Soorsagar Saar Satik
(0)
Author:
Dr. Dhirendra VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
375
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सूरदास हिन्दी साहित्य के सूर्य माने जाते हैं, किन्तु इस महाकवि की प्रसिद्ध कृति ‘सूरसागर’ का पठन-पाठन का रसास्वादन उतना नहीं हो पा रहा है जितना होना चाहिए। इसके अनेक कारण हैं। एक तो यह ग्रन्थ बहुत बड़ा है, दूसरे इसमें अनेक स्तरों की सामग्री मिश्रित रूप में पाई जाती है।</p> <p>इसी बात को ध्यान में रखते हुए ‘सूरसागर’ के लगभग 5000 पदों में से 831 अत्यन्त उत्कृष्ट पदों का चयन इस पुस्तक में किया गया है। विनय तथा भक्ति के पदों के उपरान्त कृष्णचरित सम्बन्धी पद, गोकुल लीला, वृन्दावन लीला, राधा-कृष्ण, मथुरा गमन, उद्धव-सन्देश और द्वारिका चरित तथा कृष्ण-जन्म से लेकर राधा-कृष्ण के अन्तिम मिलन तक के</p> <p>सम्पूर्ण कृष्णचरित क्रमबद्ध वर्णन प्रस्तुत ग्रन्थ में किया गया है। इस प्रकार का प्रयास पहली बार प्रस्तुत है।</p> <p>आशा है, अध्येता इस ग्रन्थ से पूरा लाभ उठा सकेंगे।
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सूरदास हिन्दी साहित्य के सूर्य माने जाते हैं, किन्तु इस महाकवि की प्रसिद्ध कृति ‘सूरसागर’ का पठन-पाठन का रसास्वादन उतना नहीं हो पा रहा है जितना होना चाहिए। इसके अनेक कारण हैं। एक तो यह ग्रन्थ बहुत बड़ा है, दूसरे इसमें अनेक स्तरों की सामग्री मिश्रित रूप में पाई जाती है।</p>
<p>इसी बात को ध्यान में रखते हुए ‘सूरसागर’ के लगभग 5000 पदों में से 831 अत्यन्त उत्कृष्ट पदों का चयन इस पुस्तक में किया गया है। विनय तथा भक्ति के पदों के उपरान्त कृष्णचरित सम्बन्धी पद, गोकुल लीला, वृन्दावन लीला, राधा-कृष्ण, मथुरा गमन, उद्धव-सन्देश और द्वारिका चरित तथा कृष्ण-जन्म से लेकर राधा-कृष्ण के अन्तिम मिलन तक के</p>
<p>सम्पूर्ण कृष्णचरित क्रमबद्ध वर्णन प्रस्तुत ग्रन्थ में किया गया है। इस प्रकार का प्रयास पहली बार प्रस्तुत है।</p>
<p>आशा है, अध्येता इस ग्रन्थ से पूरा लाभ उठा सकेंगे।
Book Details
-
ISBN9789389243963
-
Pages387
-
Avg Reading Time13 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यागराज को तीर्थराज कहा गया है। यह भारत का सर्वप्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र होने के साथ ही भारतीय सात्त्विकता का सर्वोत्तम प्रतीक भी है। यह हिन्दू-आस्था का एक महान केन्द्र तो है ही, यह हमारे देश की धार्मिक और आध्यात्मिक चेतना का केन्द्रबिन्दु भी है। प्रयागराज के माहात्म्य का विस्तृत वर्णन मत्स्य, पद्म और कूर्म पुराण के कई अध्यायों में मिलता है। कुम्भ के दौरान संगम तीर्थ पर एक स्नान-दिवस पर भक्तिभाव से कई बार इतने लोग जमा हो जाते हैं कि उनकी संख्या दुनिया के कई देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक होती है। उन श्रद्धालुओं को कभी कोई निमंत्रण नहीं देता, वे श्रद्धा और भक्ति की एक अदृश्य डोर में बँधकर वहाँ खिंचे चले आते हैं। हमारी सनातन सस्कृति का यह चुम्बकीय आकर्षण अनादिकाल से यथावत् बना हुआ है। श्रद्धा और आस्था का यह आवेग सदियों से चली आ रही हमारी परम्परा का हिस्सा है। यह परम्परा हमें अपनी मूल संस्कृति से जोड़े रखने के साथ ही सांस्कृतिक एकीकरण का पथ भी प्रशस्त करती है। स्वाभाविक रूप से प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास के बारे में जानना-समझना एक सुखद अनुभूति है। बहरहाल, अभिलेखीय और साहित्यिक स्रोतों के आधार पर प्रयागराज और कुम्भ के गौरवशाली इतिहास को इस पुस्तक में बहुत ही सरस ढंग से प्रस्तुत किया गया है। इसमें प्रामाणिकता और रोचकता का मणि-कांचन संयोग है। यह पुस्तक हमारे देश के सांस्कृतिक वैभव की एक अभिनव गाथा लेकर आई ह
Dr. Kalam : Prerna Ki Udaan
- Author Name:
Dr. Unnat Pandit
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ख्यातिप्राप्त वैज्ञानिक, विचारक, दाशर्निक और शिक्षक के रूप में डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने प्रत्येक भारतीय को सदैव प्रेरित किया है। उनके जीवन, कॅरियर और लेखन ने कोटि-कोटि भारतीयों का मार्गदर्शन किया है, उन्हें प्रोत्साहित किया है। वे हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन हर भारतीय के हृदय में हमेशा उनका स्थान रहेगा। वे समाज और देश के प्रति अपने कर्तव्यों को लेकर हमारे मन में सदैव ज्ञान की ज्योति जलाते रहेंगे। प्रस्तुत पुस्तक ‘डॉ. कलाम : प्रेरणा की उड़ान’ उनके सहज-सरल, अनुकरणीय जीवन का एक विशद् विवेचन करती है। इस पुस्तक का उद्देश्य भारत के सर्वांगीण विकास के डॉ. कलाम के स्वप्न को साकार करने की प्रबल इच्छाशक्ति जाग्रत् कराना है, ताकि भारत के छात्र-युवा-आमजन प्रेरणा ले सकें। यह पुस्तक पढ़कर छात्रों को भारतीय रक्षा और अनुसंधान विकास में एरोनॉटिकल इंजीनियर, मिसाइल इंजीनियरिंग, उपग्रह प्रक्षेपण यान तकनीक के क्षेत्र में डॉ. कलाम के अनगिनत योगदानों के विषय में और ज्यादा जानने का अवसर मिलेगा। स्वप्न देखकर उन्हें साकार करने की क्षमता प्राप्त करने की उड़ान भरने में यह पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी।
Geetgovind
- Author Name:
Jaidev
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"‘गीतगोविंद’ संस्कृत के प्रसिद्ध कवि जयदेव द्वारा रचित एक अनुपम काव्य-ग्रंथ है, जिसमें राधा-कृष्ण की केलि-कथाओं तथा उनकी अभिसार-लीलाओं के अत्यंत रसमय चित्रण के साथ ही प्रेम के सभी भारतीय रूपों का बड़ी तन्मयता और कुशलता के साथ वर्णन किया गया है। समग्र संस्कृत साहित्य में इस कोटि की मधुर रचना दूसरी कोई नहीं। यह आध्यात्मिक शृंगार का अत्यंत मनोरम काव्य-ग्रंथ है, जिसमें शब्द और अर्थ का मनोमुग्धकारी सामंजस्य है। कृष्ण-भक्ति साहित्य में ‘गीतगोविंद’ को धर्मग्रंथ का स्थान प्राप्त है। श्रीवल्लभ संप्रदाय में भी ‘गीतगोविंद’ को श्रीमद्भागवत पुराण के समान प्रतिष्ठा प्राप्त है। यह ग्रंथ देश-विदेश के अनेक मूर्धन्य एवं लब्धप्रतिष्ठ विद्वान् समीक्षकों द्वारा मुक्त कंठ से प्रशंसित है। प्रस्तुत है, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में सुप्रतिष्ठित इस ग्रंथ-रत्न का सुमधुर हिंदी अनुवाद। आध्यात्मिक साधकों के लिए ही नहीं आम पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी पुस्तक। "
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