Santosh Mehrotra

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सन्तोष मेहरोत्रा डेवलपमेंट इकोनॉमिस्ट हैं और यूनिवर्सिटी ऑफ़ बाथ, यू.के. में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर हैं। इसके अलावा वह हायर स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स, मॉस्को में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली में इकोनॉमिक्स के प्रोफ़ेसर थे। न्यू स्कूल फ़ॉर सोशल रिसर्च, न्यूयॉर्क से इकोनॉमिक्स में एम.ए. और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पी-एच.डी. (इकोनॉमिक्स, 1985) करने के बाद, उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में शोध सम्बन्धी पदों पर 15 साल (1991-2006) बिताए। वे फ्लोरेंस के इनोसेंटी रिसर्च सेंटर में विकासशील देशों के लिए सोशल पॉलिसी पर यूनीसेफ के ग्लोबल रिसर्च प्रोग्राम का नेतृत्व कर रहे थे। ग्लोबल ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट न्यूयॉर्क के चीफ़ इकोनॉमिस्ट भी रहे। योजना आयोग के ग्रामीण विकास विभाग और विकास नीति विभाग का नेतृत्व (2006-09) करने के लिए भारत लौटे। वे भारत की 11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजनाओं के कई अध्यायों के मुख्य लेखक थे। योजना आयोग के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ लेबर इकोनॉमिक्स रिसर्च के डायरेक्टर जनरल (2009-14) भी रहे। वे भारत सरकार के सेक्रेटरी के रैंक पर थे। उनकी 14 किताबें प्रकाशित हैं—हिन्दी में उनकी दो किताबें : ‘हर हाथ को काम’ (2025) और ‘विकास से हारेगा नक्सलवाद’ (2018) चर्चित रही हैं। उनकी पुस्तकों का हिन्दी, स्पैनिश, फ्रेंच, इटैलियन, रशियन, जर्मन और पुर्तगाली भाषाओं में अनुवाद हुआ है। वह नियमित रूप से अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन, एशियाई विकास बैंक, यूएनडीपी, यूनेस्को और यूएनईवीओसी को परामर्श देते हैं। विकास के मुद्दों पर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया—दोनों माध्यमों में लगातार उनकी भागीदारी रहती है।

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