The Unfrazzled Kite
Author:
Kamal PandaPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 201.45
₹
237
Available
Aaditya had it all; he was successful, wealthy and at the top of his game, yet he felt a void in his life. He was ready to relinquish all to find out the secret his father tried to tell him When he was breathing his last and also to seek out his lost love one last time. Would she still be waiting for him after all these years? What was his father trying to tell him? How far would you go to find out the truth? Aaditya decided to go back to his roots in a quest to find all that he had lost…..
ISBN: 9788194128977
Pages: 1600
Avg Reading Time: 27 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘नरकयात्रा’ और ‘बारामासी’ के बाद ‘मरीचिका’ हमें नितांत नए ज्ञान चतुर्वेदी से परिचित कराता है।
इस पौराणिक फैंटेसी में वे भाषा, शैली, कथन तथा कहन के स्तर पर एकदम निराली तथा नई ज़मीन पर खड़े दीखते हैं। यहाँ वे व्यंग्य को एक सार्वभौमिक चिंता में तब्दील करते हुए ‘पादुकाराज’ के मेटाफर के माध्यम से समकालीन भारतीय आमजन और दरिद्र समाज की व्यथा-कथा को अपने बेजोड़ व्यंग्यात्मक लहजे में कुछ इस प्रकार कहते हैं कि पाठक के समक्ष निरंकुश सत्ता का भ्रष्ट तथा जनविरोधी तंत्र, राजकवि तथा राज्याश्रयी आश्रमों के रूप में सत्ता से जुड़े भोगवादी बुद्धिजीवी और पादुकामंत्री, सेनापति-पादुका राजसभा आदि के ज़रिए तथाकथित श्रेष्ठिजनों के बीच जारी सत्ता-संघर्ष का मायावी परंतु भयानक सत्य–सब कुछ अपनी संपूर्ण नग्नता में निरावृत हो जाता है। ‘पादुकाराज’, ‘अयोध्या’ तथा ‘रामराज’ के बहाने ज्ञान चतुर्वेदी मात्र सत्ता के खेल और उसके चालाक कारकों का ही व्यंग्यात्मक विश्लेषण नहीं करते हैं, वे मूलतः इस क्रूर खेल में फँसे भारतीय दरिद्र प्रजा के मन में रचे-बसे उस यूटोपिया की भी बेहद निर्मम पड़ताल करते हैं, जो उस ‘रामराज’ के स्थापित होने के भ्रम में ‘पादुका-राज’ को सहन करती रहती है, जो सदैव ही मरीचिका बनकर उसके सपनों को छलता रहा है।
स्वर्ग तथा देवता की एक समांतर कथा भी उपन्यास में चलती रहती है, जो भारत के आला अफ़सरों की समांतर परन्तु मानो धरती से अलग ही बसी दुनिया पर बेजोड़ टिप्पणी बन गई है। आधुनिक भारत के इन ‘देवताओं’ का यह स्वर्ग ज्ञान के चुस्त फिकरों, अद्भुत विट और निर्मल हास्य के प्रसंगों के जरिए पाठकों के समक्ष ऐसा अवतरित होता है कि वह एक साथ ही वितृष्णा भी उत्पन्न करता है और करुणा भी। और शायद क्रोध भी।
हिन्दी में फैंटेसी गिनी-चुनी ही है। विशेष तौर पर हिन्दी व्यंग्य में पौराणिक फैंटेसी जो लिखी भी गई है, वे प्रायः फूहड़ तथा सतही निर्वाह में भटक गई हैं। इस लिहाज से भी ‘मरीचिका’ एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है।
And Tomorrow Comes Another Day
- Author Name:
Thashneem Sunil
- Book Type:

- Description: How does a lady feel when her wedded life breaks into pieces and she gets raped by her mother-in-law in-law. What does she look like the future starting there? Won't life go blank and turn into a question mark? This lady was dhiani, a rape victim. Same way what happens when a man comes to realize that his wife is a call girl? This was phani who adored his life partner to the core. Dhiani over looked everything. She turned out to be more grounded after all this and particularly when her parents never trusted her and deserted her. Starting there she saw how to live without contingent upon somebody. Later at a point, phani and dhiani fell in love with each other. It was phani, who was a consistent backing for her. Life is simple, it has numerous today's and every today has a tomorrow and each tomorrow we have an issue sitting tight for us to handle it. Same way, This story spins around dhiani and phani who face different difficulties in their day - to-day lives to withhold a relationship. They change their difficulties into circumstances which made them feel more certain. They gathered all the lessons what life gave them and that helped them to bolster Shruthi, their closest companion and sheetal's dhiani's sister.
Tajmahal Ke Ansu
- Author Name:
Sunil Vikram Singh
- Book Type:

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Description:
ताजमहल के आँसू प्रेम का मार्मिक आख्यान है। उपन्यास की कथा दो स्तरों पर चलती है। एक स्तर पर है पूर्णेन्दु शेखर और मधुरिमा चटर्जी की प्रेम कहानी और दूसरा स्तर है पूर्णेन्दु शेखर, शेखर द्वारा रचित उपन्यास ‘ताजमहल’ के किरदारों का संसार। उपन्यास की कहानी दोनों स्तरों पर समानान्तर चलती है और पाठकों को कभी मुगल काल में ले जाती है तो कभी वर्तमान समय से साक्षात्कार कराती है। अतीत और वर्तमान के विस्तृत कैनवास पर रचित इस उपन्यास में पाठकों को बाँधे रखने की अद्भुत क्षमता है। इस लिहाज से यह उपन्यास पठनीयता को सुरक्षित रखते हुए शिल्पगत प्रयोग का अनूठा उदाहरण है।
अतीत से वर्तमान और इतिहास से कल्पना के बीच आवाजाही करता यह उपन्यास गहरे सामाजिक सरोकार और जनप्रतिबद्धता का भी परिचायक है। ताजमहल का डिजाइन बनाने वाले उस्ताद ईसा और शाहजहाँ की बेटी जहाँआरा की प्रेम कहानी को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि इसमें एक कलाकार का अन्तर्द्वन्द्व और उसकी पीड़ा भी अभिव्यक्त हो जाती है। प्रेम-कथा के आवरण में सामाजिक यथार्थ को उजागर करने वाला यह उपन्यास निश्चय ही पाठकों को पसन्द आयेगा।
—डॉ. दिनेश कुमार
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