Allamprabhu : Pratibha Ka Shikhar
(0)
Author:
Kashinath AmbalgePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
300
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अज्ञान रूपी पालने में</p> <p>ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर</p> <p>सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला,</p> <p>झुलाती हुई पालने</p> <p>लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई!</p> <p>जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे</p> <p>लोरी बन्द न हो</p> <p>तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥</p> <p> </p> <p>अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास रखते हैं कि ‘नि:शब्द ज्ञान क्या शब्दों की साधना से सम्भव है?’</p> <p> </p> <p>बहती नदी को देह भर पाँव</p> <p>जलती आग को देह भर जिह्वा</p> <p>बहती हवा को देह भर हाथ</p> <p>अतः गुहेश्वर, तेरे शरण का सर्वांग लिंगमय है॥
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अज्ञान रूपी पालने में</p>
<p>ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर</p>
<p>सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला,</p>
<p>झुलाती हुई पालने</p>
<p>लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई!</p>
<p>जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे</p>
<p>लोरी बन्द न हो</p>
<p>तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥</p>
<p> </p>
<p>अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास रखते हैं कि ‘नि:शब्द ज्ञान क्या शब्दों की साधना से सम्भव है?’</p>
<p> </p>
<p>बहती नदी को देह भर पाँव</p>
<p>जलती आग को देह भर जिह्वा</p>
<p>बहती हवा को देह भर हाथ</p>
<p>अतः गुहेश्वर, तेरे शरण का सर्वांग लिंगमय है॥
Book Details
-
ISBN9788194364870
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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