Alok Mishra
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Books
lucknow Arey tauba ( लखनऊ अरे तौबा ) By Alok Mishra
- Author Name:
Alok Mishra
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Book Type:

- Description: लखनऊ जितना नवाबों के लिए जाना जाता है उतना ही शायरों के लिए भी। पर उस दिन के बाद ये शहर टैक्सी ड्राइवर शरद सिंह के लिए भी जाना जाने लगा । क़िस्मत ने ऐसा खेल खेला कि इस एक अकेले के पीछे शायराना शहर के सारे धुरंधर पड़ गये । जैसे चाहने वाले मीर की कब्र ढूढ़ते हैं वैसे मारने वाले शरद सिंह को ढूढ़ रहे थे । किसी ज़माने में इसी लखनऊ की गलियों में अपनी मोहब्बत के हाथों में हाथ डाले शरद नवाबों की तरह घूमता था । और अब हाल ये था कि जान बचाने के लिए मारा-मारा फिर रहा था । दिन जवानी के थे और दौर मुसीबतों का। वो वक़्त कुछ और था जब शरद किसी का जान-ए-जिगर हुआ करता था। अब जो थे वे जानी दुश्मन थे। बीते दिनों पिताजी शरद से लखनऊ छुड़वाना चाहते थे और शरद ने मना कर दिया था। पर हालात ने शरद को ऐसे मोड़ पे खड़ा कर दिया था कि वो हर साँस साँस में कह रहा था- लखनऊ अरे तौबा !
lucknow Arey tauba ( लखनऊ अरे तौबा ) By Alok Mishra
Alok Mishra
Kashi Express
- Author Name:
Alok Mishra
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Book Type:

- Description: संगम का मतलब मिलना ही नहीं होता, बिछड़ना भी होता है।हजारों किलोमीटर तक फैली भारतीय रेल की पटरियों पर हजारों ट्रेनें भागती हैं और इन तमाम ट्रेनों में करोड़ों लोग रोज़ सफर करते हैं। इन्हीं किसी ट्रेन की गेट पर खड़े राज ने प्लेटफॉर्म पर भागती सिमरन का हाथ पकड़ कर अन्दर खींच लिया था। इन्हीं किसी ट्रेन में ठाकुर बलदेव सिंह, जय और वीरू के हाथों में हथकड़ी डालकर जेल ले जा रहे थे। इन्हीं किसी ट्रेन में समीर भी वर्षा से पहली बार मिलता है।समीर नौकरी के सिलसिले में मुंबई जा रहा है और वर्षा सहेली की शादी में इलाहाबाद। वर्षा तो इलाहाबाद में उतर जाती है लेकिन समीर के दिल में घर कर जाती है।यहाँ से ये कहानी ज़िन्दगी की पटरियों पर दौड़ती हुई, अपनी मंज़िल की तलाश में आगे बढ़ती है, और वहीं जाकर रुकती है, जहाँ से कहानी शुरू होती है।