Hindu Dharma And Sanskriti
Author:
Dr. Sadanand Damodar SaprePublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Available
DHARMA and RELIGION are altogether different conceptions. Even as per the Oxford dictionary, ‘DHARMA’ means “eternal law of Universe” whereas ‘RELIGION’ means “a particular way of worship and faith.”
All of these rules, laws etc. [pertaining to Dharma] have been observed, understood and realised by the people known as Hindu and hence Dharma is known as Hindu Dharma. However, these rules-laws etc. are applicable to every human being (Manav) all over the world (Vishwa), not confined only to Hindus. Hence, Hindu Dharma is Manav Dharma or Vishwa Dharma – the global ethics applicable to the entire humankind.
If we look at the things which are considered as very sacred/pious in Hindu Dharma, it can be seen that each one of them possesses special qualities which are quite unique and useful for humankind.
The Hindu Sanskriti has a special feature of wishing the well-being of ALL human beings (not just Hindus).
ISBN: 9789390900268
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: "हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ ‘रामचरितमानस’ के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास को उत्तर भारत के घर-घर में अकूत सम्मान प्राप्त है। राम की अनन्य भक्ति ने उनका पूरा जीवन राममय कर दिया था। हालाँकि उनका आरंभिक जीवन बड़ा कष्टपूर्ण बीता, अल्पायु में माता के निधन ने उन्हें अनाथ कर दिया। उन्हें भिक्षाटन करके जीवन-यापन करना पड़ा। धीरे-धीरे वह भगवान् श्रीराम की भक्ति की ओर आकृष्ट हुए। हनुमानजी की कृपा से उन्हें राम-लक्ष्मण के साक्षात् दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके बाद उन्होंने ‘रामचरितमानस’ की रचना आरंभ की। ‘रामलला नहछू’, ‘जानकीमंगल’, ‘पार्वती मंगल’, ‘कवितावली’, ‘गीतावली’, ‘विनयपत्रिका’, ‘कृष्ण गीतावली’, ‘सतसई दोहावली’, ‘हनुमान बाहुक’ आदि उनके प्रसिद्ध ग्रंथ हैं। यह पुस्तक उन्हीं तुलसी को समर्पित है, जो अपनी रचनाओं द्वारा हमारा मार्गदर्शन करते हैं, हमें सामाजिक व आध्यात्मिक रूप से श्रेष्ठ बनने की शिक्षा देते हैं। तुलसी की वाणी, उनकी रचनाएँ मन को छू लेनेवाली हैं; हमें मार्ग दिखानेवाली हैं। इनका संदेश हमारा पाथेय है।"
Shri Ramcharitmanas : dwitya sopan Ayodhyakand
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindutva Evam Rashtriya Punarutthan
- Author Name:
Subramaniam Swamy
- Book Type:

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