Allamprabhu : Pratibha Ka Shikhar
(0)
Author:
Kashinath AmbalgePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
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अज्ञान रूपी पालने में</p> <p>ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर</p> <p>सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला,</p> <p>झुलाती हुई पालने</p> <p>लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई!</p> <p>जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे</p> <p>लोरी बन्द न हो</p> <p>तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥</p> <p> </p> <p>अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास रखते हैं कि ‘नि:शब्द ज्ञान क्या शब्दों की साधना से सम्भव है?’</p> <p> </p> <p>बहती नदी को देह भर पाँव</p> <p>जलती आग को देह भर जिह्वा</p> <p>बहती हवा को देह भर हाथ</p> <p>अतः गुहेश्वर, तेरे शरण का सर्वांग लिंगमय है॥
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अज्ञान रूपी पालने में</p>
<p>ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर</p>
<p>सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला,</p>
<p>झुलाती हुई पालने</p>
<p>लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई!</p>
<p>जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे</p>
<p>लोरी बन्द न हो</p>
<p>तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥</p>
<p> </p>
<p>अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास रखते हैं कि ‘नि:शब्द ज्ञान क्या शब्दों की साधना से सम्भव है?’</p>
<p> </p>
<p>बहती नदी को देह भर पाँव</p>
<p>जलती आग को देह भर जिह्वा</p>
<p>बहती हवा को देह भर हाथ</p>
<p>अतः गुहेश्वर, तेरे शरण का सर्वांग लिंगमय है॥
Book Details
-
ISBN9788194364870
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Chandrashekhar Singh
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- Description: प्रस्तुत पुस्तक में सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र की कुछ ऐसी ही कहानियों को संगृहीत किया गया है, जिनके द्वारा धर्म, सत्यता, संस्कार और प्रेम का ज्ञान प्रकट होता है। सरल भाषा एवं सुंदर चित्रों के साथ पुस्तक को आकर्षक एवं उपयोगी बनाने का प्रयास किया गया है। हमें आशा ही नहीं, पूर्ण विश्वास है कि राजा हरिश्चंद्र के जीवन की प्रेरित ये कहानियाँ बाल पाठकों में अवश्य ही धर्म, संस्कृति एवं सत्यता का संचार करने में सहायक होंगी।
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