Parti Parikatha
Author:
Phanishwarnath RenuPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 399.2
₹
499
Available
इस उपन्यास को पढ़ते हुए प्रत्येक संवेदनशील पाठक स्पन्दनीय ज़िन्दगी के सप्राण पन्नों को उलटता हुआ-सा अनुभव करेगा। सहृदयता के सहज-संचित कोष के रस से सराबोर प्रत्येक शब्द, हर गीत की आधी-पूरी कड़ी ने मानव-मन के अन्तरतम को प्रत्यक्ष और सजीव कर दिया है। दो पीढ़ियों के जीवन के विस्तृत चित्रपट पर अनगिनत महीन और लयपूर्ण रेखाओं की सहायता से चतुर कथाशिल्पी ने एक अमित कथाचित्र का प्रणयन किया है। इस महाकाव्यात्मक उपन्यास को पढ़कर समाप्त करने तक पाठक अनेक चरित्रों, घटना-प्रसंगों, संवादों और वर्णन-शैली के चमत्कारों से इतना सामीप्य अनुभव करने लगेंगे कि उनसे बिछुड़ना एक बार उनके हृदय में अवश्य कसक पैदा करके रहेगा।
ISBN: 9788126716999
Pages: 379
Avg Reading Time: 13 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Sapno Ke Swaroop
- Author Name:
Manas Ojha
- Book Type:

- Description: Sapno Ke Swaroop
Gandi Baat
- Author Name:
Kshitiz Roy
- Book Type:

-
Description:
एक लड़का था—कुछ लोफर, लफुआ, दीवाना-सा! जिसका दिल था नए रैपर में वही पुराना—शहीदाना। शहर पटना पूरा अपना लगे उसे!
लड़की थी अलबेली-सी, सोचने का कारख़ाना, हिम्मत की एनीटाइम लोडेड गन जैसी, पुरानी जीन्स और एकदम नया गाना!
दिल्ली शहर में मौसम था अन्ना आन्दोलन का,
चुनाव के घुमड़ रहे थे बादल।
डेजी आई पढ़ने एलएसआर में। बन गई ड्रमर।
गोल्डन आया डेजी के पीछे बावला। बन गया ड्राइवर।
दोनों थे ख़ालिस ग़ैर-राजनीतिक युवा।
पढ़िए उन्हीं के घोर राजनीतिक रोमांस की दिलचस्प दास्ताँ, जिसमें उनकी निजता में शहर, समाज और परिस्थितियाँ दे रही हैं बराबरी से दख़ल...जहाँ कुछ भी नहीं है निश्चित और अनिश्चित ही है उनका
सबसे बड़ा रोमांस...
जिसे कहते हैं सब गंदी बात,
क्या होती है वाक़ई वह
गंदी-सी कोई बात!
Aakhiri Kalaam
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

-
Description:
यह कथा-कृति उपन्यास की सारी सीमाओं और लालचों को उलट-पुलट देती है। चरित्रों के टकराव से कथा का विकास—यह जो उपन्यास-लेखन की आदत बन चुकी है, यहाँ इस आदत से लगभग इनकार है। फिर भी यह कथा-कृति एक उपन्यास ही है। इसमें गद्य और वृत्तान्त का एक अजब संयोजन है, जहाँ से ढाँचागत वर्जनाएँ समाप्त होती हैं और कथा का विस्तार और खुलापन बातों और विचारों को आमंत्रित करते-से लगते हैं। गद्य और गल्प का एक नया रसायन तैयार होता है जो अपने रस और सुर से अद्भुत पठनीयता पैदा करता है। इस तरह यह उपन्यास गल्प की एक नई, अबाध निरन्तरता का प्रमाण है।
इस उपन्यास में मिथकीय संस्कृति के विश्लेषण की एक पवित्र और निहत्थी छटपटाहट है। मिथक को इतिहास में बदलने की कोशिशों का पर्दाफाश है; विचार, संरचना और संस्कृति पर एकल बहसों का निर्वेद है। इसी के भीतर कहानी के तार बिखरे पड़े हैं। इन्हीं तकलीफ़ों के भीतर से इतिहास के उन सूत्रों को ढूँढ़ने का प्रयत्न है, जो एक मिले-जुले समाज की बुनियाद हैं और जिनको उलट-पुलट देने की बर्बर आहटें इधर चौतरफ़ा सुनाई दे रही हैं। इसी तरह यह उपन्यास अपने समय के संसार की एक चित्र-रचना बनता है। अपने अतीत, इतिहास, मिथक और साहित्य-संस्कृति को उकेरता-उधेड़ता हुआ उसकी एक विस्फोटक और स्तब्धकारी पुनर्रचना सामने रखता है। उन बातों, अर्थों और व्याख्याओं को सामने लाता है, जो उसी में छुपी थीं लेकिन लोग और समाज, संस्कृति और विचार के धनुर्धर उसकी ओर से अक्सर आखें मूँदे रहते हैं।
अन्तत: यह उपन्यास हमारे अतीत और वर्तमान की एक नई ‘पोलेमिक्स' है। इंसाफ़ की इच्छा का एक दुखद-द्वंद्वात्मक संवाद है, जो अपने लोगों और अपनी जनता को ही सम्बोधित है।
Nacohus
- Author Name:
Purushottam Agarwal
- Book Type:

-
Description:
एक दशक पहले, आहत भावनाओं की हिंसक राजनीति के बढ़ते संकट पर टिप्पणी करते हुए, पुरुषोत्तम अग्रवाल ने एक व्यंग्य-लेख में, प्रस्ताव किया था, ‘आहट भावना आयोग का गठन’ कर ही दिया जाए...
अब यह उपन्यास...ज़बान पर लगते जा रहे नित नए तालों की डरावनी ख़बर की पड़ताल करने के साथ ही, सूचना और मनोरंजन के सब तरफ़ पसरते जंजाल में, तकनीकी आतंक तले चेतना के हाशिए पर धकेले जा रहे विवेक की चीत्कार को स्वर देता है यह उपन्यास...
पुरुषोत्तम अग्रवाल का पहला उपन्यास ‘नाकोहस’ नई-नई गढ़ी जा रही वास्तविकता की पड़ताल के लिए गढ़े गए ‘बौनैसर’ और ऐसे अनेक विचारोत्तेजक शब्दों के कारण भी ध्यान खींचता है...
स्वयं ‘नाकोहस’ भी ऐसा ही एक शब्द है...
Samudra Ki Gahari Hari Aatma
- Author Name:
Aacharya Jankivallabh Shastri
- Book Type:

- Description: "कथा साहित्य के अंतर्गत कानन, अपर्णा, लीला कमल, बाँसों का झुरमुट तथा नाट्य-साहित्य के अंतर्गत अशोक वन, सत्यकाम, जिंदगी, आदमी, प्रतिध्वनि, देवी, नील झील आदि कृतियाँ जानकीवल्लभ शास्त्री के रचनाकार के उस प्रबुद्ध-सिद्ध गद्यकार पक्ष को उजागर करती है, जो अनेक कवियों के लिए एक कसौटी है। शास्त्रीजी का संस्मरण-साहित्य हिंदी साहित्य की वह अमूल्य निधि है, जिसके बीच से नहीं गुजरना एक सहज-सरल सारगर्भित भाव-निधि से वंचित रह जाना है। स्मृति के वातायन, निराला के पत्र, नाट्य-सम्राट् श्री पृथ्वीराज कपूर, हंसबलाका, कमर्क्षेत्रे: मरुक्षेत्रे, एक असाहित्यिक की डायरी और अष्टपदी आदि संस्मरण-साहित्य शास्त्रीजी का वैयक्तिक राग नहीं, जीवन का विराट् संदर्भ तथा चिंतन-मनन का संवेदनात्मक वह आरोह-अवरोह है, जिसमें पाठक स्वयं को आंतरिक और बाह्य रूपों में देख-समझ और जान सकता है। वैयक्तिक संदर्भों तथा अनुभूतियों को भी शास्त्रीजी ने जिस कुशलता से साहित्य बना दिया है, यह उनके चिंतनशील, मननशील एवं संवेदनशील सर्जक व्यक्तित्व की अन्यतम उपलब्धि है। आचार्य जानकीवल्लभ शास्त्री एक सजग, अनुरागी, पारदर्शी और सूक्ष्मदर्शी विश्लेषक-आलोचक भी हैं। इनके समीक्षा-साहित्य रचनात्मक, क्रियाशील और मूल्यांकनपरक विद्वान् आचार्य का साक्षात्कार कराता है। वैसे इनकी आलोचना महज आलोचना नहीं, रचनात्मक-आलोचना है। "
Raat Ke Gyarah Baje
- Author Name:
Rajesh Maheshwari
- Book Type:

-
Description:
‘रात के ग्यारह बजे’ नारी के विविध रूपों को काले और सफ़ेद खानों में रखकर देखने के बजाय ‘ग्रे एरिया’ में अलग-अलग शेड्स दिखाता है। बहुत ही विश्वसनीय प्रसंगों के ताने-बाने में। राजेश माहेश्वरी के इस उपन्यास की स्त्रियाँ शिक्षित हैं और आत्मविश्वास से भरी हुई हैं। कठिनाइयों के अथाह दुर्गम को पार कर वे अस्तित्व के संघर्ष में निरन्तर आगे बढ़ती हुई नज़र आती हैं।
उपन्यास के किरदार मानसी, राकेश, आनन्द, गौरव और पल्लवी के बीच रिश्तों की परतें बहुत उलझी हुई हैं। ये सभी किरदार ज़िन्दगी की गाड़ी में सवार सहयात्री से लगते हैं जिनके जीवन की घटनाएँ कहीं न कहीं हमारे अपने जीवन की सच्चाई से हमें अवगत कराते हुए प्रतीत होते हैं। 'विश्वास’ का वास्तविक अर्थ हम तब समझ पाते हैं जब हमारे साथ विश्वासघात होता है। और तभी पता चलता है कि विश्वास का धागा जितना सच्चा होता है, उतना ही कच्चा भी होता है। लेखक ने इस अनुभव को बहुत कारगर ढंग से चित्रित किया है।
इस उपन्यास को पढ़ते हुए एक बात अलग से ध्यान खींचती है कि स्त्री-स्वतंत्रता और स्वावलम्बन के समर्थक पुरुष उनके हित में चाहे जो करते हों, लेकिन उनके हँसी-मज़ाक़ में भी उसी तरह की बातें होती हैं जो किसी सामान्य पुरुष के। उपन्यास की भाषा कथा-प्रवाह को गतिशील बनाए रखनेवाली है तथा कथानक की बुनावट ऐसी कि लगे, जैसे कोई फ़िल्म देख रहे हों!
आज के दौर में स्त्री और पुरुष के बीच के रिश्तों को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास।
Krishnavtar : Vol. 6 : Mahamuni Vayas
- Author Name:
K. M. Munshi
- Book Type:

-
Description:
कृष्ण-चरित्र के अछूते-मार्मिक प्रसंगों को उद्घाटित करनेवाली वृहद् औपन्यासिक कृति ‘कृष्णावतार’ का यह छठा खंड है। लेखक के अनुसार, छठे खंड में निबद्ध होकर भी यह कथा इस समूची ग्रन्थमाला की प्रस्तावना के समान है। अतः इस खंड की महत्ता स्वयंसिद्ध है।
देश-काल की दृष्टि से यह वह समय है जब आर्यावर्त्त में वर्ण-व्यवस्था जन्म ले रही थी। ऐसे में मूल महाभारत के रचयिता, तीर्थ-संस्कृति के जनक और ‘श्रुति’ को प्रामाणिक रूप से लिपिबद्ध करनेवाले कृष्ण द्वैपायन व्यास अपने जीवन-काल में ही एक महान धर्म-निर्माता, महामुनि, यहाँ तक कि भगवान वेदव्यास के नाम से प्रसिद्ध हो गए थे। लेकिन एक मछुआरे की कन्या के गर्भ से पैदा होकर इस महान गौरव तक वे किस प्रकार पहुँचे, इसका उल्लेख कहीं नहीं मिलता। यह उपन्यास इसी अभाव की सुन्दरतम पूर्ति है। किशोर और युवा व्यास को इस कृति में हम अकल्पनीय रूप से सक्रिय देखते हैं, जिसे तत्कालीन समाज के जटिलतम संघर्षों और उसके अपने दु:खों ने एक नया व्यक्तित्व प्रदान किया है। इसके अतिरिक्त इस उपन्यास में कितनी ही ऐसी घटनाएँ और चरित्र हैं, जो हमें मुग्ध और सम्मोहित कर लेते हैं।
Ahasas-E-Ishtiyara
- Author Name:
Tanuj Kumar
- Book Type:

- Description: इस काव्य-संकलन के माध्यम से रचनाकार तनुज कुमार ने जीवन के भिन्न-भिन्न आयामों को शायरी, गजलों एवं कविताओं द्वारा अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। रचनाकार ने अहसासों एवं हालातों को कलम के जरिए मूर्त रूप दिया है, ताकि इसे पढक़र आम जनमानस अपने अंदर छिपी हुई भावनाओं को स्वत: अनुभव कर सके। रचनाकार ने भाषाई सीमाओं को लाँघते हुए हिंदी, उर्दू, अरबी, फारसी एवं अंग्रेजी के शब्दों का न्यायोचित उपयोग करते हुए अपनी रचनाओं को प्रभावशाली एवं दिल को छूने वाली बनाया है। इस कविता-संग्रह के माध्यम से रचनाकार ने अपने निजी अनुभवों को सर्वमान्य बनाने का प्रयास किया है। पुस्तक ‘अहसास-ए-इश्तियारा’—जैसा नाम से विदित है—में रचनाकार ने इनसानी अहसासों को रूपक के माध्यम से रेखांकित किया है, जिसमें जीवन के कटु अनुभवों, सामाजिक व्यवस्थाओं एवं प्रेमानुकूल भावनाओं का यथासंभव चित्रण किया है। इस पुस्तक की कई रचनाएँ एक तरफ जहाँ हमें भाव-विभोर करती हैं, वहीं दूसरी तरफ आत्मचिंतन को भी विवश कर देती हैं। सुधी पाठकगण जब लेखक की रचनाओं का पठन करेंगे तो निश्चित तौर पर कोई अपने बिछड़े प्रेम को याद करेगा तो कोई अपने साथ हुए अन्याय को याद करेगा तो किसी के अंदर नई ऊर्जा का प्रादुर्भाव होगा।
Damsel in Distress
- Author Name:
ChhavZee
- Book Type:

- Description: Poetry Book
The Gift
- Author Name:
Ruchi Prabhu
- Rating:
- Book Type:

- Description: Don’t read this book. Do NOT read this book Go watch YouTube videos Go watch series on Netflix Go listen to some songs on Ganna.com But, Just put the book down quietly and walk away… WARNING! In this book I have had my share of experiencing romance, hatred, longing and drops the most. An individual observes a bunch to pick up nuisance of personalities and relationship dynamics of those around him/her. This book contains my way of expressing through haiku or Epigrams which evoke my personal feelings dealing with a good ending and sometimes with the ray of no hope in a scalding weather.
Aatmadan
- Author Name:
Narendra Kohli
- Book Type:

-
Description:
‘आत्मदान’ सुप्रसिद्ध उपन्यासकार नरेन्द्र कोहली का ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित उपन्यास है। कथानायक राज्यवर्द्धन स्थाणीश्वर का राजकुमार है जो अपनी भावप्रवण संवेदनशीलता के कारण न तो युद्ध को सही मानता है और न ही राज्य के विस्तार में उसकी रुचि है। मगर पिता की निरन्तर प्रेरणा और प्रजा की रक्षा के लिए वह हूणों के संहार के लिए युद्धक्षेत्र की तरफ़ प्रयाण करता है और दो वर्षों तक निरन्तर अत्याचारी हूण शासकों का संहार करता है। तभी अचानक उसे पिता के निधन और माता के सती होने का शोक समाचार मिलता है। इस दुखद घटनाक्रम से वह काफ़ी व्यथित हो जाता है और उसे विरक्ति हो जाती है। वह संन्यास लेना चाहता है तथा राज्य व प्रजा का भार अपने अनुज हर्ष पर सौंप देना चाहता है। उसी समय उसे मालवा शासक देवगुप्त द्वारा उसके बहनोई की हत्या और बहन की पीड़ा का दुखद संवाद मिलता है। क्रोध के मारे वह संन्यास का विचार छोड़ देवगुप्त को मज़ा चखाने और अपनी बंदिनी बहन को आततायियों से मुक्त कराने निकल पड़ता है।
उपन्यासकार ने इस पूरे घटनाक्रम को इतनी जीवन्तता से चित्रित किया है कि पढ़ते हुए सब कुछ अपनी आँखों के सामने घटित होते देखने का आभास होता है।
संवेदनशील भाषा और प्रवाहपूर्ण शिल्प के कारण यह उपन्यास बेहद पठनीय है और एक नैतिक आख्यान से पाठकों को रू-ब-रू कराता है।
Samar Gatha
- Author Name:
Howard Fast
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nirlep Narayan
- Author Name:
Rajendra Ratnesh
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास श्रावक उमरावमल ढढ्ढा की जीवनी पर आधारित है।
श्री ढढ्ढा का जीवन सीधा, सादा और सरल था। रायबहादुर सेठ के पौत्र और एक बड़ी हवेली के मालिक होकर भी उन्होंने आमजन का जीवन जिया। पुरखों द्वारा छोड़ी गई करोड़ों की सम्पत्ति अपने भोग-विलास पर ख़र्च नहीं करके दान कर दी। उनके पुरखे अंग्रेज़ों के बैंकर थे। उनका व्यवसाय इन्दौर, हैदराबाद तक फैला था। महारानी अहल्याबाई के राखीबंद भाई उनके पुरखे थे। उन्होंने पुरखों की सम्पत्ति को छुए बिना नौकरी करके अपना जीवन-यापन किया। श्री ढढ्ढा वस्तुत: एक अकिंचन अमीर थे। वे सचमुच ही निर्लेप नारायण थे।उमरावमल ढढ्ढा मानते थे कि मैं सबसे पहले इनसान हूँ, बाद में हिन्दुस्तानी। उसके बाद जैन। जैन के बाद श्वेताम्बर। स्थानकवासी परम्परा का श्रावक। वे सम्यक् अर्थों में महावीर मार्ग के अनुगामी और अनुरागी थे।
वे हमेशा अपनी बात अनेकान्त की भाषा में कहते थे। अनेकान्त को समझाने का उनका फ़ार्मूला बड़ा सीधा था। वे कहते थे कि 'ही' और ‘भी' में ही अनेकान्त का सिद्धान्त छिपा है। मेरा मत ‘ही’ सच्चा है, यह एकान्तवाद है जबकि अनेकान्त कहता है कि मेरा मत ‘भी’ सच्चा है और आपका मत ‘भी’ सच्चा हो सकता है।
उन्होंने पुरखों के छोड़े करोड़ों रुपयों के धन को छुआ ही नहीं। वकालत, वृत्तिका और व्यवसाय—इन सब में उन्हें वांछित सफलता नहीं मिली। वकालत इसलिए छोड़ दी कि झूठ की रोटी वे नहीं खा सकते थे। वृत्तिका भी गिरते स्वास्थ्य की वजह से लम्बी नहीं चली। व्यवसाय में घाटे पर घाटे लगे। जो कुछ पास में बचा, वह दान-पुण्य में लुटा दिया।
उन्होंने अमीरी को छोड़ ग़रीबी को अपनाया। जब भी कोई ढढ्ढा हवेली की भव्यता को देखता तो उसकी आँखें आश्चर्य से फटी की फटी रह जातीं कि इतनी बड़ी हवेली का स्वामी एक सीधी-सादी ज़िन्दगी जी रहा है।
Ek Break Ke Baad
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

-
Description:
उम्र के जिस मुक़ाम पर लोग रिटायर होकर चुक जाते हैं, के.वी. शंकर अय्यर के पास नौकरियाँ चक्कर लगा रही हैं। के.वी. मानते हैं कि इंडिया के इकोनॉमिक ‘बूम’ में देश की एक अरब जनता के पास ख़ुशहाली के सपने हैं। दुनिया का शासन अब सरकारों के हाथ नहीं, कॉरपोरेट कम्पनियों के हाथों में है।
मल्टीनेशनल कम्पनी का एक्जीक्यूटिव गुरुचरण राय के.वी. की बातों को बिना काटे सुनता रहता है। वह बीच-बीच में पहाड़ों पर क्या करने जाता है, इसकी कोई भनक के.वी. को नहीं है। अन्ततः वह कम्पनी के काम से मध्य प्रदेश के किसी सुदूर प्रान्त में जाकर लापता हो जाता है। एक ब्रेक के बाद, जिसमें वह एक आई-गई ख़बर हो गया है, के.वी. को मिलती हैं उसकी डायरियाँ, जिसमें लिखी बातों का कोई तुक उन्हें नज़र नहीं आता।
उपन्यास के तीसरे पात्र भट्ट की नियति एक नौकरी से दूसरी नौकरी तक शहर-शहर भटकने की है। कॉरपोरेट दुनिया के थपेड़े खाते-खाते वह बीच में गुरुचरण उर्फ़ गुरु के साथ पहाड़-पहाड़ घूमता है। स्त्रियों के साथ सम्बन्धों में गुरु क्या खोजता है या उसका क्या सपना
है, यह जाने बग़ैर गुरु के साथ भट्ट यायावरी करता जीवन के कई सत्यों से टकराता रहता है।अलका सरावगी का यह नया उपन्यास कॉरपोरेट इंडिया की तमाम मान्यताओं, विडम्बनाओं और धोखों से गुज़रता है। इस दुनिया के बाज़ू में कहीं वह पुराना ‘पोंगापंथी’ और पिछड़ा भारत है, जहाँ तीस करोड़ लोग सड़क के कुत्तों जैसी ज़िन्दगी जीते हैं। कॉरपोरेट इंडिया अपने लुभावने सपनों में खोया यह मान लेता है कि ‘ट्रिकल डाउन इफ़ेक्ट’ से नीचेवालों को देर-सबेर फ़ायदा होना ही है।
गुरुचरण का कॉरपोरेट जगत् का चोला छोड़कर सिर्फ़ गुरु बनकर जीने का निर्णय तथाकथित विकास की अन्धी दौड़ का मौन प्रतिरोध है। गुरु के रूप में भी उसकी मृत्यु एक तरह से औपन्यासिक आत्महत्या मानी जा सकती है। जिस तरह की संवेदनात्मक दुनिया बनाने का उसका सपना है, उसकी क़ब्र पर कॉरपोरेट इंडिया उग आया है, जिसमें भट्ट जैसे लोगों के नए सपने और नई सफलताएँ हैं।
Where Has My Gulla Gone
- Author Name:
Padma Sachdev
- Book Type:

- Description: No Description Available for this Book
Moolya Aadharit Shiksha
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "वर्तमान में विद्यालयों में अनुशासनहीनता एवं हिंसक व्यवहार की घटनाएँ निरंतर बढ़ रही हैं। अतः अगर हम अपनी शिक्षा को मूल्य-आधारित और संस्कार-आधारित बना पाएँ तो हम इस प्रकार की सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षण के मानवतावादी पहलुओं पर जोर देते हुए भारत ने अपनी नई शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा का तात्पर्य अध्यापकों, किताबों से प्राप्त जानकारी और सूचनाओं का संप्रेषण मात्र नहीं है। उन मूल्यों, योग्यताओं और प्रवृत्तियों को विकसित करना भी है, जो शांतिपूर्ण, न्यायोचित, समावेशी और टिकाऊ समाज के निर्माण के लिए विश्व समुदाय को एकत्र एवं प्रेरित कर विश्व-कल्याण में योगदान देने के लिए संकल्पबद्ध कर सकें। भारतीय ज्ञान-परंपरा में मूल्यपरक शिक्षा का बड़ा महत्त्व है। मूल्य-आधारित शिक्षा का अर्थ छात्रों को नैतिक मूल्यों, धैर्य, ईमानदारी, प्रेम, सद्भावना, दया, करुणा, मानवता, इत्यादि सार्वभौमिक मूल्यों को सिखाना है। मूल्य शिक्षा का संपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में निहित है। मूल्य-आधारित शिक्षा से न केवल मानवीय गुणों का विकास होगा, बल्कि हम अपनी नागरिकता के प्रति जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से समझ पाएँगे। नैतिकता पर आधारित शिक्षा हो तो उसमें मूल्य अपने आप आ जाएँगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी हम मानवतावादी मूल्यों का समावेश करने हेतु कटिबद्ध हैं, जिससे कि भविष्य का भारत एक सुखी, संपन्न व मानव मात्र के लिए कल्याणकारी जीवन की अवधारणा के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु अग्रसर हो तथा संपूर्ण विश्व में शांति, प्रेम व भाईचारे की स्थापना हेतु हम ध्वजवाहक बन सकें। "
Jungle (Raj)
- Author Name:
Upton Sinclaire
- Book Type:

-
Description:
अप्टन सिंक्लेयर की सर्वाधिक चर्चित कृति ‘जंगल’ ने विगत सदी के पहले दशक में पूरे अमेरिका में एक आन्दोलन-सा खड़ा कर दिया था और अमेरिकी सत्ता को हिला डाला था। इस उपन्यास के प्रकाशन को अमेरिकी मज़दूर आन्दोलन के इतिहास की एक घटना माना जाता है। शिकागो स्थित मांस की पैकिंग करनेवाले उद्योगों और उनके मज़दूरों की नारकीय स्थिति का बयान करनेवाले इस उपन्यास ने थियोडोर रूज़वेल्ट की सरकार को ‘प्योर फूड एंड ड्रग एक्ट’ और ‘मीट इंस्पेक्शन एक्ट' नामक दो क़ानून बनाने के लिए बाध्य कर दिया था।
अनेक कठिनाइयों के बाद 1906 में पुस्तकाकार प्रकाशित होते ही ‘दि जंगल’ की डेढ़ लाख से भी अधिक प्रतियाँ हाथोंहाथ बिक गईं। अगले कुछ ही वर्षों के भीतर सत्रह भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ और लगभग पूरी दुनिया में इसे बेस्टसेलर का दर्जा मिला। ‘दि न्यूयार्क इवनिंग वर्ल्ड’ ने लिखा था : “बायरन को रातोंरात मिली प्रसिद्धि के बाद से एक किताब से एक ही दिन में वैसी विश्वव्यापी ख्याति अर्जित करने का कोई उदाहरण नहीं मिलता जैसी अप्टन सिंक्लेयर को मिली है।”
‘दि जंगल’ ने पूरे अमेरिकी समाज को झकझोर दिया। लगभग आधी सदी पहले प्रकाशित हैरियट बीचर स्टो के उपन्यास ‘अंकल टॉम्स केबिन’ (1852) के बाद यह पहली पुस्तक थी जिसने इतना गहरा सामाजिक प्रभाव डाला था।
इस उपन्यास का मूल उद्देश्य शिकागो स्टॉकयाड् र्स में व्याप्त गन्दगी और अस्वास्थ्यकर स्थितियों को उजागर करना मात्र नहीं, बल्कि इसकी मूल थीम उजरती ग़ुलामी को कठघरे में खड़ा करना है। सिंक्लेयर ने स्पष्ट बताया कि उपन्यास का उद्देश्य औद्योगिक पूँजीवाद में मेहनतकश स्त्रियों-पुरुषों की अमानवीय जीवन-स्थितियों का जीवन्त दस्तावेज़ प्रस्तुत करना और यह बताना था कि समाजवाद ही इस समस्या का एकमात्र समाधान हो सकता है। उपन्यास का सादा, रुखड़ा, निर्मम गद्य वस्तुतः उस क़िस्म के मानव-जीवन के बयान के सर्वथा अनुरूप है जो सिंक्लेयर ने शिकागो के स्टॉकयाड् र्स में देखा, जहाँ काम करनेवाले औरत-मर्द उन मूक पशुओं जैसे ही हो गए थे जिन्हें कसाईबाड़े में वे जिबह किया करते थे।
आज के नवउदारवादी दौर में भारत जैसे जिन देशों में एक बार फिर उजरती ग़ुलामी के नए-नए नर्क रचे जा रहे हैं, वहाँ के लिए सिंक्लेयर और ‘जंगल’ जैसी उनकी कृतियाँ एक बार फिर प्रासंगिक हो गए हैं।
Zindagi Zero Mile
- Author Name:
Harsh Ranjan
- Book Type:

- Description: -ध्यान से देखो, पहचानते हो? मेरा इशारा यहाँ की छोटी सी -किंतु बेजान नहीं - इस सड़क की तरफ था .....यहाँ पर चलने वाले लोगों की सीधी-साधी चाल .....सड़क किनारे मंदिर में बज रही घंटियाँ ....सालों से खड़ा बरगद और उस पर लपेटी अनगिनत डोरियाँ..... निश्चल कोमल और पवित्र खिल-खिलाहटें ....अपनी इमानदार हाटें .....यहाँ की भोली-भाली उमंग ....अपने मिट्टी की गंध .... हम दोनों गंगा के किनारे चले गये। उमड़ते-घुमड़ते काले-काले मेघ....निश्चल और निर्मल गंगा...दूर तक फैलता कल-कल का स्वर....बहती ठंढ़ी हवाएँ ....तट पर की हलचल.... इस दृश्य ने जैसे हमें बाँध लिया था। सामने से सावन की धूम-धाम जैसे धीरे-धीरे अपनी ओर बढ़ती आ रही थी। -ये है अपना उत्सव!- मैंने कहा और आनंद के पास किनारे पर ही बैठ गया। वह भी काफी देर से स्थिर बैठा, इस दृश्य को देखता रहा। दूर आकाश में काले-काले मेघ छा चुके थे और फिर जोरदार बारिश शुरू हो गयी। मौसम बिल्कुल ठंडा हो गया और चारों ओर सोंधी-सोंधी गंध फैल गयी। काफी देर की चुप्पी के बाद उसने मुझसे कहा- ऐसा लगता है कि कहीं इन्हीं में खो जाऊँ! .....कहीं मिल जाऊँ .... आज शायद उसने पहली बार अपने अंधेरे कमरे से निकलकर इस दुनिया को देखा था। मेरे मन में एक संतोष सा हुआ और आँखों में आँसू आ गये -इसके लिए इन्हें भी तो यहाँ रखना होगा ...इसी पवित्रता के साथ ...इतनी ही गरिमा से .... मैं फिर वापस आ गया।
Qaid Bahar
- Author Name:
Geeta Shri
- Book Type:

-
Description:
प्रेमी जहाँ पति मैटेरियल में बदलने लगता है और प्यार विवाह नाम के नरक में, क़ैद की दीवारें वहीं उठना शुरू होती हैं, जिनसे निकलने का संघर्ष इस उपन्यास की स्त्रियाँ कर रही हैं। लेकिन इस मुक्ति का निर्वाह क्या इतना आसान है? प्रेम से रहित हो जाना और अपने एकान्त के वैभव को चारों तरफ जगमगाती-दहाड़ती पारिवारिकताओं के ठीक सामने खड़ा कर देना; क्या यह उतना ही सरल है जितना विचार के रूप में सोच लेना!
यह एक मुश्किल फ़ैसला है, एक कठिन इरादा जिसके लिए अपने आप से भी लड़ना होता है, और अपने आसपास की दुनिया से भी, उन मूल्यों-मान्यताओं से भी जिन्हें जीवन की एकमात्र और स्वीकृत पद्धति के रूप में स्थापित कर दिया गया है। लेकिन आज की स्त्री को यह संघर्ष, यह ख़तरा, यह बहुआयामी युद्ध फिर भी वरेण्य लगता है, बनिस्बत उस ‘सुख’, ‘संतोष’ और ‘पूरेपन’ के जिसकी गारंटी विवाह नाम की संस्था देती रही है, और बदले में स्त्री से ही नहीं, कई बार पुरुष से भी उसकी आज़ादी को छीनती रही है।
स्त्री-स्वातंत्र्य की अवधारणाओं को अपने लेखन से नई धार देनेवाली गीताश्री का यह उपन्यास कथाओं और उपकथाओं में चलती एक बहस ही है। यह उन स्त्रियों के अन्तर्बाह्य संघर्षों का कोलाज है जो समाज को पारम्परिक परिवार के स्थान पर एक नया केन्द्र देना चाहती हैं जहाँ किसी की संवेदना को रौंदा न जाए, न स्त्री की, न पुरुष की; जहाँ इन दोनों का सम्बन्ध आरम्भ से अन्त तक एक-दूसरे को अपने-अपने ‘व्यक्ति’ में खिलने-खुलने-पूरा होने में मदद देता हो।
इस उपन्यास से गुज़रना स्त्री-विमर्श के एक जटिल, लेकिन ज़रूरी पड़ाव से साक्षात्कार करना है।
Vyasparva
- Author Name:
Durga Bhagwat
- Book Type:

- Description: महाभारत भारतीय मनीषा की ऐसी पूँजीभूत अभिव्यक्ति है कि इसके बारे में यह कथन अतियुक्ति नहीं लगती कि जो कुछ भारत में है वह सब महाभारत में है, और जो इसमें नहीं है वह कहीं नहीं है। आश्चर्य नहीं कि ऐसे महाग्रन्थ का अध्ययन, मनन और उसकी व्याख्या किसी के लिए भी आसान नहीं है। उसके सामाजिक आशय के सम्यक स्वरूप को पहचानना अथवा विशद रूप में समझाना तो और भी कठिन है। इस कठिनाई के प्रत्युत्तरस्वरूप, मराठी भाषा की प्रमुख चिन्तक-साहित्यकार दुर्गा भागवत ने इस पुस्तक में, महाभारत के सत्य को उसके प्रमुख पात्रों के ज़रिये अत्यन्त सहज और लालित्यपूर्ण ढंग से व्याख्यायित किया है। ‘व्यासपर्व’ गहन चिन्तन और ललित अभिव्यक्ति के सहज सामंजस्य से निर्मित कृति है जिसमें विदुषी लेखक ने स्पष्ट किया है कि करुणा जब प्राणों में बस जाती है तभी धर्म का दर्शन होता है। उन्होंने इस जीवन-सत्य की ओर भी संकेत किया है कि मनुष्य मूलतः मनुष्य है; उसका लक्ष्य भी मनुष्य ही है। श्रीकृष्ण, भीष्म, द्रोण, गान्धारी, अश्वत्थामा, अर्जुन, दुर्योधन, कर्ण, विदुर, द्रौपदी, एकलव्य आदि की अद्भुत झाँकी इस पुस्तक में साकार उपस्थित हुई है जिनमें व्यक्तित्व और इतिहास ही नहीं, हमारा समय भी मुखरित होता है। निःसन्देह ‘व्यासपर्व’ भारतीय संस्कृति की एक बहुआयामी व्याख्या है। यह कृति गद्य भी है और काव्य भी, जो ‘सत्यं शिवं सुन्दरम्’ के समन्वित स्वरूप को उद्भासित करती है। बार-बार पढ़ने और संग्रह करने योग्य एक अनुपम पुस्तक।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book