Gomutra
Author:
Geet ChaturvediPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के मेरे प्रिय कवि व कथाकार हैं गीत चतुर्वेदी।</p>
<p>—नामवर सिंह</p>
<p>गीत चतुर्वेदी ने अपने गल्प व कविताओं में अवाँ-गार्द भाव दिखाया है। उनका अध्ययन बेहद विस्तृत है जो कि उनकी पीढ़ी के लिए एक दुर्लभ बात है। यह पढ़ाई उनकी रचनाओं में अनायास और सहज रूप से गुँथी दिखती है। उनकी भाषा व शैली अभिनव है। उनके पास सुलझी हुई दृष्टि है जिसमें क्लीशे नहीं और जो कि वर्तमान विचारधारात्मक खेमों के शिकंजे में भी फँसी हुई नहीं है।</p>
<p>—अशोक वाजपेयी</p>
<p>गीत के पास बहुत ताज़ा और चमकीली भाषा है। वह विचारवान और स्वप्नदर्शी हैं। अपने कथन में शब्दों की बारीक नक़्क़ाशी के साथ ही गद्य में भी कविता की सुगंध, गीत के लेखन की विशेषता रही है।</p>
<p>—ज्ञानरंजन</p>
<p>गीत चतुर्वेदी का रचनाकर्म जितना स्थानीय संस्कृति में रचा-बसा है, उतना ही विश्व-साहित्य की बारीकियों में भी। वह हृदय के इतिहासकार हैं, आत्मा के पुरातत्त्ववेत्ता। </p>
<p>—अनिता गोपालन
ISBN: 9788119835447
Pages: 160
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: "भारत उत्सवों का देश है। किसी का जन्म हो तो उत्सव, जन्म के एक साल बाद फिर जन्मोत्सव। आजकल जन्मदिन मनाने का बड़ा चलन है। पहले दिन पाठशाला जाने पर कई परिवार अक्षरोत्सव मनाते हैं। वसंतोत्सव भी मनता है। होली, दीवाली, दशहरा की बात ही छोडि़ए। ये सारे तो बड़े-बड़े उत्सव हैं ही। इन वर्षों में इश्कोत्सव भी मनाया जाता है। ‘वेलेंटाइन-डे’ को लेकर बड़े शहरों के बाजारों में बड़ा जोश दिखाई देता है। विवाहोत्सव की तो बात ही छोडि़ए। यह वैयक्तिक, पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक उत्सव तो है ही, इससे भी कहीं बढ़कर है, क्योंकि यह आर्थिक उत्सव भी है। इस पर सैकड़ों उद्योग पलते हैं। बस एक उत्सव नहीं है, वह है मरणोत्सव। मगर सोचता हूँ—यह मरणोत्सव अभी तक उत्सव क्यों नहीं बना? बाजार का ध्यान इस तरफ क्यों नहीं गया? कुछ पश्चिमी और पूर्वी देशों में बाजार इस तरफ ध्यान दे रहा है। यह तो आपको मालूम ही है कि बाजार लग जाए तो क्या नहीं हो सकता? यह जो जीवन बीमा है, इसके बारे में सोचकर देखिए। अरबों-खरबों रुपए का यह व्यापार मृत्यु की आशंका पर ही टिका है। मृत्यु के आसपास अन्य उद्योग भी चल सकते हैं। शादी से तो फिर भी कुछ लोग बच निकलते हैं, मगर मरने से तो कोई बच ही नहीं सकता, अर्थात् इसका बाजार सबसे बड़ा है। —इसी संग्रह से प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री दीनानाथ मिश्र को अपनी विशिष्ट चुटीली शैली में समाज में व्याप्त कुरीतियों-अव्यवस्थाओं पर मारक प्रहार करने की अद्भुत क्षमता थी। यह संग्रह ऐसे ही धारदार व्यंग्यों का संकलन है।
The Unfrazzled Kite
- Author Name:
Kamal Panda
- Book Type:

- Description: Aaditya had it all; he was successful, wealthy and at the top of his game, yet he felt a void in his life. He was ready to relinquish all to find out the secret his father tried to tell him When he was breathing his last and also to seek out his lost love one last time. Would she still be waiting for him after all these years? What was his father trying to tell him? How far would you go to find out the truth? Aaditya decided to go back to his roots in a quest to find all that he had lost…..
Yogeshwar
- Author Name:
Shakuntala Mishra
- Book Type:

- Description: योगेश्वर अर्थात श्रीकृष्ण के अनेक रूप जनमानस में अंकित हैं—माखन-चोर से लेकर गीता-उपदेशक तक जिन्हें भारतवासियों ने कई कोणों से देखा और प्रेम किया। यह आख्यान उन्हीं श्रीकृष्ण को एक समग्र व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत करने का कथात्मक प्रयास है। उनके वंश-इतिहास और जीवन की हर घटना के साथ। कथाकार का मानना है कि कृष्ण के चरित्र को पूरी तरह समझने के लिए हमें चमत्कारों और भावुकता की मन:स्थिति से निकलकर उन्हें एक ऐसे युगपुरुष के रूप में देखना होगा जिसके जीवन का हर क्षण मानवता के लिए एक बहुमूल्य सन्देश है। यह कथा कृष्ण के माता-पिता और उनके भी पूर्वजों की पृष्ठभूमि के वर्णन से आरम्भ होती है जिसमें देवकी और वसुदेव के तप, उनके सुदीर्घ कष्ट और कंस द्वारा उनके छह पुत्रों की हत्या के लोमहर्षक विवरण हमें देखने को मिलते हैं। कृष्ण के बाल्यकाल और छात्र-जीवन को भी कथाकार ने विभिन्न स्रोतों के आधार पर यहाँ पुनर्सृजित किया है। कृष्ण के जीवन में आए विभिन्न पात्रों के माध्यम से चलती यह कथा भगवान श्रीकृष्ण को एक सम्पूर्ण मनुष्य के रूप में स्थापित करती है—एक ऐसा मनुष्य जो एक समय इस पृथ्वी पर अपने दुर्लभ और असाधारण गुणों के साथ उपस्थित था।
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