Madhur Swapna
Author:
Rahul SankrityayanPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
‘मधुर स्वप्न’ एक ऐतिहासिक उपन्यास है। इतिहास के अध्येता-अन्वेषक के रूप में राहुल सांकृत्यायन ने ऐसे पक्षों और प्रसंगों को उजागर करने में विशेष दिलचस्पी दिखाई जिनमें गणतांत्रिक, समाजवादी और साम्यवादी मूल्यों के चिह्न मिलते हैं। वस्तुतः पाठकों को वे यह दिखलाना चाहते थे कि भेद-भावमुक्त और बराबरी पर आधारित समाज के निर्माण के लिए जिन मूल्यों की वकालत की जा रही है उनका एक ठोस ऐतिहासिक आधार है; वे मानव समाज की विरासत का हिस्सा हैं। यह सोच ‘मधुर स्वप्न’ सहित उनकी सभी ऐतिहासिक कृतियों में स्पष्ट झलकती है। इस उपन्यास की कथाभूमि है मध्य एशिया में दजला नदी से यक्षु नदी तक की भूमि और काल है पाँचवीं सदी के अन्तिम दशक से लेकर छठी सदी के आरम्भिक तीन दशक। तब वहाँ सासानी वंश का पीरोजा पुत्र कवात् का शासन था। धर्माचार्यों का उन दिनों बड़ा जोर था। इस उपन्यास में उन्हीं दिनों के सामन्ती शासन के वैभव-विलास, धर्माचार्यों की अनीति और दुराचार तथा दीन-दुखियों के करुण चीत्कार का विश्वसनीय चित्रण हुआ है। इसमें इतिहास के दोनों प्रकार के पात्र जीवन्त रूप में उपस्थित हैं—वे जिन्होंने बल और धन के जोर पर जन सामान्य का शोषण करना अपना शाश्वत अधिकार समझा, और वे भी जो प्रतिकूल से प्रतिकूल परिस्थितियों में भी न्याय हासिल करने के स्वप्न को नहीं भूले और उसके लिए त्याग किया। धनिकों और गरीबों, शासकों और शासितों की विषम स्थिति के बीच न्याय और जनमुक्ति का यह मधुर स्वप्न ही इस उपन्यास का मूल सन्देश है।
यह उपन्यास, वास्तव में, युग-युग के उस स्वप्न की सम्पूर्ण झलक है जो धीरे-धीरे, आंशिक रूप में ही सही, सत्य बनता जा रहा है।
ISBN: 9789348157348
Pages: 232
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Andekhe Anjaan Pul
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

- Description: भूरे लोगों के इस भारतीय समाज में स्त्री को कई अपमानजनक परीक्षाओं से गुज़रना पड़ता है। विवाह की पहली शर्त है—उसका गोरा होना। लड़की यदि काली, कुरूप हुई तो अस्वीकार का कोड़ा लहराने लगता है। क्या काली लड़की को सपने देखने का हक़ नहीं है? इस उपन्यास की नायिका निन्नी कालापन और कुरूपता के बावजूद सपनों में निकट के सागर को देखती है, लेकिन निन्नी के छूते ही सपने में बनी बर्फ़ की मूर्ति गल जाती है। जबकि दूर का और लगभग अनजाने दर्शन द्वारा समानता और स्नेह से दिया गया चुम्बन एक पुल बन जाता है। प्रख्यात कथाकार का यह उपन्यास स्त्री-जीवन को समानता की गरिमा देने पर बल देता है।
Paon Ka Sanichar
- Author Name:
Akhilesh Mishra
- Book Type:

-
Description:
अपने समय के चर्चित पत्रकार और लेखक अखिलेश मिश्र के इस पहले उपन्यास में आज़ादी से पूर्व के उत्तर भारत के ग्रामीण परिवेश के सौहार्दपूर्ण सामाजिक जीवन का जीवन्त चित्रण हुआ है।
बटोहियों की बतकही के अद् भुत कथारस से आप्लावित यह आख्यान ग्रामीण जीवन के कई अनछुए पहलुओं से साक्षात्कार कराता है।
इसमें एक बच्चे के युवा होने तक के जीवनानुभव की कथा के माध्यम से देश-काल के हरेक छोटे-बड़े विडम्बनापूर्ण क्रिया-व्यवहारों, रूढ़ियों और अन्धविश्वासों पर मारक व्यंग्य किया गया है। पूरा उपन्यास इस विद्रोही ‘जनमदागी’ नायक की शरारतों (और शरारतें भी कैसी-कैसी—नुसरत की नानी की अँगनई में बैठकर चोटइया काट डालने, छुआछूत नहीं मानने की ज़िद में नीच जाति से रोटी लेकर खाने, उसी की गगरी से पानी पीने, गुलेल से निशाना साधने, तालाब में तैरने आदि की पूरी कथा) से भरा पड़ा है। यही विद्रोही मानसिकता आगे चलकर धार्मिक कर्मकांडों और अंग्रेज़ों की सत्ता के विरुद्ध संघर्ष में तब्दील हो जाती है।
इसमें तत्कालीन समाज में स्त्रियों की स्थिति-नियति का जिस संवेदनापूर्ण ढंग से चित्रण हुआ है और उस स्थिति के ख़िलाफ़ लेखकीय व्यंग्य की त्वरा जिस रूप में उभरकर सामने आई है, वह भी विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
इस उपन्यास को विरल कथ्य के साथ-साथ शैली लाघव और कहन की भंगिमा के लिए भी लम्बे समय तक याद रखा जाएगा।
Dantkatha
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

-
Description:
बहुचर्चित कथाकार अब्दुल बिस्मिल्लाह की क़लम से लिखा गया यह एक अद् भुत उपन्यास है। अद्भुत इस अर्थ में कि इसकी समूची संरचना उपन्यास के प्रचलित मुहावरे से एकदम अलग है। इसमें मनुष्य की कहानी है या मुर्ग़े की अथवा दोनों की, यह जिज्ञासा लगातार महसूस होती है, हालाँकि यह न तो फंतासी है, न कोई प्रतीक-कथा।
कथा-नायक है एक मुर्ग़ा, जो मनुष्य की हत्यारी नीयत को भाँपकर अपनी प्राण-रक्षा के लिए एक नाबदान में घुस जाता है। लेकिन हुआ क्या? यह तो अब नाबदान से भी बाहर निकलना मुश्किल है। ऐसे में वह लगातार सोचता है : अपने बारे में, अपनी जाति के बारे में। और सिर्फ़ सोचता ही नहीं, दम घोंट देनेवाले उस माहौल से बाहर निकलने के लिए जूझता भी है। लगातार लड़ता है भूख और चारों ओर मँडराती मौत से, क्योंकि वह ज़िन्दा रहना चाहता है और चाहता है कि मृत्यु भी अगर हो तो स्वाभाविक, मनुष्य के हाथों हलाल होकर नहीं। इस प्रकार यह उपन्यास नाबदान में फँसे एक मुर्ग़े के बहाने पूरी धरती पर व्याप्त भय, असुरक्षा और आतंक तथा इनके बीच जीवन-संघर्ष करते प्राणी की स्थिति का बेजोड़ शब्दचित्र प्रस्तुत करता है। लेकिन मनुष्य और मुर्ग़े के अन्तःसम्बन्धों की व्याख्या-भर नहीं है यह, बल्कि मुर्ग़ों-मुर्ग़ियों का रहन-सहन, उनकी आदतें, उनके प्रेम-प्रसंग, उनकी आकांक्षाएँ, यानी सम्पूर्ण जीवन-पद्धति यहाँ पेन्ट हुई है। शायद यही कारण है कि 'दंतकथा’ में हर वर्ग का पाठक अपने-अपने ढंग से कथारस और मूल्यों की तलाश कर सकता है।
Apradh Aur Dand
- Author Name:
Fyodor Dostoyevsky
- Book Type:

-
Description:
दोस्तोयेव्स्की ने अपने समय के निरंकुश शासन और सामाजिक संरचना में जी रहे आम रूसी लोगों के दारुण यंत्रणा-भरे जीवन और निरन्तर आत्मा पर बोझ डालने वाले अमानवीय परिवेश को, उनके अवसादों, घुटन और खंडित स्वप्नों को, पुरातन मन्थरता की पीड़ा को और साथ ही पूँजीवादी संक्रमण के साथ-साथ जारी सामाजिकता के व्यक्तित्व के विघटन को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। अपने दिक्काल के यथार्थ के कलात्मक पुनर्सृजन के लिए उन्होंने जो प्रविधि अपनाई, वह पात्रों के मनोजगत के संश्लिष्ट बहुपरती द्वन्द्वों में गहरे, और गहरे उतरते जाने की प्रविधि थी।
'अपराध और दंड' लेखक के सभी उपन्यासों में सबसे आसानी से पढ़ा जा सकनेवाला उपन्यास है। यद्यपि समझने की दृष्टि से यह एक कठिन और गूढ़ रचना है। इस उपन्यास को लेकर प्रचलित धारणाएँ अपेक्षाकृत सरलीकृत हैं, जिनमें सारा ध्यान उसकी अन्तर्वस्तु के किसी एक पहलू पर केन्द्रित किया जाता है। मसलन, 'अपराध और दंड' को प्राय: एक क़िस्म का 'फ़ौजदारी' उपन्यास माना जाता है अथवा उसे कोरी राजनीतिक कृति समझा जाता है, जो तथाकथित निषेधवादियों अर्थात गत शती के सातवें दशक के विप्लवी और क्रान्तिकारी विचारमना रूसी युवाजन के विरुद्ध लक्षित है।
निस्सन्देह, उपन्यास में ये सभी बातें किसी-न-किसी हद तक मौजूद हैं। दोस्तोयेव्स्की ने हत्यारे की मनोदशा का सूक्ष्मतम, बेजोड़ कलात्मक 'विश्लेषण' किया था। इस बात में भी कोई सन्देह नहीं कि उपन्यास रूसी निषेधवाद से गहरे रूप से सम्बन्धित है। इसी तरह इसमें तनावपूर्ण नैतिक-दार्शनिक मर्म भी भरपूर है। लेकिन मूल बात कुछ और ही है। दोस्तोयेव्स्की के उपन्यासों के मूलाधार में विचार-मानव यानी ऐसे चरित्र हैं जो इस या उस विचार के अन्धाधुन्ध समर्थक हैं। 'अपराध और दंड' इसका साकार रूप है; इसमें नायक ने अपने सर्वस्व को एक भ्रामक ही नहीं, वरन् भयावह विचार के लिए अर्पित कर दिया है...।
Kasch Ka Vinash
- Author Name:
Roberto Calasso
- Book Type:

-
Description:
इस शानदार पुस्तक में, ‘द मैरिज ऑफ़ कैडमस एंड हारमनी’ के ख्यात लेखक, रॉबर्तो कलासो उस कोड का रहस्य खोल देते हैं जिसे बॉदिलेयर आधुनिक कहता है—फ्रेंच रिवॉल्यूशन से चलकर निरन्तर घातक होती द्वितीय विश्वयुद्ध तक की कालावधि। टैलीरॉ के फ़्रांस से लेकर विख्यात अफ़्रीकन शहर कश तक, लेनिन के रूस और कम्बोडिया के नरसंहारी खेतों तक, कलासो हमें मिथकों, साहित्य, कला और विज्ञान की लुभावनी भूल-भुलैयों से होकर सभ्यता के केन्द्र में लाते हैं जहाँ वे इतिहास के गुह्यतम रहस्यों का उद्घाटन करते हैं। आवाज़ों और वार्तालापों से भरी-पूरी, आश्चर्यजनक, पहेली बुझाती, यह गहन पुस्तक पढ़कर भूल जानेवाली चीज़ नहीं है। यह किसी प्राचीन पुस्तकालय की गन्ध की भाँति स्मृति में बसी रह जाती है।
—सुनील खिलनानी, ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’, बुक रिव्यू
ऐसा लगता है कि कलासो ने इस माँग करती और कुरेदनेवाली पुस्तक को बनाने में कम से कम एक राष्ट्रीय पुस्तकालय को खँगाला होगा। इसकी विषय-वस्तु आधुनिक मस्तिष्क का छिछलापन है और आधुनिक संस्कृति की कार्य-विधि के कारण ही जिसका कलासो ऐसी बारीकी और योग्यता से विश्लेषण करते हैं...मैं उस विशेषण का प्रयोग करने में हिचक रहा हूँ जिसके योग्य यह पुस्तक सर्वथा है : मास्टरपीस (श्रेष्ठ रचना)...सभी महान पुस्तकों की भाँति यह पुस्तक हमें अधिक पढ़ती है और हम इसे कम पढ़ते हैं और कला या चिन्तन की महान रचनाओं के समान ही, यह आपको अपना जीवन बदलने के लिए विवश कर सकती है।
—जे टॉल्सन, ‘सिविलिजे़शन’
‘द रुइन ऑफ़ कश’ दो विषय लेती है : प्रथम है टैलीरॉ और दूसरा है बाक़ी सब चीज़ें, और बाक़ी सब चीज़ों में वे सब चीज़ें शामिल हैं जो मानव इतिहास में घटित हुई हैं, सभ्यता की शुरुआत से लेकर आज तक...। यह एक ऐसी पुस्तक है जो अपने आपको एक भटकन और आवारापन में उजागर करती है, अपनी कल्पना, मनमर्ज़ी और कभी न तृप्त होनेवाली जिज्ञासा से मार्गदर्शन प्राप्त करती है, और बनी हुई है टुकड़ों से, उद्धरणों और इधर-उधर भटकने से, कहानियों, लघुकथाओं और कहावतों से—यह सब इसलिए कि इसे एक अविरल आनन्द के साथ पढ़ा जा सके।
—इटालो काल्विनो, ‘पैनेरामा मेस’
Naari
- Author Name:
Siyaramsharan Gupt
- Book Type:

-
Description:
चिरन्तन नारी युग-युग के अन्धकार में, उसे तुच्छ करके चिरकाल से आगे बढ़ती जा रही है, दु:ख और विपत्ति के अँधियारे पथ को पददलित करती हुई। उसे कोई भय नहीं है, कोई चिन्ता नहीं है। यही वह भाव है, यही वह मूल-मंत्र है, जिसके इर्द-गिर्द प्रसिद्ध उपन्यासकार सियारामशरण गुप्त जी ने इस उपन्यास का ताना-बाना बुना है, जो रोचक है, उत्कृष्ट मनोरंजन प्रदान करनेवाला है, और दिशाहीन होते समाज को सही दिशा दिखानेवाला भी है।
नारी सहित प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर की सृष्टि है। इसी कारण ईश्वर की तरह वह गहन भी है। ईश्वर की तरह ही कष्ट सहन करके ही उसे ईश्वरीय शक्ति उपलब्ध करना होगा। उचित यही है, करणीय यही है। यही वह मान्यता है, यही वह सिद्धान्त है, जिसे इस उपन्यास में निरूपित किया गया है, स्थापित किया गया है। उपन्यास के पात्र जैसे सजीव होकर इन सर्वोच्च मान्यताओं को अपने क्रिया-कलापों और संवादों से इस प्रकार पूर्णता से स्थापित करते चलते हैं कि पाठक के मन-मस्तिष्क पर उसका स्थायी प्रभाव पड़े।
It's All About SRK
- Author Name:
Tania Ioannou
- Book Type:

- Description: How Shah Rukh Khan’s ted talk gave me a Spark of life after the loss of My 23 year- old daughter. This is the voice of an amateur, which may lack linguistic value but reveals the voice of the heart. Hello, My name is Tania ioannou, L grew up in Australia as a child of Greek immigrants.When L was a teenager, we returned to Greece.I am married and have 4 Children. When My eldest daughter was 23 years old, she was killed in a car accident.Needless to say, L was devastated! I knew nothing of Shah Rukh Khan nor of Hollywood.It is far from My culture and country.I saw his ted talk on the Internet and was curious to find information about his life and achievements.This introduced me to an awakening from the lethargy of pain and emptiness that L was enduring.L found a Spark of life, all over again, to the joy of My other 3 Children who are surprised to see me engaged in other activities other than My work.I teach English as a Second language to Non native speakers.I used to write poetry in Greek of which some poems were published in local magazines.L am not ashamed to say that at the age of 56, yes 56, and with 3 Children, L was intrigued to write poetry for the first time in my life in English about this extraordinary individual named Shah Rukh Khan.Therefore it is an amateur’s attempt to introduce the sensitive, inspiring world of srk and if L have managed to capture the soul, heart and thoughts of his admirers and of the superstar himself, even at the least, then L will have conquered an impossible dream! L have written 26 poems which I have printed as a book, dedicated to his 26 years of showbiz. It is a tribute to the life, work and performance of this super talented megastar! This was all feasible due to ted Talks and L was also inspired to become a volunteer ted translator in Greek as a tribute to the involvement with ted India for, which L have also written a poem. Thank you Shah Rukh Khan for the opportunity to set out on this wonderful, sentimental journey….
Salam Aakhiri
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

-
Description:
समाज में वेश्या की मौजूदगी एक ऐसा चिरन्तन सवाल है जिससे हर समाज हर युग में अपने-अपने ढंग से जूझता रहा है। वेश्या को कभी लोगों ने सभ्यता की ज़रूरत बताया, कभी कलंक बताया, कभी परिवार की क़िलेबन्दी का बाई-प्रोडक्ट कहा और कभी सभ्य, सफ़ेदपोश दुनिया का गटर जो ‘उनकी’ काम-कल्पनाओं और कुंठाओं के कीचड़ को दूर अँधेरे में ले जाकर डंप कर देता है। इधर वेश्याओं को एक सामान्य कर्मचारी का दर्जा दिलाए जाने की क़वायद भी शुरू हुई है। लेकिन
ऐसा कभी नहीं हुआ कि समाज अपनी पूरी इच्छाशक्ति के साथ वेश्यावृत्ति के उन्मूलन के लिए कटिबद्ध हो जाए; इस अभिशाप के उन्मूलन के नाम पर तमाम तरह के उत्पीड़न-दमन और शोषण का शिकार वेश्याएँ ज़रूर होती रही हैं।
यह उपन्यास वेश्याओं और वेश्यावृत्ति के पूरे परिदृश्य को देखते हुए हमारे भीतर उन असहाय स्त्रियों के प्रति करुणा का उद्रेक करता है, जो किसी भी कारण इस बदनाम और नारकीय व्यवसाय में आ फँसी हैं।
कलकत्ता के सोनागाछी रेड लाइट एरिया की अँधेरी गलियों का सीधा साक्षात्कार कराते हुए लेखिका सभ्य समाज की संवेदनहीनता और कठोरता को भी साथ-साथ झिंझोड़ती चलती है; यही चीज़ इस उपन्यास को सिर्फ़ एक कथा-पुस्तक की हद से निकालकर एक दस्तावेज़ में बदल देती है।
Match Box 81
- Author Name:
Dr. Lata Kadambari Goel
- Book Type:

- Description: "फास्ट फूड तथा पाउच के जमाने में वक्त की कमी को देखते हुए कहानियाँ भी छोटी-छोटी होनी चाहिए न! बिल्कुल ऐसी कि माचिस की एक डिब्बी में समा जाएँ। इस पुस्तक में लेखिका ने अपने समाजोपयोगी विचारों और भावों को ‘मैच बॉक्स 81’ में डाला है। जरा जलाइए न उसको। कैसी नीली, पीली, लाल, गुलाबी ‘लौ’ छोड़कर अचानक बुझ जाती है वो नन्हीं सी तीली। ऐसी ही नन्हीं-नन्हीं कहानियों की शक्ल लिये ये ‘तीलियाँ’ मतलब कि ये छोटी-छोटी कहानियाँ हैं, जो अपने ज्ञान की रोशनी से पाठकों के जीवन को प्रकाशमान करेंगी। लेखिका ने इन कहानियों के माध्यम से जीवन की छोटी-छोटी, लेकिन महत्त्वपूर्ण समस्याओं को सुलझाने के लिए एक व्यावहारिक ताना-बाना बुनने का कुछ इस प्रकार से प्रयास किया है कि कहानी भीतर तक झकझोर देनेवाला एक सवाल उठाकर खत्म हो जाती है। जीवन के अंधकार से निकलने का एक छोटा सा प्रयास है ये पठनीय कहानियाँ। "
Samay Se Aage
- Author Name:
Sitaram Jha Shyam
- Book Type:

-
Description:
डॉ. सीताराम झा ‘श्याम’ विरचित ‘समय से आगे’ शीर्षक उपन्यास जितना ही रोचक है, उतना ही प्रेरक और प्रभावक भी। इसमें विशाल एवं विस्तृत सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा बौद्धिक-सांस्कृतिक पट-भूमि पर समग्र मानव जीवन का अभूतपूर्व चित्रण किया गया है। वस्तुतः, जीवन के सभी पक्ष अपनी परिपूर्णता में व्यंजित हैं। मानव प्रेम एवं प्रकृति-प्रेम में समवाय सम्बन्ध दिखाते हुए प्रेम को नया विस्तार प्रदान किया गया है, जो जीवन में आशा का संचार करता है, विकास की नई दिशाओं की तलाश के लिए नई दृष्टि प्रदान करता है—शोषण, उत्पीड़न, प्रपीड़न से मुक्त होने तथा समस्त प्राणियों को निर्भर रहने का अमर सन्देश देता है।
इस उपन्यास के कुछ पात्र—विभाकर, रंचना, नन्दिता, निदेश, चलित्तर, सुराजीदास, अनुपम आदि ऐसे हैं, जो धैर्य, साहस, आत्मबल, उत्साह, दूरदृष्टि, कर्मठता, दक्षता, ईमानदारी आदि मानवीय गुणों का उत्कृष्ट परिचय देकर जीवन को सफल-सार्थक बनाते हैं। इसके विपरीत, वल्लरी, सौदामिनी, पुरन्दर जैसे पात्र वर्तमान जीवन के संघर्षपूर्ण दौर में आगे बढ़ने के लिए छटपटाते तो हैं ज़रूर, पर उन्हें न तो आधार भूमि की परख है और न ही मंज़िल का पता। इसी से आगे बढ़ने की अमर्यादित इच्छा उनके वर्तमान को तो विनष्ट कर ही देती है, गौरवपूर्ण अतीत से भी प्रेरणा लेने के योग्य नहीं रहने देती। ऐसी स्थिति में प्रोज्ज्वल भविष्य के दर्शन का सुयोग कैसे मिल सकता है? उपन्यास का पहला ही वाक्य अद्भुत प्रकाश फैला देता है अतीत से भविष्य तक ‘व्यक्ति बहुत कुछ बन जाने की भाग-दौड़ में मनुष्य बनना ही भूल जाता है।’
डॉ. श्याम के इस उपन्यास में मानवीय संवेदना की अप्रतिम अभिव्यंजना है—निश्चल संवेदना की वह मार्मिक व्यंजना, जो मनुष्यता की अनिवार्य शर्त है, जिसके बिना जीवन नीरस और निरर्थक बन जाता है। सम्पूर्ण उपन्यास पढ़ जाने पर किसी को भी यह कहने में संकोच का अनुभव नहीं होगा कि ‘समय से आगे’ उपन्यास लेखन के क्षेत्र में नया प्रतिमान है।
Tarpan
- Author Name:
Shivmurti
- Book Type:

-
Description:
‘तर्पण’ भारतीय समाज में सहस्राब्दियों से शोषित, दलित और उत्पीड़ित समुदाय के प्रतिरोध एवं परिवर्तन की कथा है। इसमें एक तरफ़ कई-कई हज़ार वर्षों के दुःख, अभाव और अत्याचार का सनातन यथार्थ है तो दूसरी तरफ़ दलितों के स्वप्न, संघर्ष और मुक्ति चेतना की नई वास्तविकता। इस नई वास्तविकता के मानदंड भी नए हैं, पैंतरे भी नए और अवक्षेपण भी नए। उत्कृष्ट रचनाशीलता के समस्त ज़रूरी उपकरणों से सम्पन्न ‘तर्पण’ दलित यथार्थ को अचूक दृष्टि-सम्पन्नता एवं सरोकार के साथ अभिव्यक्त करता है।
गाँव में ब्राह्मण युवक चन्दर दलित युवती रजपत्ती से बलात्कार की कोशिश करता है। रजपत्ती और साथ की अन्य स्त्रियों के विरोध के कारण वह सफल नहीं हो पाता। उसे भागना पड़ता है। लेकिन दलित बलात्कार किए जाने की रिपोर्ट लिखाते हैं। ‘झूठी रिपोर्ट’ के इस अर्द्धसत्य के ज़रिए शिवमूर्ति हिन्दू समाज की वर्णाश्रम व्यवस्था के घोर विखंडन का महासत्य प्रकट करते हैं। इस पृष्ठभूमि पर इतनी बेधकता, दक्षता और ईमान के साथ अन्य कोई रचना दुर्लभ है।
समकालीन कथा साहित्य में शिवमूर्ति ग्रामीण वास्तविकता के सर्वाधिक समर्थ और विश्वसनीय लेखकों में हैं। ‘तर्पण’ उनकी क्षमताओं का शिखर है। रजपत्ती, भाईजी, मालकिन, धरमू पंडित जैसे अनेक चरित्रों के साथ अवध का एक गाँव अपनी पूरी सामाजिक, भौगोलिक संरचना के साथ यहाँ उपस्थित है। गाँव के लोग-बाग, प्रकृति, रीति-रिवाज, बोली-बानी—सब कुछ—शिवमूर्ति के जादू से जीवित-जाग्रत हो उठे हैं। युगों की रुद्ध शापित चेतना जब अपने प्रतिरोध और प्रतिशोध पर परवान चढ़ती है तो उसकी नज़र वर्तमान तक ही महदूद नहीं रहती, वह अतीत के सारे अभिशप्त पुरखों का तर्पण करती है और वैयक्तिकता सामूहिकता में ढलकर क्रान्ति का नया पाठ रचती है।
संक्षेप में कहें तो ‘तर्पण’ ऐसी औपन्यासिक कृति है जिसमें मनु की सामाजिक व्यवस्था का अमोघ सन्धान किया गया है। एक भारी उथल-पुथल से भरा यह उपन्यास भारतीय समय और राजनीति में दलितों की नई करवट का सचेत, समर्थ और सफल आख्यान है।
Aksharo Ke Aage
- Author Name:
Bhairavprasad Gupt
- Book Type:

- Description: 'अज्ञानवश अन्धविश्वास में फँसना एक बात है और ज्ञान होते हुए भी अन्धविश्वास का शिकार होना दूसरी बात है। अन्धविश्वास के कारण मनुष्य का आत्म- विश्वास क्षीण होता है, शक्ति तथा क्रियाशीलता में शिथिलता आती है, यहाँ तक कि वह एकदम निकम्मा तथा असमाजिक भी हो जाता है, जैसे लाखों साहू, सन्त, फ़क़ीर, आवारे, चोर, डाकू, हत्यारे, अन्य अपराधकर्मी आदि। सबसे गम्भीर बात तो यह है कि अन्धविश्वासों के कारण समाज के विकास में बड़ी रुकावटें आती हैं, आदमी की सामाजिक चेतना तक कुंठित हो जाती है, जिसके चलते आदमी समाज के विकास की नई दिशा में अथवा नए मार्ग पर चलने से इनकार कर देता है।... हमारी ज़िन्दगी ऐसी क्यों है, हम क्यों अंधविश्वासों, कुप्रथाओं से जकड़े हुए हैं, हम क्यों अपने अनुभवों से भी कुछ नहीं सीखते?'
Upsanhar
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

-
Description:
‘उपसंहार’ में कृष्ण के जीवन के अन्तिम दिनों की कथा कही गई है जो जितनी मार्मिक है उतनी ही उद्वेलक भी। यह जितनी कृष्ण की कथा है उतनी ही द्वारका के बनने और बिगड़ने की भी। कृष्ण ‘महाभारत’ के सर्वप्रमुख चरित्र हैं—योगेश्वर, युगन्धर, लीला-पुरुष, पूर्णावतार और ईश्वर। द्वारका उनकी देन है, उनकी सृष्टि। लेकिन महाभारत जैसे महायुद्ध के उपरान्त इसी द्वारका में कृष्ण का एक और रूप दिखलाई पड़ता है। यह रूप ईश्वरीय अलौकिकता से दूर एक ऐसे मनुष्य का है जिसकी असाधारण उपलब्धियों के पीछे खड़ी विफलताएँ अब एक-एक कर सामने आ रही हैं।
जिस द्वारका को उन्होंने अपने मन-प्राण से साकार किया था, वही तिनका-तिनका बिखर रहा है। जिस कृष्ण के विराट रूप के सामने कुरुक्षेत्र में अठारह अक्षौहिणी सेना दृष्टि खो बैठी थी, वही कृष्ण अब अवश नज़र आते हैं। आख़िर क्या है जय का सच्चा अर्थ? क्या तमाम सफलताएँ अन्ततोगत्वा विफलता में ही तिरोहित होती हैं? मानवीय जीवन के ऐसे अनेक मूलभूत प्रश्नों पर ‘उपसंहार’ उपन्यास नए सिरे से प्रकाश डालता है। अपने संक्षिप्त कलेवर के बावजूद इसका स्वर महाकाव्यात्मक है। ‘महाभारत’ के बारे में कहा जाता है कि जो कुछ दुनिया में है, वह ‘महाभारत’ में है और जो उसमें नहीं है, वह कहीं नहीं है। ‘उपसंहार’ पढ़कर इस कथन की सत्यता को भी समझा जा सकता है।
Koi Baat Nahin
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

-
Description:
“तभी हवा का एक झोंका न जाने क्या सोचकर एक बड़े से काग़ज़ के टुकड़े को शशांक के पास ले आया। उसने घास से उठाकर उसे पढ़ा—‘आदमी का मन एक गाँव है, जिसमें वही एक अकेला नहीं रहता।’ शशांक ने सोचा, आदमी मन में ही तो अपने को और अपनी सारी बातों को छिपाकर रख सकता है...’’
‘कोई बात नहीं’ जैसे एक मंत्र है—हार न मानने की ज़िद और नई शुरुआतों के नाम। समय के एक ऐसे दौर में जब प्रतियोगिता जीवन का परम मूल्य है और सारे निर्णय ताक़तवर और
समर्थ के हाथ में हैं, वेदना, जिजीविषा और सहयोग का यह आख्यान ऐसे तमाम मूल्यों का प्रत्याख्यान है।
मोटे तौर पर इसे शारीरिक रूप से कुछ अक्षम एक बेटे और उसकी माँ के प्रेम और दु:ख की
साझेदारी की कथा के रूप में देखा जा सकता है, पर इसका मर्म एक सुन्दर और सम्मानपूर्ण जीवन की आकांक्षा है, बल्कि इस हक़ की माँग है। शशांक सत्रह साल का एक लड़का है जो दूसरों से अलग है क्योंकि वह दूसरों की तरह चल और बोल नहीं सकता। कलकत्ता के एक नामी मिशनरी स्कूल में पढ़ते वक़्त अपनी ग़ैरबराबरी को जीते हुए, उसका साबिका उन तरह-
तरह की दूसरी ग़ैरबराबरियों से भी होता रहता है, जो हमारे समाज में आसपास कुलबुलाती रहती है। स्कूल में शशांक का एकमात्र दोस्त है—एक एंग्लो-इंडियन लड़का आर्थर सरकार जो उसी की तरह एक क़िस्म का जाति-बाहर या आउटकास्ट है—अलबत्ता बिलकुल अलग कारणों से।
शशांक का जीवन चारों तरफ़ से तरह-तरह के कथा-क़िस्सों से घिरा है। एक तरफ़ उसकी आरती मौसी है, जिसकी प्रायः खेदपूर्वक वापस लौट आनेवाली कहानियों का अन्त और आरम्भ शशांक को कभी समझ में नहीं आता। दूसरी तरफ़ उसकी दादी की कहानियाँ हैं—दादी के अपने घुटन-भरे बीते जीवन की, बार-बार उन्हीं शब्दों और मुहावरों में दोहराई जाती कहानियाँ, जिनका कोई शब्द कभी अपनी जगह नहीं बदलता। लेकिन सबसे विचित्र कहानियाँ उस तक पहुँचती हैं जतीन दा के मार्फ़त, जिनसे वह बिना किसी और के जाने, हर शनिवार विक्टोरिया मेमोरियल के मैदान में मिलता है। ये सभी कहानियाँ आतंक और हिंसा के जीवन से जुड़ी कहानियाँ हैं जिनके बारे में हर बार शशांक को सन्देह होता है कि वे आत्मकथात्मक हैं, पर इस सन्देह के निराकरण का उसके पास कोई रास्ता नहीं है।
तभी शशांक के जीवन में वह भयानक घटना घटती है जिससे उसके जीवन के परखच्चे उड़ जाते हैं। ऐसे समय में यह कथा-अमृत ही है जो उसे इस आघात से उतारता है; साथ ही उसे संजीवन मिलता है उस सरल, निश्छल, अद् भुत प्रेम और सहयोग से जो सब कुछ के बावजूद दुनिया को बचाए रखता आ रहा है। और तब उसकी अपनी यह कथा, जो आरती मौसी द्वारा लिखी जा रही थी, पुनः जीवित हो उठती है—कथामृत के आस्वादन से जागी कथा।
Vyasparva
- Author Name:
Durga Bhagwat
- Book Type:

- Description: महाभारत भारतीय मनीषा की ऐसी पूँजीभूत अभिव्यक्ति है कि इसके बारे में यह कथन अतियुक्ति नहीं लगती कि जो कुछ भारत में है वह सब महाभारत में है, और जो इसमें नहीं है वह कहीं नहीं है। आश्चर्य नहीं कि ऐसे महाग्रन्थ का अध्ययन, मनन और उसकी व्याख्या किसी के लिए भी आसान नहीं है। उसके सामाजिक आशय के सम्यक स्वरूप को पहचानना अथवा विशद रूप में समझाना तो और भी कठिन है। इस कठिनाई के प्रत्युत्तरस्वरूप, मराठी भाषा की प्रमुख चिन्तक-साहित्यकार दुर्गा भागवत ने इस पुस्तक में, महाभारत के सत्य को उसके प्रमुख पात्रों के ज़रिये अत्यन्त सहज और लालित्यपूर्ण ढंग से व्याख्यायित किया है। ‘व्यासपर्व’ गहन चिन्तन और ललित अभिव्यक्ति के सहज सामंजस्य से निर्मित कृति है जिसमें विदुषी लेखक ने स्पष्ट किया है कि करुणा जब प्राणों में बस जाती है तभी धर्म का दर्शन होता है। उन्होंने इस जीवन-सत्य की ओर भी संकेत किया है कि मनुष्य मूलतः मनुष्य है; उसका लक्ष्य भी मनुष्य ही है। श्रीकृष्ण, भीष्म, द्रोण, गान्धारी, अश्वत्थामा, अर्जुन, दुर्योधन, कर्ण, विदुर, द्रौपदी, एकलव्य आदि की अद्भुत झाँकी इस पुस्तक में साकार उपस्थित हुई है जिनमें व्यक्तित्व और इतिहास ही नहीं, हमारा समय भी मुखरित होता है। निःसन्देह ‘व्यासपर्व’ भारतीय संस्कृति की एक बहुआयामी व्याख्या है। यह कृति गद्य भी है और काव्य भी, जो ‘सत्यं शिवं सुन्दरम्’ के समन्वित स्वरूप को उद्भासित करती है। बार-बार पढ़ने और संग्रह करने योग्य एक अनुपम पुस्तक।
Vijeta
- Author Name:
Sharaf Rashidov
- Book Type:

-
Description:
‘विजेता’ और इसकी अगली कड़ी ‘तूफ़ान झुका सकता नहीं’ नामक उपन्यासों में उज्बेकिस्तान के एक ग्राम-सोवियत की जनता को एकजुट सामूहिक श्रम और सामूहिक मेधा एवं कौशल से, ख़ाली पड़ी धरती को खेती योग्य बनाते हुए, क्रान्तिविरोधी बसमाचियों द्वारा बन्द कर दिए गए कोकबुलाक चश्मे के उद्गम को खोजकर उसे फिर से चालू करते हुए और सामूहिक फ़ार्मों के उत्पादन को तरह-तरह से आगे बढ़ाते हुए विस्तार से चित्रित किया गया है।
आर्थिक सम्बन्धों के रूपान्तरण के साथ ही जो नई सामाजिक-सांस्कृतिक-नैतिक-सौन्दर्यशास्त्रीय मूल्य-मान्यताएँ, सम्बन्ध और संस्थाएँ अस्तित्व में आ रही थीं तथा नए-पुराने के बीच जो संघर्ष अविराम जारी था, उसका लेखक ने विश्वसनीय और जीवन्त चित्र उपस्थित किया है। कथा के फलक पर पार्टी और प्रशासकीय मशीनरी की वह नौकरशाही भी मौजूद है। क्रान्ति-पूर्व समाज के अवशेष कुछ षड्यंत्रकारी विध्वंसक तत्त्व भी मौजूद हैं जो पुरानी पीढ़ी के कुछ लोगों की रूढ़िवादिता और नौकरशाही की हठधर्मिता का लाभ उठाकर सार्वजनिक सम्पत्ति और समाजवाद को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं।
पुराने मूल्यों और रूढ़ियों से चिपके कुछ पुराने लोग भी हैं जो धीरे-धीरे बदलते हैं। लेकिन नए और पुराने के बीच का संघर्ष लगातार चलता रहता है। इन सभी प्रवृत्तियों की पारस्परिक अन्तर्क्रिया और संघात के रूप में आगे बढ़ते घटना-क्रम के बीच से नई दुनिया के उन नए नायकों के उदात्त, मानवीय चरित्र उभरते हैं जो पूँजी की संस्कृति के बरअक्स श्रम की संस्कृति की नुमाइंदगी करते हैं।
Nirlep Narayan
- Author Name:
Rajendra Ratnesh
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास श्रावक उमरावमल ढढ्ढा की जीवनी पर आधारित है।
श्री ढढ्ढा का जीवन सीधा, सादा और सरल था। रायबहादुर सेठ के पौत्र और एक बड़ी हवेली के मालिक होकर भी उन्होंने आमजन का जीवन जिया। पुरखों द्वारा छोड़ी गई करोड़ों की सम्पत्ति अपने भोग-विलास पर ख़र्च नहीं करके दान कर दी। उनके पुरखे अंग्रेज़ों के बैंकर थे। उनका व्यवसाय इन्दौर, हैदराबाद तक फैला था। महारानी अहल्याबाई के राखीबंद भाई उनके पुरखे थे। उन्होंने पुरखों की सम्पत्ति को छुए बिना नौकरी करके अपना जीवन-यापन किया। श्री ढढ्ढा वस्तुत: एक अकिंचन अमीर थे। वे सचमुच ही निर्लेप नारायण थे।उमरावमल ढढ्ढा मानते थे कि मैं सबसे पहले इनसान हूँ, बाद में हिन्दुस्तानी। उसके बाद जैन। जैन के बाद श्वेताम्बर। स्थानकवासी परम्परा का श्रावक। वे सम्यक् अर्थों में महावीर मार्ग के अनुगामी और अनुरागी थे।
वे हमेशा अपनी बात अनेकान्त की भाषा में कहते थे। अनेकान्त को समझाने का उनका फ़ार्मूला बड़ा सीधा था। वे कहते थे कि 'ही' और ‘भी' में ही अनेकान्त का सिद्धान्त छिपा है। मेरा मत ‘ही’ सच्चा है, यह एकान्तवाद है जबकि अनेकान्त कहता है कि मेरा मत ‘भी’ सच्चा है और आपका मत ‘भी’ सच्चा हो सकता है।
उन्होंने पुरखों के छोड़े करोड़ों रुपयों के धन को छुआ ही नहीं। वकालत, वृत्तिका और व्यवसाय—इन सब में उन्हें वांछित सफलता नहीं मिली। वकालत इसलिए छोड़ दी कि झूठ की रोटी वे नहीं खा सकते थे। वृत्तिका भी गिरते स्वास्थ्य की वजह से लम्बी नहीं चली। व्यवसाय में घाटे पर घाटे लगे। जो कुछ पास में बचा, वह दान-पुण्य में लुटा दिया।
उन्होंने अमीरी को छोड़ ग़रीबी को अपनाया। जब भी कोई ढढ्ढा हवेली की भव्यता को देखता तो उसकी आँखें आश्चर्य से फटी की फटी रह जातीं कि इतनी बड़ी हवेली का स्वामी एक सीधी-सादी ज़िन्दगी जी रहा है।
Vama-Bodhini
- Author Name:
Navnita Devsen
- Book Type:

-
Description:
‘वामा-बोधिनी’ सिर्फ़ वामाओं में बोधोदय रचती है, ऐसा नहीं है। नवनीता देव सेन की यह उपन्यासिका, उसका व्यतिक्रम है जो आधुनिक बंगला साहित्य में, निस्सन्देह एक साधारण संयोजन है। उपन्यास का केन्द्र-बिन्दु, हालाँकि औरत ही है, लेकिन इसमें पुरुष-विरोधी हुंकार नहीं है, बल्कि उसके प्रति ममत्व-भाव है। सोलहवीं शती के मैमनसिंह की एक बंगाली महिला कवि की जीवनगाथा, बीसवीं शती की तीन अलग-अलग औरतों की कथा में घुल-मिल गई है। एक चिरन्तन मानवी की व्यथा-कथा; जिसमें रचे-बुने गए हैं, अतल मन की गहराइयों के अनगिनत अहसास!
हम सबकी ज़िन्दगी में परत-दर-परत अनगिनत युद्ध छिड़े हुए हैं—राजनीति बनाम नैतिक सच्चाई; प्रेम बनाम दायित्व; पांडित्य बनाम सृजनात्मक प्रतिभा; पुरुष शासित नीतिबोध बनाम जगत के भीतरी मूल्यबोध; सामाजिक सुनीति बनाम मानवीय आवेग—इन तमाम ख़तरनाक विषयों की लेखिका ने जाँच-परख की है। कमाल की बात यह है कि इसके बावजूद कहीं रस-भंग नहीं हुआ है, शिल्प ने कहीं भी जीवन के स्वाभाविक प्रवाह का अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि कथा-शैली में विलक्षण रूप से एक अभिनव तत्त्व का समावेश हुआ है।
अतीत और वर्तमान, अन्तर्जीवन और बाह्य जीवन, वक्तव्य और कथा-बयानी, गद्य और पद्य, यहाँ घुल-मिलकर एकमेक हो गए हैं। रिसर्च के दौरान लिए गए नोट्स, डायरी के पन्ने, प्रेमियों के ख़त, ग्रामीण बालाओं के गीत, नायिका की विचारधारा, सम्पादक का जवाब—इस सबको मिलाकर इस कथा में, बिलकुल नए रूप में, बेहद सख़्त लेकिन बहुमुखी सत्य का सृजन किया गया है, जो कथा के शिल्प में हीरे की तरह जड़ा हुआ है; हीरे ही की तरह शुभ्र-उज्ज्वल कठोर और अखंडित रूप में जगमगाता हुआ।
Agneyam
- Author Name:
P. Vatsala +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: English translation by Vasanthi Sankaranarayanan of P. Vatsala's Malayalam novel Agneyam. Sahitya Akademi 2008
Meera Yagik Ki Diary
- Author Name:
Bindu Bhatt
- Book Type:

-
Description:
गुजराती उपन्यास के क्षेत्र में सन् 1992 में ‘मीरा याज्ञिक नी डायरी’ (मीरा याज्ञिक की डायरी) एक बे-आवाज़ बग़ावत बनकर आई। बिन्दु भट्ट द्वारा पहली बार यहाँ रूढ़ियों और कामवर्जनाओं की बन्दिशों को तोड़कर बिना किसी मुखरता के सेल्फ़ सेन्सरशिप को उखाड़ फेंकने की दिशा में स्त्री-लेखन ने एक क़दम आगे बढ़ाया है। संवेदनशील-शिक्षित युवती के समलिंगी तथा विषमलिंगी काम सम्बन्धों की अन्तरंग और बेबाक अभिव्यक्ति, डायरी शैली की कलात्मक सार्थकता एवं पारदर्शी गद्य की ताज़गी ने सुज्ञ पाठक वर्ग का बरबस ध्यान खींचा। आज सर्वाधिक आलोचनात्मक लेखों का रिकॉर्ड ‘मीरां याज्ञिक की डायरी’ ने क़ायम किया है।
अपने लघु-कलेवर में ‘मीरा याज्ञिक की डायरी’ हमारी चेतना को अनेक स्तर पर छूते हुए विस्तार देती है। विश्वविद्यालय में शोधकार्य करती मीरा संवेदनशील और बौद्धिक है। ख़ालिस ख़ूबसूरती और भरपूर प्रेम की उसे तलाश है। इस तलाश में अपने समूचे अस्तित्व के साथ वह समस्त परिवेश, विविध पात्र और परिस्थितियों को सहज स्वीकार करती है। संवेदना के स्तर पर वह जो कुछ भी अनुभव करती है, उसे बिना किसी दम्भ-दावे और पूर्वाग्रह के, अपनी डायरी में सर्जनात्मक ढंग से दर्ज करती है। इसीलिए मीरा की डायरी में उसके भीतर-बाहर की प्रत्येक तरंग का विश्लेषणात्मक लेखा-जोखा है और उसकी भाषा में बिना किसी लाग-लपेट की अपूर्व ऐसी स्वाभाविकता। निर्मम होकर अपने आपको भी दाँव पर लगाती यह अन्तरंगता जीवन के साथ बड़े गहरे सरोकार से ही सम्भव है। इसके चलते यह डायरी केवल मीरा की नहीं रहती, बल्कि किसी भी संवेदनशील बौद्धिक चेतना का अंश बन जाती है। वृन्दा और उजास में भीतर तक पैठकर स्वयं अपने को पाने की मीरा की ख़तरनाक जद्दोजहद ‘मनुष्य’ मात्र की जद्दोजहद में बदल जाती है और हमें झकझोरती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book