Jamuni
(0)
Author:
MithileshwarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मिथिलेश्वर ग्रामीण परिवेश के सशक्त कथाकार हैं। उनकी लम्बी कहानी ‘जमुनी’ को कृषक-जीवन की महागाथा कहा जा सकता है, जिसमें एक सामान्य भारतीय कृषक परिवार के प्रेम-घृणा, आस्था-विश्वास, आशा-निराशा, हर्ष-विषाद, सम्पत्ति-विपत्ति और उत्थान-पतन का मार्मिक एवं सजीव चित्र प्रस्तुत किया गया है...। शिल्प का रचाव निश्चय ही कहानी को महत्त्वपूर्ण बना देता है, किन्तु कहीं-कहीं अनायास सादगी ही शिल्प का शृंगार बन जाती है। प्रेमचन्द का कथाशिल्प ऐसा ही था। वर्तमान कथाकारों में मिथिलेश्वर का कथाशिल्प भी इसी प्रकार का है।’’ —डॉ. राकेश गुप्त एवं डॉ. ऋषिकुमार चतुर्वेदी ‘हिन्दी कहानी 1991-95’, खंड-2 का भूमिकांश शीर्षक कथा ‘जमुनी’ एक लम्बी कहानी है जिसमें एक कृषक परिवार का संघर्ष जीवन्त हो उठता है और जहाँ अपनी भूख-प्यास और नींद-आराम को दरकिनार करते हुए हर एक की चिन्ता बीमार भैंस को मृत्यु के मुख में जाने से बचाने की है, क्योंकि वह भैंस ही उनकी सुख-समृद्धि का केन्द्र है। ‘जमुनी’ के अतिरिक्त इस संग्रह की अन्य कहानियाँ भी जीवन और जगत के जरूरी सवालों के जवाब तलाशती अमिट प्रभाव क़ायम करनेवाली कहानियाँ हैं। निःसन्देह, यह कहानी-संग्रह समर्थ कथाशिल्पी मिथिलेश्वर के प्रौढ़ कथा-लेखन की सार्थक यात्रा का द्योतक है। ‘बाबूजी’ के कथाकार ने अपने लेखकीय नैरन्तैर्य और श्रेष्ठ कथा-लेखन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट मौजूदगी का एहसास कराते हुए हिन्दी कथा-जगत को और अधिक ऊर्जस्वित और विकसित किया है...।
Read moreAbout the Book
मिथिलेश्वर ग्रामीण परिवेश के सशक्त कथाकार हैं। उनकी लम्बी कहानी ‘जमुनी’ को कृषक-जीवन की महागाथा कहा जा सकता है, जिसमें एक सामान्य भारतीय कृषक परिवार के प्रेम-घृणा, आस्था-विश्वास, आशा-निराशा, हर्ष-विषाद, सम्पत्ति-विपत्ति और उत्थान-पतन का मार्मिक एवं सजीव चित्र प्रस्तुत किया गया है...। शिल्प का रचाव निश्चय ही कहानी को महत्त्वपूर्ण बना देता है, किन्तु कहीं-कहीं अनायास सादगी ही शिल्प का शृंगार बन जाती है। प्रेमचन्द का कथाशिल्प ऐसा ही था। वर्तमान कथाकारों में मिथिलेश्वर का कथाशिल्प भी इसी प्रकार का है।’’
—डॉ. राकेश गुप्त एवं डॉ. ऋषिकुमार चतुर्वेदी ‘हिन्दी कहानी 1991-95’, खंड-2 का भूमिकांश
शीर्षक कथा ‘जमुनी’ एक लम्बी कहानी है जिसमें एक कृषक परिवार का संघर्ष जीवन्त हो उठता है और जहाँ अपनी भूख-प्यास और नींद-आराम को दरकिनार करते हुए हर एक की चिन्ता बीमार भैंस को मृत्यु के मुख में जाने से बचाने की है, क्योंकि वह भैंस ही उनकी सुख-समृद्धि का केन्द्र है।
‘जमुनी’ के अतिरिक्त इस संग्रह की अन्य कहानियाँ भी जीवन और जगत के जरूरी सवालों के जवाब तलाशती अमिट प्रभाव क़ायम करनेवाली कहानियाँ हैं। निःसन्देह, यह कहानी-संग्रह समर्थ कथाशिल्पी मिथिलेश्वर के प्रौढ़ कथा-लेखन की सार्थक यात्रा का द्योतक है। ‘बाबूजी’ के कथाकार ने अपने लेखकीय नैरन्तैर्य और श्रेष्ठ कथा-लेखन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट मौजूदगी का एहसास कराते हुए हिन्दी कथा-जगत को और अधिक ऊर्जस्वित और विकसित किया है...।
Book Details
-
ISBN9788126719655
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Biyaban Me
- Author Name:
Sara Rai
- Book Type:

- Description:
सारा राय की कहानियाँ अनेक स्तरों पर सजग चेतना द्वारा रचित संसार हैं। उनके यहाँ भीतर की सम्पन्नता और भीतर का ख़ालीपन, बाहर की सम्पन्नता और बाहर का उजाड़ एक-दूसरे के आमने-सामने होते रहते हैं, बल्कि एक-दूसरे के बरक्स रखे आईनों की तरह वे परस्पर को कई गुना करते चलते हैं। व्यक्त और अव्यक्त यथार्थ एक-दूसरे के साथ नाज़ुक सन्तुलन साधते हुए एक सम्पूर्ण अनुभव की रचना करते हैं।
दृश्य, परिवेश, पात्र और अनुभव का ही नहीं, समय का भी एक पूरेपन के क़रीब ले जाता हुआ बोध, यानी एक साथ भंगुरता और अन्तहीनता का बोध उनकी कहानियों में आपको कभी भी हो सकता है। इसी तरह किसी सीमित घटना या क्रिया का अन्तहीनता में फिसल जाना उसे एक दूसरे ही आयाम में ले जाता है और सीमित जीवन-काल के आर-पार फैला अनन्त समय बड़ी सहजता से आपके समय-बोध का हिस्सा बन जाता है। एक साथ समय की रवानी और ठहराव का चित्र उनके यहाँ कुछ यों उभरता है—‘समय के बड़े-बड़े चकत्ते तैरते हुए निकल जाते हैं, जैसे वे कुछ हों ही ना। ऐसा लगता है जैसे दिन एक-एक करके नहीं, कई-कई के झुंड में बीत रहे हों, कभी-कभी पूरा एक मौसम एक अकेले दिन की तरह निकल जाता है।’
सारा राय की ताक़त उनके बहुत बारीक, बहुत मामूली मगर उन चुने हुए ब्यौरों में है, जिन्हें वे भीतरी और बाहरी दुनिया के तानों-बानों से कुछ इस तरह बुनती हैं कि एक रहस्य-सा उनके गिर्द घिर आता है। यह रहस्य उनकी कहानियों को हर बार पढ़ने पर नए सिरे से खुलता है। उनके बिम्ब, उनकी उपमाएँ हम सबकी जानी-पहचानी चीज़ों को एकदम अछूता-सा कोई सन्दर्भ देकर ऐसा एक मायालोक खड़ा कर देती हैं जिसमें—सेमल की फलियों से उड़ती रुई बर्फ़ के तूफ़ान में बदल जा सकती है, आसमान कुएँ में पड़े रूमाल में, लाल स्वेटर पहने स्कूल के फाटक से लुढ़कते-पुढ़कते बच्चे बीर-बहूटियों में और ‘आह सारा! द होल वर्ल्ड!’ कहते हुए पकड़ाई गई पनीर पूरी एक दुनिया में तब्दील हो जा सकती है।
किसी भी सम्बन्ध को परिणति तक पहुँचाने की हड़बड़ी उनके यहाँ नहीं है। सम्बन्धों के महीन रेशों को वे हल्के इशारों से कहे-अनकहे शब्दों में, बिम्बों में थामती हैं। वे ‘बियाबान में’ कहानी की नायिका का अपने लेखन के साथ का रिश्ता हो या रश्मि किरण के साथ का, ‘परिदृश्य’ कहानी की सीमी का अनामिका और उसके भाई के साथ धीरे-धीरे अस्तित्व में आया सम्बन्ध हो, मकड़ी के जाले की सुन्दर संरचना के निमित्त, बाबू देवीदीन सहाय का अपनी रूह के साथ पहली बार स्थापित हुआ सम्बन्ध हो या अनामिका का गंगा के कछार के साथ शेष दूसरे फ़्लैप पर...का तादात्म्य हो—ये सम्बन्ध जितनी देर के लिए, जितने भी, जैसे भी होते हैं, अपनी सम्पूर्ण सत्ता के साथ होते हैं। गंगा का कछार अलग मौसम में, किसी दूसरे समय पर, किसी अलग मनःस्थितियों में अलग ही रूप धर ले सकता है।
‘भूलभुलैयाँ’ जैसी कहानी में वे भव्य अतीत के कोनों-अँतरों को तलाशती हैं। इस प्रक्रिया में अतीत के साथ-साथ सम्भावित का भी एक लोक खुलता चला जाता है। बनारस की साकिन नूर मंज़िल हवेली के उस प्राचीन वैभव—जब ‘हर कमरे में लोग अंगूर के गुच्छों की तरह’ होते थे—के बरक्स बची थीं किले की दीवार जैसे कन्धोंवाले सैयद हैदर की बड़ी बेटी कुलसूम बानो, जिन्हें नूर मंज़िल जैसी विशाल हवेली में बन्द रहने के बावजूद नाचने और नाचते-नाचते लट्टू की तरह एक जगह सिमट आने के तथा छत की काई लगी काली मुँडेर से डैनों की तरह बाजुओं को फैलाकर उड़ने के एहसास से कोई वंचित नहीं कर पाया था।
दुनिया में कुछ भी ऐसा नहीं जिससे सारा को परहेज़ हो। आज की कहानी की तरह सिर्फ़ लोगों को ही नहीं, सब कुछ को उनकी कहानियों में आने की छूट है। लोगों के अलावा ‘बियाबान में’ का लुटा-पिटा पुराना खँडहर बस हो, कहीं नहीं से कहीं नहीं तक जाता पुल हो, मेक्वायरी का चार एकड़ का बीहड़ हो, गंगा के किनारे तम्बुओं, लाइटों का उग आया नया नगर हो, हरी आग की तरह सारे में फैल जानेवाली लम्बी-लम्बी घास हो, पूरी सृष्टि ही चली आती है जीवन की सी सहजता के साथ। रामबाँस पर तीस सालों में सिर्फ़ एक बार आनेवाला फूल भी नहीं बचता उनकी आँख से। सुनहरी कलियों का वह नज़ारा मालती को एक उपलब्धि की तरह लगता है और दो दीवारों के बीच तथा मकड़ी का जाला बाबू देवीदीन सहाय के साथ हमें भी एक करिश्मे की तरह लगता है। इन छोटी-छोटी चीज़ों की एक करिश्मे की शक्ल में पहचान और जीवन में इनकी जादुई उपस्थिति में सारा की गहरी आस्था है।
उनके यहाँ हिन्दी के पूर्ववर्ती कथाकारों की अनुगूँज के साथ ख़ुद उनके रोयों की तरह संवेदनशील और उड़ानक्षम भाषा का विरल संयोजन है। चीज़ों को देखने का, उसे भाषा में सहेजने का सारा का ढंग अनोखा है। चीज़ें और उनके आस-पास वही है जिसे हम सब रोज़ देखते हैं या नहीं देखते। उन्हें सारा के साथ उनकी आँख से देखना आज की हिन्दी कहानी के परिदृश्य में एक अलग तरह का देखना है। ‘ऊपर का आकाश डालों से घटाटोप हो उठा और ज़मीन पर बरगद ने जड़ों के महल खड़े किए, कई-कई महल, एक-दूसरे की अनुगूँज की तरह।’
—ज्योत्स्ना मिलन
Kal Ugega Suraj
- Author Name:
Smt. Mridula Bihari
- Book Type:

- Description:
कहानी सबसे प्राचीन कला है। जब दर्शन, विज्ञान, इतिहास नहीं थे, तब भी कहानियाँ थीं। यह इतिहास की जननी है। यह वह दृष्टि है, जो परतों के भीतर झाँक लेती है। कल्पना एवं अनुभव को प्रकट करने की आकांक्षा का प्रतिफल है कहानी। यह अंतर्मन के अनुभवों व भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम है। दार्शनिक तथा मनोवैज्ञानिक सिद्धांत कथाओं में ही मानवीय तरलता पाते हैं। रचनाएँ सूक्ष्म प्रक्रिया से गुजरती हैं, लगातार अपने भीतर उतरते जाना होता है, यह अनुभूति का क्षेत्र है। यह न अपने में समाधान है और न अध्यात्म। यह मन के भीतर चल रहे द्वंद्व से साक्षात्कार है। मन की दुनिया बड़ी निराली है। रचने का काम उगाने जैसा भी है। प्रत्येक कहानी लिखने से पहले किसान की तरह खेत की पूरी मिट्टी को कोड़ना पड़ता है। चेतना की गहराइयों में कोई बीज भूमि तोड़कर प्रकाश-दर्शन का मार्ग खोज रहा हो। रचना का सीधा संबंध जीवन से है। जो जीवन में है, वही साहित्य रचना में है। कहानी में एक पूरी जिंदगी आ जाती है। प्रसिद्ध कथाकार मृदुला बिहारी अपनी कहानियों में दार्शनिकता, मानवता तथा समाज के विविध पक्षों को बहुत सूक्ष्मता से उकेरती हैं। मानवीय संबंधों के महीन ताने-बाने का बोध कराती पठनीय कहानियाँ।
Pratinidhi kahaniyan : Ramdarash Mishra
- Author Name:
Ramdarash Mishra
- Book Type:

- Description:
रामदरश मिश्र की कहानियों का व्यास चौड़ा है। उनकी चिन्ताओं का छोर व्यापक है। किन्तु जिस एक बात को उन्होंने आज तक सर्वाधिक तरजीह दी है, वह है कहानियों की पठनीयता। वे प्रेमचन्द और रेणु के बाद की पीढ़ी के ग्रामीण रचनाकार हैं सो वे ग्रामीण भारत की समस्याओं को नहीं भूलते, अपने इलाके का दर्द नहीं भूलते। वहाँ का सामन्ती आचरण, दरिद्रता, गरीबी, मान-अपमान, अहं में जी रहा सवर्ण समुदाय, भूखे रहने पर विवश दलित और वंचित—सब उनकी निगाह में हैं। उनकी कहानियाँ इन सभी मुद्दों को उठाती हैं। जिस लहज़े में ‘राग दरबारी’ में श्रीलाल शुक्ल ने लिखा है, यहाँ से भारतीय देहात का महासागर शुरू होता है, वह महासागर रामदरश जी के कथा संसार में लहराता मिलता है। कितने आन्दोलन उनके सामने से होकर गुजरे, पर वे उस शोर-शराबे के बीच भी अनुभव, बोध और रूपबन्ध के स्तर पर वैविध्यपूर्ण कहानियाँ लिखते रहे और आज भी उसी त्वरा के साथ विभिन्न विधाओं को अपनी रचनात्मकता से समृद्ध कर रहे हैं। प्रतिनिधि कहानियाँ में सम्मिलित कथा संसार उनकी इसी बहुवस्तुस्पर्शिता का परिचायक है।
—ओम निश्चल
Panch Ka Sikka
- Author Name:
Arun Kumar Asafal
- Book Type:

- Description:
Short Stories
Pratinidhi Kahaniyan : Chandrakanta
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
चन्द्रकान्ता कश्मीर केन्द्रित अपने विपुल कथा-लेखन के लिए हिन्दी जगत में ख़ासी लोकप्रिय हैं। अपनी कहानियों में उन्होंने देश-विभाजन के तत्काल बाद कश्मीर संकट से उपजे हालात से लेकर 'जेहाद' के नाम पर जारी आतंकवाद से झुलसते कश्मीर की आबोहवा और अवाम के दुःख-दर्द का अद्यतन चित्र उकेरा है, जहाँ वे यथास्थिति का चित्रण-भर करके नहीं रुक जातीं अपितु प्यार, ईमान और इंसानियत से लबरेज़ पात्रों का सृजन कर कट्टरता एवं हिंसा के विरुद्ध पुरज़ोर आवाज़ उठाती हैं। कश्मीर ही नहीं, देश-दुनिया की हर उस मानवीय त्रासदी को चन्द्रकान्ता अपनी कहानियों में जगह देती हैं जिससे एक संवेदनशील रचनाकार का मन आहत एवं उद्वेलित होता है। वे उस भ्रष्ट व्यवस्था और मनुष्य विरोधी तंत्र को कठघरे में खड़ा करती हैं, जिसने तेज़ी से बदलते समाज में चतुर्दिक संघर्ष से घिरे मनुष्य की आन्तरिक अनुभूतियों को कहीं गहरे दफ़न कर दिया है। व्यक्ति और व्यवस्था की मुठभेड़ में वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक विषम परिस्थिति एवं प्रवृत्ति की समीक्षा करती हैं; तत्पश्चात् उन तथ्यों का अन्वेषण करती हैं जिससे मनुष्य की अन्तरात्मा को मरने से बचाया जा सके और इस प्रकार एक बेहतर कल के लिए मनुष्य के स्वप्नों, संवेदनाओं और स्मृतियों को सिरज लेने की चिन्ता चन्द्रकान्ता की कहानियों का प्रस्थान-बिन्दु बन जाती है।
Turning Point
- Author Name:
Geeta Pandit
- Book Type:

- Description:
Book
Kahaniyan Rishton Ki : Parivar
- Author Name:
Akhilesh
- Book Type:

- Description:
भारतीय जीवन में परिवार का वही है, जो किसी भी धर्म या सम्प्रदाय में पूजागृह का होता है। परिवार नामक संस्था ही भारतीय जीवन और समाज-व्यवस्था का मूल है। पिछले सौ सालों में चौतरफ़ा बदलाव के बीच भारतीय समाज में परिवार की संरचना, उसमें अन्तर्निहित तरलता और सम्बन्धों की तीव्रता में क्या और कैसे बदलाव आए हैं, इस संकलन की कहानियों में साफ़-साफ़ दीखता है। संयुक्त परिवार से एकल परिवार और फिर लिव-इन रिलेशनशिप का चलन, इनके भाव-दुष्प्रभाव सबकी पड़ताल इस संकलन की कहानियों में है और अन्त में एक छुपा सन्देश भी कि यहाँ रिश्ते जीवन से बड़े और ज़्यादा मूल्यवान हैं।
The Coffin Master
- Author Name:
John F. Deane
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Desh Vibhajan Ki Kahaniyan
- Author Name:
Salam Azad
- Book Type:

- Description:
सीमा के उस पार अस्वस्थ पिता खड़े हुए और इस पार बेटी, बीच में लगभग आधे मील चौड़े पाट की एक नदी...धरती को बाँटने की कोशिशों का पीड़ाजनक नतीजा ऐसी ही सीमाओं में होता है। ‘देश विभाजन की कहानियाँ’ बांग्लादेश के लब्धप्रतिष्ठ लेखक सलाम आज़ाद ने इन्हीं सीमाओं और पीड़ाओं से आक्रान्त होकर क़लमबद्ध की हैं। इन कहानियों में उन्होंने अपने देश के विभाजन के कारणों, उसके परिणामों और निरीह मनुष्य की नियति पर पड़नेवाले उसके दूरगामी और विडम्बनापूर्ण प्रभावों को भावप्रवण कथात्मकता के साथ रेखांकित किया है।
सलाम आज़ाद बांग्लादेश के उन लेखकों में अपना महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं जिनका सरोकार साम्प्रदायिक सौहार्द और देश का धर्मनिरपेक्ष विकास है। उनकी यह चिन्ता भी इन कहानियों में लक्षित की जा सकती है। बांग्लादेश में हिन्दुओं के साथ किए जानेवाले भेदभाव और उनके नागरिक अधिकारों का हनन सलाम आज़ाद के लेखक को गहरा दु:ख पहुँचाता है, जिसके चलते वे ‘जन्मभूमि’ जैसी कहानियाँ लिखने को बाध्य होते हैं। ‘देश विभाजन की कहानियाँ’ कहानियाँ भी हैं, और दस्तावेज़ भी।
Mar Gaya Deepnath
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
- Book Type:

- Description:
चन्द्रकिशोर जायसवाल अपने आसपास के समाज और जीवन को सहज भाव से देखते-पढ़ते हैं, और उसी सहजता से उसके विरोधाभासों की ओर संकेत करते हुए ऐसी कहानी लिखते हैं, जिससे पाठक फ़ौरन जुड़ जाता है। मर गया दीपनाथ कहानी-संग्रह में शीर्षक कथा के अलावा पाँच कहानियाँ और हैं। लगभग सत्तर पृष्ठों में फैली कहानी ‘मर गया दीपनाथ’ हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिकता को मनोवैज्ञानिक स्तर पर समझने की कोशिश करती है, और उन बड़े मूल्यों को रेखांकित करती है जिनके आधार पर भारत की साझी सामाजिकता आकार ग्रहण करती है। साधारण शैली में असाधारण कहानियाँ रचनेवाले कथाकार चन्द्रकिशोर जायसवाल ने मध्यवर्गीय पारिवारिक जीवन को गहरी संवेदनशीलता के साथ अंकित किया है, साथ ही ग्रामीण जीवन के ऐसे चित्र भी उनके यहाँ मिलते हैं जिनसे स्वातंत्र्योत्तर भारत में विभिन्न स्तरों पर घटित होनेवाले बदलावों के सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक निहितार्थों को समझना आसान हो जाता है। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ न सिर्फ़ उनके कथाकार के विभिन्न पक्षों को सामने लाती हैं, बल्कि अपनी पठनीयता और यथार्थबोध के चलते हमारी स्मृति का हिस्सा बन जाती हैं।
Donon Asmanon Ke Rang
- Author Name:
Zakiya Zubairee
- Book Type:

- Description:
दोनों आसमानों के रंग में संकलित कहानियाँ हैं—परायी धरती पर मुरझाते रिश्तों की, और स्त्री-विरोधी परम्पराओं में जकड़ी अपनी ज़मीन पर मुरझाने पर मजबूर कर दी गईं उम्मीदों की। ज़किया जुबैरी प्रवासी हिन्दी कथाकार हैं। इन कहानियों में उन्होंने एक तरफ लंदन और दूसरी तरफ भारत-पाकिस्तान की ज़मीन से अपने कथानक उठाए हैं।
लंदन या कह सकते हैं, यूरोप-अमेरिका के समृद्ध देशों में भारतीय उपमहाद्वीप के कितने ही लोग कभी सपनों और कभी मजबूरियों के हाथों बेबस हो बसने और कमाने-खाने जाते हैं। इसके लिए जो संघर्ष अपेक्षित है, वह करते, वे जो चाहते हैं, हासिल भी कर लेते हैं, लेकिन फिर भी कुछ होता है जो उनसे खो जाता है—रिश्ते, रिश्तों की गरमाहट और अपने आपको अपनों के भरोसे छोड़ निश्चिन्त हो जाने का भारतीय दुस्साहस। वह वहाँ उन्हें नहीं मिल पाता। ज़किया ज़ुबैरी अपने सुदीर्घ प्रवासी अनुभवों के आधार पर इन परिस्थितियों को एक स्त्री की निगाह से देखती हैं।
बाकी जिन कहानियों की पृष्ठभूमि भारतीय उपमहाद्वीप हैं उनमें पाकिस्तान से ली गईं दो कहानियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं—‘दोनों आसमानों के रंग’ जिसमें भारत के प्रति घृणा को आधार बनाकर एक दिलचस्प कथानक बुना गया है, और दूसरी ‘दस्तक’ जिसमें पाकिस्तान के कुछ पिछड़े हिस्सों में आज भी प्रचलित ‘वानी’ की प्रथा के हवाले से एक रोंगटे खड़े करनेवाला घटनाक्रम हमारे सामने आता है।
Katha Sarang
- Author Name:
Anjum sharma
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Pratinidhi Kahaniyan : Khushwant Singh
- Author Name:
Khushwant Singh
- Book Type:

- Description:
पत्रकारिता से जुड़े रहकर भी खुशवंत सिंह ने अंग्रेज़ी में लिखनेवाले एक भारतीय कथाकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इस संग्रह में उनकी कुछ प्रतिनिधि कहानियाँ शामिल हैं, जिन्हें उनके तीन कहानी-संग्रहों से चुना गया है।
खुशवंत सिंह की कहानियों का संसार न तो सीमित है और न एकायामी, इसलिए ये कहानियाँ अपनी विषय-विविधता के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। ध्यान से पढ़ने पर इनकी दुनिया जहाँ हमारी सामाजिक दुनिया की अनेक ख़ासियतें उजागर करती हैं, वहीँ इनमें लेखक का अपना व्यक्तित्व भी प्रतिध्वनित होता है—विचारोत्तेजक और अनुभूतिप्रवण। शैली सहज, सरल और भाषा प्रवाहमयी है। जीवन के विस्तृत अनुभवों में पगी हुई इन कहानियों में अपने देश की मिट्टी की सोंधी गन्ध है।
मानव-जीवन में गहरे जड़ जमाए खोखले आदर्शों और दकियानूसी परम्पराओं पर कुठाराघात करती हुई ये चुटीली कहानियाँ अपने समय की जीवंत प्रतिध्वनियाँ हैं, जो यदि हमें गुदगुदाती हैं तो सोचने-समझने के लिए प्रेरित भी करती हैं। लेकिन साथ ही ये एक ऐसे भारतीय लेखक की कहानियाँ भी हैं, जो अपने मुँहफट स्वभाव और स्वतंत्र विचारों के लिए बहुत बार विवादों के घेरे में रहा है।
Wah Bhayanak Raat
- Author Name:
Sharatchandra Chatopadhyay
- Book Type:

- Description:
वह भयानक रात बांग्ला के महान कथाशिल्पी शरत् चन्द्र की ऐसी कहानियों का संग्रह है जो खास तौर से किशोर पाठकों के मनोजगत के अनुकूल हैं। इन कहानियों में साहसिकता और रोमांचकता तो है ही, अपार करुणा और उदात्त प्रेम भी है, जिसके दायरे में मनुष्य ही नहीं, एक उपेक्षित कुत्ता भी शामिल है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इन कहानियों के पात्र किसी जादुई दुनिया से नहीं आए हैं, बल्कि ये हमारे आस-पास रहनेवाले लोग हैं, लेकिन इनकी साधारणता में भी ऐसे मानवीय गुणों का समावेश है कि एक बार इनसे परिचित हो जाने पर इन्हें भुला पाना नामुमकिन है।
Prerak Prasang
- Author Name:
Rashtra Bandhu
- Book Type:

- Description:
जानते हो लुई पास्चर ने कैसे सफलता पाई? रोग फैलानेवाले कीटाणुओं के इंजेक्शन रोगी कीड़ों को लगाए गए। इससे माइक्रोवेव नष्ट किए गए। जहर-से-जहर को निष्प्रभावी बनाया गया। राष्ट्र के लिए मरनेवालों का आकलन यत् किंचित् ही सही, लेकिन किया गया है, किंतु राष्ट्र के लिए जीनेवालों का आकलन हुआ ही नहीं। जब यह दुरूह, किंतु आवश्यक काम हाथ में लिया जाएगा तो हमें पता चलेगा कि साहित्य के क्षेत्र में दूसरा वल्लभ भाई पटेल कोई है तो वह है संतराम, जिसके बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी होते हुए भी कम लोगों की दिलचस्पी उसमें थी। साख्यभाव की भक्ति, शत्रुओं को भी जीवित रहने की कामना, पूर्ण सुख न देने की प्रार्थना और क्षमाभाव की प्रकृति, चुटीली बात कहनेवाला, धैर्य की पराकाष्ठा तक निर्धनता झेलनेवाला, जिसने कभी चाकरी नहीं की, स्वदेश-प्रेमी; यह विद्वान् अगरबत्ती की तरह मात्र बयालीस वर्ष जिया, लेकिन उसकी सुवास आज भी हमें उसके बारे में अधिक जानने की प्रेरणा देती है। प्रस्तुत पुस्तक के प्रसंग अपनी सरलता, सरसता, कर्तव्य-परायणता एवं उच्चकोटि की देशभक्ति के रस में पगे हुए हैं। अत: विद्यार्थी, अध्यापक ही नहीं, हर आम और खास के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Pratinidhi Kahaniyan : Krishna Baldev Vaid
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

- Description:
कृष्ण बलदेव वैद समकालीन हिन्दी कथा-साहित्य में अलग से पहचाने जानेवाले कथा-शिल्पी हैं। उन्हें किसी भी साधारण खाने में रखना कठिन है। इस संग्रह में उनकी चुनिन्दा कहानियाँ शामिल हैं, जिनमें से प्रायः प्रत्येक एक गम्भीर पाठकीय अभिरुचि की माँग करती है, क्योंकि उनके कथा-अभिप्रायों में सीधे-सादे सामाजिक या आर्थिक सन्दर्भ-भर ही नहीं हैं—कई और ऐसे अर्थ भी हैं, जो इकहरी यथार्थवादी रचनाओं में नहीं होते। लिखने की प्रेरणा उन्हें ‘अतीत के उस काले शोर को बार-बार भोगने और बराबर उससे भागते रहने की परस्पर विरोधी विवशताओं’ से मिलती है। इस बारे में उनका यह आत्मस्वीकार भी महत्त्वपूर्ण है कि ‘जैसे वह शोर मेरा अपना है, वह सन्दर्भ (रचना-सन्दर्भ) भी मेरा अपना ही होना चाहिए, अपना ही हो सकता है।’ यथार्थ और अयथार्थ का सारा झमेला अप्रासंगिक है लेकिन इसका आशय यह नहीं कि इन कहानियों में यथार्थ का अभाव है, क्योंकि ‘कलाकार के लिए अयथार्थ कुछ भी नहीं’ होता। निस्सन्देह, कृष्ण बलदेव वैद की ये कहानियाँ उनकी विशिष्ट रचना-दृष्टि, प्रयोगधर्मिता और कसी हुई भाषा-शैली का प्रतिनिधित्व करती हैं।
KANTRAKI BAGAN AUR ANY KAHANIYAN
- Author Name:
Pushpita Awasthi
- Book Type:

- Description:
Short stories in hindi
Katha Saptak Ushakiran Khan
- Author Name:
Ushakiran Khan
- Book Type:

- Description:
Padamshri Ushakiran Khan Famous 7 Stories
Gyandan
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

- Description:
यशपाल के लेखकीय सरोकारों का उत्स सामाजिक परिवर्तन की उनकी आकांक्षा, वैचारिक प्रतिबद्धता और परिष्कृत न्याय-बुद्धि है। यह आधारभूत प्रस्थान बिन्दु उनके उपन्यासों में जितनी स्पष्टता के साथ व्यक्त हुए हैं, उनकी कहानियों में वह ज़्यादा तरल रूप में, ज़्यादा गहराई के साथ कथानक की शिल्प और शैली में न्यस्त होकर आते हैं। उनकी कहानियों का रचनाकाल चालीस वर्षों में फैला हुआ है। प्रेमचन्द के जीवनकाल में ही वे कथा-यात्रा आरम्भ कर चुके थे, यह अलग बात है कि उनकी कहानियों का प्रकाशन किंचित् विलम्ब से आरम्भ हुआ। कहानीकार के रूप में उनकी विशिष्टता यह है कि उन्होंने प्रेमचन्द के प्रभाव से मुक्त और अछूते रहते हुए अपनी कहानी-कला का विकास किया। उनकी कहानियों में संस्कारगत जड़ता और नए विचारों का द्वन्द्व जितनी प्रखरता के साथ उभरकर आता है, उसने भविष्य के कथाकारों के लिए एक नई लीक बनाई, जो आज तक चली आ रही है। वैचारिक निष्ठा, निषेधों और वर्जनाओं से मुक्त न्याय तथा तर्क की कसौटियों पर खरा जीवन—ये कुछ ऐसे मूल्य हैं जिनके लिए हिन्दी कहानी यशपाल की ऋणी है। ‘ज्ञानदान’ कहानी-संग्रह में उनकी ये कहानियाँ शामिल हैं : ‘ज्ञानदानֺ’, ‘एक राज़’, ‘गण्डेरी’, ‘कुछ समझ न सका’, ‘दु:ख का अधिकार’, ‘पराया सुख’, ‘80/100’, या ‘सांई सच्चे!’, ‘ज़बरदस्ती’, ‘हलाल का टुकड़ा’, ‘मनुष्य’, ‘बदनाम’ और ‘अपनी चीज़’।
Katha Saptak - Rajendra Dani
- Author Name:
Rajendra Dani
- Book Type:

- Description:
Description Awaited
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book