Rigved : Mandal-3, 4 & 5
(0)
Author:
Govind Chandra PandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
800
640 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।</p> <p>भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।</p> <p>वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीसिप्त विशेषताएँ हैं।</p> <p>इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के तीसरे, चौथे एवं पाँचवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Read moreAbout the Book
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।</p>
<p>भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।</p>
<p>वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीसिप्त विशेषताएँ हैं।</p>
<p>इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के तीसरे, चौथे एवं पाँचवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Book Details
-
ISBN9788190551731
-
Pages1065
-
Avg Reading Time36 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
The Buddha and His Dhamma Book on Buddha's Life And Philosophy
- Author Name:
DR. B.R. Ambedkar
- Book Type:

- Description: "The Buddha and His Dhamma is Dr. B.R. Ambedkar's final and perhaps most spiritually significant work, offering a detailed exploration of the life, teachings and philosophy of Gautama Buddha. First published in 1957, this book serves as a foundational text for the Navayana or Neo-Buddhist movement, which Ambedkar initiated to promote a version of Buddhism rooted in social justice, equality and compassion. In this work, Ambedkar reinterprets the teachings of the Buddha to emphasise principles of rationalism, ethical living, and human dignity, critiquing traditional religious practices that, in his view, perpetuate superstition and social inequality. He presents the Buddha as a revolutionary figure whose teachings directly oppose caste-based discrimination and advocate for a moral code that transcends ritualistic practices."
Main Ram Bol Raha Hoon
- Author Name:
Pramod Kumar Agrawal
- Book Type:

- Description: राम का जीवन भारतीयों के लिए एक आदर्श जीवन है। जन्म से लेकर अंत तक राम का चरित्र एक दीप-स्तंभ है। ऐसे सार्वकालिक राष्ट्रीय नायक का कथानक किसी भी कृति को गौरवान्वित करता है। ‘रामचरितमानस’ के धीरोदात्त नायक राम कथनी से अधिक करनी में विश्वास रखते थे। अतः उनके जो भी कथन उपलब्ध हैं, वे भारतीय संस्कृति की महत्त्वपूर्ण धरोहर हैं। राम के प्रस्तुत उद्घोष तुलसीकृत रामचरितमानस एवं लेखक की समांतर कृति ‘रामचरितमानस: नाट्य रूप’ से उद्धृत किए गए हैं। विश्वास है, सुधी पाठक प्रस्तुत कृति से प्रेरणा ग्रहण करके अपने जीवन को सफल बनाएँगे और भारतीय तथा विश्व-समाज को समुन्नत करने में योगदान देंगे।
SOCH BADI KAMYABI BADI
- Author Name:
Dale Carnegie
- Book Type:

- Description: दुनिया के सबसे महानतम स्वयं-सहायता गुरुओं में से एक से उत्कृष्टता के सबक 2 ऐसा कॅरियर चुनें, जो आपको सबसे ज्यादा अनुकूल हो। 2 पब्लिक स्पीकिंग के गुण सीखें, जो आपको एक प्रभावी कम्यूनिकेटर बनाएगा। 2 काम की चार अच्छी आदतों को अपनाकर तनाव और थकान को दूर करें। 2 अपने जीवन में वित्तीय योजना के ग्यारह मौलिक सिद्धांतों को लागू करें। अत्यंत सफल लेखक और प्रेरक वक्ता डेल कारनेगी ने दुनिया भर में लाखों लोगों को अपने जीवन और कॅरियर में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी। डेल कारनेगी की शिक्षा के जरूरी सिद्धांतों का संग्रह ‘सोच बड़ी, कामयाबी बड़ी’ एक ऐसी मूल्यवान पुस्तक है, जो आपके व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में आपकी मदद करेगी। प्रत्येक सिद्धांत को सफल कारोबारियों और कॉरपोरेट जगत् की हस्तियों के साथ ही इतिहास की महान् राजनीतिक विभूतियों की जीवन-घटनाओं वाक्यों और कहानियों से समझाया गया है। इसमें डेल कारनेगी तथा उन विचारकों और कामयाब लोगों की प्रेरक उक्तियों का एक संग्रह भी है, जिनकी वह सबसे अधिक प्रशंसा करते थे, जैसे कि रॉल्फ वाल्डो इमर्सन, थॉमस ए एडिसन, हेनरी फोर्ड और कई अन्य प्रसिद्ध व्यक्ति।
Parashakti Shri Sita
- Author Name:
Suresh Kumar Singh
- Book Type:

- Description: श्री सुरेश कुमार सिंह, प्रशासनिक पद पर होते हुए भी आध्यात्मिक चिन्तन और लेखन में लीन रहते हैं। उनकी आध्यात्मिक चेतना और शोध-दृष्टि स्पृहणीय है। ‘पराशक्ति श्रीसीता’ और उनसे सम्बन्धित स्थल की प्रामाणिक खोज उनके व्यक्तित्व को उजागर करती है। एक प्रशासनिक अधिकारी के गुरुतर दायित्वों का निर्वहन करते हुए इक्यावन शक्तिपीठों का अन्वेषण, उपनिषदों में देवी के विविध स्वरूपों का शोधपरक विश्लेषण तथा ‘पराशक्ति श्रीसीता’ के विविध स्वरूपों का विवेचन इनकी वैचारिक ऊँचाइयों का दिग्दर्शन कराता है। भदोही जनपद के ख्यातिलब्ध विद्वानों—शास्त्र चूड़ामणि, डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. भारतेन्दु द्विवेदी तथा डॉ. लक्ष्मीधर चतुर्वेदी ने पुस्तक को उपयोगी बनाने में अहम् भूमिका निभाई है। विश्वास है, यह पुस्तक ‘पराशक्ति श्रीसीता’ और वाल्मीकि आश्रम सीतामढ़ी के सन्दर्भ में मील के पत्थर का काम करेगी।
VEDON KI KATHAYEN (PB)
- Author Name:
Harish Sharma
- Book Type:

- Description: कहते हैं धर्म वेदों में प्रतिपादित है। वेद साक्षात् परम नारायण है। वेद में जो अश्रद्धा रखते हैं, उनसे भगवान् बहुत दूर हैं। वेदों का अर्थ है—भिन्न-भिन्न कालों में भिन्न-भिन्न व्यक्तियों द्वारा आविष्कृत आध्यात्मिक सत्यों का संचित कोष। वास्तव में जीवन को सुंदर व साधक बनानेवाला प्रत्येक विचार ही मानो वेद है। मैक्स म्यूलर का तो यहाँ तक कहना था कि वेद मानव जाति के पुस्तकालय में प्राचीनतम ग्रंथ हैं। वेद संख्या में चार हैं—ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद। वेद का शाब्दिक अर्थ है ‘ज्ञान’ या ‘जानना’। ये हमारे ऋषि-तपस्वियों की निष्कपट, निश्छल भावना की अभिव्यक्ति हैं। इनमें जीवन को सद्मार्ग पर प्रशस्त करने का आह्वान है। इतना ही नहीं, वेदों में आत्मा-परमात्मा, देवी-देवता, प्रकृति, गृहस्थ-जीवन, सृष्टि, लोक-परलोक के साथ-साथ नाचने-गाने आदि की बातें भी निहित हैं। इन सबका एक ही उद्देश्य है—मानव-कल्याण। एक ओर जहाँ वेदों में ईश-भक्ति और अध्यात्म की महिमा गाई गई है, वहीं दूसरी ओर कर्म को ही कल्याण का मार्ग कहा गया है। वेद हमारे अलौकिक ज्ञान की अनुपम धरोहर हैं। अत: इनके प्रति जन-सामान्य की जिज्ञासा होना स्वाभाविक है, इसलिए वेदों के गूढ़ ज्ञान को हमने कथारूप में पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। इन कथा-कहानियों के माध्यम से सुधी पाठक न केवल इन्हें पढ़-समझ सकते हैं, बल्कि पारंपरिक वैदिक ज्ञान को आत्मसात् कर लोक-परलोक भी सुधार सकते हैं।
Srikrishna, Buddha, Yeshu Aur Muhammed "श्रीकृष्ण, बुद्ध, ईसा और मुहम्मद" | Enlightening Insights Into The Life | Swami Vivekananda Book in Hindi
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब यहाँ हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मँडरा रहे थे। पंडित-पुरोहितों ने हिंदू धर्म को घोर आडंबरवादी और अंधविश्वासपूर्ण बना दिया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक पूर्ण पहचान प्रदान की | इसके पहले हिंदू धर्म विभिन छोटे-छोटे संप्रदायों में बँटा हुआ था। तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो, अमेरिका में विश्व धर्म संसद् में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और इसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई। स्वामीजी का विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहाँ बड़े-बड़े महात्माओं तथा ऋषियों का जन्म हुआ; यह संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं, केवल यहीं आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिए जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है। प्रस्तुत पुस्तक 'कृष्ण, बुद्ध, ईसा और मुहम्मद ' में स्वामीजी ने सरल शब्दों में देवत्व प्राप्त इन स्तुत्य महापुरुषों के व्यक्तितत और उनकी शिक्षाओं की अनिर्वचनीय व्याख्या की है। एक अत्यंत प्रेरक्त और ओजपूर्ण पुस्तक, जो जीवन में दैविक आशा का संचार करती है।"
Dattatreyagita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: तत्त्वं क्षेत्रं व्योमातीतमहं क्षेत्रज्ञ उच्यते। अहं कर्ता च भोक्ता च जीवन्मुक्तः स उच्यते॥ तत्त्व (सत्य) क्षेत्र (देह) से परे होता है और उसे क्षेत्रज्ञ (आत्मा) कहा जाता है। मैं कर्ता (क्रिया करनेवाला) और भोक्ता (भोग करनेवाला) हूँ। जो इस सत्य को जानता है, वही सच्चा जीवन्मुक्त कहलाता है।
Nath Sampraday
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description: र्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ऐसे वांड़्मय-पुरुष हैं जिनका संस्कृत मुख है, प्राकृत बाहु है, अपभ्रंश जघन है और हिन्दी पाद है। नाथ सिद्धों और अपभ्रंश साहित्य पर उनके शोधपरक निबन्ध पढ़ते समय मन की आँखों के सामने उनका यह रूप साकार हो उठता है। ‘नाथ सम्प्रदाय’ में गुरु गोरखनाथ के लोक-संपृक्त स्वरूप का उद्घाटन किया गया है। स्वयं द्विवेदी जी के शब्दों में 'गोरखनाथ ने निर्मम हथौड़े की चोट से साधु और गृहस्थ दोनों की कुरीतियों को चूर्ण-विचूर्ण कर दिया। लोकजीवन में जो धार्मिक चेतना पूर्ववर्ती सिद्धों से आकर उसके पारमार्थिक उद्देश्य से विमुख हो रही थी, उसे गोरखनाथ ने नई प्राणशक्ति से अनुप्राणित किय
Guru-Shishya Samvad "गुरु-शिष्य संवाद" | Spiritual Journey | Swami Vivekananda Book in Hindi
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: "स्वामी विवेकानंद ने भारत में उस समय अवतार लिया, जब यहाँ हिंदू धर्म के अस्तित्व पर संकट के बादल मँडरा रहे थे । पंडितों-पुरोहितों ने हिंदू धर्म को घोर आडंबरी और अंधविश्वासपूर्ण बना दिया था। ऐसे में स्वामी विवेकानंद ने हिंदू धर्म को एक पूर्ण पहचान प्रदान की । इसके पहले हिंदू धर्म विभिन्न छोटे-छोटे संप्रदायों में बँटा हुआ था। तीस वर्ष की आयु में स्वामी विवेकानंद ने शिकागो (अमरीका) में विश्व धर्म-संसद् में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और इसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई। प्रस्तुत पुस्तक ‘गुरु-शिष्य संवाद' में स्वामी विवेकानंद ने सरल शब्दों में वेद, उपनिषद् और वेदांत के बारे में सारभूत व्याख्या की है तथा प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से अपने शिष्यों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत करने का प्रयास किया है। उन्होंने अकाट्य तर्कों द्वारा वैश्विक ज्ञान के सागर को इस पुस्तक रूपी गागर में भर दिया है। यह एक अत्यंत प्रेरक और ओजपूर्ण पुस्तक, जो जीवन में दैविक आशा का संचार करती है; मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है।"
Lok Ram-Katha
- Author Name:
Shyam Sunder Dubey
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक ‘लोक राम-कथा’ में उत्तरभारत की अनेक लोक-बोलियों में प्रचलित लोकगीतों के माध्यम से लोक रामायण को अन्वेषित करने का प्रयास किया गया है। इस प्रयास में यह भाव भी सक्रिय रहा है कि लोक की मौलिक और प्रचलित कथा में भिन्न अवधारणाओं को महत्त्व दिया जाये। लोक रामायण के रूप में बोलियों के अन्तर्गत लिखित काव्य ग्रन्थ भी है। इस तरह के काव्य ग्रन्थ कुछ ही बोलियों में मिलते हैं। अवधी में इस तरह के ग्रंथों का प्रणयन हुआ है। इनका परिचय भी यथासम्भव इस प्रस्तुति में सम्मिलित है। इस दिशा में यह प्रस्थानिक कार्य ही है। रामवृत्त को केन्द्र बनाकर रचे गये लोकगीतों-लोक आख्यानों की प्रचुरता का अन्दाज केवल इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि देश-विदेश में जिस तरह जन-जन में राम रमे हुए हैं उसी तरह उनके चरित्र अनुकीर्तन से सम्बन्धित लोक रचनाएँ भी असंख्य हैं।
रामकथा से सम्बन्धित विभिन्न अंचलों के लोकगीतों में लोकमंगल की भावना व्यक्त हुई है। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने तुलसी के संदर्भ में जिस लोक मंगल की सर्वतोभद्र प्रतिष्ठा की है वह लोकमंगल तुलसी के काव्य में लोक जीवन के प्रभाव से ही प्रतिष्ठित हुआ है। लोक मूल्यों के प्रति तुलसी की निष्ठा उनके लोकाभिराम में केन्द्रित हो जाती है। लोक रामायण लोक के सामाजिक, आध्यत्मिक, सांस्कृतिक एवं कलात्मक मूल्यों की संप्रतिष्ठा करती है। इन मूल्यों की प्रतिष्ठा हेतु लोक ने अपने ढंग से रामायण की चरित्र संरचना की है। कथा के अनेक अभिप्रायों का संवितरण लोक के अनेक अंचलों में एक जैसा है। बहुत संभव है कि इस तरह के संवितरण में चरणशील प्रवृत्ति के अनेक जनों की भूमिका रही हो। भक्ति के हिलुरते अछोर भाव समुद्र की लहरें कब कहाँ किस तट पर अपने आस्था जल का विमोचन करती रही हैं, यह लोकगीतों की अभिव्यक्ति में अनुभव किया जा सकता है। यह सर्वत्र एक से ही भाव का जो लोक चित्र में उदय होता है वह लोक की अंतर्निहित समिष्ठि शक्ति का प्रकाशन भी है। लोक रामायण लोक की समिष्ठिगत अवधारणा का संपुजित प्रकाश इसी अर्थ में प्रदान करती है।
लोक कथाओं के रूप में रामकथा अनेक अंचलों में अपने एकदम अलग सन्दर्भों में व्यक्त हुई है। विशेष रूप से आदिवासी कहे जानेवाले सुदूर अंचलों से लेकर विभिन्न पहाड़ी क्षेत्रों में रामकथा लोक बोली के गद्य में प्राप्त होती है। काव्य में तो प्राय: सभी लोकांचलों में रामकथा गायी गयी है। इसके अलावा प्राकृत और अपभं्रश में भी रामकथा पर केन्द्रित अनेक राम कथायें रची गयी हैं।
Sanskrtik Virasat Ke Dhani : Bharat Aur Japan
- Author Name:
Shila Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: "जापान में भी ईश्वर की पूजा-अर्चना, सेवा, देवों का आह्वान करने की रीतियाँ भारतीय जीवन से बहुत कुछ मिलती-जुलती हैं। भारत की तरह जापान में भी मकान बनाने से पहले भूमि-पूजन करते हैं। परिवार के मंगल के लिए पितरों से आशीर्वाद लेते हैं। गुरु-शिष्य परंपरा का दर्शन वहाँ भी होता है। जापान की पौराणिक कहानियों में पत्थर में परिवर्तित हुई लड़की अपने श्रीरामचरितमानस की अहल्या जैसी ही लगती है और जापान की सूर्य उपासना की पद्धति भारत के सूर्य नमस्कार के जैसी ही है। जिस प्रकार हिंदू कोई धर्म नहीं है, एक जीवन पद्धति है, उसी प्रकार शिंतो भी प्रकृति और मनुष्य के साहचर्य की जीवन पद्धति है, जिसका किसी दर्शन, धर्म, ग्रंथ अथवा उपदेश से साम्य नहीं है, बस वह रहन-सहन का एक तरीका भर है। जापान में भी दीपावली की तरह जगमगाहट है; होली की तरह रंगों की फुहार है; पतंगों के उत्सव में भिन्न-भिन्न प्रकार के पतंगों से रँगा हुआ पूरा आसमान है; शादी-विवाह के मौकों पर संगीत से सजी हुई महफिलें हैं तो साकुरा के बागों तले फूलों की अल्हड़ बरसात है; कठपुतलियों के नृत्य हैं। काबुकी के रंग-मंच में अभिनय के रंगों में रँगी हुई कोमल भावनाएँ हैं और भारत से मिलता-जुलता हर जगह बहुत कुछ है। यह पुस्तक इन्हीं अनुभवों पर आधारित एक प्रतिबिंब है, जिसमें जापान के अनेक रंगों को समेटने का प्रयास किया गया है। "
Rigved : Mandal-8
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

-
Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के आठवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Devalayon Per Mithun Murtiyan Kyon ?
- Author Name:
Tapi Dharma Rao
- Book Type:

-
Description:
तेलगू लेखक तापी धर्माराव के लेखन का प्रयोजन समाज को शिक्षित करना रहा है। इतिहास को बाँचने में उन्हें कोई गुरेज़ नहीं। वे तथ्यों की वैज्ञानिक पड़ताल भी करते हैं और अन्धविश्वासों को चुपचाप पचा लेने की ग़लतियाँ वह नहीं करते। आत्मानुभव उनके मन में उठे द्वन्द्व का कारण बनता है और वह उनके समाधान की खोज करने में जुट जाते हैं। उनके लेखन में ज्ञान से अधिक अनुभव है और परम्परा से अधिक व्यावहारिक तथ्य।
सच कहने के लिए साहस, धैर्य और आत्मबल की ज़रूरत होती है। तापी धर्माराव के यह गुण प्रस्तुत पुस्तक में साफ़ महसूस किए जा सकते हैं। पुस्तक सवाल–दर–सवाल खड़े करती है। लेखक ने इन प्रश्नों को प्रस्तुत करने और उनके सम्बन्ध में तथ्यों को स्पष्ट करने की चेष्टा की है। प्रश्नों के कारणों की विवेचना के साथ–साथ उनके हल की तलाश भी ज़रूरी है। पुस्तक में कई प्रश्न टकराते हैं और उनका समाधान जिज्ञासाओं की पूर्ति के रूप में किया गया है।
Rigved : Mandal-9
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

-
Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के नौवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Crystals and Life Transition
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: The Crystal and Life Transition is a book that explores the relationship between crystals, healing, and life transitions. It is a guide to using crystals to help you navigate your own personal life transitions. The book is divided into three sections: The first section covers the history of crystals, their properties, and how they can be used in healing. The second section focuses on how to use crystals for specific problems or situations in your life. It also includes an overview of different types of crystals and how they work together as a team to impact different aspects of your life. The third section provides specific exercises that will help you get started using crystals as part of your daily routine--or even just as an occasional hobby!
SIDDHARTHA An Indian Tale
- Author Name:
Hermann Hesse
- Book Type:

- Description: Siddhartha: An Indian Tale is a novel by Hermann Hesse. The theme of the novel is the search for self-realization by a young Brahman, Siddhartha. Realizing the contradictions between reality and what he has been taught, he abandons his comfortable life to wander. His goal is to find the serenity that will enable him to defeat fear and to experience with equanimity the contrasts of life, including joy and sorrow, life and death.
Ghazal Kumbh 2020
- Author Name:
Dixit Dankauri
- Book Type:

- Description: This Book Doesn't have a Description
Dharam Ke Naam Par
- Author Name:
Geetesh Sharma
- Book Type:

-
Description:
धर्म के सही चरित्र एवं स्वरूप से परिचित हुए बिना विवेकहीनता, अन्धविश्वासों एवं भ्रान्तियों से मुक़ाबला नहीं किया जा सकता। इस दिशा में यह पुस्तक एक सार्थक प्रयास है। लेखक ने निष्पक्ष दृष्टि से बिना किसी पूर्वग्रह के तीन धर्मों—हिन्दू, ईसाई और इस्लाम की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए हिंसा, नारी और दासत्व के सन्दर्भ में संक्षिप्त पर तथ्यपरक व वस्तुगत विश्लेषण प्रस्तुत किया है।
धर्म का बीभत्स और बर्बर रूप आज हम देख रहे हैं। पूरे भारतीय उपमहाद्वीप और अफ़ग़ानिस्तान में धर्म के रक्तरंजित इतिहास को दोहराया जा रहा है। धार्मिक-स्थल अपराधियों के शरण-स्थल बने हुए हैं। धर्म का अपराध के साथ गठजोड़ चिन्तित करता है। भजन-कीर्तन-प्रवचन के आयोजनों और धार्मिक-स्थलों के निर्माण में बेशुमार वृद्धि हुई है, वहीं हत्या, बलात्कार, उत्पीड़न और भ्रष्टाचार बढ़े हैं। स्वयं मनुष्य अपनी नियति तथा भाग्य का निर्माता है। समता, स्वतंत्रता और न्याय प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है। कोई भी ऐसी व्यवस्था जो मनुष्य को इन अधिकारों से वंचित करती है, वह मानव-विरोधी है, चाहे वह धर्म हो या साम्राज्यवाद या फासीवाद या निजी स्वार्थों पर आधारित विकृत तथा जनविरोधी जनतंत्र। मनुष्य सर्वोपरि है, उसके ऊपर कोई नहीं, न धर्म न ईश्वर।
Nij Brahma Vichar
- Author Name:
Purushottam Agarwal
- Book Type:

-
Description:
धर्म के सामान्य अनुयायी, साधारण आस्थावान् लोग हों या धर्म को हिंसक राजनीति में बदलनेवाले चतुर सुजान, धर्म के अध्येता हों या कठोर आलोचक और घोर विरोधी—अपने सारे मतभेदों के बावजूद इनमें से अधिकांश एक बात पर सहमत हैं। वह यह कि धर्म और अध्यात्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। या तो अध्यात्म फ़िज़ूल की बात है, या फिर धर्म ही अध्यात्म का एकमात्र आधार और माध्यम है। या तो अध्यात्म का आशय है—समाजनिरपेक्ष आत्मलीनता या अध्यात्म का अर्थ है प्रतिक्रियावादी रहस्यवाद। दोनों में से किसी भी तर्क-पद्धति को अपनाइए, निष्कर्ष पहले से तय है : यदि अध्यात्म के प्रश्नों में आपकी दिलचस्पी है तो आप धर्म को अपनाइए; यदि आप धर्म से असुविधा महसूस करते हैं तो अध्यात्म को भी साथ-साथ ख़ारिज कर दीजिए।
परस्पर विरोधी तर्क-पद्धतियों का निष्कर्ष के धरातल पर यह सामंजस्य अद्भुत है। धर्मेतर अध्यात्म की सम्भावनाओं पर विचार का प्रस्ताव, जो यह पुस्तक आपको देती है, विरुद्धों के इस सामंजस्य से टकराने का, और हो सके तो इसके परे जाने का प्रस्ताव है।
पिछले एक साल से भी ज़्यादा समय से दैनिक ‘जनसत्ता’ में चिन्तक-आलोचक
डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल का चर्चित कॉलम ‘मुखामुखम’ एक समग्रबोध की साधना करने की भरसक कोशिश करता रहा है। सैद्धान्तिक प्रश्नों से जूझने से लेकर अटलांटा, वर्धा और गोपेश्वर के अनुभव-संवेदनों को पाठकों के सामने प्रस्तुत करने तक के रूप में ये लेख लगातार उत्सुकता के साथ पढ़े गए। जाने-माने बुद्धिजीवियों से लेकर पाठकों तक सभी ने इनमें विशेष दिलचस्पी ज़ाहिर की। बहसें भी हुईं। शुरुआती एक वर्ष (मई 2003-मई 2004) में प्रकाशित चर्चित लेख यहाँ पुस्तक रूप में प्रस्तुत हैं। लेखक ने इनमें वे आवश्यक पाद-टिप्पणियाँ और सन्दर्भोल्लेख भी जोड़ दिए हैं, जो अख़बार में नहीं आ सकते थे, लेकिन ज़रूरी थे।
Upnishdon Ke Samvad
- Author Name:
Shobha Nigam
- Book Type:

-
Description:
उपनिषद् भारत के गौरव-ग्रंथ हैं। ये वेदों के अंतिम भाग हैं। वैसे तो ये विश्वप्रसिद्ध ग्रंथ हैं, किंतु दुःख की बात है कि इनसे हम भारतीय ही बहुत कम परिचित हैं। अत्यंत सरल किंतु ओजस्वी भाषा में ये ग्रंथ दार्शनिक समस्याओं पर विचार करते हैं, ऐसी दार्शनिक समस्याओं पर जो मानवजीवन से जुड़ी हुई हैं। ये भारत को श्रेष्ठ मार्ग तो दिखाते ही हैं...प्रेरित करते हैं...चेतावनी भी देते हैं कि यदि हमने इसे नहीं अपनाया तो जीवन में महान हानि निश्चित है।
इस तरह उपनिषदों की शिक्षा सदियों से मानव पर उपकार करती आई है। उपनिषदों ने न केवल भारतीयों को अथवा हिंदुओं को प्रभावित किया है वरन् इन्होंने अन्य देश एवं धर्म के लोगों को भी प्रभावित किया है। अनेक विदेशी विद्वान भी इनके मुरीद हुये हैं। इनसे न केवल परवर्ती आस्तिक दर्शन सिंचित हुये हैं वरन् नास्तिक दर्शन भी सिंचित हुये हैं।
उपनिषदों की एक बड़ी विशेषता यह भी रही है कि वेदों के कर्मकांड की ओर बढ़ते कदमों को रोककर यहां के तेजस्वी ऋषियों ने ज्ञानकांड की गंगा बहाकर भारतीय दर्शन, भारतीय समाज और भारतीय धर्म को एक नई दिशा की ओर मोड़ा है। भगवत्गीता पर उपनिषदों का अत्यंत प्रभाव पड़ा है। गीता को इसीलिये उपनिषदों का सार कहा जाता है।
उपनिषदों के विचार मुख्यतः गुरु और शिष्य के मध्य संवाद रुप में प्रस्तुत हुये हैं। वैसे तो उपनिषदों की संख्या 108 मानी जाती है किंतु इस ग्रंथ में हमने 11 प्रमुख उपनिषदों में आये संवादों को 31 अध्यायों में प्रस्तुत किया है। बृहदारण्यक एवं छांदोग्य उपनिषद् से सर्वाधिक संवाद लिये गये हैं जो इन उपनिषदों का बृहत् आकार देखते हुये स्वाभाविक है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book