Debabrata Ghosh

Debabrata Ghosh

4 Books

Kitabon mein Billi ne Bachche Diye Hain

  • Author Name:

    Debabrata Ghosh +1

  • Book Type:
  • Description: इब्न बतूता पहन के जूता, निकल पड़े तूफान में थोड़ी हवा नाक में घुस गई, घुस गई थोड़ी कान में Only a great poet such as Sarveshwar Dayal Saxena can write a poem for children about going into a storm. Not a regular storm, but a storm that can break you into two. Stopping only to repair his shoes, Ibn Batuta enters storm after storm. The poem rekindles memories of Ibn Battuta's courageous travels from Morocco to India as it brings life to the rhymes for children. All poems in this collection are equally remarkable. For instance, read the following poem, crisp composition with a breezy rhyme: महँगू ने महँगाई में, पैसे फूँके टाई में While poems' temperament rises and falls, Debabrata Ghosh's illustrations are quiet and serene. The green in these illustrations is at its quietest, and so is the colour blue. Age group 6-8 years
Kitabon mein Billi ne Bachche Diye Hain

Kitabon mein Billi ne Bachche Diye Hain

Debabrata Ghosh

130

₹ 107.9

Kahaniyan Jo Shuru Nahi Huyi

  • Author Name:

    Vinod Kumar Shukla +1

  • Book Type:
  • Description: बचपन में मैं पीपल के पत्‍ते की पिपहरी बनाकर उसको बजाने का आनन्‍द लिया करता था। इन दिनों पिपहरी बजाने जैसा वही आनन्‍द बच्‍चों के लिए लिखने में मिल रहा है। हाल ही में विनोद कुमार शुक्‍ल ने बच्‍चों के लिए लिखने के बारे में यह बात कही है। आप बच्‍चों के लिए लिखकर सचमुच पिपहरी बजाने का मज़ा ले रहे हैं। मज़े से की गई इन रचनाओं में उनके अन्‍दाज़ और भाषा का मज़ा भी है। देबब्रत घोष के चित्रों में कहानी सुनाने वाली बड़ी चाची और कहानी सुनते बच्‍चे पड़ोस के बच्‍चे लगते हैं। लगभग सभी चित्रों में दो रंगों का जोड़ है। जैसे अनगिनत रंग पढ़ने वाले की कल्‍पना में उमड़ने के लिए छोड़ दिए हों।
Kahaniyan Jo Shuru Nahi Huyi

Kahaniyan Jo Shuru Nahi Huyi

Vinod Kumar Shukla

185

₹ 153.55

Bagh aur Chhata

  • Author Name:

    Prabhat +1

  • Book Type:
  • Description: बाघ और छाता पाँच लोककथाओं की किताब है। इन लोककथाओं का पुनर्लेखन किया है कवि प्रभात ने। हम बार बार कहते हैं कि सबकी अपनी कहानी या कहानियाँ होती हैं। वे भी यूँ तो किसी न किसी स्तर पर सबकी होती हैं। क्योंकि उनका भावजगत सबका भावजगत होता है। लेकिन कुछ कथाएँ हम सबकी होती हैं। बराबरी से। उनका लेखक हम सब हैं। हम में से कोई भी उनमें अपनी कहानी का एक टुकड़ा जोड़ सकता है। इस तरह ये कहानियाँ कितने ही कितने लोगों के लगाए एक हिस्से से बनी हैं। इस बार इनमें एक हिस्सा लगाया है कवि प्रभात ने। जैसे, इस किताब की पहली ही पंक्ति है। जंगल घाटियों में चाँदनी रात हो रही थी। यह कहन कवि प्रभात की अपनी है। ताज़ी भी। सुबह हो रही है एक सामान्य वाक्य है। मगर रात हो रही है ऐसे हम नहीं कहते। रात के होने का वर्णन वैसा ही है जैसे सुबह का आमतौर पर होता है। सूरज की तरह चाँद उग रहा है। क्योंकि इस कहानी में एक साँप है। साँप की सुबह चाँद से होती है। ये पाँचों कहानियाँ बहुत रसीली हैं। रसीली इसलिए कि जैसे, चटपटी चीज़ें सामने आने पर मुंह में रस पैदा होते हैं। और यही रस उस चीज को पचाने में हमारी मदद करते हैं। ऐसे ही ये लोककथाएँ एक रस पैदा करती हैं जो बड़ी से बड़ी कल्पनाओं को, बड़े से बड़े विरोधाभासों को पचाने में या यकीन करने में मदद करता है। लोककथाओं में कुछ भी असम्भव नहीं है। इस तरह की होकर वे अनन्त आशाएँ भी पैदा करती हैं। इन लोककथाओं में इंसान हों या जानवर सब एक किरदार में बदल गए हैं। वे इंसान और जानवर के ऊँच नीच से मुक्त हैं। चोर हैं तो इस तरह हैं कि हाँ वे होते हैं। किसी विलेन की तरह नहीं हैं। बाघ और छाता कहानी में बाघ यानी चार टाँग छाता यानी एक टाँग से पूछता है कि दो टाँग यानी इंसान कहाँ गया हैं। एक टाँग बोलता है कि वह दस टाँग को पकड़ने गया है। चार टाँग यानी बाघ डर जाता है। लोककथाओं में यह बात क्या इस ओर भी इशारा करती है कि एक समय था जब सरल गणित का भी शैशव था और वह इस तरह डराती थी। इस किताब के चित्र देबब्रत घोष ने बनाए हैं। इन लोककथाओं के लोक चित्रों की तरह के चित्र हैं। इतने छोटे छोटे कमाल उनके चित्रों में हैं कि उन पर नज़र जाते ही मन में सूझ की कायली आ जाती है। मसलन, बाघ और छाता कहानी में छाते का चित्र। छाते को बाँधने के फीते और छाते के सिर को चित्रकार ने पूँछ की तरह दिखाया है। और उस पूँछ के घुमाव से पता चलता है कि पूँछ किसकी पूँछ की तरह है।
Bagh aur Chhata

Bagh aur Chhata

Prabhat

100

₹ 83

Keral Ke Kele

  • Author Name:

    Debabrata Ghosh +1

  • Rating:
  • Book Type:
  • Description: प्रयाग शुक्ल की मज़ेदार कविताओं की किताब जिसे आप और आपका बच्चा स्कूल बस का इंतज़ार करते समय या घर पर स्कूल के लिए तैयार होते समय गा सकते हैं। उनकी शब्दावली बनाने का एक मज़ेदार तरीका। देबब्रत घोष के रंगीन चित्र उनकी हास्य की भावना से समृद्ध हैं, जिसका आप और आपका बच्चा आनंद लेंगे। Age group 6-8 years
Keral Ke Kele

Keral Ke Kele

Debabrata Ghosh

125

₹ 103.75

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