Narendra-Mohini
(0)
Author:
Devkinandan KhatriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
250
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Available
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घूमते-घूमते इस नौजवान बहादुर के कान में एक दर्दनाक रोने की आवाज आई जिसे सुनते ही वह चौंक उठा और इधर-उधर ध्यान लगा कर देखने लगा, मगर फिर वह आवाज न सुन पड़ी।</p> <p>वह दर्दनाक आवाज ऐसी न थी कि जिसे सुनकर कोई भी अपने दिल को सम्हाल सकता। हमारा नौजवान बहादुर तो एक दम परेशान हो गया, क्योंकि यह जितना दिलेर और ताकतवर था उतना ही नेक ओ रहमदिल भी था। आवाज कान में पड़ते ही मालूम हो गया था कि यह किसी कमसिन औरत की आवाज है जिस पर कोई जुल्म हो रहा है। इससे आखिर न रहा गया और यह उसी आवाज की सीध पर पश्चिम की तरफ चल निकला। थोड़ी ही दूर जाने पर फिर वैसी ही दर्दनाक आवाज इस बहादुर के बाईं तरफ से आई जिसे सुन यह बाईं तरफ को मुड़ा और थोड़ी ही देर में उस जगह जा पहुँचा जहाँ से वह पत्थर जैसे कलेजे को भी गलाकर बहा देने वाली आवाज आ रही थी।</p> <p>लोमहर्षक दृश्यों और कहानियों के रचेता देवकीनन्दन खत्री के इस उपन्यास के केन्द्र में एक प्रेम-कथा है। कहानी बिहार के दो राजघरानों से सम्बन्ध रखती है। उनकी संतानों में एक नरेन्द्र रंभा से विवाह न करके घर से भाग जाता है और मोहिनी से प्रेम करने लगता है। लेकिन प्रेम की अप्रत्याशित स्थितियाँ उसके सामने आती रहती हैं। मोहिनी की दो बहनें हैं केतकी और गुलाब। इसी केतकी के घर नरेन्द्र की भेंट पुन: रंभा से होती है...</p> <p>टेढ़ी-मेढ़ी राहों से चलती हुई यह प्रेमकथा हमें देवकीनन्दन खत्री के तिलिस्मी उपन्यासों की भी याद दिलाती है, और एक नए परिवेश से भी परिचित कराती है।
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घूमते-घूमते इस नौजवान बहादुर के कान में एक दर्दनाक रोने की आवाज आई जिसे सुनते ही वह चौंक उठा और इधर-उधर ध्यान लगा कर देखने लगा, मगर फिर वह आवाज न सुन पड़ी।</p>
<p>वह दर्दनाक आवाज ऐसी न थी कि जिसे सुनकर कोई भी अपने दिल को सम्हाल सकता। हमारा नौजवान बहादुर तो एक दम परेशान हो गया, क्योंकि यह जितना दिलेर और ताकतवर था उतना ही नेक ओ रहमदिल भी था। आवाज कान में पड़ते ही मालूम हो गया था कि यह किसी कमसिन औरत की आवाज है जिस पर कोई जुल्म हो रहा है। इससे आखिर न रहा गया और यह उसी आवाज की सीध पर पश्चिम की तरफ चल निकला। थोड़ी ही दूर जाने पर फिर वैसी ही दर्दनाक आवाज इस बहादुर के बाईं तरफ से आई जिसे सुन यह बाईं तरफ को मुड़ा और थोड़ी ही देर में उस जगह जा पहुँचा जहाँ से वह पत्थर जैसे कलेजे को भी गलाकर बहा देने वाली आवाज आ रही थी।</p>
<p>लोमहर्षक दृश्यों और कहानियों के रचेता देवकीनन्दन खत्री के इस उपन्यास के केन्द्र में एक प्रेम-कथा है। कहानी बिहार के दो राजघरानों से सम्बन्ध रखती है। उनकी संतानों में एक नरेन्द्र रंभा से विवाह न करके घर से भाग जाता है और मोहिनी से प्रेम करने लगता है। लेकिन प्रेम की अप्रत्याशित स्थितियाँ उसके सामने आती रहती हैं। मोहिनी की दो बहनें हैं केतकी और गुलाब। इसी केतकी के घर नरेन्द्र की भेंट पुन: रंभा से होती है...</p>
<p>टेढ़ी-मेढ़ी राहों से चलती हुई यह प्रेमकथा हमें देवकीनन्दन खत्री के तिलिस्मी उपन्यासों की भी याद दिलाती है, और एक नए परिवेश से भी परिचित कराती है।
Book Details
-
ISBN9789395328302
-
Pages183
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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इस पुस्तक के पहले दो खंड इस मूल सवाल का सामना करते हैं कि इन मामूली लेखकों में इतनी विद्रोही-वृत्ति कैसे पैदा हुई कि उनकी कृतियों पर प्रतिबन्ध लगाने पड़े? व्यापक फलक पर इसका ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करना आवश्यक था। 19वीं सदी और 20वीं सदी के 30 के दशक तक की 24 विप्लवधर्मी विभूतियों के उन विचारों या अवधारणाओं का आकलन भी इसमें किया गया है जिनमें अपने-अपने प्रकार से जीवन या समाज या राजनीति में आमूल बदलाव के आवेग या प्रतिकार या राजद्रोह की चिनगारियाँ थीं।
पुस्तक में समाहित तत्कालीन पत्रिकाओं-पुस्तकों में प्रयुक्त, मुखपृष्ठों, चित्रों, रेखांकनों की प्रस्तुति इसे और अधिक उपयोगी बनाती है।
Vaidhanik Galp
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

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Description:
गहरी राजनैतिक, सामाजिक पक्षधरता का गद्य होते हुए भी चन्दन का ‘वैधानिक गल्प’ तीव्र आन्तरिक भावनाओं और संवेदनाओं का साथ नहीं छोड़ता। इस मुश्किल जगह से रचे जाने के बावजूद कमाल यह भी है कि यह गल्प के पारम्परिक तत्त्वों जैसे–रहस्य, रोचकता और अन्तत: पठनीयता को बचाए रखता है। प्यार, क्रूरता और प्रतिरोध चन्दन के यहाँ अपने सूक्ष्म और समकालीन रूपों में प्रकट होते हैं जो न सिर्फ़ चकित करता है बल्कि पाठक की चेतना में कुछ सकारात्मक जोड़ जाता है।
—महेश वर्मा
चन्दन पाण्डेय की लेखकी को समकाल के पूर्ण साहित्यिक विनियोग के रूप में देखा-रखा जा सकता है। चन्दन का कथाकार क़िस्से में ग़ाफ़िल नहीं, बल्कि सतर्क व अचूक है, जिससे समकाल के अद्यतन संस्करण का भी प्रवेश उनके कथादेश में सहज ही सम्भव है। कहन की साहिबी उन्हें ईर्ष्या का पात्र बनाती है।
—कुणाल सिंह
Kavi Ki Preyasi
- Author Name:
Ilachandra Joshi
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- Description: ‘कवि की प्रेयसी’ एक काल्पनिक उपन्यास है जिसमें प्रसिद्ध उपन्यासकार इलाचन्द्र जोशी ने अपनी सशक्त लेखनी के माध्यम से अपने ही एक परिचित मित्र के पूर्व जन्म की कहानी का चित्रण किया है। इसमें वर्णित प्रसंगों की सटीकता प्रमाणित करने के लिए किसी पुरातत्त्वेत्ता की दृष्टि को व्यर्थ प्रयत्न करने की आवश्यकता नहीं है। इस उपन्यास में पात्रों के मनोभावों को बड़ी सटीकता और सघनता से लिखा गया है जिससे कोई भी संवेदनशील पाठक अछूता नहीं रह सकता। अन्त:बाह्य जीवन के संघर्ष व रोमांचकता से परिपूर्ण सार्थकता को प्रस्तुत करनेवाला यह उपन्यास पाठकों को शुरू से अन्त तक बाँधे रखने में सक्षम है।
Purnmidam
- Author Name:
Saroj Kaushik
- Book Type:

- Description: , ऋचा थी—अतुलनीय, अनिंद्य, उसका हृदय एक छलछलाता हुआ प्रवाह था—प्रेम और निष्ठा के पारदर्शी जल से लबालब। उसकी आत्मा जैसी सहजता, वैसी पवित्रता को आजीवन बनाए रखना सरल नहीं। न वैसा आवेग, न वैसी अकुंठ तत्परता और न दूसरों के प्रति ऐसा नि:संकोच स्वीकार जीवन जीते हुए अक्षुण्ण रखना सम्भव है। जीवन की यात्रा में अक्सर मन और जीवन के पैर मैले हो ही जाते हैं, लेकिन ऋचा के नहीं। और वीरेश्वर जैसे उसी के लिए बना हुआ, उतना ही दृढ़, उसी अनुपात में स्वाभिमानी और ईमानदार। मन और वचन के संकल्पों को लेकर उतना ही गम्भीर और भरोसेमन्द। ऋचा और वीरेश्वर की यह कहानी स्त्री-जीवन के साथ-साथ स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के बारे में एक नई दृष्टि देती है। स्त्री यहाँ पूर्णत: एक जिजीविषा का स्वरूप ग्रहण कर लेती है जो अपने आत्म की खोज-यात्रा में जीवन और मूल्यों के नए-नए सोपान चढ़ती चली जाती है। ब्राह्मण होते हुए वह दलित युवक वीरेश्वर से प्रेम करती है और पूरा जीवन उस प्रेम को अपनी आस्था का अवलम्बन बनाए रखती है और स्वयं भी उसके लिए एक स्तम्भ बनी रहती है। इसी रिश्ते से जन्मी उनकी बेटी प्रज्ञा पुन: समाज की रूढ़ियों और स्वयं उनके लिए एक मानक बनकर सामने आती है। नए मूल्यों की स्थापना करता सहज भाषा और शिल्प में अत्यन्त पठनीय उपन्
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