Sufiwad Ke Adhyatmik Ayam
Author:
Zafar RazaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 320
₹
400
Unavailable
हिन्दी में तसव्वु़फ या सूफ़ीमत पर दो प्रामाणिक पुस्तकें छपी हैं। एक चन्द्रबली पाण्डेय की, दूसरी डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी की। इस्लाम धर्म के अनुयायी विद्वान् की हिन्दी में यह पहली पुस्तक है—सू़फ़ीवाद के आध्यामिक आयाम।</p>
<p>इस पुस्तक में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ-साथ सू़फ़ी सिद्धान्तों का बहुत ही स्पष्ट और प्रामाणिक विवेचन है। प्रोफ़ेसर जाफ़र रज़ा ने अपने प्रतिपादन की पुष्टि क़ुर्आन के उद्धरणों से की है। इसके साथ-साथ विभिन्न सू़फ़ी सम्प्रदायों का ऐतिहासिक, दार्शनिक और साधनापरक विवेचन भी इसमें है।</p>
<p>इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पूर्ववर्ती मूल अरबी-फ़ारसी विवेचकों का संक्षिप्त परिचय भी दिया गया है। विशेष रूप से भारत में प्रसिद्ध सू़फ़ी-फ़कीर सम्प्रदायों और उनके प्रमुख हस्ताक्षरों के बारे में बहुत ही प्रामाणिक विवेचन है। प्रोफ़ेसर जाफ़र ऱजा ने अत्यन्त निष्पक्ष होकर सूफ़ीवाद का एक प्रामाणिक दस्तावेज़ प्रस्तुत किया है।</p>
<p>सूफ़ी-दर्शन इस्लाम को मथ करके निकला मक्खन है। यह इस्लाम को प्रतिष्ठा दिलाने में तो सफल हुआ ही है, इसकी पृष्ठभूमि का दिग्दर्शन प्रोफ़ेसर जाफ़र ऱजा ने अच्छी तरह प्रस्तुत किया है।
ISBN: 9788180318641
Pages: 168
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Devalayon Per Mithun Murtiyan Kyon ?
- Author Name:
Tapi Dharma Rao
- Book Type:

-
Description:
तेलगू लेखक तापी धर्माराव के लेखन का प्रयोजन समाज को शिक्षित करना रहा है। इतिहास को बाँचने में उन्हें कोई गुरेज़ नहीं। वे तथ्यों की वैज्ञानिक पड़ताल भी करते हैं और अन्धविश्वासों को चुपचाप पचा लेने की ग़लतियाँ वह नहीं करते। आत्मानुभव उनके मन में उठे द्वन्द्व का कारण बनता है और वह उनके समाधान की खोज करने में जुट जाते हैं। उनके लेखन में ज्ञान से अधिक अनुभव है और परम्परा से अधिक व्यावहारिक तथ्य।
सच कहने के लिए साहस, धैर्य और आत्मबल की ज़रूरत होती है। तापी धर्माराव के यह गुण प्रस्तुत पुस्तक में साफ़ महसूस किए जा सकते हैं। पुस्तक सवाल–दर–सवाल खड़े करती है। लेखक ने इन प्रश्नों को प्रस्तुत करने और उनके सम्बन्ध में तथ्यों को स्पष्ट करने की चेष्टा की है। प्रश्नों के कारणों की विवेचना के साथ–साथ उनके हल की तलाश भी ज़रूरी है। पुस्तक में कई प्रश्न टकराते हैं और उनका समाधान जिज्ञासाओं की पूर्ति के रूप में किया गया है।
Parashakti Shri Sita
- Author Name:
Suresh Kumar Singh
- Book Type:

- Description: श्री सुरेश कुमार सिंह, प्रशासनिक पद पर होते हुए भी आध्यात्मिक चिन्तन और लेखन में लीन रहते हैं। उनकी आध्यात्मिक चेतना और शोध-दृष्टि स्पृहणीय है। ‘पराशक्ति श्रीसीता’ और उनसे सम्बन्धित स्थल की प्रामाणिक खोज उनके व्यक्तित्व को उजागर करती है। एक प्रशासनिक अधिकारी के गुरुतर दायित्वों का निर्वहन करते हुए इक्यावन शक्तिपीठों का अन्वेषण, उपनिषदों में देवी के विविध स्वरूपों का शोधपरक विश्लेषण तथा ‘पराशक्ति श्रीसीता’ के विविध स्वरूपों का विवेचन इनकी वैचारिक ऊँचाइयों का दिग्दर्शन कराता है। भदोही जनपद के ख्यातिलब्ध विद्वानों—शास्त्र चूड़ामणि, डॉ. विद्याशंकर त्रिपाठी, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. भारतेन्दु द्विवेदी तथा डॉ. लक्ष्मीधर चतुर्वेदी ने पुस्तक को उपयोगी बनाने में अहम् भूमिका निभाई है। विश्वास है, यह पुस्तक ‘पराशक्ति श्रीसीता’ और वाल्मीकि आश्रम सीतामढ़ी के सन्दर्भ में मील के पत्थर का काम करेगी।
Colombo Se Almora Tak "कोलंबो से अल्मोड़ा तक" | Inspirational Talks on Dharma & Philosophy | Swami Vivekananda Book in Hindi
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: "उन्तालिश वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी विवेकानंद जो काम कर गए, वे आनेवाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनका विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहाँ बड़े-बड़े महात्माओं तथा ऋषियों का जन्म हुआ यही संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं, केवल यहीं आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिए जीवन के सर्वोच्च आदर्श अवस्थित हैं एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है। उनके कथन—'उठो, जागो, स्वयं जगकर औरों को जगाओ। अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक रुको नहीं, जब तक कि लक्ष्य प्राप्त न हो जाए।' पर अमल करके व्यक्ति अपना ही नहीं, सार्वभौमिक कल्याण कर सकता है। ‘कोलंबो से अल्मोड़ा' तक इस पुस्तक में स्वामीजी ने भारत सहित देश-विदेश में वेदांत धर्म और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार हेतु देश भर के युवकों का आह्वान किया है। उन्होंने भारतीय समाज में गहरे पैठी असमानता की भावना के प्रति लोगों को सचेत किया है। आत्मिक उन्नयन का पथ प्रशस्त करके मानव जीवन की सार्थकता को सिद्ध करने की प्रेरणा देती पठनीय पुस्तक ।"
Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg
- Author Name:
Vishen Lakhiani
- Book Type:

- Description: Buddh Se Seekhen Safalta Ka Marg Hindi Translation of The Buddha and The Badass: The Secret Spiritual Art of Succeeding at Work. क्या आपने गौर किया है कि कैसे कुछ लोग नौकरी में कमाल के भाग्यशाली होते हैं! वे बड़ी आसानी से समाधान सुझा देते हैं। वे सही लोगों को आकर्षित करते हैं। लोग उनके अभियानों, कंपनियों, उनकी टीमों का हिस्सा बनना चाहते हैं। वे बड़े-बड़े काम मुसकराते हुए पूरा कर लेते हैं और वेतन में अच्छी वृद्धि के साथ ही प्रमोशन भी पा लेते हैं। ये सुपरस्टार कमाल की एकाग्रता और रचनात्मकता का प्रदर्शन कर खास दायरे का हिस्सा बन जाते हैं।यह पुस्तक बताती है कि उनके साथ कैसे जुड़ें। आप जहाँ भी हों, आप में अनोखी शक्तियाँ हैं। यह आधुनिक युग का भ्रम है कि कठिन परिश्रम और संघर्ष से ही सफलता मिलती है। आपके भीतर एक आत्मा है और एक बार आपने काम के क्षेत्र में इसकी पूरी शक्ति का प्रयोग किया, तो बस कमाल हो जाता है। अपने भीतर के बुद्ध और निर्भीक योद्धा को जगाना एक ऐसी प्रक्रिया है, जो आपके काम करने के तरीके को बदलकर रख देगी। आप उन तरीकों को जान लेंगे, जो वास्तविकता के हर नियम को आपके पक्ष में ला देंगे।
Motivating Thoughts of Swami Vivekananda
- Author Name:
Swami Vivekanand
- Book Type:

- Description: Swami Vivekananda was an Indian Hindu monk, a chief disciple of the 19th-century Indian mystic Ramakrishna. He was a key figure in the introduction of the Indian philosophies of Vedanta and Yoga to the Western world and is credited with raising interfaith awareness. Swamiji has been an awe-inspiring persona for many people and this book continues the legacy of his ideas and philosophies. This book is a one-of-a-kind condensed version of Swamiji’s life and principles, For every reader; this compilation would mean an enriching and learning experience. May his quotes inspire you to believe in yourself so that you may live your dream
Kailas: Shiva's Abode
- Author Name:
Hemant Sharma +2
- Rating:
- Book Type:

- Description: Wanderlust and the desire to know the land and society more had been fueling my wish to visit Kailas. There were many curiosities. All our major rivers have their source in the region. The largest reservoir of fresh water on earth is situated there. The celestial swans are found there. I recall that how in my childhood, my Grandmother used to describe Kailas as being akin to a dreamland. According to her, Shri Krishna has said in the Gita – Meruru shikhirinamaham – ‘Among mountains I am Kailas!’ It was Sage Mandhata who first set foot on this sacred soil. Adi Shankaracharya shed his mortal body here. Guru Nanak meditated here and Swaminarayana, the founder of the sect that bears his name, saw the vision of god here. The Ramayana and the Mahabharata mention Kailas. This is where Ravana had worshipped Lord Shiva. He wanted to take Kailas with him. Shiva guilefully dissuaded him from doing so. Arjuna performed penance here and received the Pashupata Astra from Shiva. Yudhishthir proceeded heavenwards via this route. One by one, all the family members fell by the roadside; only the faithful dog kept company. Bhasmasur, the Rakshas, a devotee of Shiva was reduced to cinders here. Today the dark shadow of civilisation has begun to fall even on Mansarovar. This lake is shrinking. The sacred water body, that once stretched across 410 square kilometres, is now shrunk to only 10 square kilometres. Consider this the rage of Nature. Had Kalidasa been alive, he would have been deeply saddened to see his beloved Himalaya in this state. Is it the same Himalaya that is described in Raghuvamsham and Kumar Sambhavam? Civilisation has reached a point where the divine dimensions of Himalaya are disturbed.
Divine Spiritual Mala
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Divine Spiritual Mala is a book written by author and spiritual coach, Dr.Sanjay Rout. The book offers an in-depth exploration of the power of mala beads as a tool for meditation and spiritual growth. In it, she explains how to use malas to open up your consciousness and connect with the divine energy within you. She also provides practical guidance on how to create your own personal mala or purchase one that fits with your individual needs. Dr.Sanjay Rout has been teaching spirituality since 1966 when she founded her organization, Ananda Marga Yoga Ashram in Canada’s British Columbia province where she still resides today. She has traveled extensively throughout India giving lectures on yoga philosophy while continuing her work as an internationally recognized teacher of Eastern spirituality practices including mantra chanting, kirtan (devotional singing) as well as japa (repetition) meditations using sacred mantras such as Om Namah Shivaya or Hare Krishna Mahamantra . In Divine Spiritual Mala Dr.Sanjay guides readers through each step necessary for creating their own personalized mala experience – from selecting appropriate materials like wood or gemstones; stringing them together into meaningful patterns; learning techniques such asspacing out prayer beads along its length ;and finally connecting spiritually with words , prayers ,or affirmations during meditation sessions . By following these steps readers can discover greater peace within themselves by tapping into the healing power found at their very core .
Geetgovind
- Author Name:
Jaidev
- Book Type:

- Description: "‘गीतगोविंद’ संस्कृत के प्रसिद्ध कवि जयदेव द्वारा रचित एक अनुपम काव्य-ग्रंथ है, जिसमें राधा-कृष्ण की केलि-कथाओं तथा उनकी अभिसार-लीलाओं के अत्यंत रसमय चित्रण के साथ ही प्रेम के सभी भारतीय रूपों का बड़ी तन्मयता और कुशलता के साथ वर्णन किया गया है। समग्र संस्कृत साहित्य में इस कोटि की मधुर रचना दूसरी कोई नहीं। यह आध्यात्मिक शृंगार का अत्यंत मनोरम काव्य-ग्रंथ है, जिसमें शब्द और अर्थ का मनोमुग्धकारी सामंजस्य है। कृष्ण-भक्ति साहित्य में ‘गीतगोविंद’ को धर्मग्रंथ का स्थान प्राप्त है। श्रीवल्लभ संप्रदाय में भी ‘गीतगोविंद’ को श्रीमद्भागवत पुराण के समान प्रतिष्ठा प्राप्त है। यह ग्रंथ देश-विदेश के अनेक मूर्धन्य एवं लब्धप्रतिष्ठ विद्वान् समीक्षकों द्वारा मुक्त कंठ से प्रशंसित है। प्रस्तुत है, धर्म और दर्शन के क्षेत्र में सुप्रतिष्ठित इस ग्रंथ-रत्न का सुमधुर हिंदी अनुवाद। आध्यात्मिक साधकों के लिए ही नहीं आम पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी पुस्तक। "
Nij Brahma Vichar
- Author Name:
Purushottam Agarwal
- Book Type:

-
Description:
धर्म के सामान्य अनुयायी, साधारण आस्थावान् लोग हों या धर्म को हिंसक राजनीति में बदलनेवाले चतुर सुजान, धर्म के अध्येता हों या कठोर आलोचक और घोर विरोधी—अपने सारे मतभेदों के बावजूद इनमें से अधिकांश एक बात पर सहमत हैं। वह यह कि धर्म और अध्यात्म एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। या तो अध्यात्म फ़िज़ूल की बात है, या फिर धर्म ही अध्यात्म का एकमात्र आधार और माध्यम है। या तो अध्यात्म का आशय है—समाजनिरपेक्ष आत्मलीनता या अध्यात्म का अर्थ है प्रतिक्रियावादी रहस्यवाद। दोनों में से किसी भी तर्क-पद्धति को अपनाइए, निष्कर्ष पहले से तय है : यदि अध्यात्म के प्रश्नों में आपकी दिलचस्पी है तो आप धर्म को अपनाइए; यदि आप धर्म से असुविधा महसूस करते हैं तो अध्यात्म को भी साथ-साथ ख़ारिज कर दीजिए।
परस्पर विरोधी तर्क-पद्धतियों का निष्कर्ष के धरातल पर यह सामंजस्य अद्भुत है। धर्मेतर अध्यात्म की सम्भावनाओं पर विचार का प्रस्ताव, जो यह पुस्तक आपको देती है, विरुद्धों के इस सामंजस्य से टकराने का, और हो सके तो इसके परे जाने का प्रस्ताव है।
पिछले एक साल से भी ज़्यादा समय से दैनिक ‘जनसत्ता’ में चिन्तक-आलोचक
डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल का चर्चित कॉलम ‘मुखामुखम’ एक समग्रबोध की साधना करने की भरसक कोशिश करता रहा है। सैद्धान्तिक प्रश्नों से जूझने से लेकर अटलांटा, वर्धा और गोपेश्वर के अनुभव-संवेदनों को पाठकों के सामने प्रस्तुत करने तक के रूप में ये लेख लगातार उत्सुकता के साथ पढ़े गए। जाने-माने बुद्धिजीवियों से लेकर पाठकों तक सभी ने इनमें विशेष दिलचस्पी ज़ाहिर की। बहसें भी हुईं। शुरुआती एक वर्ष (मई 2003-मई 2004) में प्रकाशित चर्चित लेख यहाँ पुस्तक रूप में प्रस्तुत हैं। लेखक ने इनमें वे आवश्यक पाद-टिप्पणियाँ और सन्दर्भोल्लेख भी जोड़ दिए हैं, जो अख़बार में नहीं आ सकते थे, लेकिन ज़रूरी थे।
Andhshraddha Ki Gutthi
- Author Name:
Narendra Dabholkar
- Book Type:

-
Description:
विश्वास और अंधविश्वास में अंतर समझते समय मूल दिक्कत यह आती है कि एक समय में जिस विश्वास को सराहा जाता था वही दूसरे समय में अंधविश्वास बन जाता है। समाज का एक हिस्सा जिसे अंधविश्वास मानता है, वही किसी दूसरे समूह को पवित्र लगता है। सती प्रथा और मेलों में दी जानेवाली बलि ऐसी ही परंपराएँ थीं। एक सदी पूर्व का यह विश्वास आज नृशंस अंधविश्वास की श्रेणी में आ गया है।
इसीलिए श्रद्धाओं की जाँच करनी पड़ती है। विज्ञान के विकास का इतिहास ऐसी ही श्रद्धाओं की जाँच करने का इतिहास है। कोपर्निकस, गैलिलियो ने इन श्रद्धाओं को जाँचा, और जो पाया, उसे व्यक्त करने पर यातना भी सही। क्या समाज सुधार का इतिहास भी ऐसा ही नहीं है? इस पर गौर करें तो हम इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि श्रद्धा की जाँच करना और जिन्हें वह श्रद्धा सामाजिक जीवन के लिए अनिष्ट व अनुचित लगती है, उन्हें उन श्रद्धाओं के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष के लिए संगठित करने की आजादी आज की बड़ी जरूरत है।
अंधविश्वास उन्मूलन के बारे में सुधीजन एक सलाह और देते हैं कि असहमति जताओ लेकिन विरोध मत करो। लेकिन सामाजिक परिवर्तन के लिए असहमति तक सीमित रहना संभव नहीं है। उसके लिए सक्रिय आंदोलन की जरूरत होती है। सचेत संघर्ष की जरूरत होती है। इस पुस्तक में ऐसे ही संघर्षों का विवरण डॉ. नरेंद्र दाभोलकर ने अपने शब्दों में दिया है। ‘बोलता पत्थर’, ‘लंगर का चमत्कार’, ‘कमर अली दरवेश की पुकार’, ‘अनुराधा देवी की बंद मुट्ठी’ और अन्य ऐसी ही अंधविश्वास-पूर्ण गतिविधियों के विरुद्ध डॉ. नरेंद्र दाभोलकर और उनके संगठन के ये आंदोलन निस्संदेह पठनीय है।
Aaydakki Marayya-Aaydakki Lakkamma
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

-
Description:
अहंकार की भक्ति से धन का नाश
क्रियाहीन बातों से ज्ञान का नाश
दान दिए बिना दानी कहलाना केश बिना शृंगार जैसा
दृढ़ताहीन भक्ति तलहीन कुंभ में पूजा जल भरने जैसी
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को यह न छूनेवाली भक्ति है॥
कायक की कमाई समझ भक्त दान की कमाई से
दासोह कर सकते हैं कभी?
इक मन से लाकर इक मन से ही
मन बदलने से पहले ही
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग को
समर्पित करना चाहिए मारय्या॥
जो मन से शुद्ध नहीं, उसमें धन की ग़रीबी हो सकती है,
चित्त शुद्धि से कायक करनेवाले
सद्भक्तों को तो जहाँ देखो वहाँ लक्ष्मी अपने आप मिलेगी
मारय्यप्रिय अमरेश्वरलिंग की सेवा में लगे रहने तक॥
—लक्कमा
कायक में मग्न हो तो
गुरुदर्शन को भी भूलना चाहिए।
लिंग पूजा को भी भूलना चाहिए।
जंगम सामने होने पर भी उसके दाक्षिण्य में न पड़ना चाहिए।
कायक ही कैलास होने के कारण
अमरेश्वरलिंग को भी कायक करना है॥
—मारय्या
दो नयनों की भक्ति एक दृष्टि में देखने की तरह सती-पति एक भक्ति में देखने से गुहेश्वर को भक्ति स्वीकार है।
Baseshwar
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

-
Description:
निर्बलों की सहायता करना ही सबलों का कर्तव्य है। उसी से सुखी समाज की स्थापना हो सकती है। सभी धर्मों के मूल में दया की भावना ही प्रमुख है। बसवेश्वर के एक वचन का यही भाव है—दया के बिना धर्म कहाँ? सभी प्राणियों के प्रति दया चाहिए। दया ही धर्म का मूल है, दया-धर्म के पथ पर जो नहीं चलता कूडलसंगमदेव को वह नहीं भाता।
बसवेश्वर की वचन रचना का उद्देश्य ही सुखी समाज की स्थापना था। चोरी, असत्य, अप्रामाणिकता, दिखावा, आडम्बर एवं अहंरहित समाज की स्थापना बसव का परम उद्देश्य था, जो निम्न एक वचन से स्पष्ट होता है—चोरी न करो, हत्या न करो, झूठ मत बोलो, क्रोध न करो, दूसरों से घृणा न करो, स्वप्रशंसा न करो, सम्मुख ताड़ना न करो, यही भीतरी शुद्धि है और यही बाहरी शुद्धि है, यही मात्र हमारे कूडलसंगमदेव को प्रसन्न करने का सही मार्ग है। हठ चाहिए शरण को पर-धन नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को पर-सती नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को अन्य देव को नहीं चाहने का, हठ चाहिए शरण को लिंग-जंगम को एक कहने का, हठ चाहिए शरण को प्रसाद को सत्य कहने का, हठहीन जनों से कूडलसंगमदेव कभी प्रसन्न नहीं होंगे।
Rigved : Mandal-1 Uttarardh
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

- Description: सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे। भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है। वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं। इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के पहले मंडल (उत्तरार्द्ध) का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Islam Ka Janam Aur Vikas
- Author Name:
Asghar Ali Engineer
- Book Type:

- Description: आरम्भिक काल में इस्लामी आन्दोलन समाज के कमज़ोर और पीड़ित व्यक्तियों की आकांक्षाओं को व्यक्त करता था। इसलिए यह जाँच–परख दिलचस्पी से ख़ाली नहीं होगी कि उसके आरम्भिक समर्थक कौन से लोग थे। अब्दुल–मुतअल–अस्सईदी नाम के एक मिस्री लेखक ने इस पर शोधकार्य किया है। वे कहते हैं कि नवस्थापित इस्लाम मूलत: युवकों का आन्दोलन था। जिन लोगों की उम्रें दर्ज मिलती हैं, उनमें एक बड़ा बहुमत हिजरत के समय 40 से कम उम्र का था। इन लोगों ने उससे कम–से–कम 8 या 10 साल पहले इस्लाम अपनाया था। पैग़म्बर मुहम्मद ने मक्का के अमीरों की जो तम्बीह की थी कि वे ज़ख़ीराबाज़ी न करें और अपनी दौलत पर न इठलाएँ, वह कुचले हुए लोगों, ग़ुलामों और यतीमों आदि को आकर्षक लगती थी। फिर भी उनके समर्थक सिर्फ़ इन्हीं वर्गों से नहीं आए। वे सभी ख़ाली हाथ लोग या ज़ोरदार क़बीलाई सम्बद्धताओं से वंचित तलछटिए लोग नहीं थे। वास्तव में उनमें से बहुत से लोग अग्रणी क़बीलों के थे। जिस तरह हमारे अपने वक़्त में सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक मगर वंचित होने के अहसास से भरे मध्यवर्गीय बुद्धिजीवी सामाजिक रूपान्तरण में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, उसी तरह पैग़म्बर मुहम्मद के अनुयायियों ने भी निभाई। ये लोग भी मक्का के समाज के मध्यवर्ती स्तरों से ताल्लुक़ रखते थे जहाँ एक ख़ासी बड़ी सीमा तक शत्रुतापूर्ण वर्गीय सम्बन्ध पैदा हो चुके थे।
Dattatreyagita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: तत्त्वं क्षेत्रं व्योमातीतमहं क्षेत्रज्ञ उच्यते। अहं कर्ता च भोक्ता च जीवन्मुक्तः स उच्यते॥ तत्त्व (सत्य) क्षेत्र (देह) से परे होता है और उसे क्षेत्रज्ञ (आत्मा) कहा जाता है। मैं कर्ता (क्रिया करनेवाला) और भोक्ता (भोग करनेवाला) हूँ। जो इस सत्य को जानता है, वही सच्चा जीवन्मुक्त कहलाता है।
Magh Mela
- Author Name:
Vincent Van Ross +2
- Book Type:

- Description: This might come as a surprise to many readers. But, this is indeed the very first book on Magh Mela. As of now, the only book relevant to Magh Mela that is available in the market is a reproduction of the chapter on Magh Mahatmaya appearing in Padma Purana. But, that is purely mythological in content and does not deal with many aspects of the Magh Mela as it plays out in Allahabad. Everybody has heard of Kumbh Mela. But, how many of us have heard of Magh Mela? Does it surprise you to learn that Kumbh Mela is nothing but Magh Mela that is celebrated every twelfth year and Ardh Kumbh is nothing but the sixth Magh Mela celebrated between two Kumbh Melas? In other words, a mini version of the Kumbh Mela is celebrated in Allahabad year after year in the form of Magh Mela which goes almost unnoticed and unreported outside of Allahabad and Uttar Pradesh. Magh Mela is an incredible annual phenomenon in Allahabad (Prayag) from time immemorial. It is a monthlong Hindu festival that is celebrated in the month of Magh at Sangam or the confluence of rivers Ganga, Yamuna and the mythical river Saraswati. Magh Mela is marked by (snan) ritual bathing and taking up temporary residence near Sangam in the month Magh and leading an austere life devoted to prayers and rituals (kalpavas) according to their vows. The month of Magh begins with Paush Purnima and ends with Magh Purnima. But, the Magh Mela begins on Makkar Sankranti or Paush Purnima (whichever is earlier) and ends with Maha Shivaratri because of administrative reasons. Lord Vishnu is the presiding deity of Allahabad as well as the month of Magh which is considered to be the most auspicious month for Hindus. Allahabad is also known as Tirthraj Prayag. In other words, Allahabad is the king of pilgrimage sites for Hindus. Separate chapters are devoted to the most auspicious months of the Hindu calendar in the Puranas in the form of Vaishak Mahatmaya, Kartik Mahatmaya and Magh Mahatmaya explaining the significance of each month. The most important ritual for Vaishak is charity (daan). Similarly, the main ritual for Kartik is offerings in the form of earthen lamps (deep daan); and, the main ritual for Magh is ritual bathing (snan). Therefore, Magh Mela is essentially a bathing festival coupled with kalpavas. And, Tirthraj Prayag is the sacred land that has been designated for Magh Mela by Hindu scriptures. That is the secret of Magh Mela.
Siddharameshwara : Vyakti-Kriti
- Author Name:
Kashinath Ambalge
- Book Type:

- Description: वाचन से जो अनुभवी नहीं होता वह प्रेत है, वाचन से जो अनुभवी होता है वह पंडित है। विद्या तो परिश्रमी के वश में है, विद्या-अविद्या की पहचान से जग के लिए वेदज्ञ हो सका तो वही महापंडित है। हे कपिलसिद्ध मल्लिकार्जुन! भक्त का मन कामिनी में अनुरक्त होता है तो विवाह कर संग रहना चाहिए, भक्त का मन भूमि पर अनुरक्त होता है तो प्राप्त कर घर बनाना चाहिए, भक्त का मन कनक में अनुरक्त होता है तो सप्रयास प्राप्त करना चाहिए, हे कपिलसिद्ध मल्लिकार्जुन!
Gorakh-Vijay
- Author Name:
Brajendra Kumar Singhal
- Book Type:

- Description: ‘गोरख विजय' नाथपंथ के महान योगी गुरु गोरखनाथ से सम्बन्धित पुरातन बाग्रा काव्य ग्रन्थ ‘गोर्ख विजय’ का हिन्दी अनुवाद और समीक्षात्मक पर्यालोचन प्रस्तुत करनेवाली कृति है। गोरखनाथ ने अपने साधनामय जीवन और कल्याणमय दर्शन से तत्कालीन जन-समाज को अत्यन्त प्रभावित-प्रेरित किया था। उन्होंने द्वैताद्वैत-विलक्षण अद्वैतवाद का समर्थन किया लेकिन संसार को मिथ्या मानने से इनकार किया। उन्होंने मोक्ष का साधन योग को माना और योग को अष्टांग न मानकर षडंग माना। वस्तुतः यम-नियम को उन्होंने, साधक हो या सामान्य-जन, मनुष्य मात्र का कर्तव्य और दायित्व बताया जिनमें परिपक्वता के बाद ही आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि की सिद्धि सम्भव है। ऐसी अनेकानेक बातों को जानने-समझने के लिए ‘गोरख विजय’ एक अत्यन्य उपयोगी ग्रन्थ है। प्रस्तुत पुस्तक का एक और उल्लेखनीय पक्ष यह है कि इसमें बंगाल के लोक समाज में प्रचलित गोरखनाथ सम्बन्धी कई लोकगाथाएँ और कुछ अन्य प्रासंगिक सामग्री भी दी गई हैं जिनसे गोरखपंथी साधना के नये आयाम खुलते हैं। वस्तुतः साधक हो या साहित्यिक, विद्वान हो या सामान्य पाठक, गोरखनाथ में दिलचस्पी रखनेवाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
Shri Hanuman Chalisa | Devotional & Spirituality Prayer of Lord Hanuman Book in Hindi
- Author Name:
Kishor Makwana::Rasikba Kesariya
- Rating:
- Book Type:

- Description: श्री हनुमान चालीसा भगवान् श्रीराम तक पहुँचने का एक मार्ग है। जन-मानस में व्याप्त श्रीहनुमान चालीसा कोई सिद्ध कर ले, नित्य सौ बार पठन करे तो हनुमानजी उसकी सब इच्छा-आकांक्षा पूर्ण करते हैं, ऐसी मान्यता है। मनुष्य के जीवन को सफल बनानेवाली ये रत्नमणिकाएँ हैं। श्रीहनुमानजी का संपूर्ण चरित्र हम सबमें श्रद्धा, विश्वास, ज्ञान, शक्ति, पुरुषार्थ, भक्ति, सत्य, प्रामाणिक प्रयत्न, समर्पण भाव, पराक्रम, संस्कार- संपन्न वाणी, विवेक और निष्काम कर्म जीवन में सफलता प्राप्ति के लिए अनेक गुणों का सिंचन करता है।
Bhagwan Mahavir Swami
- Author Name:
M.A. Sameer
- Book Type:

- Description: विश्व का कल्याण करने वाले महापुरुषों में भगवान् महावीर का नाम बड़े सम्मान एवं श्रद्धा के साथ लिया जाता है। उनका संपूर्ण जीवन मानव-समाज के लिए आदर्श है। राजवंशी होकर भी उन्होंने समस्त सांसारिक यश-वैभव का परित्याग कर अत्यंत साधारण जीवन व्यतीत करने का संकल्प लिया। भगवान् महावीर ने कठिन साधना व तप के बल पर समस्त इंद्रियों को विजित कर लिया था। इसी कारण उन्हें 'जितेंद्रिय' कहा गया। वे धैर्य, क्षमा, संयम और सहनशीलता की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। भगवान् महावीर आजीवन लोगों को सत्य, अहिंसा और सदाचरण का उपदेश देते रहे। उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य ही 'अहिंसा परमो धर्मः' था। आज भी उनका जीवन-दर्शन संपूर्ण विश्व-समाज के कल्याण हेतु अनुकरणीय है। भगवान् महावीर स्वामी की प्रेरक व पठनीय जीवनी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book