Hindu Devi Devta
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हिंदू धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। हिंदू धर्मग्रंथों—वेद, पुराण, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, गीता आदि ने संपूर्ण मानव जाति को दिशा दिखाई है तथा जीवन में आदर्श और नैतिकता का मार्ग प्रशस्त किया है। इस उच्च धर्म के वाहक चौंसठ करोड़ देवी-देवता हैं। विद्या की देवी माँ सरस्वती हैं, धन-धान्य की देवी माँ लक्ष्मी हैं, शक्ति की प्रतीक माँ दुर्गा हैं। ब्रह्माजी जन्मदाता हैं, विष्णु पालक और शिवजी संहारक। हिंदू धर्म उपासक अपनी श्रद्धा और भक्ति में सराबोर होकर अपने इष्ट देवी-देवता की पूजा-अर्चना करते हैं। वही अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं, उनका कल्याण करते हैं। इस ग्रंथ में विद्वान् लेखक ने हिंदू धर्म के कुछ प्रमुख देवी-देवताओं के अलौकिक जीवन की झाँकी प्रस्तुत की है, जो श्रद्धा और भक्ति के आकाश को नया क्षितिज प्रदान करेगी। आस्था, विश्वास और समर्पण का भाव जगानेवाली पठनीय व मननीय कृति।
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हिंदू धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है। हिंदू धर्मग्रंथों—वेद, पुराण, उपनिषद्, रामायण, महाभारत, गीता आदि ने संपूर्ण मानव जाति को दिशा दिखाई है तथा जीवन में आदर्श और नैतिकता का मार्ग प्रशस्त किया है।
इस उच्च धर्म के वाहक चौंसठ करोड़ देवी-देवता हैं। विद्या की देवी माँ सरस्वती हैं, धन-धान्य की देवी माँ लक्ष्मी हैं, शक्ति की प्रतीक माँ दुर्गा हैं। ब्रह्माजी जन्मदाता हैं, विष्णु पालक और शिवजी संहारक।
हिंदू धर्म उपासक अपनी श्रद्धा और भक्ति में सराबोर होकर अपने इष्ट देवी-देवता की पूजा-अर्चना करते हैं। वही अपने भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं, उनका कल्याण करते हैं।
इस ग्रंथ में विद्वान् लेखक ने हिंदू धर्म के कुछ प्रमुख देवी-देवताओं के अलौकिक जीवन की झाँकी प्रस्तुत की है, जो श्रद्धा और भक्ति के आकाश को नया क्षितिज प्रदान करेगी। आस्था, विश्वास और समर्पण का भाव जगानेवाली पठनीय व मननीय कृति।
Book Details
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ISBN9788177211276
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Pages304
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Avg Reading Time10 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
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वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।
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