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Kashmir 370 Ke Sath Aur Baad (Hindi Translation of Valley of Red Snow)

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5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देनेवाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया था। जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्र शासित प्रदेश है। कश्मीर की इस ऐतिहासिक घटना से पहले आजादी के बाद के सात दशकों में सिलसिलेवार अनेक राजनीतिक और सामाजिक घटनाएँ हुई थीं। किन ताकतों की वजह से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की यह प्रक्रिया हुई? जम्मू-कश्मीर के लोगों पर इसके क्या परिणाम हुए? इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? और सबसे महत्त्वपूर्ण बात, उनका भविष्य क्या है? वरिष्ठ पत्रकार जीतेंद्र दीक्षित लिखित ‘कश्मीर : 370 के साथ और बाद’ में इन सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है। साथ ही एक निष्पक्ष, सही-गलत का फैसला सुनाए बिना तमाम पहलुओं को शामिल करनेवाली कहानी पेश करने का प्रयास भी किया गया है। यह पुस्तक अनुच्छेद 370 हटने की ऐतिहासिक घटना से पहले के वर्षों की घटनाओं, अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के समय कश्मीर की तात्कालिक स्थिति का वर्णन करती है और अनेक साक्षात्कारों के जरिए घाटी में विभिन्न हितधारकों की आवाज आप तक पहुँचाती है। यह पिछले दशक के दौरान घाटी में होनेवाली महत्त्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन करती है, जिन्हें लेखक ने कश्मीर की धरती पर जाकर देखा। यही नहीं, यह ‘न्यू कश्मीर’ पर गहरी जानकारी भी देती है। जम्मू-कश्मीर के भविष्य में रुचि रखनेवाले इसे अवश्य पढ़ें।

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5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा देनेवाले भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया गया था। जम्मू-कश्मीर अब एक केंद्र शासित प्रदेश है।
कश्मीर की इस ऐतिहासिक घटना से पहले आजादी के बाद के सात दशकों में सिलसिलेवार अनेक राजनीतिक और सामाजिक घटनाएँ हुई थीं। किन ताकतों की वजह से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की यह प्रक्रिया हुई? जम्मू-कश्मीर के लोगों पर इसके क्या परिणाम हुए? इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया थी? और सबसे महत्त्वपूर्ण बात, उनका भविष्य क्या है?
वरिष्ठ पत्रकार जीतेंद्र दीक्षित लिखित ‘कश्मीर : 370 के साथ और बाद’ में इन सवालों के जवाब देने की कोशिश की गई है। साथ ही एक निष्पक्ष, सही-गलत का फैसला सुनाए बिना तमाम पहलुओं को शामिल करनेवाली कहानी पेश करने का प्रयास भी किया गया है।
यह पुस्तक अनुच्छेद 370 हटने की ऐतिहासिक घटना से पहले के वर्षों की घटनाओं, अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के समय कश्मीर की तात्कालिक स्थिति का वर्णन करती है और अनेक साक्षात्कारों के जरिए घाटी में विभिन्न हितधारकों की आवाज आप तक पहुँचाती है। यह पिछले दशक के दौरान घाटी में होनेवाली महत्त्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन करती है, जिन्हें लेखक ने कश्मीर की धरती पर जाकर देखा। यही नहीं, यह ‘न्यू कश्मीर’ पर गहरी जानकारी भी देती है। जम्मू-कश्मीर के भविष्य में रुचि रखनेवाले इसे अवश्य पढ़ें।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Prabhat Prakashan
Format
Paperback
Publisher
Prabhat Prakashan
Weight
371 grams
ISBN-13
9789355211811
Pages
272
Reading time
~9 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

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