CHAITANYA MAHAPRABHU
Author:
Rachna Bhola YaminiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 280
₹
350
Available
चैतन्य महाप्रभु का बचपन का नाम विश्वंभर था। उनका जन्म चंद्रग्रहण के दिन हुआ था। लोग चंद्रग्रहण के शाप के निवारणार्थ धर्म-कर्म, मंत्र आह्वान, ओ३म् आदि जप-तप में जुटे हुए थे। शायद इस धार्मिक प्रभाव के कारण ही चैतन्य बचपन से ही कृष्ण-प्रेम और जप-तप में जुट गए। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि यह बालक उच्च कोटि का संत बनेगा और अपने भक्तों को संसार-सागर से तार देगा।
बचपन से ही चैतन्य कुशाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने अपने अकाट्य तर्कों से स्थानीय पंडितों को दर्शन और अध्यात्म चर्चा में धराशायी कर दिया था। बाद में वैष्णव दीक्षा लेने के पश्चात् चैतन्य दार्शनिक चर्चा के प्रति उदासीन हो गए। उन्होंने कृष्ण नाम-कीर्तन आरंभ कर दिया। चैतन्य ने कलियुग में भक्तियोग को मुक्ति का श्रेष्ठ मार्ग बताया है।
उनकी लोकप्रियता से खिन्न होकर एक बार एक पंडित ने उन्हें शाप देते हुए कहा, ‘तुम सारी भौतिक सुविधाओं से वंचित हो जाओ।’ यह सुनकर चैतन्य खुशी से नाचने लगे। माता-पिता ने उन्हें घर-गृहस्थी की ओर मोड़ने के लिए उनका विवाह भी कर दिया, लेकिन उन्होंने गृह त्याग दिया, अब सारी दुनिया ही उनका घर थी।
भगवान् कृष्ण के अनन्य उपासक, आध्यात्मिक ज्ञान की चरम स्थिति को प्राप्त हुए चैतन्य प्रभु की ईश्वर-भक्ति की सरस जीवन-गाथा जो पाठक को भक्ति की पुण्यसलिला में सराबोर कर देगी।
ISBN: 9789351864851
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Ashok Kumar Sharma
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- Description: आत्मा य : केवलः स्वस्थः शान्तः सूक्ष्मः सनातनः। अस्ति सर्वान्तरः साक्षाच्चिन्मात्रस्तमसः पर:॥ यह आत्मा केवल स्वस्थ, शान्त, सूक्ष्म, सनातन, सभी में विद्यमान परमात्मा के गुणों समान अर्थात् विकारहीन चेतना के रूप में, परमात्मा का प्रतीक अंश ही है और अज्ञान अर्थात् बुरी प्रवृत्तियों से परे है।
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