Poles Apart
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Author:
Archana PingleyPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction₹
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Me era it all started with a kiss, a ferocious kiss that was meant to showcase the upper hand on him but that one kiss changed everything. And just like that I was in love with him. I thought I knew all of him but he proved me wrong. I despise him for his lies and betrayal and for what I had to endure because of him. But I hate myself more for still caring for him, still loving him. Carlino I myself was not proud of what My reality was. I really despise and envied myself for everything I did except for one thing and I would never like to change that. Because of that one particular incident, I was able to cherish the wonderful feeling of falling in love with the most amazing girl I ever met. I don’t blame her for hating me when she found out My facade and now she was gone. But I'll get her back at any cost and never to lose her.
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Me era it all started with a kiss, a ferocious kiss that was meant to showcase the upper hand on him but that one kiss changed everything. And just like that I was in love with him. I thought I knew all of him but he proved me wrong. I despise him for his lies and betrayal and for what I had to endure because of him. But I hate myself more for still caring for him, still loving him. Carlino I myself was not proud of what My reality was. I really despise and envied myself for everything I did except for one thing and I would never like to change that. Because of that one particular incident, I was able to cherish the wonderful feeling of falling in love with the most amazing girl I ever met. I don’t blame her for hating me when she found out My facade and now she was gone. But I'll get her back at any cost and never to lose her.
Book Details
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ISBN9788193827109
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Pages220
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Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका सुश्री शान्ति कुमारी बाजपेयी की कृति ‘व्यवधान’ को मैंने बड़े मनोयोग से पढ़ा। मुझे आश्चर्य हुआ। ...उनकी प्रथम रचना होकर भी यह उपन्यास अपने में सर्वथा प्रौढ़ कृति मालूम पड़ता है। कथानक के गुम्फन में सफ़ाई है और उसके भीतर क्रमागत रूप में परिस्थितियों की योजना बड़ी ही विशद है। पात्रों के चरित्र में निखार है, उनका अपना-अपना स्वतंत्र विकास हुआ है और उनके मनोवैज्ञानिक उतार-चढ़ाव की गति में पर्याप्त निर्मलता है।
—डॉ. जगन्नाथ प्रसाद शर्मा
आपकी भाषा के प्रवाह, शैली के सामर्थ्य तथा चरित्र-चित्रण के कौशल से अत्यधिक प्रभावित हुआ। नामानुसार ‘व्यवधान’ के प्रसंग यत्र-तत्र मिलते हैं तथा ‘आस’ का ‘बिखरना’ एवं ‘प्रीत’ का ‘निखरना' भी पल-पल पर दिखाई देता है। दोनों ही नामकरण पूर्णत: यथार्थ हैं। आरम्भ और अन्त के प्रकरणों ने तो मुझे बार-बार रुलाया। आपकी रचना में जो सजीवता, भावनात्मक धड़कन और स्वानुभव का पुट है, उससे इस उपन्यास ने ‘आद्य’ होते हुए भी अपना ‘प्रथम’ स्थान बना लिया है।
—डॉ. पंडित ओंकारनाथ ठाकुर
उपन्यास लेखन एक दुस्तर सेतु को पार करने सरीखा है। हर्ष का विषय है कि श्रीमती शान्ति कुमारी बाजपेयी ऐसे प्रयास में कृतकार्य हुई हैं। उनकी कृति ‘व्यवधान’ का मैं स्वागत करता हूँ और एतदर्थ उन्हें हार्दिक बधाई देता हूँ।
—श्री राय कृष्णदास
Nayan Rahasya
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

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Description:
रहस्य-रोमांच के बेजोड़ लेखक और प्रख्यात फ़िल्मकार सत्यजित राय द्वारा रचित जासूस फेलूदा का एक अत्यन्त रोचक कारनामा है—‘नयन रहस्य’।
अपनी पहचान कायम करने में जुटे एक युवा जादूगर का आमंत्रण पाकर फेलूदा और उनके साथी उसका शो देखने जाते हैं। वहाँ उन्हें पता चलता है उस युवा जादूगर की असाधारण सम्मोहन शक्ति और एक ऐसे बालक ज्योतिष्क का जिसके पास किसी भी व्यक्ति पर सिर्फ एक नजर डालकर उसके बारे में सब कुछ बता देने की अलौकिक क्षमता है। ज्योतिष्क का जादू देखने से उपजा रोमांच ज्यादा देर तक नहीं टिकता और फेलूदा के सामने एक बेहद पेचीदा मामला आ जाता है।
मामला है ज्योतिष्क की सुरक्षा का। उसकी आश्चर्यजनक क्षमता में अपार कमाई की सम्भावना देख रहे कई लोग उसके पीछे पड़ जाते हैं। नतीजन ज्योतिष्क खतरे में पड़ जाता है।
फिर तो उसे बचाने के चक्कर में तू डाल-डाल, मैं पात-पात का ऐसा खेल शुरू होता है कि उपन्यास के आखिरी पन्ने तक पहुँचने से पहले आप अनुमान भी नहीं लगा सकते कि ज्योतिष्क का असल दुश्मन कौन है?
Kuchh Din Aur
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

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Description:
‘कुछ दिन और’ निराशा के नहीं, आशा के भँवर में डूबते चले जाने की कहानी हैं—एक अन्धी आशा, जिसके पास न कोई तर्क है, न कोई तंत्र; बस, वह है अपने-आप में स्वायत्त।
कहानी का नायक अपनी निष्क्रियता में जड़ हुआ, उसी की उँगली थामे चलता रहता है। धीरे-धीरे ज़िन्दगी के ऊपर से उसकी पकड़ छीजती चली जाती है। और, इस पूरी प्रक्रिया को झेलती है उसकी पत्नी—कभी अपने मन पर और कभी अपने शरीर पर। वह एक स्थगित जीवन जीनेवाले व्यक्ति की पत्नी है। इस तथ्य को धीरे-धीरे एक ठोस आकार देती हुई वह एक दिन पाती है कि इस लगातार विलम्बित आशा से कहीं ज़्यादा श्रेयस्कर एक ठोस निराशा है जहाँ से कम-से-कम कोई नई शुरुआत तो की जा सकती है। और, वह यही निर्णय करती है।
‘कुछ दिन और’ अत्यन्त सामान्य परिवेश में तलाश की गई एक विशिष्ट कहानी है, जिसे पढ़कर हम एकबारगी चौंक उठते हैं और देखते हैं कि हमारे आसपास बसे इन इतने शान्त और सामान्य घरों में भी तो कोई कहानी नहीं पल रही।
Arohan
- Author Name:
Sadhna Shankar
- Book Type:

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Description:
कल्पना कीजिए कि पृथ्वी को छोड़कर मानव जाति किसी और ग्रह पर जा बसे। तकनीक इतनी विकसित हो जाए कि प्रजनन तथा उत्तरजीविता के लिए स्त्री और पुरुष एक-दूसरे पर निर्भर न हों, दोनों के दो अलग, एक-दूसरे से अनजान लोक बस जाएँ। जब जरूरत हो क्लोनिंग से नए प्राणी का सृजन कर लिए जाएँ और जब देह का कोई अंग असमर्थ लगे उसे एकदम नए अंग से और बुढ़ापे को युवावस्था से बदल लिया जाए!
इस उपन्यास में इस कल्पना को हमारी मौजूदा दुनिया के समानान्तर तमाम सम्भव उपादानों के साथ रचा गया है। विज्ञान कथाओं को जो पाठक अविश्वसनीय कल्पनाओं की उड़ान मानते हैं, और दूसरे ग्रहों से आनेवाले मनुष्य-विरोधी प्राणियों, एलियनों की विचित्र शक्लों से ऊब चुके हैं, उनके लिए यह उपन्यास एक ताजा हवा की तरह है।
उपन्यास की ताकत है कल्पना का सांगोपांग और तर्कसम्मत निरूपण और उसके भीतर पैठकर कहानी को इस तरह कहना कि जब तक आप उसमें रहते हैं, अपनी वर्तमान दुनिया से बरबस परे चले जाते हैं। एक वैश्विक दार्शनिक गल्प-यात्रा पर एक प्रति-सृष्टि में जहाँ वह सब कुछ है जिसे मनुष्य अपनी प्राकृतिक सीमाओं को लाँघकर, अपनी उत्तरजीविता की अन्तहीन आशा में रच सकता है।
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