Umraonagar Mein Kuchh Din

(0)

₹ 199

₹ 159.2 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


राग दरबारी’ के ख्यातिलब्ध उपन्यासकार श्रीलाल शुक्ल की यह कथा-कृति हमारे सामने तीन महत्त्वपूर्ण व्यंग्य-कथाओं को प्रस्तुत करती है। ये हैं—‘उमरावनगर में कुछ दिन’, ‘कुन्ती देवी का झोला’ और ‘मम्मीजी का गधा’। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, संग्रह की आधार-कथा है—‘उमरावनगर में कुछ दिन’। उमरावनगर यानी राजकीय स्तर पर चुना गया एक ऐसा ‘आदर्श गाँव’ जो बड़ी तेज़ी से ‘विकास’ की ओर अग्रसर है, लेकिन आज़ादी के बाद पनपे सारे अवसरवाद और भ्रष्टाचार के साथ हुए तमाम समझौते उमरावनगर के सार्वजनिक जीवन में मौजूद हैं। ‘कुन्ती देवी का झोला’ में डाकुओं और पुलिस के आतंकवाद का चित्रण हुआ है, जिसका शिकार अन्ततः निरीह और निर्दोष जनता ही बनती है। ‘मम्मीजी का गधा’ में अफ़सरशाही के अहं को विषय बनाया गया है और प्रसंगतः इस बात की भी ख़बर ली गई है कि नेता लोग अर्थहीन-सी स्थितियों को अपने फ़ायदे में इस्तेमाल करके किस तरह जन-भावनाओं को भड़काते हैं।

Read more

ISBN
9788126700660
Pages
79
Avg Reading Time
3 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Don’t Miss Out

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

राग दरबारी’ के ख्यातिलब्ध उपन्यासकार श्रीलाल शुक्ल की यह कथा-कृति हमारे सामने तीन महत्त्वपूर्ण व्यंग्य-कथाओं को प्रस्तुत करती है। ये हैं—‘उमरावनगर में
कुछ दिन’, ‘कुन्ती देवी का झोला’ और ‘मम्मीजी का गधा’। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, संग्रह की आधार-कथा है—‘उमरावनगर में कुछ दिन’। उमरावनगर यानी राजकीय स्तर पर चुना गया एक ऐसा ‘आदर्श गाँव’ जो बड़ी तेज़ी से ‘विकास’ की ओर अग्रसर है, लेकिन आज़ादी के बाद पनपे सारे अवसरवाद और भ्रष्टाचार के साथ हुए तमाम समझौते उमरावनगर के सार्वजनिक जीवन में मौजूद हैं। ‘कुन्ती देवी का झोला’ में डाकुओं और पुलिस के आतंकवाद का चित्रण हुआ है, जिसका शिकार अन्ततः निरीह और निर्दोष जनता ही बनती है। ‘मम्मीजी का गधा’ में अफ़सरशाही के अहं को विषय बनाया गया है और प्रसंगतः इस बात की भी ख़बर ली गई है कि नेता लोग अर्थहीन-सी स्थितियों को अपने फ़ायदे में इस्तेमाल करके किस तरह जन-भावनाओं को भड़काते हैं।

Book Details

  • ISBN
    9788126700660
  • Pages
    79
  • Avg Reading Time
    3 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp