Anbita Vyatit
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''देखिए मैं आपकी पत्नी ज़रूर हूँ लेकिन मैं एक औरत भी हूँ…जिस दुनिया में आप रहते हैं, वह भी सही है और जिस दुनिया में मैं रह सकती हूँ? वह भी सही है...मेरा शरीर सन्तृप्त होता रहे और मेरा मन मृत होता रहे, यह मुझे आपके साथ बहुत दूर तक नहीं ले जा सकता...मैं जानती हूँ? पंछियों के केमिकल से युक्त भूसा-भरे शरीरों के करोड़ों रुपए के बिजनेस को छोड़ना या बन्द करना आपके लिए मुमकिन नहीं होगा...लेकिन मेरे लिए यह मुमकिन होगा कि मैं मुर्दों की इस दुनिया से बाहर चली जाऊँ।'' (इसी उपन्यास से) 1947 के बाद सामन्ती युग का पतन, पर्यावरण, पक्षियों से प्रेम तथा सहज मानवीय कोमल सम्बन्धों की यह कहानी बरबस ही आपको अपनी ओर आकर्षित कर लेगी।
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''देखिए मैं आपकी पत्नी ज़रूर हूँ लेकिन मैं एक औरत भी हूँ…जिस दुनिया में आप रहते हैं, वह भी सही है और जिस दुनिया में मैं रह सकती हूँ? वह भी सही है...मेरा शरीर सन्तृप्त होता रहे और मेरा मन मृत होता रहे, यह मुझे आपके साथ बहुत दूर तक नहीं ले जा सकता...मैं जानती हूँ? पंछियों के केमिकल से युक्त भूसा-भरे शरीरों के करोड़ों रुपए के बिजनेस को छोड़ना या बन्द करना आपके लिए मुमकिन नहीं होगा...लेकिन मेरे लिए यह मुमकिन होगा कि मैं मुर्दों की इस दुनिया से बाहर चली जाऊँ।'' (इसी उपन्यास से) 1947 के बाद सामन्ती युग का पतन, पर्यावरण, पक्षियों से प्रेम तथा सहज मानवीय कोमल सम्बन्धों की यह कहानी बरबस ही आपको अपनी ओर आकर्षित कर लेगी।
Book Details
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ISBN9788180313158
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Pages148
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Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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‘नौकर की कमीज़’ भारतीय जीवन के यथार्थ और आदमी की कशमकश को प्रस्तुत करनेवाला उपन्यास है। इस उपन्यास की सबसे बड़े ख़ासियत यह है कि इसके पात्र मायावी नहीं बल्कि दुनियावी हैं, जिनमें कल्पना और यथार्थ के स्वर एक साथ पिरोए हुए हैं। कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि किसी पात्र को अनावश्यक रूप से महत्त्व दिया गया हो। हर पैरे और हर पात्र की अपनी महत्ता है। केन्द्रीय पात्र संतू बाबू एक ऐसा दुनियावी पात्र है जो घटनाओं को रचता नहीं, बल्कि उनसे जूझने के लिए विवश, है और साथ ही इस सोसाइटी के हाथों इस्तेमाल होने के लिए भी। आज की ‘ब्यूरोक्रेसी’ और अहसानफ़रामोश लोगों पर यह उपन्यास सीधा प्रहार ही नहीं करता, बल्कि छोटे-छोटे वाक्यों के सहारे व्यंग्यात्मक शैली में एक माहौल भी तैयार करता चलता है। विनोद कुमार शुक्ल की सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति का ही कमाल है कि पूरे उपन्यास को पढ़ने के बाद ज़िन्दगी के अनगिनत मार्मिक तथ्य दिमाग़ में तारीख़वार दर्ज होते चले जाते हैं। उनके छोटे-छोटे वाक्यों में अनुभव और यथार्थ का पैनापन है, जिसकी मारक शक्ति केवल तिलमिलाहट ही पैदा नहीं करती बल्कि बहुत अन्दर तक भेदती चली जाती है।
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
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सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
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