Vaishali Ki Nagarvadhu
Author:
Acharya ChatursenPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 399.2
₹
499
Available
‘वैशाली की नगरवधू’ की गणना हिन्दी के श्रेष्ठतम ऐतिहासिक उपन्यासों में की जाती है। आचार्य चतुरसेन शास्त्री ने स्वयं भी इसे अपनी उत्कृष्टतम रचना मानते हुए इसकी भूमिका में लिखा था कि निरन्तर चालीस वर्षों की अर्जित अपनी सम्पूर्ण साहित्य-सम्पदा को मैं आज प्रसन्नता से रद्द करता हूँ; और यह घोषणा करता हूँ कि आज मैं अपनी यह पहली कृति विनयांजलि सहित आपको भेंट कर रहा हूँ।</p>
<p>कथा उस अम्बपाली की है जो शैशवावस्था में आम के एक वृक्ष के नीचे पड़ी मिली और बाद में चलकर वैशाली की सर्वाधिक सुन्दर एवं साहसी युवती के रूप में विख्यात हुई। नगरवधू बनने के अनिवार्य प्रस्ताव को उसने धिक्कृत कानून कहा और उसके लिए वैशाली को कभी क्षमा नहीं कर पाई। लेकिन वह अपने देश को प्रेम भी करती है जिसके लिए उसने अपने निजी सुखों का बलिदान भी किया। और अन्त में अपना सर्वस्व त्यागकर बौद्ध दीक्षा ले ली।</p>
<p>कई वर्षों तक आर्य, बौद्ध और जैन साहित्य का अध्ययन करने के उपरान्त और लेखक के तौर पर लम्बे समय में अर्जित अपने भाषा-कौशल के साथ लिखित यह उपन्यास न सिर्फ पाठकों के लिए एक नया आस्वाद लेकर आया बल्कि हिन्दी उपन्यास-जगत में भी इसने अपना एक अलग स्थान बनाया जो आज तक कायम है।
ISBN: 9789393603371
Pages: 440
Avg Reading Time: 15 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Ajnabi Jazeera
- Author Name:
Nasera Sharma
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी की वरिष्ठ कथाकार नासिरा शर्मा के लेखन की सर्वोपरि विशेषता है सभ्यता, संस्कृति और मानवीय नियति के आत्मबल व अन्तःसंघर्ष का संवेदना-सम्पन्न चित्रण। उनके कथा साहित्य के सरोकार ग्लोबल हैं। उनका कथाकार सन्तप्त और उत्पीड़ित मनुष्यता के पक्ष में पूरी शक्ति के साथ निरन्तर सक्रिय रहा है। ‘अजनबी जज़ीरा’ नासिरा शर्मा का नया उपन्यास है।
‘अजनबी जज़ीरा’ में समीरा और उसकी पाँच बेटियों के माध्यम से इराक़ की बदहाली बयान की गई है। ग़ौरतलब है कि दुनिया में जहाँ कहीं ऐसी दारुण स्थितियाँ हैं, यह उपन्यास वहाँ का एक अक्स बन जाता है। छोटी-से-छोटी चीज़ को तरसते और उसके लिए विरासतों-धरोहरों-यादगारों को बाज़ार में बेचने को मजबूर होते लोग; ज़िन्दगी बचाने के लिए सबकुछ दाँव पर लगाती औरतें और विदेशी आक्रमणकारियों की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निगरानी में साँस लेते नागरिक—ऐसी अनेक स्थितियों-मनःस्थितियों को नासिरा शर्मा ने इस उपन्यास के पृष्ठों पर साकार कर दिया है।
पतिविहीना समीरा अपनी युवा होती बेटियों के वर्तमान और भविष्य को लेकर फ़िक्रमन्द है। बारूद, विध्वंस और विनाश के बीच समीरा ज़िन्दगी की रोशनी व ख़ुशबू बचाने के लिए जूझ रही है। उपन्यास समीरा को चाहनेवाले अंग्रेज़ फ़ौजी मार्क के पक्ष से क्षत-विक्षत इराक़ की एक मार्मिक व्याख्या प्रस्तुत करता है। समीरा और मार्क की प्रेमकहानी अद्भुत है, जिसमें ज़िम्मेदारियों के हस्सास रंग शिद्दत से शामिल हैं। घृणा और प्रेम का सघन अन्तर्द्वन्द्व इसे अपूर्व बनाता है। लेखिका यह भी रेखांकित करती है कि ऐसे परिदृश्य में स्त्री-विमर्श के सारे निहितार्थ सिरे से बदल जाते हैं।
सभ्य कहे जानेवाले आधुनिक विश्व में विध्वंस का यह यथार्थ स्तब्ध कर देता है। विध्वंस की इस राजनीति में क्या-क्या नष्ट होता है, इसे नासिरा शर्मा की बेजोड़ रचनात्मक सामर्थ्य ने ‘अजनबी जज़ीरा’ में अभिव्यक्त किया है।
ज़रूरी वैश्विक प्रश्नों के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाता एक अद्भुत उपन्यास।
Inferiority
- Author Name:
Jaydeep Khot
- Book Type:

- Description: All are equally made. A Pocket book by Jaydeep Khot.
Mahabhiyog
- Author Name:
Anjali Deshpande
- Book Type:

-
Description:
‘महाभियोग’ भोपाल गैस कांड और उसके बाद सालों तक इस भयावह त्रासदी को लेकर समाज, देश, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रेस और न्याय व्यवस्था के चक्रव्यूह में जो चला, उसकी कहानी है। तथ्यपरकता और सघनता में इतनी वास्तविक कि भ्रम होता है कि कहीं लेखक इसमें ख़ुद भी तो मौजूद नहीं, और ये सारे चरित्र भी, जो एक तरफ़ भारत के साधारण जन-गण के जीवन और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ़ अपने जीवन में भी सत्ता के परम्परा-प्रसूत वर्चस्व से जूझ रहे हैं। यह सामूहिक लेकिन बहुस्तरीय संघर्षशीलता ही इस विराट कथा की नायिका है।
नब्बे और उसके बाद जन्मे लोग, बहुत सम्भव है कि इस घटना के बारे में बहुत मूर्त ढंग से कुछ न सोच पाते हों, उनके लिए यह उपन्यास सिर्फ़ इसलिए भी ज़रूरी है कि शायद पहली बार किसी उपन्यास में वे विवरण आए हैं, जो उन्हें उस त्रासदी की भयावहता को महसूस करने में मदद कर सकते हैं। साथ ही उस पूरे वैचारिक, सामाजिक और प्रशासनिक-न्यायिक विमर्श को जानने में भी, जो बरसों चलता रहा।
यह उपन्यास समाज और सरकार के बीच स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका को लेकर भी कुछ महत्त्वपूर्ण उद्घाटित करता है।
Billesur Bakariha
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
निराला के शब्दों में ‘हास्य लिये एक स्केच’ कहा गया यह उपन्यास अपनी यथार्थवादी विषयवस्तु और प्रगतिशील जीवनदृष्टि के लिए बहुचर्चित है। बिल्लेसुर एक ग़रीब ब्राह्मण है, लेकिन ब्राह्मणों के रूढ़िवाद से पूरी तरह मुक्त। ग़रीबी से उबार के लिए वह शहर जाता है और लौटने पर बकरियाँ पाल लेता है। इसके लिए वह बिरादरी की रुष्टता और प्रायश्चित्त के लिए डाले जा रहे दबाव की परवाह नहीं करता। अपने दम पर शादी भी कर लेता है।
वह जानता है कि ज़ात-पाँत इस समाज में महज़ एक ढकोसला है जो आर्थिक वैषम्य के चलते चल रहा है। यही कारण है कि ‘पैसेवाला’ होते ही बिल्लेसुर का जाति-बहिष्कार समाप्त हो जाता है। संक्षेप में यह उपन्यास बदलते आर्थिक सम्बन्धों में सामन्ती जड़वाद की धूर्तता, पराजय और बेबसी की कहानी है।
Karobare Tamanna
- Author Name:
Rahi Masoom Raza
- Book Type:

-
Description:
समस्या बड़ी हो या छोटी, उसका प्रभाव समाज के छोटे-से हिस्से पर हो या देशव्यापी हो, नियम-क़ानून द्वारा उस पर कितना क़ाबू किया जा सकता है? यह मुद्दा विचारणीय है। यह वास्तविकता है कि समस्या की जड़ में जाकर मूल कारणों की पहचान की जाए तो समस्या से मुक्ति मिल सकती है। इस दिशा में रचनाकार की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। वह समस्या की जड़ में जाकर मूल कारणों की न केवल पहचान करता है, बल्कि उनके विरुद्ध अवाम की मानसिकता का निर्माण करने की ज़िम्मेदारी भी निभाता है।
वेश्यावृत्ति का ज्वलन्त मुद्दा उपन्यास ‘कारोबारे तमन्ना’ के केन्द्र में है। निम्नवर्गीय मुस्लिम समाज की आर्थिक और सामाजिक पृष्ठभूमि में वेश्यावृत्ति के कारणों की जाँच-पड़ताल की गई है। उपन्यास वेश्याओं की जटिल जीवन-शैली और उस वृत्ति के निर्माण की पूरी प्रक्रिया को यथार्थ के धरातल पर प्रस्तुत करता है। यह रचना अपनी सम्पूर्णता में उसका विरोध भी करती है।
राही मासूम रज़ा के औपन्यासिक कर्म की मुख्यधारा के बरक्स ‘कारोबारे तमन्ना’ की ख़ूबी इसके दिलचस्प होने में है। यह अपने कथ्य के आधार पर विशिष्ट है। हिन्दी साहित्य की मुख्यधारा में लिखे उपन्यासों से इतर राही ने शाहिद अख़्तर और आफ़ाक़ हैदर नाम से उर्दू भाषा में कई उपन्यासों की परम्परा में परिगणित होने के कारण कभी चर्चा के लायक़ ही नहीं समझे गए।
‘कारोबारे तमन्ना’ को डॉ. एम. फ़िरोज़ खाँ ने लिप्यन्तरित कर हिन्दी पाठकों के लिए उपलब्ध कराया है।
राही मासूम रज़ा के असंख्य पाठकों हेतु एक संग्रहणीय पुस्तक।
Sardhana Ki Begham
- Author Name:
Rangnath Tiwari
- Book Type:

-
Description:
ऐतिहासिक उपन्यास में अपने समय की कहानी होती है जिसमें विराट काल-पुरुष के आँसू और मुस्कान, समय की सीमा को लाँघकर अविकल रूप से छलकते रहते हैं।
‘सरधाना की बेग़म’ एक ऐतिहासिक उपन्यास है जिसमें बेग़म समरू और आयरिश सोल्जर जॉर्ज थॉमस की रूहानी कशमकश साकार हो उठी है।
‘सरधाना की बेग़म’ एक अजीबो-ग़रीब शख़्सियत। सियासत जिसके ख़ून में रची-बसी थी और मक्कारी जिसके वजूद का हिस्सा। मैदाने-जंग में वह जब मर्दाना भेष में अपनी कवायदी फ़ौज और लाव-लश्कर के साथ उतरती तो अच्छे-अच्छों के छक्के छूट जाते।
दिल्ली का बादशाह शाहआलम उसे अपनी बेटी कहता और शाहआलम के वकील-ए-मुतल्लक (वजीर) माधोजी सिन्धिया उसे अपनी समशिरा बहन अर्थात् सगी बहन कहते और जिससे राखी बँधवाते।
‘‘संगीत उसकी साँसों में था
और नृत्य की लय उसके तन-बदन में
सूफ़ी तसव्वुफ़ उसका ईमान था
और ईसा मसीह की प्रेम-संवेदना
उसकी कहानी इकादत’’
जाट, मराठा, पठान, जर्मन, फ़्रांसीसी, आयरिश तथा अंग्रेज़ जांबाज़ों के हौसलों को बार-बार चकमा देकर अपनी बहादुरी और हुस्नोजमाल का भरम क़ायम रखनेवाली क़यामत का नाम है—‘सरधाना की बेग़म’, जिसके ज़िक्र के बिना अठारहवीं शताब्दी के उत्तरी भारत की अन्दरूनी कहानी अधूरी रह जाती है।
Anandmath (Raj)
- Author Name:
Bankim Chandra Chatterjee
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Khilega To Dekhenge
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘खिलेगा तो देखेंगे’ विनोद कुमार शुक्ल का बहुत चर्चित उपन्यास है। आदिवासी जीवन और परिवेश के दृश्यों में रचे-बसे इस उपन्यास में भी विनोद कुमार शुक्ल की वह कथा-शैली देखने को मिलती है जो उनका अपना आविष्कार है। बिना किसी ठोस कथा-सूत्र के ‘खिलेगा तो देखेंगे’ एक सामूहिक जीवन की कथा कहता है, जिसमें असाधारण शिल्प में बुनी दृश्यावली और कल्पनाशील बिम्बों के द्वारा साधनहीनों और अकसर मूक रहनेवाले लोगों के सुख और दु:ख ख़ुद-ब-ख़ुद सामने आकर अपने आपको दिखाते हैं। यह उपन्यास जो आप को बताता है, आप उससे ज़्यादा महसूस कर पाते हैं जिसका श्रेय विनोद कुमार शुक्ल के जादू जैसे गद्य, उनकी दृष्टि और भाषा को जाता है। प्रकृति इस कथा में जीवन की भी सहचरी है, पीड़ा और प्रसन्नताओं की भी, और उस उम्मीद की भी जिसे विनोद कुमार शुक्ल हर हाल में बचाए रखते हैं।
Aadividrohi
- Author Name:
Howard Fast
- Book Type:

-
Description:
ईसा पूर्व 73 के आसपास रोम में हुए ग़ुलाम-विद्रोह की यह महागाथा ‘आदिविद्रोही’ स्वतंत्रता, प्रेम, उम्मीद और जिजीविषा की अपूर्व कथा है। इस विद्रोह का नेतृत्व ग़ुलामों के परिवार में ही जन्मे स्पार्टकस ने किया था। यह वह दौर था जब ग़ुलामी की प्रथा अपने शिखर पर थी और मनुष्यता का विशाल हिस्सा मुट्ठीभर उच्च वर्ग की सेवा और मनोरंजन का साधन भी था। तत्कालीन रोम के सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक जीवन में ग़ुलामी की यह प्रथा कैसे काम करती थी, इसका अनुमान तो इस ऐतिहासिक उपन्यास से होता ही है; ग़ुलामों का अपना जीवन कैसा था; ग़ुलाम पुरुषों और स्त्रियों को पराधीनता की मानसिक यंत्रणा के अलावा शारीरिक तौर पर भी क्या कुछ झेलना पड़ता था, यह भी इससे समझा जा सकता है।
लेकिन उपन्यास का केन्द्रीय पात्र स्पार्टकस ही है जिसे कापुआ के अमीर लानिस्ता लेन्टुलस बाटियाटस ने ग्लैडिएटर के रूप में तैयार किया और जिसने आगे जाकर अपनी और अपने साथी ग़ुलामों की आज़ादी के लिए एक ऐतिहासिक विद्रोह को अंजाम दिया। स्वाधीनता, समानता और मुक्त विवेक के पैरोकार हावर्ड फ़ास्ट ने अपनी कृतियों में हमेशा ही साधारण जन की अन्तर्निहित शक्ति को पहचानते हुए ऐसी कथाओं की रचना की जो मानवता के भविष्य को लेकर उम्मीद पैदा करती है।
1951 में लिखे गए इस उपन्यास के विषय में यह जानना भी रोचक होगा कि तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उस समय अमेरिका के किसी प्रकाशक ने इसे छापने का साहस नहीं दिखाया था, लेखक ने इसे अपने परिचितों और पाठकों की सहायता से स्वयं प्रकाशित किया था। बाद में यह फ़िल्मों और टीवी धारावाहिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।
Agneyam
- Author Name:
P. Vatsala +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: English translation by Vasanthi Sankaranarayanan of P. Vatsala's Malayalam novel Agneyam. Sahitya Akademi 2008
Ret Ki Machhali
- Author Name:
Kanta Bharti
- Book Type:

- Description: लेखक सम्पूर्ण जीवन को अपनी रचना का विषय बनाता है, रचता है। ऐसे लेखक को फिर अपनी रचना का विषय बनाना एक विशेष प्रकार के अनुभव और संवेदनशीलता की अपेक्षा रखता है। कान्ता भारती ने अपने इस उपन्यास ‘रेत की मछली’ में लेखकीय जीवन और उसके निकट परिवेश को मानवीय सन्दर्भों में रचने का प्रयास किया है। विदेशी साहित्यों में इस प्रकार की कई औपन्यासिक कृतियाँ प्रसिद्ध हुई हैं; हिन्दी में यह अनुभव-क्षेत्र अभी नया है, और विशेष सम्भावनाओं से संयुक्त है। कान्ता की यह कथा-कृति अपने ब्यौरों में कहीं निर्मम है तो कहीं सहानुभूतिपूर्ण भी, और इस मायने में जीवन के सही अनुपात को साधती है। पाठक यहाँ रचना की पृष्ठभूमि को रचना के रूप में पाकर एक नए अनुभव-संसार में प्रवेश करता है, जहाँ उसके लिए बहुत-सी उपलब्धियाँ सम्भव हैं।
Nakshe Kadam : Naye Purane
- Author Name:
Shyam Krishna Pandey
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास पूर्व स्वतंत्रता काल से लेकर वर्तमान तक की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक स्थिति को इलाहाबाद के पटल पर रखकर बहुत बारीकी के साथ एक विराट कैनवास पर उकेरता है। इसकी कथा-गाथा 'मल्टी डायममेंशनल' है। आज के युवा को उसकी शानदार विरासत से जोड़ने की सार्थक पहल की गई है। युवा एक शक्ति-समूह है। नई 'पीढ़ी के हाथ में ही नया भारत है। उस शक्ति को इस उपन्यास के माध्यम से सकारात्मक मोड़ देने में रचनाकार सफल है।
लेखक ऐसे परिवार से हैं, जिसके पूर्वजों का स्वतंत्रता-संग्राम में पीढ़ी-दर-पीढ़ी योगदान रहा है। इसलिए इस कृति में स्वतंत्रता आन्दोलन की अब तक अनजानी या विस्मृत महत्त्वपूर्ण घटनाओं का प्रामाणिक एवं सजीव दस्तावेज़ीकरण है।
लेखक भारतीय छात्र आन्दोलन की परम्परा से 1960 से 1970 के दशक के दौरान शीर्ष स्तर पर गहराई से जुड़े रहे हैं। इसलिए स्वाधीनता के बाद उपजे युवा आक्रोश और समकालीन राजनीतिक विचारधाराओं की सोच-समझ का इस उपन्यास में अन्तरंग विवरण एवं समालोचन है। भारत के राष्ट्रस्तरीय पर्वों के आयोजन के मूल भाव का विशद वर्णन और उनके ‘सर्व धर्म सद्भाव' के शाश्वत सन्देशों की व्याख्या है। यह उपन्यास राजनीतिक, सामाजिक क्षेत्रों तथा युवा पीढी से जुड़े व्यक्तियों के अतिरिक्त सामान्य पाठकों के लिए भी पठनीय है। इसमें आद्योपान्त रोचकता है, विभिन्न समयकाल की धड़कन है, स्पन्दन है।
Teen Saal
- Author Name:
Anton Chekhav
- Book Type:

-
Description:
‘तीन साल’ आदर्श और यथार्थ के द्वन्द्व से परिपूर्ण एक मर्मस्पर्शी उपन्यास है, जिसका कथानायक एक ऐसा नौजवान है जो संस्कारों की घुटन और थोथे हवाई आदर्शों की दुनिया में पला होने के कारण कभी अपने वातावरण से समझौता नहीं कर पाता। 'विवाह और प्रेम', 'प्रेम और विवाह', 'सुखी गृहस्थ जीवन'—आख़िर ये सब भ्रमोत्पादक विचार ही हैं जिनमें वह काफ़ी समय तक उलझा रहता है, और अन्तत: इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि 'व्यक्ति को ख़ुशी के विचारों को हमेशा के लिए त्याग देना चाहिए...सुख नाम की कोई चीज़ नहीं है...।' और तब वह पुराने ढर्रे के जीवन का आदि होते हुए भविष्य का इन्तज़ार करने लगता है; क्योंकि 'कौन जानता है कि भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है!' इस उपन्यास के ज़रिए लेखक ने परम्परा से चली आती आदर्शमूलक भ्रान्तियों पर तीव्र प्रहार किया है।
‘तीन साल’ उन्नीसवीं सदी के महान रूसी उपन्यासकार एन्तोन चेख़व की अमर कृति है, जिसका विश्व-साहित्य में सानी नहीं...।
Saathi
- Author Name:
Harsh Ranjan
- Book Type:

- Description: आते हैं और आते रहेंगे- हर साल ये फाल्गुन की हवाऐं जेठ की दुपहरी आषाढ के बादल भाद्र की फुहार और काँपती-कँपकँपाती पूस की पछिया बयार... हर बार एक परदेसी कोई आएगा, लौटकर अपने देस; झांकेगा, ताकेगा, हर गली-हर मुहल्ला लिए, दबाए, छाती में हूक एक... हर साल, हर बार जो आएगा, झांकता जाएगा, थोड़ा घबराकर, थोड़ा ठहरकर, सरसरी निगाहों से या कि संग लंबी आहों के ये राहें ...ये चौराहे, आ बैठेगा फिर कोई हर साल, हर बार मन के आंगन में ... चुप...चुप...चुप... एक अनकहा आश्वासन देंगे वो, पाएंगे हम ,थामे रखना! आऐंगे ही हम बाँटने ये सब-कुछ हर साल-हर बार.....
Ashoksundari
- Author Name:
Sumit Kumar Sambhav
- Book Type:

- Description: Hindi Book
Andhera Kona
- Author Name:
Uma Shankar Choudhary
- Book Type:

-
Description:
हर चर्च में एक क्वायर होता है। लड़के-लड़कियों का, स्त्रियों और पुरुषों का, जो आस्थावान और बे-आस्था सबको अपने धीमे गायन से आध्यात्मिक दुनिया की ऐसी गलियों में लिए चलता है कि मन भीग जाता है। ‘अँधेरा कोना’ पढ़ते हुए एक ऐसा ही धीमा दुःख मन को जकड़ने लगता है और फिर उसकी गिरफ्त से छूटना खासा मुश्किल हो जाता है। यह उपन्यास...एक नृशंस समय का रेखांकन है, एक हताशा और निराशा के बीच झूलते समाज का यथार्थवादी चिन्तन है।
उमा शंकर चौधरी एक जागरूक पर्यवेक्षक की तरह हमें उन गायब जगहों पर ले जाते हैं जहाँ पात्रों का एक क्वायर कुछ गा रहा है। आप यदि नजदीक जाकर सुनने की कोशिश करेंगे तो सुन लेंगे बखूबी उनका हलाक हो जाने वाला गीत। इस गीत में एक पूरा समय और समाज है, एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की उखड़ती परतें हैं, प्रेम है, निस्तार है, अभाव है और सब कुछ खत्म हो जाने के पहले कुछ विचार करने और बचा लेने की गुहार है।
अत्यन्त चुस्त भाषा, कथ्य की रवानगी, राजनीति और समाज पर मजबूत पकड़ के दिलचस्प वाकयों से भरा यह उपन्यास कोई जादुई यथार्थवाद का आख्यान नहीं है। यह तेतरी गाँव और पटौना स्टेशन का आज का सच है। बिहार के किसी जिले का सच। वहाँ की छीजती भाषा और संस्कृति का सच। स्त्री मुक्ति के शहरी आडम्बर का गँवई, पिछड़ा और दुखद सच। मोहब्बत के नाश का सच। प्रकृति से अलगाव का सच। लोकतंत्र के प्राण-पखेरू उड़ने की आशंका का सच। जो प्रीतिकर नहीं उसे ओझल कर देने का सच। उन अँधेरे कोनों का सच जो पारम्परिक रूप से पुरानी और बेकाम हो गई चीजों को फेंकने से पहले कुछ देर छिपा देने के लिए हुआ करते थे। लेकिन आज लोकतंत्र ने अपने तईं ऐसी व्यवस्था कर दी है कि हम सबने अपनी सुविधानुसार, अपने घरों, मोहल्लों के अलावा सार्वजनिक इस्तेमाल के स्पेसेस में भी वे अँधेरे कोने ‘डंपिंग ग्राउंड’ तैयार कर लिए हैं जहाँ हम बहुत आसानी से बेमोल चीजों को फेंक कर आ सकते हैं।
ऐसे में गायब हो गए विदो बाबू को कैसे ढूँढ़े नागो, गोकि उसे फरियाद करनी है और फरियाद करने का माद्दा तो सिर्फ उस साहसी बूढ़े के पास था—यही सच है आज का—देखिए न यह जादुई विकास का कैसा अद्भुत खेल है कि हमने अपने एक्टिविस्टों, समाज सुधारकों, को ही अँधेरे कोने में डाल दिया है।
—वन्दना राग
Devrani Jethani Ki Kahani
- Author Name:
P. Gauridutt
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Chakrateerth
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत उपन्यास ‘चक्रतीर्थ’ में कुषाणों और यूनानियों की दासता से ट्रस्ट और विखंडित भारत के पुनर्संगठित होकर एक सशक्त और समृद्ध देश बनने की यह प्रेरणादायक रंगारंग भारतीय छवियों से भरपूर, यह रोचक राष्ट्र-कथा पढ़कर आपको आज के भारत की समस्याओं पर गहराई से विचार करने की स्फूर्ति मिलेगी।
यह इतिहास कथा उस भावनात्मक आन्दोलन से जुड़ी है जिसने पहली बार भारत की सभी जातियों के उत्तम विचार और संस्कार लेकर तथा ब्राह्मण और श्रमण धर्म का उचित समन्वय करके समूचे भारत को वह एकता प्रदान की जिसके सही और ग़लत प्रभावों से यह देश आज तक बँधा हुआ है।
पुरानी दुनिया में भारत के महत्त्वपूर्ण स्थान और विश्वव्यापी मानव संस्कृति की रसभीनी छटा फहराने वाला, भारतीय साहित्य में अपने रंग का अकेला, यह उपन्यास आपके हाथों में है।
उपन्यास का पहला पृष्ठ पढ़ना आरम्भ कीजिए और फिर अन्तिम पृष्ठ पूरा पढ़े बिना आप इसे छोड़ नहीं सकेंगे।
Doctor On a Warfront
- Author Name:
Dr. Bharat Kelkar
- Book Type:

- Description: युद्ध! कोणतंच युद्ध माणसाला शहाणं करत नाही की कोणत्याही प्रश्नांची उत्तरं देत नाही. उलट ते नवे प्रश्न निर्माण करतं. बदल्याच्या भावनेनं माणसाला वेडं बनवतं. तरीही माणसं युद्ध करत राहतात, नवनवी शस्त्रं हाती घेऊन परस्परांना मारत राहतात. पण त्यात भरडले जातात ते निरपराध सामान्य नागरिक. विशेषतः युद्धाशी संबंध नसणाऱ्या महिला, मुलं आणि वयोवृद्ध माणसं हकनाक बळी ठरतात युद्धाचे... हीच बाब अनेकांना खेचून नेते युद्धभूमीकडे माणुसकीवरचा विश्वास दृढ करण्यासाठी... अशी माणसं मग युद्धाच्या जखमांवर उपाय करण्यासाठी धडपडत राहतात... त्यातूनच जन्माला येते ‘डॉक्टर विदाऊट बॉर्डर्स'सारखी संस्था, जी निसर्गनिर्मित अथवा मानवनिर्मित आपत्तींमध्ये अडकलेल्यांना जीवदान देण्याचं काम अव्याहतपणे करते. हीच संस्था काही सेवाव्रत्तींना संधी देते अडचणीत सापडलेल्या माणसांना वाचवण्याची. स्वतःचा जीव धोक्यात घालून ही सेवाव्रत्ती माणसं सहभागी होतात अशा मिशनमध्ये आणि अनुभवाचं एक वेगळंच विश्व घेऊन परततात. कसा असतो हा जगावेगळा अनुभव? कोणत्या परिस्थितीत ते युद्धग्रस्तांवर उपचार करतात? युद्धाकडे ते कसे बघतात? उपचारासाठी येणारे युद्धग्रस्त त्यांच्याकडे कसे बघतात? डोळ्यांसमोर अनेकांचा मृत्यू दिसत असताना जखमींना वाचवण्याची कसरत कशी चालते? अशा एक ना अनेक प्रसंगांचं, युद्धभूमीवरच्या नाट्याचं थरारक तितकंच अस्वस्थ करणारं अनुभवकथन... सीरिया, येमेन आणि इराक या तीन युद्धग्रस्त भागात रुग्णसेवा देण्यासाठी गेलेल्या एका भारतीय ऑर्थोपेडिक सर्जनने घेतलेले विलक्षण अनुभव मांडणारे मराठीतले पहिलेच पुस्तक... ‘डॉक्टर ऑन अ वॉरफ्रंट'! डॉक्टर ऑन अ वॉरफ्रंट | डॉ. भरत केळकर Doctor On A Warfront | Dr. Bharat Kelkar
Udas Naslein
- Author Name:
Abdullah Hussain
- Book Type:

-
Description:
भारत के विभाजन और विस्थापन का गहरा चित्रण सबसे ज़्यादा उर्दू, उसमें भी ख़ासकर पाकिस्तान के कथा-साहित्य में हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण शायद यह है कि मुख्य भूमि को छोड़कर वहाँ गए लेखक अब भी किसी न किसी स्तर पर विस्थापन के दर्द को महसूस करते हैं। हालाँकि, उनका लेखन एक महान सामाजिक संस्कृति और विरासत से कट जाने के दर्द तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसमें अपनी अस्मिता को नए ढंग से परिभाषित करने का उपक्रम भी है।
पाकिस्तान के सुविख्यात लेखक अब्दुल्लाह हुसैन के इस उपन्यास की विशेषता यह है कि इसका कथानक विभाजन और विस्थापन तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य कई प्रकार की अस्मिताओं की टकराहट इसमें देखी जा सकती है। भारतीय उपमहाद्वीप के परम्परागत समाज के आधुनिक समाज में तब्दील होने की जद्दोजहद इसके केन्द्र में है।
उपन्यास का कथानक प्रथम विश्वयुद्ध के कुछ पूर्व से विभाजन और उसके पश्चात् की घटनाओं और उपद्रवों के समय तक फैला हुआ है। विशाल कैनवस वाला यह उपन्यास तीन युगों का दस्तावेज़ है। पहला अंग्रेज़ी साम्राज्य का युग, दूसरा स्वतंत्रता की प्राप्ति के लिए संघर्ष का काल और तीसरा विभाजन के पश्चात् का ज़माना। इसमें हिन्दुस्तान में बसनेवाली कई पीढ़ियों के साथ बदलते हुए ज़मानों का चित्रण है और समाज, सभ्यता तथा राजनीति की पृष्ठभूमि में बदलती हुई सोच का भी।
‘उदास नस्लें’ का नायक कोई व्यक्ति न होकर, समकालीन जीवन के विभिन्न कालखंड और उनसे गुज़रते हुए संघर्ष तथा व्यथा के भँवर में घिरी तीन पीढ़ियाँ हैं। इतिहास का ताना-बाना उन्हीं के अनुभवों के इर्द-गिर्द बुना गया है। इसमें शहरी तथा ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले दो परिवारों की कथा है।
नईम और अज़रा दो भिन्न समाजों और मानसिक और भावात्मक सरोकार के दो विपरीत पक्षों के प्रतिनिधि हैं। उनके बीच प्रक्रिया और प्रतिक्रिया का सिलसिला जारी रहता है। वे दोनों अपनी जड़ों से तो नहीं कट सकते, क्योंकि वे उनके संस्कारों का हिस्सा बन चुकी हैं, फिर भी एक प्रकार के कायाकल्प की प्रक्रिया से वे ज़रूर गुज़रते हैं।
नईम अपने स्वभाव और मूल वृत्तियों से धरती का बेटा है, परन्तु अज़रा के माध्यम से उसका परिचय उस जीवन से होता है जो किसी हद तक परम्परागत मान्यताओं के अनुरूप नहीं है। नईम और अज़रा की आपसी निष्ठा और आत्मीयता में प्रेम का तत्त्व उतना महत्त्वपूर्ण नहीं है जितना दो अस्मिताओं में एकत्व पैदा करने और उनके अन्दर विस्तार तलाश करने की भावना। परन्तु, अन्त में उसकी पराजय हृदयविदारक है।
अब्दुल्लाह हुसैन का यह बहुचर्चित उपन्यास पहली बार पाकिस्तान में 1963 में छपा था। 1964 में इसे ‘आदम जी पुरस्कार’ प्राप्त हुआ।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book