Ek Violin Samandar Ke Kinare
Author:
Krishna ChanderPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
इस उपन्यास का नायक—केशव—हज़ारों साल पीछे छूट गई दुनिया से हमारी दुनिया में आया है। आया है एक लड़की से प्रेम करने की अटूट इच्छा लिये। वह लड़की उसे मिलती भी है<strong>, </strong>लेकिन त्रासदी यह कि वह उसकी हत्या कर डालता है<strong>!...</strong></p>
<p>...तो जो व्यक्ति अपनी दुनिया से हमारी दुनिया में प्यार करने आया था<strong>, </strong>उसने हत्या क्यों की<strong>?</strong> यही है इस उपन्यास का मुख्य सवाल<strong>, </strong>जिसका जवाब प्रक्रिया में उनका यह बहुचर्चित उपन्यास वर्तमान सभ्यता के पूँजीवादी जीवन-मूल्यों पर तो प्रहार करता ही है<strong>, </strong>उन मूल्यों को उजागर करता है<strong>, </strong>जो मानव सभ्यता को निरन्तर गतिशील बनाए हुए हैं। उनकी मान्यता है कि पुरानी दुनिया के सिद्धान्तों से नई दुनिया को नहीं परखा जा सकता। नई दुनिया की स्त्री भी नई है—प्रेम के कबीलाई और सामन्ती मूल्य उसे स्वीकार नहीं। अब वह स्वतंत्र है। वास्तव में सतत परिवर्तनशील मूल्य-मान्यताओं का अन्त:संघर्ष इस कथाकृति को जो ऊँचाई सौंपता है<strong>, </strong>वह अपने प्रभाव में आकर्षक भी है और मूल्यवान भी।
ISBN: 9788171788200
Pages: 165
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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तुम्हारी रोशनी में गोविन्द मिश्र का अत्यन्त चर्चित उपन्यास है जिसमें उन्होंने आधुनिकता और परम्परा के बीच फँसी भारतीय स्त्री का एक अभूतपूर्व चित्र प्रस्तुत किया है। एक ऐसा चरित्र जो अपनी तमाम संश्लिष्टताओं में इतना सजीव है कि कहना कठिन हो जाए कि हम किसी कथा-पात्र से मिल रहे हैं या अपने आसपास के किसी जीते-जागते व्यक्ति से।
गोविन्द मिश्र को अपने परिवेश और देखे-जाने चरित्रों को लेकर ऐसे पात्र गढ़ने के लिए जाना जाता है जो मनुष्यता के शाश्वत प्रश्नों की खोज का प्रतीक बन जाते हैं। इस उपन्यास में भी उन्होंने तर्क तथा भावना के द्वन्द्व के बीच से ऐसी ही एक कहानी रची है जो प्रेम को केन्द्र में रखते हुए अस्तित्व के गम्भीर प्रश्नों से होकर गुजरती है।
विख्यात कथाकार अमृतलाल नागर ने इसीलिए इस उपन्यास को समाजशास्त्रीय अध्ययन के लिए भी एक महत्त्वपूर्ण कथा-कृति बताया था।
सुवर्णा अपने भीतर के बहुमूल्य की खोज में अपने वजूद के कई बिन्दुओं से गुजरती है, अपने विवाहित जीवन, अपने घर-परिवार और कैरियर के अलग-अलग मोर्चों पर संघर्ष करते हुए उसकी यह भीतरी-बाहरी यात्रा एक तरह से आधुनिक संस्कृति के खोखलेपन को उजागर करती हुई, मुक्ति की अवधारणा और पारम्परिक बन्धनों के संघर्ष की यात्रा बन जाती है।
जीवन के यथार्थ को अपने भीतर समेटे वृहत्तर सन्दर्भों तक फैली एक मार्मिक यात्रा।
Pashchim Bengal Ki Lokkathayen
- Author Name:
Pankaj Saha
- Book Type:

- Description: लोक और जीवन के बीच अटूट संबंध है। अपनी परंपरा, सामाजिक व्यवस्था, राजनीतिक समझ, आर्थिक तंत्र और धार्मिक मान्यताओं से आबद्ध आम-जीवन ही लोक-जीवन है। लोक-जीवन में लोक-संस्कृति अपने विभिन्न रूपों में विद्यमान रहती है। कभी यह लोकाचार, कभी लोक-विश्वास, लोक-पर्व आदि के रूप में रहती है, तो कभी लोकगीत के रूप में, कभी लोककथा के रूप में, कभी लोकनाट्य और कभी सुभाषित के रूप में। लोक-साहित्य में लोककथाओं का विशेष महत्त्व है। भारत की समस्त लोक-भाषाओं में लोककथाएँ भरी पड़ी हैं। इन लोककथाओं में मानव-मूल्यों एवं मानवीय संवेदनाओं का सागर लहराता है। इन कथाओं में मानवीय समाज की विसंगतियों एवं त्रासदियों का गहराई से अवगाहन किया जा सकता है। जातक, पंचतंत्र, हितोपदेश, वृहत्कथा, कथासरितसागर भारत की प्राचीनतम एवं अत्यंत समृद्ध लोककथाएँ हैं। बंगाल की लोककथाएँ भी बहुत पुरानी एवं समृद्ध हैं। अन्य भारतीय भाषाओं की तरह इनका भी जन्म मुख्यतः दादी एवं नानी के मुख से ही हुआ है। इस पुस्तक में संकलित समस्त लोककथाएँ बंगाल (पूर्व एवं पश्चिम) के हृदय का दर्पण हैं। इन लोककथाओं में बंगाल के लोक-जीवन की धड़कनें सुनाई पड़ती हैं।
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