Shreshtha Bal Kahaniyan
(0)
Author:
Balshauri ReddyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
599
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विश्व की आबादी में बच्चों की संख्या एक तिहाई के आसपास है। जलवायु, वेशभूषा, रीति-रिवाज, रहन-सहन, खान-पान की दृष्टि से भले ही उनमें भिन्नता दर्शित होती हो, किन्तु उनके विचार और सोच एक समान हैं। बच्चे स्वभावत: परस्पर धर्म, जाति, वर्ण, वर्ग, सम्प्रदाय को लेकर भेदभाव नहीं रखते। उनका दिल स्वच्छ, काग़ज़ की भाँति निर्मल होता है। उनमें हम जैसे संस्कार डालते हैं, उन्हीं के अनुरूप उनका चरित्र बनता है। उनके शारीरिक विकास के लिए जैसे बलवर्धक आहार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार उनके बौद्धिक विकास के लिए उत्तम साहित्य की नितान्त आवश्यकता है।</p> <p>बच्चों में कहानी सुनने की प्रवृत्ति जन्मजात है। आयु की वृद्धि के साथ उनमें कहानी पढ़ने की रुचि और प्रवृत्ति भी बढ़ती जाती है। अत: उनकी रुचि के पोषण एवं परिष्कार के लिए स्वस्थ साहित्य एक सबल माध्यम बन सकता है।</p> <p>भारतीय भाषाओं में सर्वप्रथम संस्कृत में बाल-साहित्य का प्रादुर्भाव हुआ। पंचतंत्र, हितोपदेश इत्यादि विश्व के अमर साहित्य में अपना अनुपम स्थान रखते हैं। कालान्तर में देश की अन्य भाषाओं में बाल-साहित्य का सृजन हुआ। आज भारत की प्राय: समस्त भाषाओं में उत्तम बाल-साहित्य का सृजन एवं प्रकाशन हो रहा है।</p> <p>प्रस्तुत पुस्तक में 12 भारतीय भाषाओं की 131 बाल-कहानियों का चयन किया गया है। सम्भवत: भारतीय भाषाओं में इस प्रकार का प्रयास प्रथम है। बच्चों के मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन में ये कहानियाँ सफल होंगी तो हम अपने इस प्रयास को सार्थक मानेंगे।
Read moreAbout the Book
विश्व की आबादी में बच्चों की संख्या एक तिहाई के आसपास है। जलवायु, वेशभूषा, रीति-रिवाज, रहन-सहन, खान-पान की दृष्टि से भले ही उनमें भिन्नता दर्शित होती हो, किन्तु उनके विचार और सोच एक समान हैं। बच्चे स्वभावत: परस्पर धर्म, जाति, वर्ण, वर्ग, सम्प्रदाय को लेकर भेदभाव नहीं रखते। उनका दिल स्वच्छ, काग़ज़ की भाँति निर्मल होता है। उनमें हम जैसे संस्कार डालते हैं, उन्हीं के अनुरूप उनका चरित्र बनता है। उनके शारीरिक विकास के लिए जैसे बलवर्धक आहार की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार उनके बौद्धिक विकास के लिए उत्तम साहित्य की नितान्त आवश्यकता है।</p>
<p>बच्चों में कहानी सुनने की प्रवृत्ति जन्मजात है। आयु की वृद्धि के साथ उनमें कहानी पढ़ने की रुचि और प्रवृत्ति भी बढ़ती जाती है। अत: उनकी रुचि के पोषण एवं परिष्कार के लिए स्वस्थ साहित्य एक सबल माध्यम बन सकता है।</p>
<p>भारतीय भाषाओं में सर्वप्रथम संस्कृत में बाल-साहित्य का प्रादुर्भाव हुआ। पंचतंत्र, हितोपदेश इत्यादि विश्व के अमर साहित्य में अपना अनुपम स्थान रखते हैं। कालान्तर में देश की अन्य भाषाओं में बाल-साहित्य का सृजन हुआ। आज भारत की प्राय: समस्त भाषाओं में उत्तम बाल-साहित्य का सृजन एवं प्रकाशन हो रहा है।</p>
<p>प्रस्तुत पुस्तक में 12 भारतीय भाषाओं की 131 बाल-कहानियों का चयन किया गया है। सम्भवत: भारतीय भाषाओं में इस प्रकार का प्रयास प्रथम है। बच्चों के मनोरंजन एवं ज्ञानवर्धन में ये कहानियाँ सफल होंगी तो हम अपने इस प्रयास को सार्थक मानेंगे।
Book Details
-
ISBN9789386863713
-
Pages519
-
Avg Reading Time17 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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