Raavi Likhata Hai
Author:
Abdul BismillahPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Available
<span lang="HI">पाश्चात्य और भारतीय सभ्यता</span><span lang="HI">-</span><span lang="HI">संस्कारों के बीच पुल बनाता</span>, <span lang="HI">एक संवेदनशील तथा शालीन मुस्लिम परिवार का मार्मिक दस्तावेज़। लेखक ने वर्तमान के माध्यम से अतीत के कथाचित्र का सजीव चित्रण किया है और साहित्य की एक सशक्त प्रविधि </span>'<span lang="HI">फैंटेसी</span>' <span lang="HI">का बख़ूबी प्रयोग करते हुए उपन्यास को एक नए सौन्दर्यशास्त्र से सृजित किया है</span><span lang="HI">।</span></p>
<p><span lang="HI">उपन्यास में एक निम्न मध्यवर्गीय लेकिन कर्मशील मुस्लिम परिवार की कई पीढ़ियों की जीवनगाथा का रोचक ब्योरा प्रस्तुत किया गया है। उनकी संस्कृति व सामाजिक सरोकारों के साथ</span><span lang="HI">-</span><span lang="HI">साथ यह उपन्यास ग्रामीण जीवन की गहनता</span>, <span lang="HI">प्रकृति प्रेम</span>, <span lang="HI">खेत</span><span lang="HI">-</span><span lang="HI">खलिहानों के दृश्यों का भी सफ़र करता है। भारतीयता की जड़ें कितनी सशक्त</span>, <span lang="HI">गहरी और शाश्वत हैं और उनका प्रभाव कितना दूरगामी है</span>, <span lang="HI">यह उपन्यास इस सच्चाई को स्थापित करता है। पाश्चात्य संस्कृति में पले बच्चे जिन्हें देशी रहन</span><span lang="HI">-</span><span lang="HI">सहन</span>, <span lang="HI">खानपान</span>, <span lang="HI">भाषा और अपनी दुर्व्यवस्था से अजीब</span><span lang="HI">-</span><span lang="HI">सा परहेज़ था</span>, <span lang="HI">उनका सहज रूपान्तरण एक ख़ूबसूरत प्रक्रिया है</span><span lang="HI">।</span></p>
<p><span lang="HI">लेखक ने नए और पुराने जीवन और समाज को बिना किसी टकराहट के एक शृंखला में बाँधने और सामंजस्य बनाने का एक सार्थक और अनिवार्य कार्य किया है जो आज के समय की आवश्यकता भी है</span><span lang="HI">।</span></p>
<p><span lang="HI">इस उपन्यास में आज की कम्प्यूटर</span>, <span lang="HI">मैसेज</span>, <span lang="HI">ई</span><span lang="HI">-</span><span lang="HI">मेल की इलेक्ट्रॉनिक दुनिया और तेज़ रफ़्तार भौतिक जीवन के बीच सम्बन्धों</span>, <span lang="HI">रिश्तों और संवेदनाओं को कैसे जीवित रखा जा सकता है</span>, <span lang="HI">इन पहलुओं को भी सरल भाषा में सँजोया गया है</span><span lang="HI">।</span><span lang="HI"> भाषा की रवानगी कृति की पठनीयता को बढ़ाती</span><span lang="HI"> </span><span lang="HI">है और पाठक के अन्तर्मन से एक रिश्ता भी बनाती है</span><span lang="HI">।</span>
ISBN: 9788126719556
Pages: 143
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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