Dharohar Kahaniyaan : Jaishankar Prasad
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Author:
Jaishankar PrasadPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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प्रसाद नाटकीय विडम्बनाओं की उस परम्परा के कथाकार हैं जो शेक्सपियर के नाटकों और तुर्गनेव के उपन्यासों में दिखाई पड़ती है। प्रसाद ऐसी ही क्रूर, निर्मम विडम्बनाओं के रचनाकार हैं। उनकी कहानियों में ऐसे नाटकीय तत्त्व संयोगवश नहीं हैं, वे समावेशी तत्त्व हैं। निरपराध और अपराधी, सत्य और असत्य, जीवन और मृत्यु के बीच प्रायः नाटकीय ढंग से ही पार्थक्य स्थापित कर लिया जाता है और असत्य सत्य का वाहक बन जाता है, ‘अपराधी’ उन अपराधों के लिए दंड पाता है जो उसने किये ही नहीं होते। —विजयमोहन सिंह
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प्रसाद नाटकीय विडम्बनाओं की उस परम्परा के कथाकार हैं जो शेक्सपियर के नाटकों और तुर्गनेव के उपन्यासों में दिखाई पड़ती है। प्रसाद ऐसी ही क्रूर, निर्मम विडम्बनाओं के रचनाकार हैं। उनकी कहानियों में ऐसे नाटकीय तत्त्व संयोगवश नहीं हैं, वे समावेशी तत्त्व हैं। निरपराध और अपराधी, सत्य और असत्य, जीवन और मृत्यु के बीच प्रायः नाटकीय ढंग से ही पार्थक्य स्थापित कर लिया जाता है और असत्य सत्य का वाहक बन जाता है, ‘अपराधी’ उन अपराधों के लिए दंड पाता है जो उसने किये ही नहीं होते।
—विजयमोहन सिंह
Book Details
-
ISBN9788198959430
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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R. Lakshminarayana +1
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- Description: 1886ರಿಂದ 1937 ರವರೆಗೂ ಬ್ರಿಟಿಷ್ ವಸಾಹತುಶಾಹಿಯ ಭಾಗವೇ ಆಗಿ ಭಾರತದೊಂದಿಗೆ ಸೇರ್ಪಡೆಯಾಗಿದ್ದ ಬರ್ಮಾ ಆ ನಂತರ ಬೇರ್ಪಟ್ಟು 1948ರಲ್ಲಿ ಸ್ವತಂತ್ರ ದೇಶವಾಯಿತೆಂಬುದು ಈಗ ಇತಿಹಾಸ. ಇದು ರಾಜಕೀಯ ಇತಿಹಾಸವಾದರೆ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕವಾಗಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾಜಿಕವಾಗಿ ಬರ್ಮಾಕ್ಕೂ ಭಾರತಕ್ಕೂ ಅತಿನಿಕಟ ಸಂಬಂಧವಿದೆ. ಬರ್ಮಾದ ಬಹುಸಂಖ್ಯಾತ ಜನ ನಿಷ್ಠೆಯಿಂದ ಅನುಸರಿಸಿ ಆಚರಿಸುತ್ತಿರುವ ಧರ್ಮವೆಂದರೆ ಭಾರತದಲ್ಲಿಯೇ ಹುಟ್ಟಿ ಬೆಳೆದ ಬೌದ್ಧ ಧರ್ಮವೇ. ಬುದ್ಧನ ನಾಡಾದ ಭಾರತಕ್ಕೆ ಲಾಗಾಯ್ತಿನಿಂದಲೂ ಬರ್ಮೀಯರು ಯಾತ್ರೆ ಬರುವುದು ನಡೆದೇ ಇದೆ. ಇನ್ನು ಭಾರತದಂತೆಯೇ ಬರ್ಮಾ ಕೂಡ ವ್ಯವಸಾಯ ಪ್ರಧಾನವಾದ ದೇಶವಾಗಿದ್ದು ರೈತಾಪಿ ಜನರ ನಾಡಾಗಿದೆ. ಭಾರತದಂತೆಯೇ ಮಧ್ಯಮ ಮತ್ತು ಕೆಳಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದ ಜನರೇ ಹೆಚ್ಚಾಗಿರುವ ಬರ್ಮಾದ ಶ್ರೀ ಸಾಮಾನ್ಯರ ಬದುಕು ಭಾರತದ ಬಡ ಜನತೆಯ ಬದುಕನ್ನು ಅತ್ಯಂತ ನಿಕಟವಾಗಿ ಹೋಲುತ್ತದೆ. ಪ್ರಭುತ್ವದ ಮೌಲ್ಯಗಳ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಬದುಕು ಸಾಗಿಸುತ್ತಿರುವವರ ಅಸಹಾಯಕತೆ, ಎರಡನೇ ಮಹಾಯುದ್ಧ ಜನರ ಬದುಕನ್ನು ಅತಂತ್ರಗೊಳಿಸಿದ್ದರ ಬಡ ಬರ್ಮೀಯರ ಚಿತ್ರ ನಮ್ಮ ದೇಶದ ಜನರ ಬದುಕಿಗಿಂತ ಬೇರೆಯೇನಲ್ಲ ಎಂದು ಅನಿಸುತ್ತದೆ. ಮೂಲ ಅನುವಾದಕರಾದ ಚಂದ್ರಪ್ರಕಾಶ್ ಪ್ರಭಾಕರ್ 'ಮೌತೀರಿ' ಅವರು ಮೂಲತಃ ಬರ್ಮೀಯರಾಗಿದ್ದು ಬರ್ಮೀ ಹಿಂದೀ ಭಾಷೆಗಳಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ನಿಷ್ಣಾತರಾಗಿದ್ದು ಅಲ್ಲಿಯ ಸಾಹಿತ್ಯ ಮತ್ತು ಸಾಹಿತಿಗಳ ನಿಕಟ ಪರಿಚಯವಿದ್ದವರಾದ ಕಾರಣ ಈ ಕಥೆಗಳ ಹಿಂದೀ ಅವತರಣಿಕೆ ಮೂಲವನ್ನು ಯಥಾವತ್ತಾಗಿ ಹೋಲುತ್ತವೆ. ಹಾಗಾಗಿ ಕನ್ನಡದಲ್ಲಿ ರೂಪು ತಾಳಿರುವ ಈ ಕಥೆಗಳು ಮೂಲಕ್ಕೆ ತೀರ ಹತ್ತಿರವಾಗಿವೆ. ಮೂಲತಃ ತುಮಕೂರಿನವರಾದ ಡಾ. ಆರ್. ಲಕ್ಷ್ಮೀನಾರಾಯಣ(1949) ಅವರು ಕಾಲೇಜು ಶಿಕ್ಷಣ ಇಲಾಖೆಯ ವಿವಿಧ ಸರ್ಕಾರಿ ಕಾಲೇಜುಗಳಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಾಪಕ, ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕ ಮತ್ತು ಪ್ರಿನ್ಸಿಪಾಲ್ ಆಗಿ ಕೊನೆಯಲ್ಲಿ ಜಂಟಿ ನಿರ್ದೇಶಕರಾಗಿ 37 ವರ್ಷಗಳ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸಿ ನಿವೃತ್ತರಾಗಿದ್ದು ಸದ್ಯ ಪ್ರತಿಷ್ಠಿತ ಬಿ.ಎಂ.ಶ್ರೀ. ಪ್ರತಿಷ್ಠಾನದ ಅಧ್ಯಕ್ಷರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಮೂರು ದಶಕಗಳಿಂದ ಅನುವಾದ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯರಾಗಿರುವ ಇವರು ಇಂಗ್ಲಿಷ್ ಮತ್ತು ಹಿಂದಿಯಿಂದ ಅನೇಕ ಕೃತಿಗಳನ್ನು ಅನುವಾದಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಸಂಸ್ಕೃತದಿಂದ ಅನುವಾದಿಸಿದ 'ಕನ್ನಡ ವಕ್ರೋಕ್ತಿ ಜೀವಿತ' ಎಂಬ ಇವರ ಕೃತಿಗೆ 2004ರಲ್ಲಿ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಪುಸ್ತಕ ಬಹುಮಾನ ಹಾಗೂ 2007ರಲ್ಲಿ ಕೇಂದ್ರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಅನುವಾದ ಪುರಸ್ಕಾರ ದೊರೆತಿವೆ. ಕಿರಣ್ ನಗರ್ಕರ್ ಅವರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಪ್ರಶಸ್ತಿ ಪುರಸ್ಕೃತ ಇಂಗ್ಲಿಷ್ ಕಾದಂಬರಿ 'ಕಕೋಲ್ಡ್' ನ ಕನ್ನಡ ರೂಪ 'ಬೇಗುದಿ'ಯನ್ನು ಕೇಂದ್ರ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿ ಪ್ರಕಟಿಸಿದ್ದು ಅದಕ್ಕೆ 2013ರ ಕರ್ನಾಟಕ ಸಾಹಿತ್ಯ ಅಕಾಡೆಮಿಯ ಪುಸ್ತಕ ಬಹುಮಾನ ಬಂದಿದೆ.
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