Qayas
(0)
Author:
Udayan Vajpeyi, Zilani BanoPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
199
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ास’ एक असाधारण उपन्यास है जहाँ रोज़मर्रा की साधारण सामग्री से गम्भीर और कलात्मक परिष्कृत कृति ने आकार लिया है। इस सामग्री से कोई भी और लेखक अतिनाटकीय बम्बइया कृति बना डालता है। ‘क़यास’ में अतिनाटकीयता है ज़रूर लेकिन उसे उपन्यासकार ने सहलाने की जगह, उसका मज़ाक बनाया है। इस उपन्यास की भाषा उचित ही ऊँचे स्तर की है, इसमें प्रयुक्त उपमाएँ और रूपक ज़रा भी कृत्रिम हुए बिना काव्यात्मक और नैसर्गिक हैं। पूरे उपन्यास में एक भी शब्द फ़िज़ूल नहीं है। मुझे यह पढ़कर सन्तोष से बहुत अधिक हासिल हुआ। लखना उर्फ़ लखन लाल का चरित्र ठीक ही अविस्मरणीय है, उपन्यास में उसे गौरवमय स्थान दिया गया है। यह उसी के एकालाप से ख़त्म होता है। Quote - हिन्दी उपन्यास मध्यवर्गीय जीवन और उसके रिश्तों के उत्सव में अपना गौरव मानता रहा है। उदयन वाजपेयी का ‘क़यास’ उन थोड़े-से उपन्यासों में है जो बिना किसी यथार्थवादी फर्नीचर के कोलाहल को मुमकिन कर देता है। इस उपन्यास में काव्यात्मक छरहरापन है। —कृष्ण बलदेव व
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ास’ एक असाधारण उपन्यास है जहाँ रोज़मर्रा की साधारण सामग्री से गम्भीर और कलात्मक परिष्कृत कृति ने आकार लिया है। इस सामग्री से कोई भी और लेखक अतिनाटकीय बम्बइया कृति बना डालता है। ‘क़यास’ में अतिनाटकीयता है ज़रूर लेकिन उसे उपन्यासकार ने सहलाने की जगह, उसका मज़ाक बनाया है। इस उपन्यास की भाषा उचित ही ऊँचे स्तर की है, इसमें प्रयुक्त उपमाएँ और रूपक ज़रा भी कृत्रिम हुए बिना काव्यात्मक और नैसर्गिक हैं। पूरे उपन्यास में एक भी शब्द फ़िज़ूल नहीं है। मुझे यह पढ़कर सन्तोष से बहुत अधिक हासिल हुआ। लखना उर्फ़ लखन लाल का चरित्र ठीक ही अविस्मरणीय है, उपन्यास में उसे गौरवमय स्थान दिया गया है। यह उसी के एकालाप से ख़त्म होता है।
Quote - हिन्दी उपन्यास मध्यवर्गीय जीवन और उसके रिश्तों के उत्सव में अपना गौरव मानता रहा है। उदयन वाजपेयी का ‘क़यास’ उन थोड़े-से उपन्यासों में है जो बिना किसी यथार्थवादी फर्नीचर के कोलाहल को मुमकिन कर देता है। इस उपन्यास में काव्यात्मक छरहरापन है।
—कृष्ण बलदेव व
Book Details
-
ISBN9789388933469
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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—अशोक वाजपेयी
Adhunikta Aur Paigan Sabhyatayen
- Author Name:
Udyan Vajpeyi +1
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Upanyaskar Ka Safarnama
- Author Name:
Udyan Vajpeyi +1
- Book Type:

- Description:
“शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी इस समय न सिर्फ़ उर्दू बल्कि समूचे भारतीय साहित्य में एक बड़ी और आकर्षक हस्ती हैं। उनमें गहरी विद्वत्ता और अथक सृजनशीलता का जो संयोग है, वह अनोखा है। अपनी पारम्परिक बहुलता, जो कई बार आधुनिकता की झोंक में इकहरी देखी-समझी जाने लगती है, इस चिन्तक-लेखक के यहाँ जीवन्त गतिशीलता में प्रगट होती है। उनके संवाद से हमारी स्थिति के, हमारी सांस्कृतिक धरोहर के ऐसे कई पहलू सामने आते हैं जिन्हें हम भूल गए हैं। किसी उर्दू लेखक का हिन्दी में शायद यह सबसे लम्बा संवाद है। रज़ा पुस्तक माला में इस अनूठी और कई सिम्तों को रोशन करती बातचीत को पुस्तकाकार प्रस्तुत करते हमें हर्ष है।" —अशोक वाजपेयी
Punarutthan
- Author Name:
Leo Tolstoy +1
- Book Type:

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आधुनिक इतिहास में यदि किसी विचारक-लेखक की ख्याति उसकी ज़िन्दगी में ही पूरी दुनिया में फैल चुकी थी और जीते-जी ही वह एक मिथक बन गया था, तो वे लेव तोल्स्तोय ही थे। उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर जिस तरह बाल्ज़ाक छाए हुए थे, उसी तरह उत्तरार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर तोल्स्तोय का प्रभाव-साम्राज्य फैला हुआ था।
‘पुनरुत्थान’ एक नए प्रकार का उपन्यास था जिसमें पात्रों के गहन आत्मसंघर्ष और रूपान्तरण के साथ ही, सेंट पीटर्सबर्ग के दरबार के लोगों और ग्रामीण कुलीनों से लेकर किसानों, क़ैदियों और साइबेरिया-निर्वासन पर जा रहे क़ैदियों के चरित्रों के माध्यम से तत्कालीन रूस के समूचे वैविध्यपूर्ण सामाजिक परिदृश्य को एक इतिहासकार-सदृश वस्तुपरकता और अधिकार के साथ उपस्थित कर दिया गया है। कात्यूशा का मुक़दमा और उसमें जूरी सदस्य के रूप में नेख्लूदोव की उपस्थिति सामाजिक अन्याय पर आधारित जीवन की निरर्थकता और न्यायतंत्र की कुरूपता को एकदम नंगा कर देती है।
‘पुनरुत्थान’ में तोल्स्तोय सरकार, न्यायालय, चर्च, कुलीन भूस्वामियों के विशेषाधिकारियों, भूमि के निजी स्वामित्व, मुद्रा, जेलों और वेश्यावृत्ति की मर्मभेदी आलोचना करते हैं। घनी और शक्तिशाली लोगों द्वारा उत्पीड़ित निम्न वर्गों के प्रति सहानुभूति-प्रदर्शन पर उपन्यास तीखा व्यंग्य करता है। किसानों, क्रान्तिकारियों और निर्वासित अपराधियों सहित सामान्य जनसमुदाय का चित्रण करते हुए तोल्स्तोय का ज़ोर इस बात पर है कि उत्पीड़न और अधिकारहीनता ने आमजन की आत्मिक शक्तियों को पंगु बना डाला है।
Boudam
- Author Name:
Fyodor Dostoyevsky +1
- Book Type:

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Awating description for this book
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