Qashqa Kheencha Dair Mein Baitha
(0)
₹
399
₹ 319.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Awating description for this book
Read moreAbout the Book
Awating description for this book
Book Details
-
ISBN9789391080778
-
Pages406
-
Avg Reading Time14 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Tulsi Rachnawali Vol-1
- Author Name:
Dr. Ramji Tiwari
- Book Type:

- Description: गोस्वामी तुलसीदास की विलक्षण प्रतिभा से प्रसूत अनंत काव्य-कीर्ति-कौमुदी में स्नात होकर समस्त विश्व के काव्य-रसिक धन्य, रससिक्त और श्रद्धानवत होते रहे हैं, किंतु सभी के दृष्टि-पथ में 'रामचरितमानस' ही आकाशदीप की भाँति विराजमान है। अन्य ग्रंथरत्न छायावेष्टित ही रह जाते हैं। जबकि लोक-परलोक चिंतन, व्यावहारिक चेतन जीवन और अध्यात्मबोध, संस्कृति और संस्कार, संघर्ष और आस्था तथा जय और पराजय से युक्त विलक्षण व्यक्तित्व उनके सभी ग्रंथ-रत्नों को देखने के बाद ही सगुण साकार हो पाता है। संस्कारशील और सुरुचि-संपन्न पाठक भी इस विश्वकवि के संपूर्ण वाड्मय का रसास्वादन कर लेने के बाद ही पूर्ण परितोष का लाभ ले पाता है। गोस्वामीजी के सभी ग्रंथरत्नों को एकत्र उपलब्ध कराने के पुनीत उद्देश्य से ही इस 'रचनावली' की योजना बनाई गई है। ग्रंथावली का प्रथम खंड सुविज्ञ पाठकों को समर्पित है। इसमें गोस्वामीजी की 'रामलला नहछू', 'वैराग्य संदीपनी', 'बरवै रामायण', 'जानकी मंगल', 'पार्वती मंगल', 'रामाज्ञा-प्रश्न', 'दोहावली', 'श्रीकृष्ण गीतावली' कृतियों का समावेश है। आशा है, सुधी पाठकों को अभीप्सित परितोष मिल सकेगा।
Ek Ursula Hoti Hai
- Author Name:
Kumar Mukul
- Book Type:

- Description: poetry
Hriday Ki Hatheli
- Author Name:
Pushpita Awasthi
- Book Type:

-
Description:
‘शब्द बनकर रहती हैं ऋतुएँ’, ‘अक्षत’ और ‘ईश्वराशीष’ के बाद ‘हृदय की हथेली’ से पुष्पिता अवस्थी ने प्रणय, प्रतीक्षा, विरह, आतुरता, समर्पण और आराधना की लौकिक अनुभूतियों को लोकैषणा के सँकरे दायरे से बाहर निकालकर जैसे एक आध्यात्मिक सिहरन में बदल दिया है। ‘आँसू दुनिया के लिए आँख का पानी है/लेकिन तुम्हारे लिए दु:ख की आग है’ कहते हुए कवयित्री ने प्रबन्धन-पटु समय में प्रेम की एक सरल रेखा खींचनी चाही है। उसके यहाँ ‘प्रेम के रूपक’ नहीं हैं, प्रणय का पिघलता ताप है, आँखों की चौखट में विश्वास की अल्पना है, अन-जी आकांक्षाओं की प्यास है, प्रेम का धन-धान्य है, स्मृति के कुठले में सँजोए अन्न की तरह अतीत का वैभव है। अचरज नहीं कि कवयित्री ख़ुद यह कहती है—‘इन कविताओं की व्यंजना आकाश की तरह निस्सीम है और आकाश गंगा की तरह अछोर भी। इनके अन्दर की यात्रा मन के रंगों-रचावों की यात्रा है, रस-कलश की छलकन है। सृजन के राग का आरोहण और कृत्रिमता के तिमिर का तिरोहण है।’
प्रेम के उद्दाम आदिम संगीत से होती—प्रेम का गान करने और उसका मान रखनेवाले कवियों—कालिदास, जयदेव, विद्यापति, घनानन्द की परम्परा की ही धात्री पुष्पिता फिर एक बार पुण्य के पारावार में संतरण करना चाहती हैं, अपनी गंगा में प्रिय की यमुना को जीते हुए कृष्ण को राधा-भाव और राधा को कृष्ण-भाव में जीते हुए देखना चाहती हैं। उनकी पदावलियों में अनुरक्त और विदग्ध अनुभवों—दोनों की उमगती कसक भरी है, रचनेवाले के भीतर जैसे अकेलेपन की पिघलती मोमबत्ती। शब्दों के ताप में प्रणय की तपश्चर्या है, प्रेम को पृथ्वी की पहली और अन्तिम चाहत की तरह महसूस करने की उत्कंठा है। प्यार की पवित्र जाह्नवी को दिनोंदिन मैला कर रहे समय के बावजूद देह की आकाश गंगा में तैरकर आँखें पार उतर जाना चाहती हैं ठहरे हुए समय से मोक्ष के लिए। इन कविताओं का सलीक़ेदार अपनत्व मन पर एक ऐसी छाप छोड़ता है जैसे इन अनुभूतियों के साथ, पढ़नेवाला भी सह-यात्रा कर रहा हो।
Sath Chalte Hue (Rowing Together)
- Author Name:
Sukrita Paul Kumar
- Book Type:

-
Description:
सहज प्रवाह में कई बार तो हवाओं के विरुद्ध भी, आगे बढ़ते, हम दोनों याद करते हैं कि इस संकलन की कविताओं को आकार देते हुए हमारा साथ कैसा रहा। लेकिन इस स्थिति से पहले हम अनुभव और भाषा की निजी धाराओं से भी गुज़रे। एक-दूसरे की कविताओं के अनुवाद की प्रक्रिया हमारे लिए जितनी प्रीतिकर श्रम थी, उतनी ही नैसर्गिक भी। किसी के मन में यह जिज्ञासा हो सकती है कि हमने अपने रचनात्मक लेखन के बजाय अनुवाद करने की बात क्यों सोची ? उसका उत्तर तनिक भी मुश्किल नहीं है। भाषा की सरहदें गलने-पिघलने लगती हैं जब कविता का अनुभव आसानी से एक-दूसरे तक पहुँच रहा हो। हमारी कविताओं ने यह भी तय किया कि वे एक-दूसरे की हो लें और एक अन्य भाषा में ख़ुद को कहें। हमने सिर्फ़ उनकी एक कामना को सुना, शायद यह देखने-जानने के लिए भी, कि किस तरह अनूदित कविताएँ एक बार फिर ‘मौलिक’ हो जाती हैं, कुछ खोकर या शायद कुछ हासिल करके भिन्नता पाती हुईं।
—सुकृता
Siyalkot Ki Sarhad
- Author Name:
Madan Mohan Samar
- Book Type:

- Description: Book
Kashtiyon Wala Safar
- Author Name:
Satyamohan Verma
- Book Type:

-
Description:
सत्यमोहन की कविताएँ दो स्तरों पर विकसित होती हैं—एक सामाजिक अनुभूति और दूसरा व्यक्तिगत द्वंद्व। उनकी कविताओं का शिल्प बहुत सुगठित है। उनके प्रयोग नई कविताएँ और नवगीत की भावभूमि पर ले जाते हैं।
—दिनकर सोनवलकर
सघन वैचारिकता और आकांक्षा सत्यमोहन की रचनाओं की अपनी ख़ासियत है। इनमें आस्थामय सम्भावनाएँ हैं और जीवन की रंगोली सजाने की कोशिश है। सत्यमोहन का कवि यथार्थ की क्रूरताओं से वाक़िफ़ है और प्रकृति के सहज चित्रों से तन्मयता से आबद्ध। वह सजग अभिव्यक्ति का धनी है।
—डॉ. संतोष कुमार तिवारी
सत्यमोहन वर्मा कविताओं के बनते-बदलते तेवरों के न केवल साक्षी हैं—उनका उनमें रचनात्मक हस्तक्षेप भी है। उन्होंने यथेष्ट लिखा है और अभी भी अनन्त अनकहे के धनी हैं। असन्तोष से उपजा उन्मेष उनकी कविताओं और ग़ज़लों में प्रभावी अभिव्यक्ति बन गया है।
—प्रो. सरोज कुमार
सत्यमोहन और उनकी रचनाओं की पूरी बनावट प्यार से प्यार तक की अनन्त यात्रा है। उनकी कविताएँ, गीत, ग़ज़लें विराट होने का दम नहीं भरतीं किन्तु इनमें अनेक स्वर और रंग हैं जिनकी ताज़गी मन को छूती है।
—डॉ. प्रभात कुमार भट्टाचार्य
Kavitayen : Vol. 2
- Author Name:
Sarveshwardayal Saxena
- Book Type:

-
Description:
नई कविता की लोक–सम्पृक्ति के प्रतिनिधि कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की ‘कुआनो नदी’ और ‘जंगल का दर्द’ से पूर्ववर्ती सम्पूर्ण काव्य–साधना का पहला खंड ‘कविताएँ–1’ कविताओं का यह दूसरा खंड है। इसमें पूर्व प्रकाशित कवि के दो संग्रहों (‘एक सूनी नाव’ और ‘गर्म हवाएँ’) की कविताएँ सम्मिलित हैं। इन कविताओं में कवि के निजी जीवन और समसामयिक सामाजिक, राजनीतिक जीवन की त्रासदी परस्पर गुम्फित है। ये कविताएँ राजनीति से भागती नहीं क्योंकि वह आज के जीवन का हिस्सा हैं लेकिन राजनीतिक मतवाद से उनका अलगाव अवश्य है। दरअसल, सर्वेश्वर के तर्इं इनसान से बड़ा कुछ भी नहीं है—न ईश्वर, न प्रकृति—सबका क़द उनके यहाँ एक
है।सर्वेश्वर की कविताएँ भाषा से दुर्व्यवहार करनेवाले कवियों की इधर बढ़ती हुई भीड़ के लिए एक सबक भी है। वे अपनी निजी दुनिया में ले जाकर, सामाजिक ‘सच्चाई’ से सूक्ष्म सम्पर्क करती हुर्इं, पाठक के मन में भाषा के प्रति एक धड़कता हुआ रिश्ता बनाती हैं। ‘एक सूनी नाव’ और ‘गर्म हवाएँ’—ये शीर्षक ही सर्वेश्वर की काव्य–यात्रा के बदलाव को सूचित करते हैं। पर सर्वेश्वर की कविता में जो ‘ग़ुस्सा’ धीरे–धीरे अपेक्षाकृत अधिक मुखर हुआ है, उसके पीछे भाषा पर पड़नेवाले दबाव की स्थिति से एक गहरा रचनात्मक मुक़ाबला है। कविता में निषेधी भाषा की तीव्र उपस्थिति कुछ करने और बदलने की इच्छा से अनुप्रेरित है—सिर्फ़ ग़ुस्से से ही नहीं।
Aadat Hai Humko
- Author Name:
Goapl Datt
- Book Type:

- Description: गोपाल दत्त प्रसिद्ध अभिनेता और गीतकार गोपाल दत्त का यह कविता संग्रह उनके रचनात्मक संसार का एक नया और अनदेखा पक्ष सामने लाता है। मंच और परदे पर दिखाई देने वाले उनके व्यक्तित्व से परे, यह किताब उन भावनाओं, विचारों और अनुभवों को सहेजती है, जो अक्सर अभिनय की रोशनी में छूट जाते हैं। इस संग्रह में शामिल है उनकी लोकप्रिय और चर्चित कविता ‘और करो थिएटर’, साथ ही बड़े शहर के शोऑफ और कला की इंसाफ़ पसंदगी को दर्ज करती उनकी थोड़ी ड्रामैटिक लेकिन बेहद चर्चित कविता ‘बड़े शहर का स्क्रीनप्ले’। इसके अलावा, इसमें उनके कई ऐसे गीत भी हैं, जिन्हें आप पहले सुन चुके होंगे या जिनकी गूँज आपको जानी-पहचानी लगेगी। आदत है हमको गोपाल दत्त के बहुरंगी रचनात्मक व्यक्तित्व की सच्ची झलक है—जहाँ कविता, गीत और जीवन एक-दूसरे में घुलते नज़र आते हैं। कविता प्रेमियों और रंगमंच से जुड़े पाठकों के लिए यह संग्रह विशेष रूप से पठनीय है।
Parchaiyaan
- Author Name:
Dr. Priyanka Sinha
- Book Type:

- Description: Collection of poems by Dr. Priyanka Sinha
Bhartrihari : Kavita Ka Paras Patthar
- Author Name:
Sudhir Ranjan Singh
- Book Type:

-
Description:
ऋषियों की नैतिक दृढ़ता, कालिदास, भारवि और माघ की ऐन्द्रिकता और लालित्य, और भक्त कवियों की तन्मयता, और इन सबके साथ ही मानवीय अन्तर्विरोधों की गहरी पकड़—इतना कुछ एक कवि में और वह भी एकश्लोकीय कविता के द्वारा, यह अचम्भित करनेवाली बात है। भर्तृहरि क्लासिकी संस्कृत कविता की परम्परा के साथ भी हैं और उससे हटकर भी। इसलिए उनका अस्तित्व किसी एक व्यक्ति के रूप में भले न दिखाई पड़े और पहचान राजा और योगी जैसे कई व्यक्तियों के रूप में क्यों न होती रही हो, इस तथ्य को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि हमारे यहाँ कविता की एक विशेष परम्परा रही थी जिसे भर्तृहरि नामक व्यक्ति से जोड़े बग़ैर ख़ुद कविता का व्यक्तित्व मुखर नहीं होता होगा।
भर्तृहरि सुभाषितों के कवि हैं—एकश्लोकीय कविता के कवि। जिन अनुभूतियों ने भर्तृहरि को सबसे अधिक संचालित किया है, उनमें आवेग का निर्णायक महत्त्व है।
कोसम्बी ने भर्तृहरि की दांते और गोएथे से तुलना करते हुए कुछ महत्त्वपूर्ण किन्तु विवाद योग्य निष्कर्ष निकाले हैं। वह कहते हैं कि दांते का निर्वासन उनकी नागरिक मान्यताओं के प्रति अटल विश्वास के कारण था। इसी के वजन पर भर्तृहरि के लिए कहा जा सकता है कि उनका वैराग्य कोरा आत्मनिर्वासन नहीं है, उसके पीछे उनकी सामाजिक स्वतंत्रता की भावना और उस पर अटल विश्वास है। उसका अपने समय की राजनीतिक, आर्थिक बनावट से तीखा विरोध है।
पराजय का स्वीकार दूर-दूर तक नहीं है भर्तृहरि में। काल अथवा मृत्यु का स्वीकार अवश्य है।
भर्तृहरि की कविता का महत्त्व समूची मानवजाति के लिए तो है ही, सबसे बढ़कर उसका महत्त्व हमारे कवियों के लिए है। विषय से भटके हुए हम जैसे कवियों के लिए भर्तृहरि की कविताएँ विषय हैं; और इस उलझन-भरे समय में सुलझी हुई दृष्टि हैं।
Tum Meri Jaan Ho Raziya B
- Author Name:
Piyush Mishra
- Book Type:

-
Description:
इस किताब में अभिनेता, गीतकार, संगीतकार, रंगकर्मी पीयूष मिश्रा की कविताएँ हैं। बकौल पीयूष ये कविताएँ उन्होंने अपने जीवन के एक ख़ास दौर में लिखीं और इनका अपना एक ख़ास मक़सद था। ये अपने आप से, अपनी आत्मा के सच से साक्षात्कार की कविताएँ हैं। अपने आप और अपने परिजन-लोक को सम्बोधित। विपश्यना ध्यान के दौरान जब उन्हें अपने अब तक के जीवन पर दृष्टिपात करने का अवसर मिला तब उन्होंने इन कविताओं को लिखना शुरू किया।
लेकिन जैसा कि लिखी जाने के बाद हर कविता करती है, वह अपने सर्जक-भर की नहीं रह जाती। ये भी नहीं हैं। हम भी इनमें अपने आप को देख सकते हैं। मन के एकाकी कोनों से झरीं ये पंक्तियाँ कभी अपनी एक लय लेकर आती हैं तो कभी असम्बद्ध-सा दिखने वाला आत्मालाप। हममें से हर किसी को किसी न किसी मौक़े पर अपने आप से रू-ब-रू होना होता है। उन क्षणों में ये कविताएँ हमें ज़रूर याद आएँगी।
Kabeer Ke Sau Pad
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

-
Description:
कबीर के प्रति रवीन्द्रनाथ ठाकुर का आकर्षण साहित्य-जगत की अत्यन्त विशिष्ट परिघटना है। कबीर को पढ़कर उनके व्यक्तित्व और रचनाओं से रवीन्द्रनाथ इतने प्रभावित हुए कि उनके चुनिन्दा पदों को अंग्रेजी में अनूदित कर दुनिया के सामने रखना उन्हें आवश्यक लगा। आचार्य क्षितिमोहन सेन द्वारा वाचिक परम्परा से संकलित कबीर के पदों और बेलवेडियर प्रेस से प्रकाशित ‘कबीर वाणी’ को आधार बनाकर उन्होंने कबीर के सौ पदों का अनुवाद किया—‘वन हंड्रेड पोएम्स ऑव कबीर’। उनकी दृष्टि में कबीर इसलिए महत्त्वपूर्ण हैं क्योंकि उन्होंने तमाम कुरीतियों को भेदकर भारत के अन्तर में निहित सत्य को पहचाना और उसी की साधना की। रवीन्द्रनाथ ने विशेष रूप से वे पद चुने जिनमें कबीर का प्रेमी, साधक और आत्मसन्धानी व्यक्तित्व उभरता है तथा जो विरहिनी जीवात्मा के परमात्मा से मिलन के साक्षी हैं। इस तरह कबीर को कबीरपन्थी मठों और अखाड़ों से बाहर निकलकर प्राच्य और पाश्चात्य जगत के सामने लाने में उन्होंने महती भूमिका निभाई।
रवीन्द्रनाथ के कबीर सम्बन्धी इस रचनात्मक प्रयास का निस्सन्देह ऐतिहासिक महत्त्व है, जिसको रेखांकित करते हुए वरिष्ठ लेखक-अनुवादक रणजीत साहा ने यह पुस्तक ‘कबीर के सौ पद’ तैयार की है। इसमें ‘वन हंड्रेड पोएम्स ऑव कबीर’ और उसके लिए इसमें प्रख्यात विद्वान एवलिन अंडरहिल द्वारा लिखी गई सुचिन्तित भूमिका का हिन्दी अनुवाद तो है ही, आचार्य क्षितिमोहन सेन द्वारा संकलित संग्रह से इन पदों के मूल पाठ भी दिए गए हैं। कहना न होगा कि साहित्य के अध्येताओं और शोधार्थियों से लेकर सामान्य पाठकों तक के लिए यह एक पठनीय और संग्रहणीय पुस्तक है।
Anamika
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

- Description: छायावाद के प्रवर्तकों में सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ का नाम प्रमुख है। ‘मैं’ शैली अपना कर निराला ने हिन्दी कविता को नई दिशा प्रदान की और छन्दों के बन्धन से मुक्त कर उन्होंने हिन्दी कविता के लिए नई ज़मीन तैयार की। ‘अनामिका’ में संकलित कविताएँ इस बात का प्रमाण हैं। ‘अनामिका’ नाम से निराला की कविताओं का संग्रह दो बार प्रकाशित हुआ। पहली बार ‘मतवाला’ के सम्पादक बाबू महादेव प्रसाद ने निराला की चौबीस कविताओं का संग्रह ‘अनामिका’ नाम से प्रकाशित किया था। इसमें निराला की प्रारम्भिक कविताएँ संकलित थीं। 1937 में पुन: ‘अनामिका’ नाम से ही निराला की कविताओं का संग्रह प्रकाशित हुआ। इसे निराला की श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह माना जाता है। ‘अनामिका’ को छायावाद का ‘गौरव-ग्रन्थ’ होने का श्रेय प्राप्त है।
Sab Ki Aawaz Ke Parde Mein
- Author Name:
Vishnu Khare
- Book Type:

-
Description:
बीसवीं सदी की हिन्दी कविता में अपनी धुन और आत्महानि की सीमा तक जाकर, लीक छोड़ लिख पानेवाले कम थे लेकिन शायद विष्णु खरे उन्हीं में गिने जाएँ। विष्णु खरे के साथ एक बड़ी घटना यह रही कि उनकी कविता हिन्दी के विभिन्न समसामयिक सम्प्रदायों को तुष्ट नहीं कर पाई। उनके न तो गुरु-संरक्षक रहे, न मित्र-प्रोत्साहक और न भक्त-शिष्य। ऐसी लगभग सर्वसम्मत उपेक्षा के बावजूद कहीं-कहीं उनकी कविताएँ न केवल याद रखी गईं, बल्कि कभी-कभी उनकी माँग भी की जाती रही, यही कोई कम ग़नीमत नहीं है।
अपने और दूसरों के लिए और मुश्किलें पैदा करते हुए विष्णु खरे एक ऐसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जिसमें भूले-भटके काव्यावेश आ जाता है, वरना अक्सर उसमें निम्न-मध्यवर्गीय संकेतों और ब्याजशब्दावली का बाहुल्य रहता है और कभी उनकी ज़ुबान बातचीत की तरह आमफ़हम, दफ़्तरी, अख़बारी, तत्समी या गवेषणात्मक तक हो जाती है और ख़तरनाक ढंग से कहानी, गद्य, वर्णन, ब्योरों, रपट आदि के नज़दीक पहुँचती है और यह तय करना कठिन होता है कि उस निर्विकार-सी वस्तुपरकता में तथ्याभास का व्यंग्य है, करुणा है या उन्हें कविता लिखना ही नहीं आता।
कविता के विषयों को लेकर भी उनके यहाँ एक कैलाइडोस्कोप की बहुबिम्बदर्शी विविधता है जो उनकी हर चीज़ में दिलचस्पी के दख़ल की पैदाइश है और इस ज़िद की कि सब कुछ में जो कविता है, उसका कुछ हिस्सा हासिल करना ही है। दुनिया उनके आगे बाज़ीचा-ए-इत्फ़ाल नहीं, उसमें जन्म ले चुके आदमी का कौतूहल और कशमकश है। विष्णु खरे को भी कवियों का कवि कहकर दाख़िल-दफ़्तर कर देना सुविधाजनक है लेकिन वे उन सजगों के कवि हैं जिनकी तादाद अन्दाज़ से कहीं ज़्यादा है। भारतीय आदमी और मानव के लिए उनकी प्रतिबद्धता असन्दिग्ध है लेकिन वे सारे ऐहिक और अपौरुषेय व्यापार, माया और लीला, यथार्थ और मिथक को जानने के प्रयास के प्रति भी वचनबद्ध हैं, क्योंकि हर बार उसे नई तरह से जानना चाहे बिना आदमी और अस्तित्व के पूरे बखेड़े को समझने की कोशिश अधूरी ही रहेगी। इसमें अनुभववाद या दूर की कौड़ी लाने का लाघव-प्रदर्शन नहीं है, समूचे जीवन से वाबस्तगी की बात है।
इसीलिए विष्णु खरे की कविता न तो आदमी और समाज से घबराकर ‘शुद्ध कला’, अध्यात्म या रहस्यवाद में पलायन करती है और न कायनात को मात्र भौतिक मान किसी आसान ‘वाद’ की शरण लेती है। उनके यहाँ अनुभव और कविता ‘प्योर’ तथा ‘अप्लाइड’ दोनों अर्थों में हैं क्योंकि दोनों प्रकारों का एक-दूसरे के बिना अस्तित्व और गुज़ारा सम्भव नहीं है। वे वाक़ई अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे उठाने को मनुष्य और कवि होने की सार्थकता मानते हैं। इस संग्रह की कविताओं में भी वे अपने कथ्य, भाषा तथा शैली को जोखिम-भरी चुनौतियों और परीक्षाओं के सामने ले गए हैं। वे कविता को बाँदी या देवदासी की तरह नहीं, मानव-प्रतिभा की तरह हर काम में सक्षम देखना चाहते हैं क्योंकि उनका मानना है कि ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसकी अपनी कोई अर्थवत्ता न हो—हर आवाज़ के पीछे जो दुनिया है, विष्णु खरे की यदि कोई महत्त्वाकांक्षा है तो उसे ही अभिव्यक्ति देने का प्रयास करने की लगती है।
Bhoomija
- Author Name:
Nagarjun
- Rating:
- Book Type:

- Description: राम-कथा में सीता सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पात्र हैं। कथा-विस्तार के केन्द्र में वही प्रमुख हैं। सीता नारी के उद्दाम स्वाभिमान की प्रतीक हैं। सीता का परित्याग जहाँ नारी-शोषण की व्यथा-कथा है, वहीं भूमि से उत्पन्न उस पुत्री का अपनी पवित्रता व शुचिता के प्रमाण हेतु दिव्य आवाहन—जिसके बाद धरती फटती है और वह भू-समाधि ले लेती है—उस शोषण से मुक्ति का चरम है। आज के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं वरिष्ठ कवि नागार्जुन ने प्राचीन कथा-प्रसंगों को आधुनिक सन्दर्भों में बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। इस प्रबन्धकाव्य में प्रकृति के उद्दीपन रूप के यत्र-तत्र बड़े ही विलक्षण चित्र मिलते हैं। भावों की सहजता तथा यथार्थ से निकटता तो आकर्षित करती ही है, साथ ही छन्द, लय और गति इसे मुग्धकारी पठनीयता प्रदान करते हैं। रचनाकार का विस्तृत परिचय, कथा-प्रसंग, चर्चित पात्र-प्रसंग तथा शब्दार्थों के दिए जाने से ‘भूमिजा’ एक अधिक उपयोगी काव्यकृति बन गई है।
Avalamban
- Author Name:
Manish Shrivastav
- Book Type:

-
Description:
किसी नए कवि की रचना से गुज़रते हुए अक्सर उम्मीद की जाती है कि उसमें कुछ नया होगा लेकिन मनीष श्रीवास्तव की कविताओं के साथ केवल नए होने का भाव नहीं है, यहाँ विविधता है। अपने होने में पूरी विनम्रता के साथ लेकिन रचनात्मक रूप से लगभग अतार्किक। ये कविताएँ कोई नई ज़मीन तोड़ने का दावा नहीं करतीं, कोई नारेबाज़ी नहीं करतीं, चौंकाती भी नहीं—बस, अपने कविता होने को आश्वस्त करती हैं और यह भी कि इन रचनाओं में पुरखे शामिल हैं।
सांस्कृतिक तत्सम शब्दावली और मीर, ग़ालिब, पंत की भाषा परम्परा के रास्ते से ये रचनाएँ ग्लोबल कविता की अवधारणा में प्रवेश पाती हैं। यहाँ हर रचना के साथ कोई एक छाया चलती है—भाषा, काल और कहन के एक ऐसे पृष्ठ-तनाव को फिर-फिर उजागर करती हुई, अपने पूरे संस्कार और संवेदना के साथ, जो किसी एक रचनाकार के लिए इन दिनों असम्भव है।
मनीष पूरे विस्तार के साथ शब्दों को बरतते हैं, एक चौकन्नेपन के साथ, कहीं-कहीं अतिरिक्त सावधानी के साथ भी, लेकिन बाज़ार की माँग के अनुसार तो कुछ भी नहीं। रचना का होना बचा रहे, इसका निर्वाह तो हरेक रचनाकार स्वाभाविक रूप से करता है, लेकिन यह
होना यहाँ किसी अनुशासन की तरह नहीं है।
इन रचनाओं में शब्दों का पड़ोस है जीवन और अन्ततः प्रेम जहाँ ये कविताएँ सहज रूप से खुलती चली जाती हैं।
Pinjar Prem Prakasiya : Kabir Par AAdharit Prabandh Kavya
- Author Name:
Ramanand Tiwari
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bhuri-Bhuri Khak-Dool
- Author Name:
Gajanan Madhav Muktibodh
- Book Type:

-
Description:
“मुक्तिबोध एक ऐसे कवि हैं जो अपने समय में अपने पूरे दिल और दिमाग़ के साथ, अपनी पूरी मनुष्यता के साथ रहते हैं। वे अपनी एक ऐसी निजी प्रतीक-व्यवस्था विकसित करते हैं कि जिसके माध्यम से सार्वजनिक घटनाओं की दुनिया और कवि की निजी दुनिया एक सार्थक और अटूट संयोग में प्रकट हो सके। एक सच्चे कवि की तरह वे सरलीकरणों से इनकार करते हैं। वे विचार या अनुभव से आतंकित नहीं होते। वे यथार्थ को जैसा पाते हैं वैसा उसे समझने और उसका विश्लेषण करने की कोशिश करते हैं और उनकी कविता का एक बड़ा हिस्सा अनुभव की अनथक व्याख्या और पड़ताल का उत्तेजक साक्ष्य है। मुक्तिबोध मनुष्य के विरुद्ध हो रहे विराट षड्यंत्र के शिकार के रूप में ही नहीं लिखते, बल्कि वे उस षड्यंत्र में अपनी हिस्सेदारी की भी खोज करते और उसे बेझिझक ज़ाहिर करते हैं। इसीलिए उनकी कविता निरा तटस्थ बखान नहीं, बल्कि निजी प्रामाणिकता और ‘इन्वॉल्वमेंट’ की कविता है। उनकी आवाज़ एक दोस्ताना आवाज़ है और उनके शब्द मित्रता में भीगे और करुणा-भरे शब्द हैं। ब्रेख़्त की तरह उन्हें मालूम है कि ‘जो हँसता है, उसे भयानक ख़बर बताई नहीं गई है। वे भयानक ख़बर के कवि हैं—हिन्दी में शायद अकेले। उन्होंने हमारे समय में आदमी की हालत की पूरी परिभाषा अलभ्य साहस और शक्ति से करने की अद्वितीय कोशिश की है।’
‘भूरी-भूरी ख़ाक धूल’ में मुक्तिबोध की कविता की इन सभी ख़ूबियों का एक नया स्तर खुलता है। ‘चाँद का मुँह टेढ़ा है’ के बाद, प्रकाशन-क्रम के लिहाज़ से, यह उनकी कविताओं का दूसरा संग्रह है। इसमें उनकी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित कविताएँ हैं, साथ ही अधिकांशतः ऐसी कविताएँ भी हैं जो अब तक बिलकुल अप्रकाशित रही हैं। इन कविताओं में आज के उत्पीड़न-भरे समाज को बदलने का आकुल आग्रह तथा ‘जनसंघर्षों की निर्णायक स्थिति’ में अमानवीय व्यवस्था के ‘कालान्त द्वार’ तोड़ डालने का दृढ़ संकल्प विस्मयकारी शक्ति के साथ अभिव्यक्त हुआ है। अपनी प्रचंड सर्जनात्मक ऊर्जा के कारण ये कविताएँ मन को झकझोरती भी हैं और समृद्ध भी करती हैं। यह आकस्मिक नहीं है कि मृत्यु के वर्षों बाद आज भी मुक्तिबोध हिन्दी के सर्वाधिक चर्चित कवि हैं।
Meri Zameen Mera Safar
- Author Name:
Vinod Kumar Tripathi 'Bashar'
- Book Type:

- Description: ोद कुमार त्रिपाठी पेशेवर अदीब नहीं हैं, अदब और शायरी उनके भीतर की वह बेचैनी है जो उनके व्यस्त और व्यावसायिक तौर पर सफल जीवन में रोज़ बूँद-बूँद इकट्ठा होती रहती है और फिर जैसे ही वे अपने नज़दीक बैठते हैं तो ग़ज़लों और नज़्मों की शक्ल में फूट पड़ती है। यही वे लम्हे होते हैं जब वे कहते हैं, ‘जलाकर आग दिल में, ख़ुद को इक तूफ़ान मैं कर दूँ।’ लेकिन तूफ़ान होने की यह कामना उनके व्यक्ति तक सीमित नहीं है, इसमें वह पूरा समाज और परिवेश शामिल है जो उनके साथ हमारे भी इर्द-गिर्द हमेशा रहता है और जिसकी अजीबोग़रीब फ़ितरत से हम सब वाकिफ़ हैं। हम भी उसके बीच वही तकलीफ़ महसूस करते हैं जो उन्हें होती है लेकिन बहैसियत एक हस्सास शायर वे उसे कह भी लेते हैं और बहुत ख़ूबसूरती से कहते हैं। इस किताब में शामिल उनकी ग़ज़लें और नज़्में गवाह हैं कि मौजूदा दौर की जेहनी और जिस्मानी दिक़्क़तों को उन्होंने बहुत नज़दीक और ईमानदारी से महसूस किया है। एक मिसरा है, ‘मैंने कल अपने उसूलों को नसीहत बेची’। रूह तक फैली हुई ये दुकानदारी आज हम सब का सच हो चुकी है। ऐसा कुछ अपने पास हमने नहीं रखा जिसे हम बेचने को तैयार न हों, और जिसके ख़रीदार आस-पास मौजूद न हों। लेकिन हम इससे वक़्त की ज़रूरत कहकर किनारा कर लेते हैं। विनोद त्रिपाठी इस विडम्बना को लेकर सचेत हैं। वे देख रहे हैं कि ज़िन्दगी की ये तथाकथित मजबूरियाँ हमें कहाँ लेकर जा रही हैं और ये भी कि अगर हम इन्हें रोक नहीं सकते तो इन पर निगाह तो रखना ही होगा। ‘दिखाकर ख़्वाब मुझको मारने की ज़िद है जो तेरी'—एक ग़ज़ल का ये मिसरा बताता है कि शायर ने अपने सामने मौजूद वक़्त और वक़्ती ताक़तों की साज़िशों को पहचान लिया है। और यहाँ से एक उम्मीद निकलती है कि हो सकता है कल उनका जवाब भी हम जुटा लें और अपने इंसानी सफ़र की बाक़ी उड़ानों को इंसानों की तरह अंजाम दे सकें
Samay Aur Samay
- Author Name:
Durgaprasad Jhala
- Book Type:

- Description: collection of Poems
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book