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Desh

In category

Poetry

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Hindi

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‘देश’ को उत्तर–आधुनिक महाकाव्य माना गया है। बल्कि इसे सिर्फ़ एक संरचना ही कहा जाए तो कवि को कोई आपत्ति नहीं होगी, यदि इसकी वास्तुकला में पाठक मेद, खनिज और काष्ठ के प्रयोग को पहचान ले। इस विलक्षण संरचना में बहुमुखी कल्पना का प्रयोग है, यथार्थ की एक मुख्य धारा इसमें कल्पना का स्रोत बनकर प्रवाहित होती है। किसी स्थिर बिन्दु से देश को देखने का तरीक़ा इसमें अद्भुत रूप से बदलता है। इस बदलाव में एक तीव्र और जादुई शक्ति है जो कविताओं को एकात्मकता प्रदान करती है, हालाँकि यह संरचना किसी पूर्व–निर्धारित काव्यवस्तु को प्रतिष्ठित नहीं करना चाहती। देश की कविताओं में अनेक आरम्भ हैं और अनेक अन्त, परन्तु यह सब किसी एक निर्दिष्ट समाप्ति की ओर अग्रसर नहीं होता, बल्कि एक व्यापक असमाप्ति का निर्माण करता है। इसका उत्तर–आधुनिक रूप इसी असमाप्त निर्मिति से बनता है। ‘देश’ भूखंड है, भाग्य है, निवास है, निर्वासन है, यहाँ तक कि ‘देश’ देशान्तर है और देशोत्तर भी। विविधता के बीच अस्तित्व की यह खोज वस्तुपरकता के परे शुद्ध कविता के अन्त:करण को प्रस्तुत करती है। समकालीन भारतीय साहित्य में इस कृति को अपनी कलात्मकता की लय, लोक–चेतना की मिथकीय पुन:प्रतिष्ठा और मार्मिक अस्तित्वबोध के लिए पहचाना जाएगा।

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‘देश’ को उत्तर–आधुनिक महाकाव्य माना गया है। बल्कि इसे सिर्फ़ एक संरचना ही कहा जाए तो कवि को कोई आपत्ति नहीं होगी, यदि इसकी वास्तुकला में पाठक मेद, खनिज और काष्ठ के प्रयोग को पहचान ले। इस विलक्षण संरचना में बहुमुखी कल्पना का प्रयोग है, यथार्थ की एक मुख्य धारा इसमें कल्पना का स्रोत बनकर प्रवाहित होती है। किसी स्थिर बिन्दु से देश को देखने का तरीक़ा इसमें अद्भुत रूप से बदलता है। इस बदलाव में एक तीव्र और जादुई शक्ति है जो कविताओं को एकात्मकता प्रदान करती है, हालाँकि यह संरचना किसी पूर्व–निर्धारित काव्यवस्तु को प्रतिष्ठित नहीं करना चाहती।

देश की कविताओं में अनेक आरम्भ हैं और अनेक अन्त, परन्तु यह सब किसी एक निर्दिष्ट समाप्ति की ओर अग्रसर नहीं होता, बल्कि एक व्यापक असमाप्ति का निर्माण करता है। इसका उत्तर–आधुनिक रूप इसी असमाप्त निर्मिति से बनता है।
‘देश’ भूखंड है, भाग्य है, निवास है, निर्वासन है, यहाँ तक कि ‘देश’ देशान्तर है और देशोत्तर भी। विविधता के बीच अस्तित्व की यह खोज वस्तुपरकता के परे शुद्ध कविता के अन्त:करण को प्रस्तुत करती है। समकालीन भारतीय साहित्य में इस कृति को अपनी कलात्मकता की लय, लोक–चेतना की मिथकीय पुन:प्रतिष्ठा और मार्मिक अस्तित्वबोध के लिए पहचाना जाएगा।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2001
Weight
430 grams
ISBN-13
9788126703067
Pages
256
Reading time
~9 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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