Gulmohar Gar Tumhara Naam Hota!
Author:
Husn Tabssum NihanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
‘गुलमोहर ग़र तुम्हारा नाम होता’ में संकलित कहानियाँ सायास रचे गए किसी भाषिक चमत्कार या शिल्प-सज्जा के बग़ैर जीवन के विराट और दैनिक वृत्तान्त को अलग-अलग कोनों से छूती-पकड़ती हैं। इसलिए बेहद नज़दीक से गुज़री किसी घटना की तरह याद रह जाती हैं।</p>
<p>आधुनिक स्त्री की स्वातंत्र्य-कामना और उसके सामने खड़ी समाज की सामन्ती जड़ताएँ, घरों-परिवारों की जकड़बन्दियाँ, ऊपरी तौर पर सहजीवी दिखनेवाले समाज के अन्तर्विरोध और इन सबके साथ भारतीय मुस्लिम समाज की कुछ प्रामाणिक छवियाँ इन कहानियों की अपनी विशेषताएँ हैं।</p>
<p>सीधी और सरल-सी दिखनेवाली इन कहानियों में कई दृश्य ऐसे भी हैं जो रचनाकार की अत्यन्त सूक्ष्म दृष्टि का पता देते हैं। मसलन ‘हुए तुम दोस्त जिसके’ कहानी की सविता ताई का सिर्फ़ एक स्पर्श-सुख पाने के लिए आते-जाते युवकों से नाला पार कराने का आग्रह करना—जीवन के स्वर्णिम दिन वेश्यावृत्ति में गुज़ारने और मन-भाए एकमात्र प्रेमी को खो देने के बाद अकेली खटतीं सविता ताई जो अब 88 वर्ष की हैं। भीख माँगकर पेट के लिए रोटी जुटातीं और बहाना बनाकर देह के लिए स्पर्श ढूँढ़तीं सविता ताई!</p>
<p>‘एक निकाह ऐसा भी’ में आब्ज़र्वेशन की यह बारीकी एक अलग ही स्तर पर नज़र आती है जहाँ कौन सा मौलवी निकाह पढ़ाएगा, इस सवाल से उठा विवाद वर-वधू पक्ष में ख़ून-ख़राबा तक करा देता है, लेकिन दूल्हा-दुल्हन की आपसी सहमति निकाह को स्थगित नहीं होने देती।</p>
<p>जीवन में जहाँ-तहाँ फैली नाटकीयता को ये कहानियाँ उसी कौशल से पकड़ती हैं जैसे सरल-सपाट साधारणता को। और पठनीयता इनका वह गुण है जो इस पूरे संग्रह को विशेष बनाता है।
ISBN: 9789391950767
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Bechain Patton Ka Chorus
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

-
Description:
कुँवर नारायण उन अत्यल्प साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों में हैं जिन्होंने अपने लेखन में भारतीय और वैश्विक विचार, चिन्तन, संवेदना और सरोकारों से गहन संवाद किया है। यह संवाद किसी एक साहित्यिक विधा तक सीमित नहीं रहा। उनकी काव्येतर कृतियाँ इस बात की पुष्टि करती हैं। कुँवर नारायण ने जैसे विश्वस्तरीय कविताएँ लिखी हैं वैसे ही कहानियाँ भी। 'बेचैन पत्तों का कोरस' कुँवर नारायण का दूसरा कहानी-संग्रह है। पहला कहानी-संग्रह, 'आकारों के आसपास', सत्तर के दशक में आया था। अपनी असाधारण मौलिकता के चलते यह संग्रह ख़ासा ध्यानाकर्षक रहा। उस वक़्त रघुवीर सहाय, श्रीकान्त वर्मा, श्रीलाल शुक्ल, नेमिचन्द्र जैन जैसे साहित्यकारों ने इन कहानियों को सुखद आश्चर्य के साथ सराहा।
वर्तमान समय के कथाकारों और समीक्षकों तक के लिए ये कहानियाँ निरन्तर आकर्षण और प्रेरणा का विषय बनी हुई हैं। इसी उपलब्धि का विस्तार हम इस दूसरे संकलन में पाते हैं, जो कि एक लम्बे अन्तराल के बाद आ रहा है।
वर्तमान कथा-परिदृश्य को यह संकलन कई मानों में समृद्ध करेगा। इन कहानियों में अन्तर्वस्तु की विविधता ही नहीं, भाषा, संरचना और रूप का वैविध्य भी उत्कृष्टता का प्रमाण है। हर कहानी स्वयं में नई है और दूसरी से पृथक् भी। ये कहानियाँ औपचारिक और परम्परागत तरीक़े से अलग, कहानी विधा में प्रयोग और नवाचार हैं। बहुविधात्मक प्रभाव का सुन्दर समन्वय इन कहानियों को बहुस्तरीय बनाता है, और निबन्ध, संस्मरण, रेखाचित्र, चारित्रिकी, कविता आदि विधाओं की सम्मिलित शक्ति इन कहानियों के क्षितिज को विस्तृत करती है।
Gupt Dhann : Vol. 1-2
- Author Name:
Amrit Rai
- Book Type:

- Description: Cyclopedia
Katha Saptak - Dheerendra Asthana
- Author Name:
Dhirendra Asthana
- Book Type:

- Description: collection of seven brilliant stories - बहादुर को नींद नहीं आती - पराधीन - मेरी फ़र्नांडीस क्या तुम तक मेरी आवाज़ पहुँचती है? - उस रात की गंध - मुहिम - और आदमी रोया - चीख
Hoshiyari Khatak Rahi Hai
- Author Name:
Subhash Chandra Kushwaha
- Book Type:

- Description: Short Stories
Kavve Aur Kala Pani
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
निर्मल वर्मा ने हिन्दी कहानी को एक अत्यन्त संवेदनशील, सक्षम और पारदर्शी भाषा दी, और उसमें मनुष्य की आन्तरिक रिक्तियों को दृश्यमान किया। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ सिर्फ़ पाठकीय अनुभव तक सीमित नहीं रहतीं, हमारे लिए वे एक समूचा मानवीय अनुभव हो जाती हैं—देर तक साथ रहनेवाला एक समूचा अनुभव।
साहित्य अकादमी पुरस्कार (1985) से सम्मानित ‘कव्वे और काला पानी’ (1983) में उनकी सात कहानियाँ शामिल हैं। इनमें से कुछ कहानियों की पृष्ठभूमि भारतीय है तो कुछ कहानियाँ हमें यूरोपीय ज़मीन की उदासियों से परिचित कराती हैं। यह निर्मल जी की संवेदना का समूचापन ही है कि इससे पाठक की अनुभूति कहीं विभाजित नहीं होती। मानवीय पीड़ा का स्वर कहीं दो-फाँक नहीं होता।
मानव-सम्बन्धों में आज जो एक ठहराव, ठंडापन, उदासी, बेचारगी और व्यर्थता बोध है, वह इन कहानियों के माध्यम से हमें गहरे तक झकझोरता है और हमें उन अनुभवों तक ले जाता है, जो एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हैं। घटनाएँ इतनी महत्त्वपूर्ण नहीं, जितना कि वह परिवेश जो इन कहानियों की पंक्तियों से उठकर हमारे भीतर चला आता है। हर कहानी एक गूँज की तरह कहीं भीतर ठहर जाती है।
इस संग्रह में शामिल प्रत्येक कहानी ने अपने समय में व्यापक प्रतिक्रियाओं और अकसर बहसों को भी जन्म दिया। अपनी कलात्मकता में वे आज भी उतनी ही नई हैं।
Bhutaliya Aur Anya Kahaniyan
- Author Name:
Nisar Ahmed
- Book Type:

- Description: Hindi Short Story by Nisar Ahmed
Call Centre
- Author Name:
Chanchal Sharma
- Book Type:

-
Description:
दिलीप पाण्डेय और चंचल शर्मा की कहानियाँ हिन्दी कहानियों में कुछ नए ढंग का हस्तक्षेप करती हैं। यहाँ बहुत-सी कहानियाँ हैं जिनका मैं ज़िक्र करना चाहता हूँ, लेकिन दो-तीन कहानियाँ तो अद्भुत हैं। आमतौर पर इस संग्रह की ज़्यादातर कहानियाँ दो-ढाई पेज से ज़्यादा की नहीं हैं और सबका अपना प्रभाव है। कई कहानियाँ तो इतने नए अनुभव लिए हुए हैं कि हिन्दी कहानी में दुर्लभ हैं।
आप ‘ढेढ़-मेढ़े रास्ते’ पढ़िए। आपको लगेगा कि आप एक नए महाभारत से जूझ रहे हैं जहाँ से स्त्री-स्वाभिमान की एक नई दुनिया खुलती है। पारम्परिक स्त्री-विमर्श से अलग यहाँ एक नए तरह का स्त्री-विमर्श है। चौसर पर यहाँ भी स्त्री है लेकिन अबकी स्त्री अपनी देह का फ़ैसला ख़ुद करती है। इसी के उलट ‘कॉल सेंटर’ स्त्री-स्वाधीनता के दुरुपयोग की अनोखी कथा है जो बहुत सीधे-सपाट लहज़े में लिखी गई है। इस संग्रह की विशेषता यह है कि यहाँ कहानियों में विविधता बहुत है। यहाँ आप अल्ट्रा मॉड समाज की विसंगतियों की कथा पाएँगे तो बिलकुल निचले तबक़े के अनोखे अनुभव भी, जो बिना यथार्थ अनुभव के सम्भव नहीं हैं। जैसे एक कहानी है—‘कच्चे-पक्के आशियाने’। यह कहानी ग़रीबी रेखा से नीचे जीनेवाले बच्चों की कहानी है जहाँ एक लड़की सिर्फ़ जीने के लिए अपनी देह का सौदा करती है। इसका अन्त तो अद्भुत है जब देह बेचनेवाली लड़की उस पर आरोप लगानेवाले सम्भ्रान्त मेहता से उनकी पत्नी के सामने कहती है कि मेहता साहब, आपके पाँच सौ रुपए मुझ पर बाक़ी हैं, आपकी बीवी को दे दूँगी। कहानी यहाँ सम्भ्रान्त समाज के पाखंड पर एक करारा तमाचा बन जाती है।
कुल मिलाकर दिलीप पाण्डेय और चंचल शर्मा की ये कहानियाँ इसलिए भी पढ़ी जानी चाहिए
कि इन्होंने हिन्दी कथा को कुछ नए और अनूठे अनुभव दिए हैं।
—शशिभूषण द्विवेदी
Kahin Kuchh Nahin
- Author Name:
Shashibhushan Dwivedi
- Book Type:

-
Description:
‘ख़ामोशी और कोलाहल के बीच की किसी जगह पर वह कहीं खड़ा है। और इस खेल का मज़ा ले रहा है। क्या सचमुच ख़ामोशी और कोलाहल के बीच कोई स्पेस था, जहाँ वह खड़ा था।'
उपर्युक्त पंक्तियाँ बहुचर्चित कथाकार शशिभूषण द्विवेदी की कहानी ‘काला गुलाब’ से हैं। ये ‘काला गुलाब’ जैसी जटिल संवेदना और संरचना की कहानी को 'डिकोड' करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। लेकिन उसके लेखक शशिभूषण द्विवेदी की रचनाशीलता को समझने का सूत्र भी उपलब्ध कराती हैं। वाक़ई शशिभूषण की कहानियाँ न तो यथार्थवाद और जीवन-जीवन का शोर मचाती हैं, न ही वे कला की चुप्पियाँ चुनती हैं। शशिभूषण इन दोनों के बीच हैं और ख़ामोशी के साथ जीवन के यथार्थ की चहल-पहल, उसकी रंग-बिरंगी छवियों को पकड़ते हैं। साथ ही वे जीवन के कोलाहल के बीच भी उसकी अदृश्य रेखाओं की खोज करते हैं—उसकी चुप ध्वनियों को सुनते हैं। बात शायद स्पष्ट नहीं हो सकी है, इसलिए शशिभूषण की ‘काला गुलाब’ से ही एक अन्य उदाहरण—‘लिखना आसान होता है। लिखते हुए रुक जाना मुश्किल। इसी मुश्किल में शायद ज़िन्दगी का रहस्य है।' लिखते-लिखते रुक जाने की मुश्किल उन्हीं रचनाकारों के सामने दरपेश होती है जो ख़ामोशी की आवाज़ सुनते हैं और कोलाहल की ख़ामोशी भी महसूस करते हैं। लेखक के लिए यह एक कठिन सिद्धि है, लेकिन सुखद है कि शशिभूषण इसे हासिल करते हुए दिखते हैं। बेशक उनकी यह उपलब्धि उन्हें मिले पुरस्कारों से कई-कई गुना महत्त्वपूर्ण है।
—अखिलेश
प्रसिद्ध कथाकार, सम्पादक—‘तद्भव’
Shreshtha Bal Kahaniyan part 4
- Author Name:
Prakash Manu
- Book Type:

- Description: A Collection of Hindi short stories for children, compiled and edited by Prakash Manu.
The Coffin Master
- Author Name:
John F. Deane
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mujhe Kuchh Kahana Hai….
- Author Name:
Khwaja Ahmad Abbas
- Book Type:

-
Description:
बहुत कम लोग जानते हैं कि फ़िल्मकार-कहानीकार ख़्वाजा अहमद अब्बास की क़लम की दुनिया कितनी बड़ी थी। सत्तर साल की अपनी ज़िन्दगी में उन्होंने 70 ही किताबें भी लिखीं और असंख्य अख़बारों और रिसालों में आलेख भी। हर बुधवार को 'ब्लिट्ज' में उनका स्तम्भ, अंग्रेज़ी में 'द लास्ट पेज' और उर्दू में 'आज़ाद क़लम' शीर्षक से, छपता था। और आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे उन्होंने चालीस साल लगातार लिखा, जिसमें दोनों ज़बानों के विषय भी अक्सर अलग होते थे। कहते हैं कि ये दुनिया में अपने ढंग का एक रिकॉर्ड है।
आपके हाथों में जो है वह उनकी कहानियों का संकलन है। इस संकलन की सभी 17 कहानियों को उनकी नातिन और उनके साहित्य की अध्येता ज़ोया ज़ैदी ने संगृहीत किया है। इनमें कुछ कहानियाँ पहली बार हिन्दी में आ रही हैं। डॉ. ज़ैदी का कहना है कि अब्बास साहब ऐसे व्यक्ति थे जिनके ''जीवन का लक्ष्य होता है, एक उद्देश्य जिसके लिए वे जीते हैं। एक मक़सद मनुष्य के समाज में बदलाव लाने का, उसकी सोई हुई आत्मा को जगाने का।''
यही काम उन्होंने अपनी कहानियों, फ़िल्मों और अपने स्तम्भों में आजीवन किया। आमजन से हमदर्दी, मानवीयता में अटूट विश्वास, स्त्री की पीड़ा की गहरी पारखी समझ और भ्रष्ट नौकरशाही से एक तीखी कलाकार-सुलभ जुगुप्सा, वे तत्त्व हैं जो इन कहानियों में देखने को मिलते हैं। डॉ. ज़ैदी के शब्दों में, ये कहानियाँ अब्बास साहब की आत्मा का दर्पण हैं। इन कहानियों में आपको वो अब्बास मिलेंगे जो इनसान को एक विकसित और अच्छे व्यक्ति के रूप में देखना चाहते थे।
इस किताब का एक ख़ास आकर्षण ख़्वाजा अहमद अब्बास का एक साक्षात्कार है जिसे किसी और ने नहीं, कृश्न चन्दर ने लिया था।
Katha Saptak Lakshmi Sharma
- Author Name:
Lakshmi Sharma
- Book Type:

- Description: इस संग्रह की हर एक कहानी अनूठी है। इस संग्रह में शामिल सात कहानियों में अलग ही तरह का आकर्षण है। इन कहानियों में पात्रों का जो चित्रण किया गया है, वो अनुपम है। पात्र सामने खड़े होकर बात करते हैं। मैंने सबसे पहले लक्ष्मी जी का उपन्यास 'स्वर्ग का अंतिम उतार' पढ़ा था। तब से मैं उनके लेखन का कायल हूँ। उपन्यास की जितनी प्रशंसा की जाए कम है, पर यहाँ तो हमें उनकी सात कहानियों के बारे में ही कहना है। इस संग्रह की दो कहानियाँ जो मुझे सबसे ज्यादा पसंद आईं, हालाँकि हर एक कहानी पसंद आई, पर बात उन्नीसा-बीसा जितनी ही है। जो ज्यादा पसंद आई बात उनकी पहले। 'पूस की एक और रात' और 'रानियाँ रोती नहीं।' पूस की एक और रात का जो अंत है वो चौंका देता है, अख़बार की एक ख़बर की शहर की ठंडी रात जिसका पूरा विवरण कहानी में बताया है, पर दूसरी ख़बर चौंका देती है, जिसका ज़िक्र यहाँ कर मैं कहानी को यहीं ख़त्म करना नहीं चाहता। वहीं दूसरी कहानी है 'रानियाँ रोती नहीं'। जिसमें दो काल एक साथ चलते हैं। इतिहास और वर्तमान दोनों में बड़ा अंतर है। गहनों से लदी रानियाँ और जीन्स पहने महिला। बस कपड़ों का ही तो अंतर है। महिलाओं की व्यथा तो वही है। वो रो नहीं सकती, मतलब आवाज़ नहीं उठा सकतीं। उन्हें सहने के लिए धरती पर भेजा है।
Pratinidhi Kahaniyan : Mridula Garg
- Author Name:
Mridula Garg
- Book Type:

-
Description:
‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित मृदुला गर्ग का कथा-संसार विविधता के अछोर तक फैला हुआ है। उनकी कहानियाँ मनुष्य के सारे सरोकारों से गहरे तक जुड़ी हुई हैं। समाज, देश, राजनीतिक माहौल, सामाजिक वर्जनाओं, पर्यावरण से लेकर मानव मन की रेशे-रेशे पड़ताल करती नज़र आती हैं। इस संकलन की कहानियाँ अपने इसी ‘मूड’ या मिज़ाज के साथ प्रस्तुत हुई हैं।
मृदुला गर्ग की कहानियाँ पाठक के लिए इतना ‘स्पेस’ देती हैं कि आप लेखक को गाइड बना तिलिस्म में नहीं उतर सकते, इसे आपको अपने अनुसार ही हल करना पड़ता है। यही कारण है कि बने-बनाए फ़ॉरमेट या ढर्रे से, ऊबे बग़ैर, आप पूरी रोचकता, कौतूहल और दार्शनिक निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं। गलदश्रुता के लिए जगह न होते हुए भी आपकी आँखें कब नम हो जाएँ, यह आपके पाठकीय चौकन्ने पर निर्भर करता है। यही मृदुला गर्ग की क़िस्सागोई का कौशल या कमाल है, जहाँ लिजलिजी भावुकता बेशक नहीं मिलेगी, पर भावना और संवेदना की गहरी घाटियाँ मौजूद हैं, एक बौद्धिक विवेचन के साथ।
—दिनेश द्विवेदी
Aparajita
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description: महिला कथाकारों में जितनी ख्याति और लोकप्रियता शिवानी ने प्राप्त की है, वह एक उदाहरण है श्रेष्ठ लेखन के लोकप्रिय होने का। शिवानी लोकप्रियता के शिखर को छू लेनेवाली ऐसी हस्ती हैं, जिनकी लेखनी से उपजी कहानियाँ कलात्मक और मर्मस्पर्शी होती हैं। अन्तर्मन की गहरी पर्तें उघाड़ने वाली ये मार्मिक कहानियाँ शिवानी की अपनी मौलिक पहचान हैं जिसके कारण उनका अपना एक व्यापक पाठक वर्ग तैयार हुआ। इनकी कहानियाँ न केवल श्रेष्ठ साहित्यिक उपलब्धियाँ हैं, बल्कि रोचक भी इतनी अधिक हैं कि आप एक बार शुरू करके पूरी पढ़े बिना छोड़ ही न सकेंगे। प्रस्तुत संग्रह में ‘दंड’, ‘मन का प्रहारी’, ‘श्राप’, ‘लिखूँ...’, ‘मेरा भाई’, ‘अपराजिता’, ‘निर्वाण’, ‘सौत’, ‘तीन कन्या’, ‘चन्नी’ एवं ‘धुआँ’ कहानियाँ संकलित हैं। हर कथा अपनी मोहक शैली में अभिभूत कर देने की अपार क्षमता रखती है। कलात्मक कौशल के साथ रची गई ये कहानियाँ हमारी धरोहर हैं जिन्हें आज की नई पीढ़ी अवश्य पढ़ना चाहेगी।
Premchand ki hindi urdu Kahaniyan
- Author Name:
Kamal Kishore Goyanka
- Book Type:

- Description: प्रेमचंद की हिंदी-उर्दू कहानियाँ’ पुस्तक हिंदी में ऐसा पहला प्रयास है, जिसमें प्रख्यात लेखक प्रेमचंद की उर्दू से हिंदी तथा हिंदी से उर्दू में आई कहानियों को देवनागरी लिपि में एक साथ प्रस्तुत किया गया है। प्रेमचंद को केवल उर्दू का या केवल हिंदी का लेखक कहनेवालों की संख्या कम नहीं है, परंतु सत्य यह है कि वे पहले उर्दू के और बाद में हिंदी के लेखक बने तथा जीवन-पर्यंत दोनों ही भाषाओं में लिखते रहे। वे इसके लिए भी विशेष रूप से प्रयत्नशील रहे कि उनकी उर्दू कहानियाँ हिंदी में तथा हिंदी कहानियाँ उर्दू में निरंतर आती रहें। इससे वे दो भाषा-समूहों से जुड़कर पूरे देश से जुड़ना चाहते थे, परंतु साहित्य-संसार में यह अत्यंत रोचक एवं चुनौतीपूर्ण प्रश्न है कि प्रेमचंद किस प्रकार उर्दू तथा हिंदी दो भाषाओं के सर्जनात्मक तनाव को झेलते थे, किस प्रकार एक संवेदना को दो भाषा-रूप प्रदान करते थे तथा किस प्रकार वे हिंदी तथा उर्दू को निकट लाने के साथ उन्हें अपना-अपना वैशिष्ट्य भी दे रहे थे। इन सभी प्रश्नों को उठाने तथा उनका उत्तर पाने के लिए ही यह पुस्तक पाठकों के हाथों में है। इस दुस्साध्य कार्य को किया है देश-विदेश में प्रेमचंद-विशेषज्ञ के रूप में प्रख्यात डॉ. कमल किशोर गोयनका ने, जिन्होंने अपने 50 वर्षों के शोध-कार्य से अज्ञात एवं अलक्षित प्रेमचंद के उद्घाटन के साथ उनके अध्ययन की अनेक नई दिशाओं के द्वार भी खोले हैं। ‘नमक का दारोगा’ कहानी का उर्दू व हिंदी पाठांश उर्दू पाठ : नमक का दारोगा ‘‘जब नमक का महकमा ़कायम हुआ और ़खुदादाद (ईश्वर प्रदत्त) निआमत (वरदान) से ़फायदा उठाने की आम मुमानियत (मनाही) कर दी गई तो लोग दरवाज़ा सदर (मुख्य द्वार) बंद पाकर रोज़न व शिगा़फ (रंध्र, दरार) की ़िफके्रं करने लगे। चारों तऱफ ़खयानत (धरोहर का अपहरण) और गबन और तहरीस (लालच) का बाज़ार गरम था। पटवार गीरी का मुअज्ज़िज़ (प्रतिष्ठित) और मुना़फअत (लाभ) औहदा छोड़-छोड़कर सी़ग-ए-नमक (नमक विभाग) की ब़र्कंदाज़ी (चपरासगीरी) करते थे और इस महकमे का दारो़गा तो वकीलों के लिए भी रश्क (स्पर्धा) का बाइस था।’’ (‘हमदर्द’ उर्दू मासिक पत्रिका, अक्तूबर, 1913) हिंदी पाठ : नमक का दारोगा जब नमक का नया विभाग बना और ईश्वर-प्रदत्त वस्तु के व्यवहार करने का निषेध हो गया, तो लोग चोरी-छिपे इसका व्यापार करने लगे। अनेक प्रकार के छल-प्रपंचों का सूत्रपात हुआ, कोई घूस से काम निकालता था, कोई चालाकी से। अधिकारियों के पौबारह थे। पटवारीगीरी का सर्वसम्मानित पद छोड़-छोड़कर लोग इस विभाग की बरकंदाजी करते थे। इसके दारोगा पद के लिए तो वकीलों का भी जी ललचाता था। (‘सप्त-सरोज’, प्रथम हिंदी कहानी-संग्रह, जून, 1917)
Appigowdana Shankapushpa
- Author Name:
Anjana Hegde
- Rating:
- Book Type:

- Description: DESCRIPTION AWAITED
Apni Vapasi
- Author Name:
Chitra Mudgal
- Book Type:

-
Description:
समकालीन भारतीय कथाकारों में चित्रा मुद्गल का विशिष्ट स्थान है। उनकी समाज सापेक्ष सृजनात्मकता के ज़द में कहना ग़लत न होगा—समूचा भारतीय समाज है। अपनी मिट्टी के रंगों का भूगोल है। जाहिर है उसी माटी-पानी में गुँथा-मड़ा, अवाक् कर देने वाली विसंगतियों में जीता, साँसें भरता वह आमजन है, जो व्यवस्था और पूँजी की मिलीभगत की विसात का मोहरा बना हुआ है। ग़ज़ब तो यह है, उसके ज़हालत और संघर्ष को कहीं विराम मिलता हुआ नज़र नहीं आ रहा।
यह भी कहना चाहता हूँ, महिला कथाकारों पर जिस तरह के सीमा संकेत लगाए जाते हैं, दायरों और दरीचों के सन्दर्भ में, चित्रा जी उन सभी सीमाओं का अतिक्रमण सहज रूप से इसलिए कर सकी हैं कि उनका संवेद घर-परिवार-रिश्ते-नातों की बारिकियों को उसके भीतरी संवेगों में जिस नफ़ासत से कथात्मक सौन्दर्य में बाँधता है, उसी गहराई और कलात्मकता से देहरी के बाहर निकल अपसंस्कृति की आँधी में डूब रही ज़िन्दगी के तनावों और आर्थिक दबावों, चाहे वह एक्जीक्यूटिव क्लास हो या फ्रीलांसर वर्ग—सभी को रेखांकित करने में सफल होती हैं।
मैं यह भी कहना चाहता हूँ, उनकी ज्यादातर कहानियों के चरित्र भावुकता की तर्कहीन नदी में न बहकर आर्थिक दबाव की परिणतियों को स्वीकार करते हुए ही अधिक प्रभावपूर्ण बनते हैं।
—शानी
Ek Koi Dooshra
- Author Name:
Usha Priyamvada
- Book Type:

- Description: एक कोई दूसरा उषा प्रियंवदा की इन कहानियों को पढ़ना भाषा की एक समतल, शान्त और काँच-सी पारदर्शी सतह पर चलना है। यह सतह अपनी स्वच्छता से हमें आश्वस्ति देती है। लेकिन यह सब भाषा तक ही सीमित है; भाषा के भीतर जो कहानी होती है, वह बेहद बेचैन कर देने वाली है। इन कहानियों को पढ़ते हुए हम एक ऐसे पाठ से गुज़रते हैं जो हमें लगातार सम्पूर्ण का आभास कराता हुआ, एक अधूरी, अतृप्त ज़िन्दगी की कसक साथ-साथ देता चलता है। एक कोई दूसरा की नीलांजना, झूठा दर्पण की अमृता कोई नहीं की नमिता, सागर पार का संगीत की देवयानी, पिघलती हुई बर्फ़ के अक्षय और छवि, चाँदनी में बर्फ़ पर के हेम और मीरा (मेरी) और टूटे हुए की तंत्री त्रिपाठी उर्फ़ टीटी - ये सब पात्र इस भाषा की बर्फ़ की-सी चमकती सतह के नीचे एक अधूरा और यातनाप्रद जीवन जी रहे हैं। अपने देश की मिट्टी से उखड़कर बाहर किसी सम्पन्न और पराए मुल्क में ‘अकेला’ और ‘अलग होकर’ रहना इस यंत्रणा का एक विशिष्ट पहलू है जिसको ये कहानियाँ लगातार रेखांकित करती हैं।
Manto : Pandrah Kahaniyan
- Author Name:
Saadat Hasan Manto
- Book Type:

-
Description:
‘अगर आप मेरी कहानियाँ बरदाश्त नहीं कर सकते, तो दरअसल ज़माना ही नाक़ाबिले-बरदाश्त है।’ यह कहना था मंटो का जो अपनी कहानियों में वह लिखते थे जो सब आवरणों को हटाने के बाद ज़माने के चेहरे पर नज़र आता है।
उन्होंने मज़लूमों, ग़रीब-गुरबा और उन औरतों की कहानियाँ लिखीं जिन्हें समाज ने हाशिए पर धकेलकर छोड़ दिया था। उन्होंने उन भावनाओं को लेकर भी कहानियाँ लिखीं जिन्हें सफ़ेदपोश समाज खुली रोशनी में स्वीकार नहीं कर पाता। उन्होंने ऐसे-ऐसे अहसासात को ज़बान बख़्शी जिन्हें हम कभी अपनी चालाकी और कभी अल्फ़ाज़ की कमी की वजह से यूँ ही ग़ायब हो जाने देते हैं।
इसलिए आज भी उनकी कहानियाँ हमें अपनी कहानियाँ लगती हैं; वे अपने वक़्त से इतना आगे चल रहे थे कि आज भी हमें अपने आगे ही चलते दिखाई देते हैं।
यह संकलन उनकी कुछ बहुत चर्चित और कुछ ऐसी कहानियों को लेकर बनाया गया है जिनका ज़िक्र बहुत ज़्यादा नहीं होता। संकलन किया है जानी-पहचानी सिने-अभिनेत्री और निर्देशक नंदिता दास ने। उनकी चर्चित फ़िल्म ‘मंटो’ के साथ-साथ प्रकाशित यह किताब क़िस्सागो मंटो की पूरी शख़्सियत को सामने ले आती है। बकौल नंदिता : ‘उनकी कहानियों के पात्र अक्सर वे लोग होते हैं जो समाज के कोनों में रहते हैं और औरतों के लिए सहानुभूति भरी नज़र रखते हैं। यही बात उन्हें और लेखकों से अलग करती है।’
Kannad Ki Shresth Kahaniyan
- Author Name:
Tippeswami
- Book Type:

-
Description:
कन्नड़ के सात लेखक ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित हुए हैं। इनमें मास्ती और अनन्तमूर्ति तो इस विद्या के सर्वाधिक चर्चित ही नहीं, अपितु इस विद्या को गति देनेवाले कथाकारों में गिने जाते हैं। कन्नड़ कहानियों के पीछे एक सौ वर्षों का इतिहास है। इस कालखंड में हज़ारों कहानियाँ अपने समय और समाज के साथ संवाद करने में सक्षम रही हैं और दुर्लभ मिसालें रची हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में चौबीस कन्नड़ कथाकारों की एक-एक कहानी को चुना गया है। चयन को लेकर यह दावा नहीं है कि इन कथाकारों की यही सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ हैं। बावजूद इसके इतना तो कहा ही जा सकता है कि शामिल कथाकारों की उन कहानियों को पुस्तक में संगृहीत करने की कोशिश की गई है, जो अपनी भाषा में पाठकों द्वारा सराही गई और काफ़ी चर्चित रही हैं। उम्मीद है कि ये कहानियाँ हिन्दी पाठकों को भी पसन्द आएँगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book