🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Pratinidhi Kahaniyan : Suryabala

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

सूर्यबाला सहज लेकिन बहुस्तरीय अभिव्यक्ति की कथाकार हैं। उनके पात्र अपने जीवन को जीते हुए उन सच्चाइयों को बयान कर जाते हैं जिन्हें विचारों और शिल्प-चातुर्य से बोझिल कथाएँ अकसर नहीं कर पातीं। उनका रचना-संकल्प अपने परिवेश और उसमें रची-बसी सहज मानवीय जिजीविषा के आलोड़नों से उठता है; इसलिए वे ऐसी कहानियाँ रच पाती हैं जिन्हें हर पाठक अपनी संवेदना की गहराई के साथ पढ़ सकता है, उनमें अपने किसी न किसी भाव-पक्ष का बिम्ब देख सकता है। कथा-कथन की पारम्परिक प्रवाहमयता को बरकरार रखते हुए वे उसे आधुनिक जीवन-संघर्षों की सहज वाहक बना देती हैं। पठनीयता जिसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है, जिसके चलते पाठक कब भीतर से बदलना शुरू हो जाता है, पता ही नहीं चलता। भाव-प्रवण स्थितियों को वे ऐसे तटस्थ कौशल से चित्रित करती हैं कि पाठक-मन में होनेवाला करुणा का उद्रेक निरर्थक सहानुभूति की तरफ नहीं, यथार्थ की विडम्बना के प्रति प्रतिकार और अस्वीकार की ओर मुड़ जाता है। वे किसी आन्दोलन की अनुयायी नहीं रहीं, उनके विमर्श का आधार उनका अपना सरोकार बोध है, जो उन्हें अपने वृत्त के बाहर से जुटाए गए आग्रहों की कृत्रिमता से भी बचाता है।

Read more

₹ 199

₹ 159.2 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Pratinidhi Kahaniyan : Suryabala This book ₹159
Mere Sandhi-Patra Suryabala ₹150
3 books selected ₹948 ₹908

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

सूर्यबाला सहज लेकिन बहुस्तरीय अभिव्यक्ति की कथाकार हैं। उनके पात्र अपने जीवन को जीते हुए उन सच्चाइयों को बयान कर जाते हैं जिन्हें विचारों और शिल्प-चातुर्य से बोझिल कथाएँ अकसर नहीं कर पातीं। उनका रचना-संकल्प अपने परिवेश और उसमें रची-बसी सहज मानवीय जिजीविषा के आलोड़नों से उठता है; इसलिए वे ऐसी कहानियाँ रच पाती हैं जिन्हें हर पाठक अपनी संवेदना की गहराई के साथ पढ़ सकता है, उनमें अपने किसी न किसी भाव-पक्ष का बिम्ब देख सकता है। कथा-कथन की पारम्परिक प्रवाहमयता को बरकरार रखते हुए वे उसे आधुनिक जीवन-संघर्षों की सहज वाहक बना देती हैं। पठनीयता जिसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होती है, जिसके चलते पाठक कब भीतर से बदलना शुरू हो जाता है, पता ही नहीं चलता। भाव-प्रवण स्थितियों को वे ऐसे तटस्थ कौशल से चित्रित करती हैं कि पाठक-मन में होनेवाला करुणा का उद्रेक निरर्थक सहानुभूति की तरफ नहीं, यथार्थ की विडम्बना के प्रति प्रतिकार और अस्वीकार की ओर मुड़ जाता है। वे किसी आन्दोलन की अनुयायी नहीं रहीं, उनके विमर्श का आधार उनका अपना सरोकार बोध है, जो उन्हें अपने वृत्त के बाहर से जुटाए गए आग्रहों की कृत्रिमता से भी बचाता है।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2022
Weight
132 grams
ISBN-13
9789393768650
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12 × 18 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp