🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Hadapada Appanna-Lingam

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

ध्यान करना चाहूँ तो क्या ध्यान करूँ। मन तेजोहीन धुँधला पड़ गया था, तन शून्य हो गया था। कायक गुण गल चुका। देह से अहं मिट गया था। अपने आपसे प्रकाश में झूमते मैं सुखी बनी अप्पण्णाप्रिय चन्नबसवण्णा॥   मन याद कर रहा है। बुरी विषय वासना की ओर मन बहक रहा है। डाली की चोटी की ओर जा रहा है मन मन किसी भी नियम में बँधता नहीं, छोड़ देने पर मन जाता भी नहीं। अपनी इच्छा पर मनमानी करते मन को नियम में बाँधकर लक्ष्य में स्थिर करके शून्य में विहरनेवाले शरणों के चरणों में मैं समा रही अप्पण्णाप्रिय चन्नबसवण्णा॥ —लिंगम्मा   घास-फूस-कचरा निकालकर स्वच्छ किए हुए खेत में कूड़ा-करकट बोनेवाले पागलों की तरह विषय-सुखों के झूठे भ्रम में लोलुप होकर तकलीफ़ में पड़नेवाले मनुष्य कैसे जान सकते महाघन गुरु के स्वरूप को? मरण बाधा में पड़नेवाले आपको कैसे जान सकते हैं बसवप्रिय कूडल चन्नबसवण्णा? ॥   भूख मिटाने अन्न स्वीकार करते हैं, विषय के मोह में झूठ बोलते हैं, नए-नए व्यसन में पड़कर भस्म धारण करके सारा विश्व घूमते हैं। इस मिथ्या को छोड़कर, माया के धुँधलेपन को दूर किए बिना नहीं समा सकता हमारा बसवप्रिय कूडल चन्नबसवण्णा॥     —अप्पण्‍णा

Read more

₹ 300

240 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Hadapada Appanna-Lingam This book ₹240
Molige Maarayya : Molige Mahadevi Kashinath Ambalge ₹300
Siddharameshwara : Vyakti-Kriti Kashinath Ambalge ₹300
3 books selected ₹900 ₹840

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

ध्यान करना चाहूँ तो क्या ध्यान करूँ।

मन तेजोहीन धुँधला पड़ गया था, तन शून्य हो गया था।

कायक गुण गल चुका। देह से अहं मिट गया था।

अपने आपसे प्रकाश में झूमते मैं सुखी बनी

अप्पण्णाप्रिय चन्नबसवण्णा॥

 

मन याद कर रहा है।

बुरी विषय वासना की ओर मन बहक रहा है।

डाली की चोटी की ओर जा रहा है मन

मन किसी भी नियम में बँधता नहीं,

छोड़ देने पर मन जाता भी नहीं।

अपनी इच्छा पर मनमानी करते मन को नियम में बाँधकर

लक्ष्य में स्थिर करके शून्य में विहरनेवाले

शरणों के चरणों में मैं समा रही

अप्पण्णाप्रिय चन्नबसवण्णा॥

—लिंगम्मा

 

घास-फूस-कचरा निकालकर स्वच्छ किए

हुए खेत में कूड़ा-करकट बोनेवाले पागलों की तरह

विषय-सुखों के झूठे भ्रम में लोलुप होकर

तकलीफ़ में पड़नेवाले मनुष्य कैसे जान सकते

महाघन गुरु के स्वरूप को?

मरण बाधा में पड़नेवाले आपको कैसे जान सकते हैं

बसवप्रिय कूडल चन्नबसवण्णा? ॥

 

भूख मिटाने अन्न स्वीकार करते हैं,

विषय के मोह में झूठ बोलते हैं,

नए-नए व्यसन में पड़कर

भस्म धारण करके सारा विश्व घूमते हैं।

इस मिथ्या को छोड़कर, माया के धुँधलेपन को दूर किए बिना

नहीं समा सकता हमारा बसवप्रिय कूडल चन्नबसवण्णा॥    

—अप्पण्‍णा

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2020
Weight
232 grams
ISBN-13
9789389742015
Pages
96
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp