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Author:
Arjun ThiagarajPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction₹
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If you consider the past as one's Eligibility, every one of us sitting here is good for nothing" When it comes to relationships, which quality do you look for?? Beauty? Wealth? Fame? Being together, thinking of your partner each moment, late night chat, spying on them, sex, conflict with your parents, that courageous decision to leave your respective houses... Love may not always be about the usual scenes mentioned above... Love can wait, love can accept the faults, passion can uphold your morale and moral values in your life, and love can change even the custom in a society... The story of Sree Venugopal and veena started during a competition ’best manager' and extended to the most significant competition human have ever played... The life. Were they the best managers???.
Read moreAbout the Book
If you consider the past as one's Eligibility, every one of us sitting here is good for nothing" When it comes to relationships, which quality do you look for?? Beauty? Wealth? Fame? Being together, thinking of your partner each moment, late night chat, spying on them, sex, conflict with your parents, that courageous decision to leave your respective houses... Love may not always be about the usual scenes mentioned above... Love can wait, love can accept the faults, passion can uphold your morale and moral values in your life, and love can change even the custom in a society... The story of Sree Venugopal and veena started during a competition ’best manager' and extended to the most significant competition human have ever played... The life. Were they the best managers???.
Book Details
-
ISBN9789385137648
-
Pages142
-
Avg Reading Time2 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: राजकमल चौधरी की लेखनी जीवन के सांगोपांग चित्रण, जीवन जीनेवालों के समाज और प्रकृति से सम्बन्धित सन्दर्भों के साथ-साथ चलती है। नारी समलैंगिकता, यौन-विकृति, फ़िल्म-कल्चर, महानगरों के निम्नवर्गीय समुदाय आदि विषयों को राजकमल ने अपने उपन्यास लेखन का मूल केन्द्र बनाया। हिन्दी में लिखे इनके लगभग सभी उपन्यास इन्हीं विषयों पर आधारित हैं। निम्न मध्यवर्ग से उच्च मध्यवर्ग के बीच के इनके सारे पात्र अपनी आवश्यकताओं की अभिलाषा एवं उनकी पूर्ति हेतु घनघोर समस्याओं, विवशताओं से आक्रान्त दिखते हैं। कतरा-भर सुख-सुविधा के लिए, अपनी अस्मिता बचा लेने के लिए जहाँ व्यक्ति को घोर संघर्ष करना पड़े, वहीं से राजकमल का हर उपन्यास शुरू होता है। इस संकलन में राजकमल चौधरी के पाँच उपन्यास संग्रहीत किए गए हैं—‘अग्निस्नान’, ‘शहर था शहर नहीं था’, ‘देहगाथा’, ‘बीस रानियों के बाइस्कोप’ और ‘एक अनार : एक बीमार’। सभी उपन्यास बीती सदी के पाँचवें दशक से आई शिल्पगत और कथ्यगत नवीनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनके उपन्यासों में शिल्प एवं कथ्य प्रयोग अनूठे और एक सीमा तक चौंकानेवाले हैं। राजकमल की रचनाओं पर अक्सर अश्लीलता का आरोप लगता रहा है लेकिन जब स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की चर्चा चिकित्साशास्त्र के पन्नों पर अश्लील नहीं है, व्यक्ति के दैनिक क्रियाकलाप में अश्लील नहीं है, तब वह साहित्य में आकर कैसे अश्लील हो जाएगी? यदि मुट्ठी-भर लोग पूरे देश के आम नागरिक की सुख-सुविधा अपने फ़्लैट में क़ैद कर लेते हैं, अभावग्रस्त और विवश नारियों को थोड़े से अर्थ के बल पर अपने बिस्तर पर खिलौना बनाकर इसे वैध और उचित ठहराते हैं और यह आचरण अश्लील नहीं है तो फिर इसकी चर्चा कैसे अश्लील है? जनजीवन में घटती किसी भी घटना के चित्रण में राजकमल ने अश्लीलता खोजने की इच्छा नहीं की, बल्कि अश्लीलता खोजनेवालों को यहाँ तक हिदायत दे डाली कि साहित्य में अश्लीलता आरोपित करनेवाले पुलिस मनोवृत्ति के लोग उनकी किताब न पढ़ें।
Salaam Bombay Via Versova Dongri
- Author Name:
Sarang Upadhyay
- Book Type:

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Description:
ग्यारह किस्सों के जरिए, प्रेम की शक्ति और विश्वास की डोर तक पहुँचने वाला यह उपन्यास ‘यूनिक’ है, मुम्बई के निम्न-मध्यवर्गीय जीवन का मिनिएचर बनाते हुए हिन्दी कथा-साहित्य में एक दुर्लभ और विरल पाठकीय अनुभव की सर्जना करता है, राघव और सायरा जैसे दो यादगार किरदारों के जरिए रंग और बदरंग के बीच भावनात्मकता का उदास उत्सव मनाता है और सपनों का ताना-बाना बुनता है। यह सब करते हुए सारंग उपाध्याय का उपन्यास ‘सलाम बॉम्बे व्हाया वर्सोवा डोंगरी’ मुम्बई की आत्मा को एक कड़क कथात्मक सलाम ठोंकता है, वह आत्मा जिसका नाम ‘जिजीविषा’ है। साहित्य की आत्मा का नाम भी दरअसल यही है।
—गीत चतुर्वेदी
Gaban
- Author Name:
Premchand
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- Description: गबन' की नायिका जालपा का बचपन से एक सपना है- उसे माँ के जैसा ही चंद्रहार मिले। इस स्वप्न के इर्द-गिर्द प्रेमचंद भारतीय मध्यवर्ग के पतन की कथा लिखते हैं। जालपा का स्वर्णाभूषणों के प्रति अतार्किक प्रेम नायक रमानाथ को भ्रष्टाचार की ओर इतना ले जाता है कि वह अन्ततः निर्दोषों को सज़ा कराने के लिए झूठा सरकारी गवाह तक बनने को तैयार हो जाता है; यह 'गबन' की कथा है। इसके बीच ऐसे अनेक चरित्र और उनके जीवन प्रसंग हैं जो सहज मानवीय ढंग से उच्चता और अवनति की ओर यात्रा करते दिखाई देते हैं। इससे 'गबन' बस आभूषण प्रेम के दुष्परिणामों का आख्यान नहीं रह जाता- मानवीय गरिमा और सामाजिक परिवर्तन के उच्च आदर्शों का दस्तावेज बन जाता है।
Where Has My Gulla Gone
- Author Name:
Padma Sachdev
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Will You Marry Me ?
- Author Name:
Parulraj Jain
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- Description: Will you marry me? What is the most frightening eight letters word? If the question were asked to girls, nine out of ten would have said ‘cockroach’. Wait!!! But that’s not an eight letters word. Okay, what is the most frightening word in English? Well, it is probably cockroaches for girls, but for boys, it is marriage. Marriage, is it as scary as it sounds? India, The most versatile and weird (in many ways) country in the world, has many forms of marriage. We have our ways of doing everything. We have many ways of doing the same thing across the country, and marriage is no exception. Marriage is a serious thing here, and it is more challenging to come out of this sacred bond than to enter into one. This is why everyone is so sceptical and afraid of this institution. The world is moving ahead, but we are relatively still or slow-paced. We don’t know if it’s good or bad not to let ourselves evolve with time and move on, but retro is a new cool, right? Read this hilarious romantic tale of how Modi's parents tricked him -their son- into embarking upon one of the oldest adventures called marriage with a stranger, nupur, for the rest of his life.
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