O Henry Ki Lokpriya Kahaniyan
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श्रेष्ठ कहानियाँ—“मेहरबानी करके दो बासी पावरोटी।“ यह तो बहुत अच्छी तसवीर है,मादाम!”मिस मार्था जब रोटी लपेट रही थीं तो उसने कहा।“हाँ।” मिस मार्था ने अपनी ही चालाकी पर खुश होते हुए कहा, “मुझे कला और (नहीं, अभी इतनी जल्दी ‘कलाकार’ कहना ठीक नहीं रहेगा) पेंटिंग बहुत अच्छे लगते हैं।” उसने शब्द बदलते हुए कहा, “तुम सोचते हो, यह एक अच्छी तसवीर है?” “महल,” ग्राहक ने कहा, “यह अच्छी नहीं बनी है। इसका परिप्रेक्ष्य सही नहीं है। गुड मॉर्निंग, मादाम!” —इसी संग्रह से विश्व-प्रसिद्ध अमेरिकी साहित्यकार ओ. हेनरी को एक मुकदमे में तीन वर्ष जेल में बिताने पड़े। यहाँ एक सदाचारी कैदी के रूप में रहते हुए उन्हें गरीबों और दबे-कुचलों के प्रति दया-भाव उत्पन्न हुआ और फिर यहीं से उनकी उत्कृष्ट कहानियों का जन्म हुआ। उपदेशपरक, मनोरंजक एवं आह्लादकारी कहानियों का संग्रह।
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श्रेष्ठ कहानियाँ—“मेहरबानी करके दो बासी पावरोटी।“
यह तो बहुत अच्छी तसवीर है,मादाम!”मिस मार्था जब रोटी लपेट रही थीं तो उसने कहा।“हाँ।”
मिस मार्था ने अपनी ही चालाकी पर खुश होते हुए कहा, “मुझे कला और (नहीं, अभी इतनी जल्दी ‘कलाकार’ कहना ठीक नहीं रहेगा) पेंटिंग बहुत अच्छे लगते हैं।” उसने शब्द बदलते हुए कहा, “तुम सोचते हो, यह एक अच्छी तसवीर है?”
“महल,” ग्राहक ने कहा, “यह अच्छी नहीं बनी है। इसका परिप्रेक्ष्य सही नहीं है। गुड मॉर्निंग, मादाम!”
—इसी संग्रह से
विश्व-प्रसिद्ध अमेरिकी साहित्यकार ओ. हेनरी को एक मुकदमे में तीन वर्ष जेल में बिताने पड़े। यहाँ एक सदाचारी कैदी के रूप में रहते हुए उन्हें गरीबों और दबे-कुचलों के प्रति दया-भाव उत्पन्न हुआ और फिर यहीं से उनकी उत्कृष्ट कहानियों का जन्म हुआ। उपदेशपरक, मनोरंजक एवं आह्लादकारी कहानियों का संग्रह।
Book Details
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ISBN9789350480571
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Pages152
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Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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Description:
‘तितली धूप’ संग्रह की कहानियों में ऐसी स्मृतियाँ और अनभिव विन्यस्त हैं जिनमें खिले हुए रंगीन फूलों की खुशबू और उन्माद है तो खुले घाव से रिसते दर्द की कसक भी है।
एक सघन-समृद्ध भाषा जीवन यथार्थ की तमाम संश्लिष्टता और सिलवटों से अविच्छिन्न नाता बनाए रखती है। अमूर्तन और यथार्थ का दुर्लभ संतुलन इन कहानियों में ऐसे दृश्य रचता है जो पाठक को सुखद विस्मय से भर देता है।
इस संग्रह में ग्रामीण और आदिवासी जीवन की कहानियाँ भी हैं जिनमें दुख, शोषण, गरीबी और बर्बर होते समय की यथार्थ और पारदर्शी छवियाँ हैं। साथ ही भूमंडलीकरण के उत्तर समय के आतंक और सूचना-तकनीक की धूर्त प्रविधियों को कहानी की घटनात्मकता में जीवन मूल्यों की चुनौती की तरह प्रस्तुत किया गया है।
इन कहानियों में मनुष्य की गरिमा और उसकी करुणा का संसार है जो इसके विनाश में लाभ का अवसर देखने वाले कारक आशयों तक ले जाकर उनके लिए घृणा का प्रति संसार भी रचती हैं। बाजार की बदनीयती को समझने के बावजूद व्यक्ति अपने ज्ञान के अकेलेपन के साथ रहने को अभिशप्त है। इन कहानियों में लोभ-मग्न होते जा रहे इस उत्तर आधुनिक समय में व्यक्ति की जकड़न की यंत्रणा और मुक्ति की इच्छा, दोनों मौजूद हैं। यहाँ मनुष्य के गरिमापूर्ण सुखद जीवन की दृढ़ लेकिन सरल माँग है।
ये कहानियाँ संघर्ष और आवेश को उस संयम और धैर्य के साथ प्रस्तुत करती हैं जो आशयों और सरोकारों के लिए जरूरी है।
Door Se Dekha Hua
- Author Name:
Sunil Gangopadhyay
- Book Type:

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Description:
सामाजिक विडम्बनाओं, विसंगतियों, आर्थिक विषमताओं से उपजी भयावह स्थितियों का संवेदनशील अवलोकन करती कहानियाँ।
अन्याय, शोषण और ग़रीबी के साथ हो रहे ज़ुल्मों को रेखांकित कर ये कहानियाँ यह भी सोचने पर विवश करती हैं कि आज़ाद मुल्क में अन्तिम आदमी के लिए संविधान द्वारा किए गए वादों को कितना पूरा किया गया है? समतामूलक समाज का सपना आज किस दशा में है और ग़रीबी उन्मूलन की कल्पना कहाँ धराशायी हो गई है?
सदियों से नारी पूजनीय तो है पर उसे पुरुष समाज ने अपेक्षित आदर नहीं दिया, बल्कि अपनी जिस्मानी आग में उसकी आहुति देता रहा। ग़रीब समाज की लड़कियों के पेट की भूख तो तन ही बेच कर बुझती है! ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण नारकीय जीवन स्थितियों के मार्मिक दस्तावेज़ भी इन कहानियों में मिलेंगे।
लेखक ने अपनी इन कहानियों के माध्यम से समाज के साथ उस संस्कृति का भी परिचय कराया है जो आज विलुप्त होने की स्थिति में है, अतीत का हिस्सा बनती जा रही है।
संग्रह की कुछ कहानियों में देशज और लोक-प्रचलित शब्दों का प्रयोग विशेष ध्यान खींचता है।
बहुरंगी और विविध भावना-संसार की सर्जना करनेवाली पठनीय कहानियों का एक सम्पूर्ण और संग्रहणीय संकलन।
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