Sherjung

Sherjung

3 Books
0 Rating
0 Follow

जन्म : 27 नवम्बर, 1904। शिक्षा : अधिकतर स्वशिक्षण। अंग्रेज़ी, हिन्दी, उर्दू, फ़ारसी, बांग्ला और जर्मन भाषाओं के ज्ञाता। जीवन की मुख्य घटनाएँ : आरम्भ से बहिर्मुखी और घुमक्कड़ प्रवृत्ति के धनी शेरजंग एक ज़मींदार परिवार में पैदा होने के बावजूद युवावस्था में ही ज़मींदारी के ख़िलाफ़ हो गए थे। किशोरावस्था से ही वे स्वतंत्रता-आन्दोलन में शरीक हो गए जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेज़ी सरकार ने उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई जो बाद में चलकर आजीवन कारावास में बदल गई। मई, 1938 में रिहाई और उसी वर्ष शादी। 1940 में पुनः गिरफ़्तार। 1944 में रिहाई और देश को स्वतंत्रता मिलने तक दिल्ली की सिविल लाइंस में नज़रबन्द। स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद 1947-48 में शरणार्थी शिविरों का आयोजन। कश्मीर मिलीशिया का संगठन किया और कर्नल की मानद उपाधि से सम्मानित हुए। बंगाल में दंगों के दौरान साम्प्रदायिक सौहार्द के लिए कार्य किया। गोवा मुक्ति आन्दोलन में संलग्न रहे। प्रमुख कृतियाँ : ‘लोरजा’ (कविता-संग्रह); ‘लाइफ़ एंड टीचिंग ऑफ़ कार्ल मार्क्स’, ‘हिस्ट्री ऑफ़ कम्युनिस्ट रशिया’, ‘ट्रिस्ट विथ टाइगर’, ‘रैंबलिंग इन टाइगरलैंड’, ‘गनलोर’, ‘प्रिज़न डेज़’ और उर्दू में एक उपन्यास। ग़ालिब और हाफ़िज़ की ग़ज़लों के हिन्दी रूपान्तरण, ‘दस स्पेक जरथुष्ट्र’। हिन्दी में : ‘कारावास के दिन’। निधन : 15 दिसम्बर, 1996।

Sherjung

Sherjung

3 Books

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp