Swami Ramtirth Ke Prerak Vichar
(0)
₹
400
320 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"स्वामी रामतीर्थ एक महान तत्वज्ञानी और धर्मोपदेशक थे। उनका जन्म 2 अक्तूबर, 1873 को पंजाब के गुजराँवाला जिले के मुरारीवाला गाँव में हुआ था। सन् 1901 में स्वामी रामतीर्थ ने संन्यास का व्रत ले लिया और भगवा धारण करके निकल पड़े। संन्यास धारण करने के बाद वे दुनिया भर में वेदांत का प्रचार करने की तैयारी में जुट गए। उन्होंने शास्त्रों और पश्चिमी दर्शन का गहन अध्ययन किया। वेदांत का प्रचार करने के उद्देश्य से सन् 1902 में स्वामी रामतीर्थ जापान गए। स्वामी रामतीर्थ अद्वैत वेदांत को अत्यंत सरल करके जनमानस के समक्ष इस तरह से रखा कि साधारण बुद्धिवाला व्यक्ति भी उससे लाभान्वित हो सके। उन्होंने मनुष्य को त्याग, आत्मविश्वास, कर्म, निष्ठा, निर्भयता, दृढ़ता, एकता और विश्व-प्रेम की व्यावहारिक शिक्षा देकर सत्य और मुक्ति का मार्ग दिखाया। स्वामी रामतीर्थ का संपूर्ण जीवन एवं उनके विचार मानव-जाति के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं, जिसकी सहायता से मानव अपने जीवन-लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकते हैं।"
Read moreAbout the Book
"स्वामी रामतीर्थ एक महान तत्वज्ञानी और धर्मोपदेशक थे। उनका जन्म 2 अक्तूबर, 1873 को पंजाब के गुजराँवाला जिले के मुरारीवाला गाँव में हुआ था।
सन् 1901 में स्वामी रामतीर्थ ने संन्यास का व्रत ले लिया और भगवा धारण करके निकल पड़े। संन्यास धारण करने के बाद वे दुनिया भर में वेदांत का प्रचार करने की तैयारी में जुट गए। उन्होंने शास्त्रों और पश्चिमी दर्शन का गहन अध्ययन किया। वेदांत का प्रचार करने के उद्देश्य से सन् 1902 में स्वामी रामतीर्थ जापान गए।
स्वामी रामतीर्थ अद्वैत वेदांत को अत्यंत सरल करके जनमानस के समक्ष इस तरह से रखा कि साधारण बुद्धिवाला व्यक्ति भी उससे लाभान्वित हो सके। उन्होंने मनुष्य को त्याग, आत्मविश्वास, कर्म, निष्ठा, निर्भयता, दृढ़ता, एकता और विश्व-प्रेम की व्यावहारिक शिक्षा देकर सत्य और मुक्ति का मार्ग दिखाया।
स्वामी रामतीर्थ का संपूर्ण जीवन एवं उनके विचार मानव-जाति के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं, जिसकी सहायता से मानव अपने जीवन-लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकते हैं।"
Book Details
-
ISBN9789393111081
-
Pages175
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Devi | Unveiling The Mysteries Of The Divine Goddess: Exploring The Secrets Of Goddess
- Author Name:
Nirjharini Tripathy
- Book Type:

- Description: Prepare to be captivated by a story that transcends time, evoking a tapestry of emotions-from the heart-wrenching struggles of the past to the empowering triumphs of the present. 'Devi' is a celebration of resilience-a reminder of the power of women to create, nurture, and transform the world around them; not just a tale of survival. 'Devi' beautifully explores the sacred symbolism of water, from the confluence at Prayagraj to the sacred Ghats of Kashi, Triveni Sangam to Manikarnika, with the Ganges taking centre-stage, reverberating through the ages as a mother, a goddess, and a spiritual archetype. 'Devi' delves deeply into the teachings of the revered texts-the Vedas, Upanishads, Bhagavad Gita, and Shastras that shape the moral fabric of society. In the heart of Odisha's remote Sambalpur, set against the backdrop of the pandemic-stricken year of 2020, a profound narrative unfolds a journey that weaves together the threads of history, and the indomitable spirit of five generations of mothers and daughters, rendering the Navadurga : Shailaputri, Brahmacharini, Chandraghanta, Kushmanda, Skandamata, Katyayani, Kalaratri, Mahagauri, and Siddhidatri.
Vaidik Dharm Evam Shraman Parampara
- Author Name:
Akhand Pratap Singh
- Book Type:

-
Description:
वैदिक धर्म एवं श्रमण परम्परा में प्रवृत्ति एवं निवृत्तिमूलक धर्म के कालगत प्रवाह व प्रभाव का समालोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है जो विश्वविद्यालय स्तर पर स्नातकोत्तर के छात्रों का मार्गदर्शन कराने में सर्वथा उपयोगी है। पुस्तक में साहित्यिक व पुरातात्त्विक साक्ष्यों का यथास्थान उपयोग, तथ्य एवं चिन्तन का सन्निवेश, शोधपरक दृष्टि का समावेश और संस्कृतनिष्ठ भाषा का निर्वहन है।
इस पुस्तक का उद्देश्य ताम्राश्म काल (ई.पू. तृतीय सहस्त्राब्दी) से लेकर 12वीं, 13वीं शती ईस्वी सन् अर्थात् पूर्वमध्यकाल तक हुए धर्म-दर्शन के विकास का कालक्रमानुसार विवेचन है।
प्रामाणिक इतिहास हेतु जहाँ एक ओर वैदिक संहिताओं, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद् एवं पुराण साहित्य आदि का आश्रय लिया गया, वहीं दूसरी ओर पुरातात्त्विक सामग्रियों जैसे, मुहरें, मूर्तियाँ, मुद्राएँ एवं भित्ति-चित्रों से प्राप्त सूचनाओं का समावेश किया गया है।
Raman Maharshi
- Author Name:
Anita Gaur
- Book Type:

- Description: "साधना में अभिरुचि रखनेवालों के लिए श्री रमण महर्षि का नाम जाना-पहचाना है। भारत के आध्यात्मिक क्षितिज पर पिछले कुछ वर्षों में जिन नक्षत्रों का उदय हुआ है, उनमें श्री रमण महर्षि का नाम विशेष उल्लेखनीय है। उन्होंने अपने जीवन तथा कार्यों से भारत का नाम आलोकित किया है। भारत के अलावा पश्चिम के कई देशों में अपना उजाला फैलाकर रमण महर्षि ने देश को गौरवान्वित किया है तथा मानव-जाति की बहुमूल्य सेवा की है। 30 दिसंबर, 1879 को सोमवार के दिन आधी रात के लगभग एक घंटे बाद एक जाने-माने प्राचीन ब्राह्मण कुल में जन्म हुआ उस अद्भुत बालक का, जिसे बाद में पूरी दुनिया ने भगवान् श्री रमण महर्षि के नाम से जाना। उन्होंने साधारण जनों को रास्ता बताया कि मानव को उसके दैनिक कार्यों को करते हुए किस प्रकार उस परम तत्त्व की वंदना करनी है, कैसे आत्मा की शुद्धि करके जन्म-मरण के चक्करों से पार पाना है। यदि हम अपने दायित्वों का निर्वाह ही नहीं कर सकते तो हमें इस पृथ्वी पर मानव बनकर रहने का क्या अधिकार है! इस जगत् में ज्ञान की वास्तविक परिभाषा, जीवन की गहराइयाँ महर्षि रमण जैसे ज्ञानी पुरुषों ने ही हमें समझाई है। आध्यात्मिकता के मार्ग का दिग्दर्शन करनेवाले श्री रमण महर्षि की प्रेरणाप्रद जीवनगाथा।
Shrimad Bhagavadgita Mein Karma Aur Netratva Siddhant | Shrimad Bhagwat Geeta Hindi
- Author Name:
Dr. Asmika Sinha
- Book Type:

- Description: We read the dialogue between Shri Krishna and Arjuna and these teachings of Shri Krishna as the Srimad Bhagavad Gita. Shrimad Bhagavad Gita means the song of wisdom sung by God. We can see Shri Krishna not only as Arjuna's charioteer, but also as the charioteer of our lives. By following the path shown by him, we can find relief from all the worries and sorrows of life. The Bhagavad Gita is like a continuously flowing river of ideas and knowledge, irrigating Indian culture for ages and giving the message of moving forward on the path of action. Its ocean of knowledge is deep and vast; the more we immerse ourselves in it, the more pearls of wisdom we receive. The Bhagavad Gita, a journey of knowledge, defines action and leadership in seven chapters; this is the aim of this book. Like almost every major religious text in India, the Gita cannot be accurately dated to its composition. However, it appears to have been composed later than the 'classical' Upanishads, with the possible exception of Maitri, and to have been a work of Buddhism post-dating the period. It is clear from materials dating from the fifth and second centuries BCE that the major teachings of both the Upanishads and early Buddhism were similar to those of the Gita, as was the dualistic teaching, commonly known as Samkhya, later defined in the Samakhya-karika Ishakrpa.
Bhagwatigita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
- Book Type:

- Description: Bhagwati gita
Divine Power
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
- Book Type:

- Description: Divine Power: How to Connect with the Divine Within You is a book about spirituality, self-care, and how to find your own way. It's about finding your divine power and using it to live a life you love.This book is meant to help you understand the importance of connecting with your own inner divinity--and why we all need it. It will guide you through the process of finding your own way, no matter where that may lead.
Prayagraj: Ardhkumbh, Kumbh, Mahakumbh
- Author Name:
Kumar Nirmalendu
- Book Type:

- Description: भक्ति, तीर्थ, धर्म, ब्रह्म और मोक्ष की अवधारणा को समझे बिना भारत और उसकी चेतना को समझ पाना सम्भव नहीं है। भारत में जहाँ कहीं भी देवनदी के एक से अधिक प्रवाह एक साथ मिलकर बहने लगते हैं, धाराओं का वह मिलन-स्थान ‘प्रयाग’ बन जाता है। हिमालय क्षेत्र में पंचप्रयाग तीर्थ ऐसे ही बने हैं। परन्तु जहाँ गंगा, यमुना और सरस्वती की तीन धाराओं का मिलन होता है, उस स्थान को प्रयागराज कहा गया है। यहाँ प्रतिवर्ष माघ स्नान के लिए, प्रति 6 वर्ष पर अर्धकुम्भ स्नान के लिए, प्रति 12 वर्ष पर कुम्भ स्नान के लिए और प्रति 144 वर्ष पर महाकुम्भ स्नान के लिए असंख्य लोग आते हैं। भाषा, जाति, प्रान्त आदि के भेदों को भुलाकर एक जन-समुद्र उमड़ आता है। भारतीय जीवन पद्धति में अमृतत्त्व का अनुसन्धान मानव जीवन का चरम लक्ष्य रहा है। अर्धकुम्भ, कुम्भ या महाकुम्भ के अवसर पर एकत्र होने वाला अपार जनसमुदाय सम्भवतः अमृत से भरे कुम्भ की अपनी अव्यक्त अभिलाषा को लेकर ही यहाँ पहुँचता है। प्रयागराज भारत का प्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र होने के साथ ही भारतीय सात्विकता का सर्वोत्तम प्रतीक भी है। कुम्भ सम्बन्धी पौराणिक मान्यता का सर्वाधिक प्रचार शंकराचार्य ने किया था। लेकिन आदि शंकराचार्य के पूर्व भी प्रयाग में कुम्भ का आयोजन होता रहा है। इसका सबसे पुराना ऐतिहासिक वर्णन ह्वेनत्सांग (7वीं सदी ई.) ने किया था। उस समय प्रयाग के त्रिवेणी संगम पर दुनिया भर से ऋषि-मुनि, राजा-महाराजा, सामन्त, कलाविद् और धर्मप्राण लोग लाखों की संख्या में एकत्र हुए थे। कुम्भ के दौरान संगम तीर्थ पर एक स्नान दिवस पर भक्तिभाव से कई बार इतने लोग जमा हो जाते हैं कि उनकी संख्या दुनिया के कई देशों की कुल जनसंख्या से भी अधिक होती है। श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति की एक अदृश्य डोर में बँधकर खिंचे चले आते हैं। श्रद्धा और आस्था का यह आवेग सदियों से चली आ रही हमारी परम्परा का हिस्सा है। प्रयागराज और कुम्भ की गौरवशाली परम्परा के बारे में जानना एक सुखद अनुभूति है।
CHAITANYA MAHAPRABHU
- Author Name:
Rachna Bhola Yamini
- Book Type:

- Description: चैतन्य महाप्रभु का बचपन का नाम विश्वंभर था। उनका जन्म चंद्रग्रहण के दिन हुआ था। लोग चंद्रग्रहण के शाप के निवारणार्थ धर्म-कर्म, मंत्र आह्वान, ओ३म् आदि जप-तप में जुटे हुए थे। शायद इस धार्मिक प्रभाव के कारण ही चैतन्य बचपन से ही कृष्ण-प्रेम और जप-तप में जुट गए। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी कर दी थी कि यह बालक उच्च कोटि का संत बनेगा और अपने भक्तों को संसार-सागर से तार देगा। बचपन से ही चैतन्य कुशाग्र बुद्धि के थे। उन्होंने अपने अकाट्य तर्कों से स्थानीय पंडितों को दर्शन और अध्यात्म चर्चा में धराशायी कर दिया था। बाद में वैष्णव दीक्षा लेने के पश्चात् चैतन्य दार्शनिक चर्चा के प्रति उदासीन हो गए। उन्होंने कृष्ण नाम-कीर्तन आरंभ कर दिया। चैतन्य ने कलियुग में भक्तियोग को मुक्ति का श्रेष्ठ मार्ग बताया है। उनकी लोकप्रियता से खिन्न होकर एक बार एक पंडित ने उन्हें शाप देते हुए कहा, ‘तुम सारी भौतिक सुविधाओं से वंचित हो जाओ।’ यह सुनकर चैतन्य खुशी से नाचने लगे। माता-पिता ने उन्हें घर-गृहस्थी की ओर मोड़ने के लिए उनका विवाह भी कर दिया, लेकिन उन्होंने गृह त्याग दिया, अब सारी दुनिया ही उनका घर थी। भगवान् कृष्ण के अनन्य उपासक, आध्यात्मिक ज्ञान की चरम स्थिति को प्राप्त हुए चैतन्य प्रभु की ईश्वर-भक्ति की सरस जीवन-गाथा जो पाठक को भक्ति की पुण्यसलिला में सराबोर कर देगी।
Krishna
- Author Name:
Kamini Gayakwad
- Book Type:

- Description: The childhood stories of Lord Krishna attract children a lot. The book stores the captivating world of village, river, forest, mountain, cow and cowherd. There are games, friendship, admiration, fears and courage. This world seems to be an extension of children's imagination in this book.
Ramayan Ki Kahani, Vigyan Ki Zubani
- Author Name:
Saroj Bala
- Book Type:

- Description: This Book Doesn't have a Description.
Hindutva
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: Hindutva is a geo-cultural concept that embodies respect, a sense of place, and the feeling of coexistence for everyone. This synchronicity-oriented cultural consciousness has made it quite liberal, tolerant, and flexible. The situation deteriorated when external invaders took advantage of the liberality of this overly tolerant culture and started to cut at its very roots. The excessive permissiveness of Hindutva was misinterpreted as cowardice, leading to a concerted effort to destroy all its fundamental elements. Even today, various conspiracies are being devised with a similar aim. Forbearance has rendered the supporters and followers of ‘Hindutva’, or ‘Indianness’, indifferent, impotent, and fatalistic. The common-good-oriented philosophy of self-righteousness does not imply that, in this world and in our behavior, we should forget our duty to ourselves and neglect self-defense. The policy of abandonment in the face of invaders has nothing to do with the philosophy and principle of coexistence and tolerance. Every time Hindutva failed to confront invading enemies, its supporters not only suffered humiliation but also lived under subjugation. Hindutva is so devoted to the pursuit of truth that it does not compromise on any account. For Hindutva, the existence of this world is not the ultimate truth; rather, it is an illusion. In other words, what exists in reality is simply a manifestation of an eternal and true non-dual Brahman. —From this book
Death: An Inside Story
- Author Name:
Sadhguru
- Rating:
- Book Type:

- Description: Death is a taboo in most societies in the world. But what if we have got this completely wrong? What if death was not the catastrophe it is made out to be but an essential aspect of life, rife with spiritual possibilities for transcendence? For the first time, someone is saying just that. In this unique treatise-like exposition, Sadhguru dwells extensively upon his inner experience as he expounds on the more profound aspects of death that are rarely spoken about. From a practical standpoint, he elaborates on what preparations one can make for one’s death, how best we can assist someone who is dying and how we can continue to support their journey even after death. Whether a believer or not, a devotee or an agnostic, an accomplished seeker or a simpleton, this is truly a book for all those who shall die!
Shri Hanuman Chalisa Rahasy
- Author Name:
Shailesh Tiwari
- Rating:
- Book Type:

- Description: Book
Tere Dar Pe : Bhakti Ke Naye Drishtikon
- Author Name:
Rajesh P Meshwari
- Book Type:

- Description: हर प्राणी का अपना धर्म होता है। उसका मूल स्वभाव होता है। जैसे किसी विषैले जीव का धर्म है काटना या विष वमन करना। मनुष्य का धर्म है—करुणा और क्षमा। संस्कृति हमें यही सिखाती है कि हम जगत् के समस्त प्राणियों से करुणा करें, उन्हें क्षमा करें। यदि किसी विषैले जीव को भी हम मारते हैं, तो यह हमारे धर्म के प्रतिकूल है। वह हमारा धर्म नहीं है। हमारी असल परीक्षा ऐसे ही अवसरों पर होती है। हम अपने शत्रुओं के प्रति भी शुभकामनाओं से भरे हों और यथासम्भव करुणा और क्षमा के मार्ग का ही अनुसरण करें। इन श्रेष्ठतम मानवीय गुणों का पक्ष इतिहास में हर प्रबुद्ध और जाग्रत मनीषी ने लिया है।
Shri Ramcharitmanas : dwitya sopan Ayodhyakand
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Rigved : Mandal-2
- Author Name:
Govind Chandra Pandey
- Book Type:

-
Description:
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।
भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।
इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के दूसरे मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
Jeevan Gita: Bhagavadgita Mein Jyotish Vigyan (Set of Volume 1 & 2)
- Author Name:
Dr. Arun Kumar Jaiswal
- Book Type:

- Description: डॉ. अरुण कुमार जायसवाल—एक प्रेरक व्यक्तित्व, जिन्होंने अपनी जीवन-साधना से अपने क्षण-प्रति-क्षण के जीवन में यह प्रमाणित किया है कि जीवन का अर्थ ‘मर्म एवं दर्शन-साधनों’ में नहीं, साधना में है। डॉ. जायसवाल की जीवन साधना उन्हीं की भाँति बहुआयामी है। वैदिक संस्कृति, ज्योतिष विज्ञान, भारतीय दर्शन—इन्हीं में से कुछ है। श्रीमद्भगवद्गीता के वे न केवल तत्त्वदर्शी विज्ञाता हैं बल्कि इसमें वर्णित साधना विधियों के वे लोकोत्तर व रहस्यदर्शी साधक हैं। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता की रचना को प्रकट करनेवाले महर्षि कृष्णद्वैपायन, जिन्हें वेदव्यास के नाम से भी जाना जाता है और इसका दिव्य गायन करनेवाले विश्वात्मा भगवान् कृष्ण, दोनों को ही तत्त्वत: आत्मसात् करने में सफलता पाई है। डॉ. अरुण ने अपने इस ग्रंथ में स्वयं के हृदय की अनुभूतियों को अक्षरों में पिरोया है। जैसे भगवान् सूर्य के सारथी अरुण सूर्यदेव के प्रकाश से संसार का परिचय कराते हैं, कुछ इसी तरह से डॉ. अरुण ने भी भगवद्गीता के ज्ञानसूर्य का अपनी जीवन-चेतना एवं जीवन-साधना से इस ग्रंथ के माध्यम से परिचय दिया है। उनके इस ग्रंथ में पूर्ववर्ती आचार्यों एवं मनीषियों के परंपरागत दर्शन-ज्ञान के साथ ज्योतिष विज्ञान के मर्म का भी समन्वय व प्राकट्य है। डॉ. अरुण कुमार जायसवाल की जीवनयात्रा व्यक्ति से व्यक्तित्व बनने-गढऩे व विनिर्मित होने की साधना यात्रा है। व्यक्ति के रूप में अपने परिवार-नगर व प्रांत में जनमे एवं जीवन साधना के लिए समर्पित होकर असंख्यों के लिए प्रेरक बने। उनका नाम, उनका परिचय ही इस ग्रंथ का भी परिचय है। निष्काम कर्म- अनासक्त जीवन-साधनाशील जीवनयात्रा, जो नित सोपानों एवं आयामों की ओर निरंतर गतिशील है। उसका यथार्थ परिचय तो बस उनसे मिलनेवालों एवं प्रेरित होनेवालों की अनुभूतियों में पहचाना जा सकता है। उनसे परिचित होने का सुगम साधन भी यही है। सत्य और यथार्थ यही है कि ग्रंथकार का परिचय किन्हीं शब्दों में नहीं समा सकता है। वह तो उनके निरंतर विराट् होते हुए व्यक्तित्व में है, जो गीता गायक की निरंतर चेतना में अनवरत घुलता-मिलता हुआ उन्हीं में एकाकार होता जा रहा है।
Baal Krishna
- Author Name:
Kamini Gayakwad
- Book Type:

- Description: कृष्ण की बाल लीलाएँ साहस, जिज्ञासा, मैत्री और प्रेम की कथाएँ हैं । इनमें नैतिकता और विवेकशीलता की शिक्षा है तो वैसा ही निर्मल हास्य और आनन्द भी है। शकटासुर गाड़ी का रूप धरकर कृष्ण को कुचलने आया था, लेकिन कृष्ण ने उसे अच्छा सबक सिखाया। तृणावर्त बवंडर बनकर उन्हें उड़ाने आया था। कृष्ण ने अपना वज़न इतना बढ़ाया कि वह धरती पर गिर पड़ा। कालिया नाग और पूतना की कहानियाँ भी ऐसी ही मज़ेदार है। सुदामा की कहानी दोस्ती की मिसाल है। पुराण कथा
Sanskrtik Virasat Ke Dhani : Bharat Aur Japan
- Author Name:
Shila Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: "जापान में भी ईश्वर की पूजा-अर्चना, सेवा, देवों का आह्वान करने की रीतियाँ भारतीय जीवन से बहुत कुछ मिलती-जुलती हैं। भारत की तरह जापान में भी मकान बनाने से पहले भूमि-पूजन करते हैं। परिवार के मंगल के लिए पितरों से आशीर्वाद लेते हैं। गुरु-शिष्य परंपरा का दर्शन वहाँ भी होता है। जापान की पौराणिक कहानियों में पत्थर में परिवर्तित हुई लड़की अपने श्रीरामचरितमानस की अहल्या जैसी ही लगती है और जापान की सूर्य उपासना की पद्धति भारत के सूर्य नमस्कार के जैसी ही है। जिस प्रकार हिंदू कोई धर्म नहीं है, एक जीवन पद्धति है, उसी प्रकार शिंतो भी प्रकृति और मनुष्य के साहचर्य की जीवन पद्धति है, जिसका किसी दर्शन, धर्म, ग्रंथ अथवा उपदेश से साम्य नहीं है, बस वह रहन-सहन का एक तरीका भर है। जापान में भी दीपावली की तरह जगमगाहट है; होली की तरह रंगों की फुहार है; पतंगों के उत्सव में भिन्न-भिन्न प्रकार के पतंगों से रँगा हुआ पूरा आसमान है; शादी-विवाह के मौकों पर संगीत से सजी हुई महफिलें हैं तो साकुरा के बागों तले फूलों की अल्हड़ बरसात है; कठपुतलियों के नृत्य हैं। काबुकी के रंग-मंच में अभिनय के रंगों में रँगी हुई कोमल भावनाएँ हैं और भारत से मिलता-जुलता हर जगह बहुत कुछ है। यह पुस्तक इन्हीं अनुभवों पर आधारित एक प्रतिबिंब है, जिसमें जापान के अनेक रंगों को समेटने का प्रयास किया गया है। "
Vishwa Vandya Vivekananda
- Author Name:
Triloki Nath Sinha
- Book Type:

- Description: स्वामी विवेकानंदजी ने विश्व धर्म संसद् में अपने उद्बोधन से प्रतिनिधियों सहित सभी श्रोताओं की हृद्तंत्री को ऐसा झनझनाया कि वहाँ 17 दिन की सभा में आयोजकों को उन्हें 5 दिन बोलने का अवसर देना पड़ा। भारत के उस अंधकारपूर्ण युग में स्वामी विवेकानंदजी ने भारत की प्रतिष्ठा बढ़ाने व सम्मान दिलाने का अत्यंत महत्त्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने इस संपूर्ण भूमंडल में भारत की श्रेष्ठता की पहचान सर्वत्र करा दी। उन्होंने अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंसजी के दिव्य संदेश को विश्व में प्रचारित करने के साथ ही ‘नर सेवा—नारायण सेवा’ का एक अभिनव सूत्र धर्मप्रिय लोगों व संन्यासियों को देकर श्रीरामकृष्ण आश्रम की स्थापना करके उस सूत्र को व्यवहार में लाने का माध्यम प्रस्तुत कर दिया। स्वामी विवेकानंदजी के जीवन तथा विचारों से संबंधित विपुल साहित्य प्रकाशित हो चुका है, तथापि उनका विस्तृत समस्त विवरण इस छोटी सी पुस्तक के रूप में भारत के समाज-बंधुओं, विशेषकर नवयुवकों एवं विद्यार्थियों के लिए सुलभ कराने का प्रयत्न किया गया है। उनके विचारों को अधिकाधिक उन्हीं के शब्दों में उद्धृत करने का भरसक प्रयास किया गया है, जो उनकी उपलब्ध जीवनियों, पुस्तकालयों, पत्रिकाओं एवं विद्वानों के उद्धरणों से प्रयत्नपूर्वक ढूँढ़कर निकाले गए हैं। विश्व के जनमानस को उद्वेलित करनेवाले तथा दरिद्र नारायण की सेवा का मार्ग प्रशस्त करनेवाले स्वामी विवेकानंद की प्रेरणादायी जीवनी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book