॉवेल का मफ़हूम जितना संजीदा है, तर्ज़ उतनी ही तज्रबाती है।
Book Details
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ISBN9789394494268
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Pages273
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Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: ‘शस्त्र विदाई’ अर्नेस्ट हेमिंग्वे के विश्वप्रसिद्ध उपन्यास ‘ए फ़ेयरवेल टू आर्म्स’ का अनुवाद है। कई फ़िल्मों का आधार बन चुके और विश्व की अनेक भाषाओं में अनूदित इस उपन्यास की पृष्ठभूमि में प्रथम विश्वयुद्ध है। 1929 में प्रकाशित ‘ए फेयरवेल टू आर्म्स’ का कथावाचक पात्र अमेरिकी फ़ेडरिक हेनरी है जो इतालवी सेना में लेफ़्टिनेंट है। प्रथम विश्वयुद्ध के लोमहर्षक विवरणों, सनकी सिपाहियों, युद्ध और विस्थापन से जूझते नागरिकों से अँटे उपन्यास के विशाल फ़लक का केन्द्र हेनरी और कैथरीन बार्कले का प्रेम है। इस उपन्यास के प्रकाशन के साथ ही हेमिंग्वे एक आधुनिक अमेरिकी लेखक के रूप में स्थापित हो गए थे, यही उपन्यास उनका पहला बेस्टसेलर था।
Chiranjeev
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
- Book Type:

-
Description:
परम्परा और आधुनिकता का समन्वय करते हुए लोक-मन और उसमें प्रवाहित करुणा के सामाजिक भाव को अपनी रचनाओं में समेटकर जीवन की गाथाएँ रचने वाले चन्द्रकिशोर जायसवाल का यह उपन्यास पारिवारिक जीवन के सौन्दर्य को इतने विस्तार और बारीकी से सम्भवत: पहली बार अपने कथानक का विषय बनाता है। कथानक के केन्द्र में शशांक, दिव्या और इस दम्पति का पुत्र टीपू हैं। इन्हीं पात्रों और इनके जीवन के बहाने लेखक ने इस उपन्यास में ग्रामीण और कस्बाई जीवन के छोटे-छोटे ब्योरों से यह कथा बुनी है जो दरअसल भारत के समूचे लोक-परिवेश का महाख्यान है।
यह उपन्यास सम्बन्धों के जटिल संजाल के साथ लोक की उस ऊष्मा को भी पुनर्जीवित करता है, जो हमारे आधुनिक समय के हाशिये पर उपेक्षित जा पड़ी है। विवरण-सघनता इस उपन्यास में एक तरफ अगर लेखक की विशाल अनुभव-सम्पदा का प्रमाण है तो दूसरी तरफ उसकी रचनात्मक ऊर्जा का भी साक्ष्य है। यही वह भूमि है जो इस उपन्यास को अनूठा और दुर्लभ बनाती है, और जिससे गुजरते हुए पाठक इसके संसार का हिस्सा हो जाता है।
जिजीविषा के साथ यह उपन्यास मृत्यु को भी अपने कथ्य की परिधि में समेटता है, लेकिन जीवन की तलाश उसके परे भी जारी रहती है। निस्सन्देह इस उपन्यास में वह सब है जिसकी अपेक्षा एक विधा के तौर पर उपन्यास से की जाती है।
Hindutva : Ek Jeevan Shaili
- Author Name:
Ed. Kalraj Mishra
- Book Type:

- Description: आज भारत के राजनीतिक परिवेश में चारों ओर संकट दिखाई दे रहा है। देश में भ्रष्टाचार चरम पर है। धर्म-जाति के नाम पर वोट पाने हेतु राष्ट्रीय हितों को तिलांजलि दी जा रही है। छद्म धर्म-निरपेक्षता के नाम पर संप्रदायवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। आज के इस कलुषित वातावरण में हिंदुत्व की अप्रतिम जीवन-शैली को अपनाकर ही समाज में एक जन-जागरण पैदा किया जा सकता है, जिससे अपने संकीर्ण मतभेदों से ऊपर उठकर एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण हो सके। जीवनपर्यंत राष्ट्रवाद की राजनीति के आदर्शों पर चलनेवाले वरिष्ठ राजनेता पं. कलराज मिश्र ने हिंदुत्व की परंपराओं, वेद, पुराणों और स्मृतियों के माध्यम से सभी समस्याओं का हल खोजने का प्रयास किया है। इस पुस्तक में सम्मिलित अनेक आध्यात्मिक गुरुओं, राजनेताओं, लेखकों के मर्मस्पर्शी लेख बालविवाह, जातिप्रथा, टूटते परिवार, भ्रष्टाचार, महिलाओं के प्रति दुराचार जैसी बुराइयों को दूर करने में अवश्य सफल होंगे। हिंदुत्व की व्यापक अवधारणा, उसकी अप्रतिम जीवन-शैली, उसकी संस्कृति का दिग्दर्शन कराती एक श्रेष्ठ कृति।
Abhibhavak Kaise Hon
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description: "शिक्षकों और बालकों पर पुस्तकें चाहे कम ही सही, परंतु लिखी गई हैं। माता-पिता या अभिभावक कैसे हों? इस विषय पर पहली बार ही कोई पुस्तक हिंदी साहित्य में प्रकाशित हुई है। मुझे पहल करने का गौरव प्राप्त हो रहा है। इस पुस्तक की शैली भी अनोखी है। अभिभावकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम हो रहा है। हर विषय के विशेषज्ञ उसमें अपने व्याख्यान दे रहे हैं। फिर शंका-समाधान के लिए प्रश्न एवं उत्तर की व्यवस्था से पुस्तक और अधिक सरल तथा सरस बन गई है। माता-पिता अपने बच्चों की तथा परिवार की भलाई के लिए इस पुस्तक को अवश्य पढें़। इसमें ऐसा बहुत कुछ मिलेगा, जो माता-पिता बन जाने के बाद भी हमें पता नहीं है। हमें अपने दायित्व का बोध नहीं है। हम या तो बच्चों को मारते-डाँटते हैं या शिक्षकों को दोष देते रहते हैं। मेरा दावा है कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद हम सच्चाई को समझेंगे, अपने कर्तव्य को जानेंगे, समझेंगे तथा निभाएँगे।
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