Barfiyan Vyangya Ki
(0)
Author:
Mahesh Garg "Bedhadak"Publisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
200
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"अफसर होना व्यर्थ है अफसर होना व्यर्थ है, घर में पूछ न ताछ पत्र-प्रपोजल छोड़कर, बना रहे हैं छाछ बना रहे हैं छाछ, प्रभु क्या हालत कीन्हीं मैडम का अब काम रह गया नुक्ता-चीनी माँ के संग मिलकर बच्चे भी कोस रहे हैं कुछ आता-जाता नहीं, ये केवल बॉस रहे हैं। पोशाक फ्रंट रो में एक नेता चल रहे थे साथ-साथ झकझकाती ड्रेस उनकी देखकर मैंने कहा तीन पीढ़ी से यही पोशाक, कोई खास बात? वो जरा से मुस्कराए कवि से कोई क्या छुपाए? आजकल इसके बिना पहचान नहीं है अस्ल बात—इसमें गिरेबान नहीं है! "
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"अफसर होना व्यर्थ है
अफसर होना व्यर्थ है, घर में पूछ न ताछ
पत्र-प्रपोजल छोड़कर, बना रहे हैं छाछ
बना रहे हैं छाछ, प्रभु क्या हालत कीन्हीं
मैडम का अब काम रह गया नुक्ता-चीनी
माँ के संग मिलकर बच्चे भी कोस रहे हैं
कुछ आता-जाता नहीं, ये केवल बॉस रहे हैं।
पोशाक
फ्रंट रो में एक नेता चल रहे थे साथ-साथ
झकझकाती ड्रेस उनकी देखकर मैंने कहा
तीन पीढ़ी से यही पोशाक,
कोई खास बात?
वो जरा से मुस्कराए
कवि से कोई क्या छुपाए?
आजकल इसके बिना पहचान नहीं है
अस्ल बात—इसमें गिरेबान नहीं है!
"
Book Details
-
ISBN9789390378319
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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