Rigved : Mandal-9
Author:
Govind Chandra PandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Religion-spirituality0 Ratings
Price: ₹ 520
₹
650
Available
वेद सनातनविद्या के काव्यात्मक प्रतिपादन हैं। ऋग्वेद संहिता के अनुवाद एवं व्याख्या का प्रयास अनेक भाषाओं में समय-समय पर होता रहा है, किन्तु अभी तक उपलब्ध सभी अनुवादों में काव्यपक्ष की उपेक्षा अथवा पद्यानुवाद की प्रस्तुति के असम्भव प्रयास ही किए गए हैं जो ऋचाओं के साथ पूरा न्याय नहीं करते हैं। वेदों में भावों की सनातनता एक व्यापक ध्वनि के रूप में सूक्तों, संवादों और आख्यानों में विद्यमान है। प्रस्तुत अनुवाद में पादानुसारी किन्तु भावपरक अनुवाद पर विशेष आग्रह सोद्देश्य है ताकि ऋचाओं की काव्यात्मकता का यथासम्भव सम्प्रेषण एवं मूल की अर्थयोजना का क्रम अनुवाद में सुरक्षित रहे।</p>
<p>भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।</p>
<p>वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।</p>
<p>इस खंड में ‘ऋग्वेद’ के नौवें मंडल का व्याख्या सहित हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत किया गया है।
ISBN: 9789381344088
Pages: 516
Avg Reading Time: 17 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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भाषान्तर में व्याख्या का सूक्ष्म प्रकार अनिवार्य होता है और वही अनुवाद का वर्तमान और अतीत के मध्य संवाद बनाकर बहुत कुछ को परम्परा में जीवित तथा प्रगतिशील रखता है। अतः ग्रन्थ में अनुवाद के लिए उपयुक्त भाषा, पुरातन ध्वनि बहुलता और समसामयिक सजीवता के संरक्षण की दृष्टि से तत्सम, तद्भव एवं देशी शब्दों के समन्वित प्रयोग किए गए हैं। साथ ही, गम्भीर और बहुमुखी अर्थों को स्पष्ट करने के लिए क्रियापदों के अनुवाद, दुरूह पदों के अर्थनिर्वचन में धातुपाठ, निरुक्त की पद्धति एवं आधुनिक तथा तुलनात्मक व्याकरण के अनुसरण से सहायता ली गई है।
वेद आर्षकाव्य के निर्देशन के साथ-साथ अध्यात्मगवेषियों के मार्गदर्शक भी हैं। अतः ऋचाओं में संश्लिष्ट आधियाज्ञिक, आधिभौतिक, आधिदैविक और आध्यात्मिक अर्थों को उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है। व्याख्याकारों में जहाँ विवाद की स्थिति है, वहाँ प्राचीन एवं नवीन दोनों ही मतों का विवेचन प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार काव्यात्मक पक्ष की प्रस्तुति, निगूढ़ अर्थ के आयामों का विश्लेषण और विवादित स्थलों का तुलनात्मक विवेचन इस ग्रन्थ के अनुवाद एवं व्याख्या की अभीप्सित विशेषताएँ हैं।
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- Description: Wanderlust and the desire to know the land and society more had been fueling my wish to visit Kailas. There were many curiosities. All our major rivers have their source in the region. The largest reservoir of fresh water on earth is situated there. The celestial swans are found there. I recall that how in my childhood, my Grandmother used to describe Kailas as being akin to a dreamland. According to her, Shri Krishna has said in the Gita – Meruru shikhirinamaham – ‘Among mountains I am Kailas!’ It was Sage Mandhata who first set foot on this sacred soil. Adi Shankaracharya shed his mortal body here. Guru Nanak meditated here and Swaminarayana, the founder of the sect that bears his name, saw the vision of god here. The Ramayana and the Mahabharata mention Kailas. This is where Ravana had worshipped Lord Shiva. He wanted to take Kailas with him. Shiva guilefully dissuaded him from doing so. Arjuna performed penance here and received the Pashupata Astra from Shiva. Yudhishthir proceeded heavenwards via this route. One by one, all the family members fell by the roadside; only the faithful dog kept company. Bhasmasur, the Rakshas, a devotee of Shiva was reduced to cinders here. Today the dark shadow of civilisation has begun to fall even on Mansarovar. This lake is shrinking. The sacred water body, that once stretched across 410 square kilometres, is now shrunk to only 10 square kilometres. Consider this the rage of Nature. Had Kalidasa been alive, he would have been deeply saddened to see his beloved Himalaya in this state. Is it the same Himalaya that is described in Raghuvamsham and Kumar Sambhavam? Civilisation has reached a point where the divine dimensions of Himalaya are disturbed.
Ramgita
- Author Name:
Ashok Kumar Sharma
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- Description: भगवान श्रीराम त्रेता युग में हुए थे, उनकी शिक्षाओं को हर युग में उपयोगी माना जाता रहा है। ये शिक्षाएँ संसार में रहते हुए ही जीतने, आगे बढ़ने तथा असम्भव को सम्भव बनाने का मार्ग दिखाती हैं। उनकी शिक्षाएँ आत्मज्ञान, नैतिकता, मानसिक सन्तुलन, ध्यान, साहस, मैत्री और प्रेम का महत्त्व समझाने के साथ-साथ निराशा से बचे रहने का मार्ग भी दिखाती हैं। जीवन में ठीक रास्ते पर चलने, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की शिक्षाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे कर्म के साथ कर्तव्य पालन और आत्मविश्वास के महत्त्व पर बल देते हैं। उचित-अनुचित के बीच अन्तर करने एवं नैतिक मूल्यों का पालन करने की प्रेरणा देते हैं।
Amazing Astro Science
- Author Name:
Dr.Sanjay Rout
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- Description: Amazing Astro Science is the must-read book for anyone interested in space exploration and the latest developments in astronomy. Written by renowned astrophysicist Dr. Sanjay, this comprehensive guide provides readers with an in-depth look into the fascinating world of space science. From the history of astronomy to the latest discoveries in star formation and black holes, this book covers it all. Readers will gain an understanding of the fundamentals of astrophysics and the technology used to explore the outer reaches of the universe. With its easy-to-understand explanation of complex topics and its stunning visuals, Amazing Astro Science is both a captivating and educational read. Whether you’re a student of astronomy, a casual hobbyist, or just curious about the universe, this book will provide readers with a wealth of knowledge and insight.
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