Beyond the Shores of the River Existentialism
(0)
Author:
Munipalle B Raju, Nidadavolu MalathiPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
Short-story-collections₹
270
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English translation by Nidadavolu Malathi of Sahitya Akademi Award winning Telugu short stories Astitvanadam Aavali Teerana by Munipalle B Raju.
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English translation by Nidadavolu Malathi of Sahitya Akademi Award winning Telugu short stories Astitvanadam Aavali Teerana by Munipalle B Raju.
Book Details
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ISBN9789355485397
-
Pages296
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Avg Reading Time10 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: मिथिलेश्वर ग्रामीण परिवेश के सशक्त कथाकार हैं। उनकी लम्बी कहानी ‘जमुनी’ को कृषक-जीवन की महागाथा कहा जा सकता है, जिसमें एक सामान्य भारतीय कृषक परिवार के प्रेम-घृणा, आस्था-विश्वास, आशा-निराशा, हर्ष-विषाद, सम्पत्ति-विपत्ति और उत्थान-पतन का मार्मिक एवं सजीव चित्र प्रस्तुत किया गया है...। शिल्प का रचाव निश्चय ही कहानी को महत्त्वपूर्ण बना देता है, किन्तु कहीं-कहीं अनायास सादगी ही शिल्प का शृंगार बन जाती है। प्रेमचन्द का कथाशिल्प ऐसा ही था। वर्तमान कथाकारों में मिथिलेश्वर का कथाशिल्प भी इसी प्रकार का है।’’ —डॉ. राकेश गुप्त एवं डॉ. ऋषिकुमार चतुर्वेदी ‘हिन्दी कहानी 1991-95’, खंड-2 का भूमिकांश शीर्षक कथा ‘जमुनी’ एक लम्बी कहानी है जिसमें एक कृषक परिवार का संघर्ष जीवन्त हो उठता है और जहाँ अपनी भूख-प्यास और नींद-आराम को दरकिनार करते हुए हर एक की चिन्ता बीमार भैंस को मृत्यु के मुख में जाने से बचाने की है, क्योंकि वह भैंस ही उनकी सुख-समृद्धि का केन्द्र है। ‘जमुनी’ के अतिरिक्त इस संग्रह की अन्य कहानियाँ भी जीवन और जगत के जरूरी सवालों के जवाब तलाशती अमिट प्रभाव क़ायम करनेवाली कहानियाँ हैं। निःसन्देह, यह कहानी-संग्रह समर्थ कथाशिल्पी मिथिलेश्वर के प्रौढ़ कथा-लेखन की सार्थक यात्रा का द्योतक है। ‘बाबूजी’ के कथाकार ने अपने लेखकीय नैरन्तैर्य और श्रेष्ठ कथा-लेखन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट मौजूदगी का एहसास कराते हुए हिन्दी कथा-जगत को और अधिक ऊर्जस्वित और विकसित किया है...।
Pratinidhi Kahaniyan : Gyanranjan
- Author Name:
Gyanranjan
- Book Type:

- Description: साठोत्तरी प्रगतिशील कथा-साहित्य में ज्ञानरंजन की कहानियों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस संग्रह में उनकी प्रायः सभी बहुचर्चित कहानियाँ शामिल हैं जो समकालीन सामाजिक जीवन की अनेकानेक विरूपताओं का खुलासा करती हैं। इस उद्देश्य तक पहुँचने के लिए ज्ञानरंजन ने अक्सर पारिवारिक कथा-फ़लक का चुनाव किया है, क्योंकि परिवार ही सामाजिक सम्बन्धों की प्राथमिक इकाई है। इसके माध्यम से वे उन प्रभावों और विकृतियों को सामने लाते हैं, जो हमारे बूर्ज्वा संस्कारों की देन हैं। ये बूर्ज्वा संस्कार ही हैं कि प्रेम-जैसा मनोभाव भी हमारे समाज में या तो रहस्यमूलक बना हुआ है या भोगवाचक। ऐसी कहानियों में किशोर प्रेम-सम्बन्धों से लेकर उनकी प्रौढ़ परिणति तक के चित्र उकेरते हुए ज्ञानरंजन अपने समय की प्रायः समूची दशा पर टिप्पणी करते हैं। मनुष्य के स्वातंत्र्य पर थोपा गया नैतिक जड़वाद या उसे अराजक बना देनेवाला आधुनिकतावाद मानव-समाज के लिए दोनों ही घातक और प्रतिगामी मूल्य हैं। वस्तुतः आर्थिक विडम्बनाओं से घिरा मध्यवर्ग सामान्य जन से न जुड़कर जिन बुराइयों और भटकावों का शिकार है, ये कहानियाँ उसके विविध पहलुओं का अविस्मरणीय साक्ष्य पेश करती हैं।
Ajor
- Author Name:
Ashok Shah
- Book Type:

- Description: ग्रामीण जीवन की विडम्बनाएँ, समस्याएँ और उनसे संघर्ष; विकास के शहर-केन्द्रित मॉडल के अमानवीय अतिक्रमण के सामने सहमी खड़ी आदिवासी जीवन की आत्मनिर्भरता; शासन-प्रशासन की आधे-अधूरे मन से शुरू की गई जनकल्याण योजनाओं की हक़ीक़त और इस सबके बीच आम आदमी की जिजीविषा—अशोक शाह की कहानियों में इन चीज़ों को विस्तृत तथा प्रामाणिक विवरणों के साथ अंकित किया गया है। कई बार फ़िल्म-जैसी छवियों के माध्यम से वे समाज के हाशियों पर सिमटते समाज की पीड़ा को इतने तारतम्य के साथ प्रस्तुत करते हैं कि पूरा चित्र आँखों के आगे साकार हो जाता है। इस संग्रह में संकलित हर कहानी पाठक के सामने एक ऐसी दुनिया खोलती है जिसके बारे में हमने सुना भले हो, लेकिन इस तरह देखा कभी नहीं। पेशे से प्रशासनकि सेवाओं में रहे अशोक शाह मूलतः कवि हैं लेकिन कहानी उनके लिए उस समय बहुत ज़रूरी हो जाती है जब यथार्थ की जटिलता को समझने और समझाने में उन्हें अपेक्षाकृत ज़्यादा विस्तार आवश्यक लगने लगता है। उनका कवि होना इन कहानियों की संवेदना तथा वस्तु-चित्रण में भी बख़ूबी नज़र आता है। शिल्प को लेकर अतिरिक्त आग्रह की शिकार हिन्दी कहानी के परिदृश्य में इन कहानियों को इनकी वस्तु-विविधता के लिए ज़रूर पढ़ा जाना चाहिए। संग्रह की शीर्षक कहानी यद्यपि एक आशा तथा प्रसन्नतादायी बिन्दु पर समाप्त होती है, लेकिन उससे पहले की तटस्थ विवरणात्मकता आपको लगातार एक व्यथा से बींधे रहती है। बाक़ी कहानियाँ भी किसी न किसी कोण से हमें ऐसे ही व्यथित करती हैं।
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