Tin Pahar
(0)
Author:
Krishna SobtiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
150
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‘साँझ की उदास-उदास बाँहें अँधिआरे से आ लिपटीं। मोहभरी अलसाई आँखें झुक-झुक आईं और हरियाली के बिखरे आँचल में पत्थरों के पहाड़ उभर आए। चौंककर तपन ने बाहर झाँका। परछाई का सा सूना स्टेशन, दूर जातीं रेल की पटरियाँ और सिर डाले पेड़ों के उदास साए। पीली पाटी पर काले अक्खर चमके ‘तिन-पहाड़,’ और झटका खा गाड़ी प्लेटफॉर्म पर आ रुकी।’ इन्हीं वाक्यों के साथ नियति की यह कथा खुलती है। जया, तपन, श्री, एडना जिसके अलग-अलग छोर हैं। झील के अलग-अलग किनारे जिस तरह उसके पानी से जुड़े रहते हैं, उसी तरह आकांक्षा के भाव में एक साथ बँधे। आकांक्षा सुख की, चाह की, प्रेम की। ‘दार्जिलिंग के नीले निथरे आकाश,’ लाल छतों की थिगलियों, ‘पहरुओं से खड़े राजबाड़ी के ऊँचे पेड़ों,’ चक्करदार ‘सँकरी घुमावोंवाली चढ़ाइयों-उतराइयों,’ ‘हवाघर की बेंचों,‘ और गहरे उदास अँधेरों के बीच घूमती यह कथा जिन्दगी के अँधेरों-उजालों के बारे में तो बताती ही है, एक भीने यात्रा-वृत्तान्त का भी अहसास जगाती है। लेकिन इस उदास ‘नोट’ के साथ - ‘जिसकी साड़ी का टुकड़ा भर ही बच सका, वह इन सबकी क्या होती होगी...क्या होती होगी।’
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‘साँझ की उदास-उदास बाँहें अँधिआरे से आ लिपटीं। मोहभरी अलसाई आँखें झुक-झुक आईं और हरियाली के बिखरे आँचल में पत्थरों के पहाड़ उभर आए। चौंककर तपन ने बाहर झाँका। परछाई का सा सूना स्टेशन, दूर जातीं रेल की पटरियाँ और सिर डाले पेड़ों के उदास साए। पीली पाटी पर काले अक्खर चमके ‘तिन-पहाड़,’ और झटका खा गाड़ी प्लेटफॉर्म पर आ रुकी।’ इन्हीं वाक्यों के साथ नियति की यह कथा खुलती है। जया, तपन, श्री, एडना जिसके अलग-अलग छोर हैं। झील के अलग-अलग किनारे जिस तरह उसके पानी से जुड़े रहते हैं, उसी तरह आकांक्षा के भाव में एक साथ बँधे। आकांक्षा सुख की, चाह की, प्रेम की। ‘दार्जिलिंग के नीले निथरे आकाश,’ लाल छतों की थिगलियों, ‘पहरुओं से खड़े राजबाड़ी के ऊँचे पेड़ों,’ चक्करदार ‘सँकरी घुमावोंवाली चढ़ाइयों-उतराइयों,’ ‘हवाघर की बेंचों,‘ और गहरे उदास अँधेरों के बीच घूमती यह कथा जिन्दगी के अँधेरों-उजालों के बारे में तो बताती ही है, एक भीने यात्रा-वृत्तान्त का भी अहसास जगाती है। लेकिन इस उदास ‘नोट’ के साथ - ‘जिसकी साड़ी का टुकड़ा भर ही बच सका, वह इन सबकी क्या होती होगी...क्या होती होगी।’
Book Details
-
ISBN9788126725960
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: Brijesh is a decorated police officer; an expert in tracking mobile calls and electronic surveillance. On his inputs, paramilitary forces and police become successful in eliminating a group of dreaded terrorists in J&K. Soon he gets out of turn promotion to the post of Inspector. He’s assigned another case to crack the Nexus of cricket betting. Encouraged by his promotion, he dedicates himself to this case – almost forgetting his own family. And this proves counterproductive to him. One day when he reaches his home, the excerpt below speaks volumes of the state of affairs between him and his wife Anu. But she didn't care and started her outburst, “I’ve suffered a lot during these years,” and stared at him, “why have you come now and how can I trust you?” skeptical, she asked again giving him her hateful look. He continued to stare at the floor and she at his face. Soon, a drop of pain emerged at the ‘brims of his eyes and the tears on either of his cheeks traversed like a channel of a seasonal rivulet and fell on the ground. Perhaps the stony floor also cried out of pain and heat—heat of atonement, disgust, self-reproach, insult, feeling of used and misused, deceit, losing his wife and kids—all contained into his tears. But Anu didn’t listen that cry, her heart didn't melt, and she slammed the door right at his face. Why did it happen? – read the novel.
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Rating:
- Book Type:


- Description: सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
Suni Ghati Ka Suraj
- Author Name:
Shrilal Shukla
- Book Type:

- Description: ‘सूनी घाटी का सूरज’ एक ग्रामीण युवक के बारे में है जो शिक्षित और प्रतिभाशाली होने के बावजूद स्वयं को एक ऐसे समाज में पाता है, जहाँ उसकी सोच, आदर्शों और गुणों के व्यापारी प्रतिष्ठित हैं। लेकिन उस बाज़ार में अपनी गुणवत्ता और उपयोगिता को साबित करने के लिए उसके पास न तो सिफ़ारिश है, न उसके सम्बन्ध किसी ‘बड़े’ से हैं और न ही रिश्वत देने के लिए उसके पास धन हैं। उसने अपने पिता को क़र्ज़दार होकर एक ख़ानदानी ठाकुर के यहाँ बँधुआ जैसा जीवन जीते देखा है, और उनकी मृत्यु के बाद उसकी अपनी पढ़ाई एक हेडमास्साब के पास अनाथ की तरह रहकर, सेवा करके और फिर ट्यूशन आदि करके पूरी हुई, इसी तरह उसने एक मेधावी छात्र के रूप में प्रथम श्रेणी की डिग्रियाँ हासिल कीं। लेकिन अपनी उन सीमाओं के चलते जिनके लिए वह ख़ुद नहीं, बल्कि व्यवस्था ज़िम्मेदार है, वह अपने लिए कहीं जगह नहीं पाता। फलस्वरूप युग के आकर्षण, अतीत की प्रताड़ना और वर्तमान की निराशा को झाड़कर वह उसी अँधेरी और सुनसान घाटी में उतरने का फ़ैसला करता है, जहाँ उसकी सर्वाधिक आवश्यकता है।
Anamdas ka Potha
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Book Type:

- Description: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी उन विरल रचनाकारों में थे, जिनकी कृतियाँ उनके जीवन-काल में ही क्लासिक बन गईं। अपनी जन्मजात प्रतिभा के साथ उन्होंने शास्त्रों का अनुशीलन और जीवन को सम्पूर्ण भाव से जीने की साधना करके वह पारदर्शी दृष्टि प्राप्त की, जो किसी कथा को आर्ष-वाणी की प्रतिष्ठा देने में समर्थ होती है। ‘अनामदास का पोथा’ अथ रैक्व-आख्यान आचार्य द्विवेदी की आर्ष-वाणी का अपूर्व उद्घोष है। संसार के दु:ख-दैन्य ने राजपुत्र गौतम को गृहत्यागी, विरक्त बनाया था, लेकिन तापस कुमार रैक्व को यही दु:ख-दैन्य विरक्ति से संसक्ति की ओर प्रवृत्त करते हैं। समाधि उनसे सध नहीं पाती, और वे उद्विग्न की भाँति उठकर कहते हैं : ‘‘माँ, आज समाधि नहीं लग पा रही है। आँखों के सामने केवल भूखे-नंगे बच्चे और कातर दृष्टिवाली माताएँ दिख रही हैं। ऐसा क्यों हो रहा है, माँ?’’ और माँ रैक्व को बताती हैं : ‘‘अकेले में आत्माराम या प्राणाराम होना भी एक प्रकार का स्वार्थ ही है।’’ यही वह वाक्य है जो रैक्व की जीवन-धारा बदल देता है और वे समाधि छोडक़र कूद पड़ते हैं जीवन-संग्राम में। ‘अनामदास का पोथा’ अथ रैक्व-आख्यान जिजीविषा की कहानी है। ‘‘जिजीविषा है तो जीवन रहेगा, जीवन रहेगा तो अनन्त सम्भावनाएँ भी रहेंगी। वे जो बच्चे हैं, किसी की टाँग सूख गई है, किसी का पेट फूल गया है, किसी की आँख सूज गई है—ये जी जाएँ तो इनमें बड़े-बड़े ज्ञानी और उद्यमी बनने की सम्भावना है।’’ तापस कुमार रैक्व उन्हीं सम्भावनाओं को उजागर करने के लिए व्याकुल हैं, और उसके लिए वे विरक्ति का नहीं, प्रवृत्ति का मार्ग अपनाते हैं।
Doosara Krishna
- Author Name:
Yugeshwar
- Book Type:

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Description:
अवतारों का उद्देश्य अन्याय, अनाचार मिटाना है। सामाजिक न्याय की स्थापना है। अवतार कभी-कभी होते हैं। शास्त्र सनातन हैं। कृष्ण अवतार थे। व्यास अवतार हैं। दोनों ही यमुना के किनारे पैदा हुए थे। यमुना, कृष्ण, व्यास तीनों ही कृष्ण हैं। कृष्ण पर सर्वोत्तम लिखने तथा कृष्ण भक्ति के कारण व्यास भी कृष्ण हैं। दोनों कृष्ण का सम्बन्ध महाभारत से है। एक कृष्ण महाभारत युद्ध कथा के नायक हैं। दूसरा कृष्ण उस कथा के सर्जक। प्रथम कृष्ण की लीला की सीमा है—गोकुल, मथुरा, द्वारका। दूसरा कृष्ण स्थान की अपेक्षा शास्त्र से व्यापक हैं।
व्यास की रचनाएँ समस्त भारत की रचना, संगीत, शास्त्र, सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था का आधार हैं। जहाँ भी जिस रूप में भारत है, सर्वत्र व्यास हैं—दूसरा कृष्ण। व्यास ने नियोग द्वारा कुरुवंश को स्थायी करना चाहा था। किन्तु वह हो न सका। कौरव आपसी युद्ध में नष्ट हो गए। शान्तिपूर्व में विशाल, सामाजिक नियमों की स्थापना की। एक दिन अपने ही पुत्र से पराजित थे व्यास। ढेरों-ढेरों शास्त्र नहीं। भगवान का भजन आवश्यक है। ‘महाभारत’ व्यास के युद्ध और नाश की कथा है। भागवत में व्यास उसी कृष्ण के हाथों में वंशी थमाकर भक्ति की स्थापना करते हैं। वैदिक वाङ्मय से लेकर भागवत तक व्यास ने शास्त्र और समाज की लम्बी यात्रा की है।
नाना प्रकार के देश, समाज, विचार, दर्शन, काव्य, कथा हैं व्यास के साहित्य में। मंत्र और कथा, महासमर एवं महारस, स्त्री के प्रति घोर वैराग्य तथा हज़ारों पत्नियों वाले के अनेक काव्य पुराण लिखे हैं व्यास ने। वेद, वेदान्त भी व्यास के। पुराण, उप-पुराण एवं अनेक टीकाएँ, व्याख्याएँ भी व्यास की। तुलसीदास कहते हैं—‘राम न सकहिं नामे गुन भाई’। ऐसे व्यास ने कितना लिखा, क्या-क्या लिखा? उस अनन्त, सगुण साकार की गणना व्यास से भी सम्भव होगा, इसमें सन्देह है। उसी महान लेखक ईश्वर प्रतिनिधि, कृष्ण के द्वितीय स्वरूप व्यास की कथा है—‘दूसरा कृष्ण’।
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