Allamprabhu : Pratibha Ka Shikhar
(0)
Author:
Kashinath AmbalgePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality₹
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अज्ञान रूपी पालने में</p> <p>ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर</p> <p>सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला,</p> <p>झुलाती हुई पालने</p> <p>लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई!</p> <p>जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे</p> <p>लोरी बन्द न हो</p> <p>तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥</p> <p> </p> <p>अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास रखते हैं कि ‘नि:शब्द ज्ञान क्या शब्दों की साधना से सम्भव है?’</p> <p> </p> <p>बहती नदी को देह भर पाँव</p> <p>जलती आग को देह भर जिह्वा</p> <p>बहती हवा को देह भर हाथ</p> <p>अतः गुहेश्वर, तेरे शरण का सर्वांग लिंगमय है॥
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अज्ञान रूपी पालने में</p>
<p>ज्ञान रूपी शिशु सुलाकर</p>
<p>सकल वेदशास्त्र रूपी रस्सी से बाँधकर झूला,</p>
<p>झुलाती हुई पालने</p>
<p>लोरी गा रही है, भ्रान्ति रूपी माई!</p>
<p>जब तक पालना न टूटे, रस्सी न कटे</p>
<p>लोरी बन्द न हो</p>
<p>तब तक गुहेश्वर लिंग के दर्शन नहीं होंगे॥</p>
<p> </p>
<p>अल्लम सृजनशीलता के प्रति विश्वास रखते हैं कि ‘नि:शब्द ज्ञान क्या शब्दों की साधना से सम्भव है?’</p>
<p> </p>
<p>बहती नदी को देह भर पाँव</p>
<p>जलती आग को देह भर जिह्वा</p>
<p>बहती हवा को देह भर हाथ</p>
<p>अतः गुहेश्वर, तेरे शरण का सर्वांग लिंगमय है॥
Book Details
-
ISBN9788194364870
-
Pages116
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: नव जीवन को समुन्नत और श्रेष्ठ बनाने तथा परमात्मा की कृपा पाने के लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने अनेक उपाय विकसित किए। मंत्र, प्रार्थना और स्तुति उनमें से एक है। वेदों में हजारों मंत्र विभिन्न देवी-देवताओं को संबोधित किए गए हैं। ये सभी देवी-देवता एक ही परमात्मा के विभिन्न नाम-रूप हैं। भक्त सांसारिक दुःखों से छुटकारा पाने और भवसागर से पार जाने के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ किसी भी देवी-देवता की स्तुति कर सकता है। छोटी सी प्रार्थना हमारे जीवन का रूपांतरण कर देती है। विदुषी लेखिका ने भक्तों के आध्यात्मिक उत्थान के लिए 160 लोकप्रिय मंत्रों और प्रार्थनाओं का संकलन उनके हिंदी-अंग्रेजी अर्थ सहित ‘स्तुति सुमन’ में किया है। इसमें इष्ट देवों की बहुलता और स्तुतियों की विविधता का पूरा ध्यान रखा गया है। जीवन के हर क्षण को धर्ममय बनाने के लिए जागरण, भोजन और शयन के मंत्रों को समाविष्ट किया गया है। गायत्री मंत्र, ओऽम्कार मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, सर्वकल्याण मंत्र, नवग्रह मंत्र और दीप-स्तुति आदि के द्वारा प्रार्थना के हर पक्ष को प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। हमें विश्वास है कि विभिन्न देवी-देवताओं और पूजा-अनुष्ठानों से संबंधित ये प्रार्थनाएँ हमारे समाज के आध्यात्मिक उत्थान में सहायक सिद्ध होंगी।
Baal Krishna
- Author Name:
Kamini Gayakwad
- Book Type:

- Description: कृष्ण की बाल लीलाएँ साहस, जिज्ञासा, मैत्री और प्रेम की कथाएँ हैं । इनमें नैतिकता और विवेकशीलता की शिक्षा है तो वैसा ही निर्मल हास्य और आनन्द भी है। शकटासुर गाड़ी का रूप धरकर कृष्ण को कुचलने आया था, लेकिन कृष्ण ने उसे अच्छा सबक सिखाया। तृणावर्त बवंडर बनकर उन्हें उड़ाने आया था। कृष्ण ने अपना वज़न इतना बढ़ाया कि वह धरती पर गिर पड़ा। कालिया नाग और पूतना की कहानियाँ भी ऐसी ही मज़ेदार है। सुदामा की कहानी दोस्ती की मिसाल है। पुराण कथा
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