The Nightingale His Poems and Paintings of Dawn
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Joyous music surrounds the tree of life and envelops its inhabitants in pure bliss, yet a single nightingale perch on a branch, as it looks at the souls it has to comfort, down below, below the joyous canopy of the tree of life, into the deep dark depths, 28 souls 28 mysteries 28 stations of life, all of which will resonate within us, no matter where we are on the tree of life.
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Joyous music surrounds the tree of life and envelops its inhabitants in pure bliss, yet a single nightingale perch on a branch, as it looks at the souls it has to comfort, down below, below the joyous canopy of the tree of life, into the deep dark depths, 28 souls 28 mysteries 28 stations of life, all of which will resonate within us, no matter where we are on the tree of life.
Book Details
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ISBNN/A
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PagesN/A
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Avg Reading Time3 hrs
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Age11-18 yrs
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Country of OriginLebanon
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- Description: उर्दू के सुविख्यात शायर इब्ने इंशा की प्रतिनिधि ग़ज़लों और नज़्मों की यह पुस्तक हिन्दी पाठकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के समान है। हिन्दी में वे कबीर और निराला तथा उर्दू में मीर और नज़ीर की परम्परा को विकसित करनेवाले शायर हैं। जीवन का दर्शन और जीवन का राग उनकी रचनाओं को बिलकुल नया सौन्दर्य प्रदान करता है। उर्दू शायरी के प्रचलित विन्यास को उनकी शायरी ने बड़ी हद तक हाशिए में डाल दिया है। अब्दुल बिस्मिल्लाह के शब्दों में कहें तो इंशाजी उर्दू कविता के पूरे जोगी हैं। हालाँकि रूप-सरूप, जोग-बिजोग, बिरहन, परदेशी और माया आदि का काव्य-बोध इंशा को कैसे प्राप्त हुआ, यह कहना कठिन है, फिर भी यह असन्दिग्ध है कि उर्दू शायरी की केन्द्रीय अभिरुचि से यह अलग है या कहें कि यह उनका निजी तख़य्युल है। दरअस्ल भाषा की सांस्कृतिक और रूपगत संकीर्णता से ऊपर उठकर शायरी करनेवालों की जो पीढ़ी 20वीं सदी में पाकिस्तानी उर्दू शायरी में तेज़ी से उभरी थी, उसकी बुनियाद में इंशा सरीखे शायर की ख़ास भूमिका थी।
Nivedita
- Author Name:
Sheodam Singh Bhadoriya ‘Shiv’
- Book Type:

- Description: ‘निवेदिता’ डॉ. शिवदान सिंह भदौरिया ‘शिव’ का वाग्देवी को निवेदित कविता-संग्रह है। डॉ. शिव की कविताओं का विचारजगत व्यापक है, उसमें अगर एक तरफ़ देश और दुनिया की विविध समकालीन समस्याएँ हैं तो दूसरी तरफ़ मानव जीवन के विविध पहलुओं को छूनेवाले सार्वकालिक प्रश्न भी हैं। कविताओं के इस छोटे से संग्रह में अपने दिक्काल के बाहर और भीतर, पास और दूर को, उसके जीवनस्रोतों को एक साथ देखने और परखने की सफल कोशिश हुई है। अभी-अभी जन्मे विचार चूजों से लेकर झकझोरकर अशान्त कर देनेवाले साम्प्रदायिक धर्मोन्माद के सुनामी और उसके महाविनाश तक, काव्य दर्पण सम्मुख अपना कलेजा खोलकर उसे हू-ब-हू देखने से लेकर तर्क की कुल्हाड़ी से वाक्यों की डालियाँ गिराकर, फिर विवेक-रन्दा चलाकर गोल शहतीरों से महल बनाने तक, अनगिनत राहगीरों के पैरों की मार खानेवाले धूलकण से लेकर अपने तन की मिट्टी में न जाने कितने कुदालों की मार सह लहलहाती फ़सलें उगानेवाली औरत तक इन कविताओं का प्रसार है। कवि के वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अन्तःकरण तक झाँककर देखने की प्रवृत्ति और प्रश्नात्मक स्वभाव के चलते कविताओं में न केवल मौलिकता है, बल्कि उन्हें सर्वथा नवीन व्यक्तित्व मिला है। माँ कहकर रो पड़ती नवजात रचना, आकाश में बिखरे तारों के अन्दर से विद्युत चुम्बकीय तरंग बन बाहर निकलने की इच्छुक किरणें, अर्थ की खोज में घर की पौड़ी लाँघकर अनन्त की ओर निकलते शब्द, डायरेक्ट साहब मि. सूरज के आने का वक़्त होते ही महुए-सी झरकर बिछ गई रिसेप्शनिस्ट सुबह, जोंक की तरह चिपटती दवा की सिरिंज, हिन्दी कविता को नयापन देते कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं। ‘निवेदिता’ की कविताएँ कथ्य की तरह शिल्पगत विविधता के लिए भी उल्लेखनीय हैं। कविताएँ न केवल अपने आकार-प्रकार और प्रयोगशील शैली से बल्कि क्रियात्मक, चित्रात्मक और जीवन्त भाषा से भी हिन्दी कविता को धनी बनाती हैं।
Sukanya
- Author Name:
Ramawatar Shashi
- Book Type:

- Description: Poems
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