🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Pratinidhi Kavitayen : Praveen Shakir

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

पाकिस्तान की उर्दू शायरी में परवीन शाकिर की गणना प्रेम की नाजुक मूर्ति के रूप में होती है। परवीन का प्रेम अपने अद्वितीय अन्दाज़ में ‘नर्म सुख़न’ बनकर फूटा है और अपनी ‘ख़ुशबू’ से उसने उर्दू शायरी की दुनिया को सराबोर कर दिया है। पाकिस्तान की ही प्रसिद्ध कवयित्री फ़हमीदा रियाज़ के अनुसार, ‘परवीन के शे’रों में लोकगीतों की सी सादगी और लय भी है और क्लासिकी मौसीकी (शास्त्रीय संगीत) की नफ़ासत और नज़ाकत भी। उसकी नज़्में और ग़ज़लें भोलेपन और सॉफ़िस्टिकेशन का दिलआवेज़ संगम हैं।’ परवीर शाकिर की शायरी का केन्द्रीय विषय ‘स्त्री’ है। प्रेम में टूटी हुई, बिखरी हुई खुद्दार स्त्री। लेकिन उसकी शायरी की यह कोई सीमा नहीं है। वस्तुतः परवीन की शायरी प्रेम की एक ऐसी लोरी है जो अपने मद्धिम-मद्धिम सुरों से सोते हुओं को जगाने का काम करती है। परवीन की शायरी में रूमानियत भी है और गहरी ऐंद्रिकता भी, पर कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि सामने की दुनिया सिर्फ़ एक सपना है। अपनी सूक्ष्म यथार्थपरकता के कारण ही मुख्य रूप से ‘स्त्री’ और ‘प्रेम’ को आधार बनाकर लिखी गई ये कविताएँ अनुभूति के व्यापक द्वार खोलती हैं।

Read more

₹ 199

₹ 159.2 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Pratinidhi Kavitayen : Praveen Shakir This book ₹159
Kuthanv Abdul Bismillah ₹199
Gausevak Abdul Bismillah ₹199
3 books selected ₹597 ₹557

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

पाकिस्तान की उर्दू शायरी में परवीन शाकिर की गणना प्रेम की नाजुक मूर्ति के रूप में होती है। परवीन का प्रेम अपने अद्वितीय अन्दाज़ में ‘नर्म सुख़न’ बनकर फूटा है और अपनी ‘ख़ुशबू’ से उसने उर्दू शायरी की दुनिया को सराबोर कर दिया है।

पाकिस्तान की ही प्रसिद्ध कवयित्री फ़हमीदा रियाज़ के अनुसार, ‘परवीन के शे’रों में लोकगीतों की सी सादगी और लय भी है और क्लासिकी मौसीकी (शास्त्रीय संगीत) की नफ़ासत और नज़ाकत भी। उसकी नज़्में और ग़ज़लें भोलेपन और सॉफ़िस्टिकेशन का दिलआवेज़ संगम हैं।’

परवीर शाकिर की शायरी का केन्द्रीय विषय ‘स्त्री’ है। प्रेम में टूटी हुई, बिखरी हुई खुद्दार स्त्री। लेकिन उसकी शायरी की यह कोई सीमा नहीं है। वस्तुतः परवीन की शायरी प्रेम की एक ऐसी लोरी है जो अपने मद्धिम-मद्धिम सुरों से सोते हुओं को जगाने का काम करती है।

परवीन की शायरी में रूमानियत भी है और गहरी ऐंद्रिकता भी, पर कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि सामने की दुनिया सिर्फ़ एक सपना है। अपनी सूक्ष्म यथार्थपरकता के कारण ही मुख्य रूप से ‘स्त्री’ और ‘प्रेम’ को आधार बनाकर लिखी गई ये कविताएँ अनुभूति के व्यापक द्वार खोलती हैं।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
13th
Publication year
1994
Weight
102 grams
ISBN-13
9788126707669
Pages
142
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12 × 18 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp