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हिन्दुस्तान में गोराशाही लूट पर टिकी थी। व्यापार करने आई ईस्ट इंडिया कम्पनी ने लूट-व्यापार को स्थायी बनाने के लिए षड्‌यंत्र और सैनिक हस्तक्षेप के ज़रिए 1757 में प्लासी-युद्ध में जीत के बाद सत्‍ता हाथ में ले ली। मगर रियाया पर प्रभुत्व स्थापित करना आसान न था। गोरों के ख़िलाफ़ असन्तोष फैलने लगा था। मुनाफ़े के लिए गोरे अकाल और भूख की तिजारत कर रहे थे। अपने शासन-क्षेत्र का विस्तार कर रहे थे। बिहार-बंगाल के जंगल के दावेदार संथालों से अपना लोहा मनवाने और उनकी स्वतंत्र-प्रवृत्ति पर क़ाबू पाने के लिए गोरों ने जंगल-उत्पादों, धान-चावल की ख़रीद शुरू की। गोरों ने बाज़ार को हथियार बनाया। संथाल भड़क उठे और विद्रोह की कमान सँभाली संथाल परगना के आदि विद्रोही तिक्का माँझी ने। संथाल जीवन और गोरों के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संग्राम की गाथा दर्ज है। ‘शाल-गिरह की पुकार’ में प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की प्रखर लेखनी से। यह न केवल इतिहास है बल्कि हर भारतीय के लिए गौरव-स्मृति भी है।

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हिन्दुस्तान में गोराशाही लूट पर टिकी थी। व्यापार करने आई ईस्ट इंडिया कम्पनी ने लूट-व्यापार को स्थायी बनाने के लिए षड्‌यंत्र और सैनिक हस्तक्षेप के ज़रिए 1757 में प्लासी-युद्ध में जीत के बाद सत्‍ता हाथ में ले ली। मगर रियाया पर प्रभुत्व स्थापित करना आसान न था। गोरों के ख़िलाफ़ असन्तोष फैलने लगा था। मुनाफ़े के लिए गोरे अकाल और भूख की तिजारत कर रहे थे। अपने शासन-क्षेत्र का विस्तार कर रहे थे। बिहार-बंगाल के जंगल के दावेदार संथालों से अपना लोहा मनवाने और उनकी स्वतंत्र-प्रवृत्ति पर क़ाबू पाने के लिए गोरों ने जंगल-उत्पादों, धान-चावल की ख़रीद शुरू की। गोरों ने बाज़ार को हथियार बनाया। संथाल भड़क उठे और विद्रोह की कमान सँभाली संथाल परगना के आदि विद्रोही तिक्का माँझी ने।

संथाल जीवन और गोरों के विरुद्ध उनके ऐतिहासिक संग्राम की गाथा दर्ज है। ‘शाल-गिरह की पुकार’ में प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की प्रखर लेखनी से। यह न केवल इतिहास है बल्कि हर भारतीय के लिए गौरव-स्मृति भी है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
3rd
Publication year
2004
Weight
142 grams
ISBN-13
ShaalgirahKiPukarPerPaperBack
Pages
184
Reading time
~6 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12 × 18 cm
Language
Hindi

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