Hindu Hone Ka Dharma
Author:
Prabhash JoshiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 639.2
₹
799
Available
अपने सुदीर्घ पत्रकार जीवन में प्रभाष जोशी का लेखन लोक के विवेक को रेखांकित करने और जहाँ वह मंद पड़ा हो वहाँ उसे पुनर्जाग्रत करने का लेखन रहा है। ज़्यादातर हिन्दी समाज से संवाद करती उनकी पत्रकारिता एक ओर सत्ता-राजनीति से सीधी बहस में उतरती है और दूसरी ओर समाज, संस्कृति, पर्यावरण, संगीत और खेल की मार्फ़त समग्र जीवन-मूल्यों की खोज करती है। प्रभाष जोशी के सम्पादन में 1983 में प्रकाशित दैनिक ‘जनसत्ता’ एक बड़ी घटना थी जिसने ‘सबकी ख़बर लेने’ के साहस और ‘सबको ख़बर देने’ की प्रतिबद्धता के साथ पत्रकारिता के इकहरे विन्यास को, उसके सत्ता-केन्द्रित स्वरूप को तोड़ते हुए उसे लोकधर्मी बनाने की पहल की। क़रीब दस वर्ष बाद 1992 में जब हिन्दू समाज से उभरे कुछ विकृत और उन्मादी तत्त्वों ने अपनी साम्प्रदायिक-नकारात्मक प्रवृत्तियों के चरम के रूप में अयोध्या की बाबरी मस्जिद का ध्वंस किया तो प्रभाष जोशी उन चुनिंदा लेखकों-पत्रकारों में अग्रणी थे जिन्होंने हमारे सर्वग्राही धर्म और उदार-सहिष्णु-सामासिक संस्कृति के साथ हुए इस दुष्कृत्य का विरोध किया। ऐसे समय में जब ज़्यादातर हिन्दी मीडिया साम्प्रदायिकता के आक्रमण के आगे घुटने टेक रहा था या हक्का-बक्का था तो प्रभाष जोशी ने गांधी विचार के आलोक में जिस वैचारिक संघर्ष की शुरुआत की, वह भी ‘जनसत्ता’ के प्रकाशन जैसी ही एक घटना थी।</p>
<p>‘हिन्दू होने का धर्म’ बाबरी ध्वंस के बाद और गुजरात नरसंहार तक ‘जनसत्ता’ में लिखे गए प्रभाष जोशी के सैकड़ों लेखों-स्तम्भों में से एक चयन है जिसके फ़ोकस में संघ परिवार के साम्प्रदायिक हिन्दुत्व के विपरीत हिन्दू होने का वह मर्म है जो हमारी वास्तविक परम्परा और समाज के मूल्यों को निर्मित करता आया है और महात्मा गांधी जिसके सबसे बड़े प्रतीक-व्यक्तित्व थे। साम्प्रदायिक तत्त्वों और छद्म राष्ट्रवाद के विभिन्न मुखोशों और दशाननों को उधेड़ती ये टिप्पणियाँ हमारे आसपास बनाए जा रहे एक बुरे या निकृष्ट हिन्दू से जिरह करती हुई उसकी जगह एक अच्छे, सच्चे और नैतिक हिन्दू को प्रतिष्ठित करती हैं और यह सिद्ध करती हैं कि हिन्दुत्व की संघ परिवारी परिभाषाएँ व्यापक हिन्दू समाज में पूरी तरह अमान्य हैं। आज़ादी की लड़ाई के समय से ही हमारे देश में ‘गांधी जीतेंगे या गोडसे’ की बहस चलती रही है और उसे भी इन लेखों में बहस का विषय बनाया गया है। ख़ास बात यह है कि प्रभाष जोशी अपना वैचारिक विमर्श और अलख हिन्दुत्व के ही मोर्चे पर चलाए और जगाए रहते हैं जिससे उनके तर्क और निष्कर्ष ज़्यादा विश्वसनीय और कारगर हो उठते हैं और इस काम में हमारा पारम्परिक लोक-विवेक और धर्म उनकी मदद करता चलता है।
ISBN: 9788126719365
Pages: 655
Avg Reading Time: 22 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: ‘हिंदू धर्म की धरोहरः भारतीय संस्कृति’ यह शीर्षक स्वयं में इस पुस्तक का समग्र परिचय करवा रहा है। सनातन हिंदू धर्म क्या है और किस प्रकार से यह भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि के रूप में निरंतर क्रियाशील है, यही तथ्य इस पुस्तक के आधार तत्व हैं। यज्ञ, हवन, शंख, पद्म, गाय, त्रिशूल, मंदिर, देवस्थान जैसे शब्द सनातन हिंदू वैदिक संस्कृति में ही हैं। ये केवल शब्द ही नहीं हैं बल्कि इन शब्दों के उच्चारण में ही ऐसा ध्वनित होता है कि जीवन और जीवन का रहस्य क्या है। हमारे देवी, देवता और धार्मिक प्रतीक क्या हैं? कैसे हैं? कितने महत्त्वपूर्ण हैं? क्यों हैं? स्वाभाविक है कि जिस प्रकार से समाज बदल रहा है और विश्व पटल पर अनेकानेक उपासना पद्धतियाँ जन्म ले रही हैं, ऐसे परिवेश में किसी को भी यदि हिंदू संस्कृति को जानना और समझना है तो संजय राय ‘शेरपुरिया’ की इस पुस्तक को अवश्य पढ़ना चाहिए। जिस विशिष्टता से इस पुस्तक में सनातन प्रतीकों को मोतियों की माला में पिरोया गया है, वह अद्भुत है। भारतीयता, संस्कृति और हिंदू विरासत को समझने के लिए इस पुस्तक में सभी प्रमुख तथ्य, तत्त्व और प्रतीक उपस्थित हैं। यह पुस्तक एक ऐसी कुंजिका है जो भावी पीढ़ी को अपने मूल से जोड़ने और हिंदू संस्कृति को समझने में सक्षम भूमिका का निर्वहन करेगी। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का वैशिष्ट्य और निरंतरता बताती पठनीय पुस्तक।
Shri Ramayana Mahanveshanam : Vols.1-2
- Author Name:
M. Veerappa Moily
- Book Type:

-
Description:
अतीत के दीपक से वर्तमान को प्रकाशित करने का प्रयत्न है ‘श्रीरामायण महान्वेषणम्’।
—नीरज जैन प्रतिष्ठित हिन्दी कवि, सतना (म.प्र.)
“I have no doubt that ‘Sri Ramayana Mahanveshanam’ will remain a milestone not only in the history of Kannada literature or Hindi literature, but in the history of Indian literature also. It is his distinct contribution to Ramayana literature.”
—Indira Goswami Professor, Modern Indian Languages & Literary Studies, Delhi University
‘‘मोइली जी को इतनी बड़ी साहित्यिक परियोजना पर सोचने के लिए, उसे पूरा करने के लिए, और भारतीय परम्परा में उसके उचित सन्निवेश के हेतु प्रयास करने के लिए बधाई देना चाहता हूँ...।
—डॉ. वागीश शुक्ल कवि, दार्शनिक, समालोचक तथा प्रोफ़ेसर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg
- Author Name:
Vishen Lakhiani
- Book Type:

- Description: Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg Hindi Translation of The Buddha and The Badass: The Secret Spiritual Art of Succeeding at Work. क्या आपने गौर किया है कि कैसे कुछ लोग नौकरी में कमाल के भाग्यशाली होते हैं! वे बड़ी आसानी से समाधान सुझा देते हैं। वे सही लोगों को आकर्षित करते हैं। लोग उनके अभियानों, कंपनियों, उनकी टीमों का हिस्सा बनना चाहते हैं। वे बड़े-बड़े काम मुसकराते हुए पूरा कर लेते हैं और वेतन में अच्छी वृद्धि के साथ ही प्रमोशन भी पा लेते हैं। ये सुपरस्टार कमाल की एकाग्रता और रचनात्मकता का प्रदर्शन कर खास दायरे का हिस्सा बन जाते हैं।यह पुस्तक बताती है कि उनके साथ कैसे जुड़ें। आप जहाँ भी हों, आप में अनोखी शक्तियाँ हैं। यह आधुनिक युग का भ्रम है कि कठिन परिश्रम और संघर्ष से ही सफलता मिलती है। आपके भीतर एक आत्मा है और एक बार आपने काम के क्षेत्र में इसकी पूरी शक्ति का प्रयोग किया, तो बस कमाल हो जाता है। अपने भीतर के बुद्ध और निर्भीक योद्धा को जगाना एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आपके काम करने के तरीके को बदलकर रख देगी। आप उन तरीकों को जान लेंगे, जो वास्तविकता के हर नियम को आपके पक्ष में ला देंगे।
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