Seven Leaves One Autumn
Author:
Sukrita Paul KumarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 156
₹
195
Available
Awating description for this book
ISBN: 9788126721108
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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यह संस्करण उसी परिमार्जित एवं शुद्धतम पाठ की प्रस्तुति है जिसका आरम्भ उनकी एक सुदीर्घ भूमिका से होता है। इस भूमिका में प्रो. अग्रवाल ने पाठ-परिमार्जन की इस पूरी श्रम-साध्य प्रक्रिया पर तो प्रकाश डाला ही है, कबीर पर अपने अब तक के अध्ययन से प्राप्त अद्यतन धारणाओं को भी सूत्र रूप में दे दिया है।
पाठकों को ज्ञात ही है कि ‘अकथ कहानी प्रेम की : कबीर की कविता और उनका समय’ (2009) में उन्होंने कबीर के बहाने उस मध्यकाल में भारत की आधुनिकता की पहचान की थी, जो औपनिवेशिक आधुनिकता से पहले ही भारत के लोकवृत्त में प्रकट हो चुकी थी।
‘कबीर-ग्रंथावली’ की इस प्रस्तुति में वे न सिर्फ़ कबीर की वाणी को शुद्धतम रूप में हमें दे रहे हैं, बल्कि कबीर-अध्ययन के इतिहास की गुत्थियों को सुलझाते हुए उन्हें ठीक से पढ़ने-जानने की समझ भी हमें प्रदान कर रहे हैं।
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Hasya Vyang Ki Shikhar Kavitaye
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हिन्दी में हास्य-व्यंग्य कविताओं का उदय मुख्यतः स्वतंत्रता के बाद हुआ। बेढब बनारसी, रमई काका, गोपालप्रसाद व्यास और काका हाथरसी आदि कवियों ने हिन्दी की ज़मीन में हास्य-व्यंग्य कविताओं के बीज बोए। कालान्तर में, ख़ासकर सन् 1970 के बाद, ये बीज भरपूर फ़सल बने और लहलहाए। जीवन में बढ़ते तनाव ने हास्य-व्यंग्य को कवि सम्मेलनों के केन्द्र में स्थापित कर दिया। इसने लोकप्रियता के शिखर छुए। देश में ही नहीं, विदेश में भी। हिन्दीभाषियों में ही नहीं, अहिन्दीभाषियों में भी।
इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में कुछ कविताओं की भूमिका विशेष रही। इस पुस्तक में वही कविताएँ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इस दृष्टि से कि कोई एक संकलन ऐसा हो, जो हिन्दी की सर्वाधिक सराही गई हास्य-व्यंग्य कविताओं का प्रतिनिधित्व सचमुच कर सके। इस दृष्टि से भी कि हिन्दी की महत्त्वपूर्ण हास्य-व्यंग्य कविताओं के समुचित मूल्यांकन के लिए आधार-सामग्री एक जगह उपलब्ध हो सके।
उम्मीद है कि प्रस्तुत प्रयास आज़ादी के बाद की हास्य-व्यंग्य प्रधान कविताओं और उनमें व्यक्त देश-काल की विडम्बनाओं-विद्रूपताओं को रेखांकित करने की भूमिका अदा करेगा; और कविता-संवेदना की इस धारा की क्षमताओं को सामने लाने में भी सफल होगा।
Pratinidhi Kavitayein: Navin Sagar
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Navin Sagar
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- Description: नवीन सागर की कविताओं को पढ़ते हुए आप हिन्दी कविता की दुनिया में अपनी मौजूदा रिहायश से उठकर कहीं और जाने के लिए चल पड़ते हैं—एक ज़्यादा गहरी, ज़्यादा परतदार, ज़्यादा नाज़ुक और ज़्यादा ठोस जगह की तरफ़। वह जगह जहाँ आपको अपने न समझ में आनेवाले लेकिन मारक दुख की सहज, स्पष्ट और चित्र जैसी अभिव्यक्ति मिलती है। हमारी भाषा ने कम ही ऐसी कविताएँ पाई हैं, जैसी ये सारी हैं। नवीन सागर की कविता-पुस्तकें लम्बे समय से अनुपलब्ध हैं। हालाँकि इस बीच उनकी कविताओं की तरफ़, ख़ासतौर पर नई पीढ़ी का ध्यान उल्लेखनीय ढंग से गया है। ऐसे में उनके देहान्त के लगभग पच्चीस वर्ष बाद उनकी कविताओं से यह प्रतिनिधि चयन प्रकाशित हो रहा है। उम्मीद है कि यह पुस्तक लगभग भूले हुए, लेकिन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एक कवि को विचार के केन्द्र में लाएगी।
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