Os Ki Boond
(0)
Author:
Rahi Masoom RazaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
राही मासूम रज़ा ने ‘आधा गाँव’ लिखकर हिन्दी-उपन्यास में अपना एक सुनिश्चित स्थान बनाया था। ‘टोपी शुक्ला’ उनका दूसरा सफल उपन्यास था और यह उनका तीसरा उपन्यास है।</p> <p>यह उपन्यास हिन्दू-मुस्लिम समस्या को लेकर शुरू होता है लेकिन आख़िर तक आते-आते पाठकों को पता चलता है कि हिन्दू-मुस्लिम समस्या वास्तव में कुछ नहीं है, यह सिर्फ़ राजनीति का एक मोहरा है, और जो असली चीज़ है वह है इंसान के पहलू में धड़कनेवाला दिल और उस दिल में रहनेवाले जज़्बात; और इन दोनों का मजहब और जात से कोई ताल्लुक नहीं। इसीलिए साम्प्रदायिक दंगों के बीच सच्ची इंसानियत की तलाश करनेवाला यह उपन्यास एक शहर और एक मजहब का होते हुए भी हर शहर और हर मजहब का है ! एक छोटी-सी ज़िंदगी की दर्द भरी दास्तान जो ओस की बूँद की तरह चमकीली और कम-उम्र है।
Read moreAbout the Book
राही मासूम रज़ा ने ‘आधा गाँव’ लिखकर हिन्दी-उपन्यास में अपना एक सुनिश्चित स्थान बनाया था। ‘टोपी शुक्ला’ उनका दूसरा सफल उपन्यास था और यह उनका तीसरा उपन्यास है।</p>
<p>यह उपन्यास हिन्दू-मुस्लिम समस्या को लेकर शुरू होता है लेकिन आख़िर तक आते-आते पाठकों को पता चलता है कि हिन्दू-मुस्लिम समस्या वास्तव में कुछ नहीं है, यह सिर्फ़ राजनीति का एक मोहरा है, और जो असली चीज़ है वह है इंसान के पहलू में धड़कनेवाला दिल और उस दिल में रहनेवाले जज़्बात; और इन दोनों का मजहब और जात से कोई ताल्लुक नहीं। इसीलिए साम्प्रदायिक दंगों के बीच सच्ची इंसानियत की तलाश करनेवाला यह उपन्यास एक शहर और एक मजहब का होते हुए भी हर शहर और हर मजहब का है ! एक छोटी-सी ज़िंदगी की दर्द भरी दास्तान जो ओस की बूँद की तरह चमकीली और कम-उम्र है।
Book Details
-
ISBN9788126701988
-
Pages152
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
NISHANK : Ek Antrang Path
- Author Name:
Gopal Sharma
- Book Type:

- Description: जिन केंद्रीय शिक्षा मंत्रियों ने साहित्यकार के रूप में भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है उनमें श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का नाम प्रमुख है। साहित्य की विविध विधाओं (कविता, कहानी, उपन्यास, यात्रा-वृत्तांत, संस्मरण, जीवनी, जीवनोपयोगी लेखन आदि) में अपने विपुल लेखन से भारतीयता और भारतीय जीवन मूल्यों की स्थापना करते हुए उन्होंने देश-देशांतर में अपने पाठकों का अपार स्नेह प्राप्त किया है। इस पुस्तक के माध्यम से निशंकजी की अब तक प्रकाशित कृतियों का एक ऐसा अंतरंग पाठ प्रस्तुत किया गया है, जो एक साथ ही अंतरिम भी है और विस्तृत भी। यहाँ देखा जा सकता है कि विविध पाठक-वर्गों की अपेक्षाओं की एक साथ पूर्ति करते हुए निशंक-साहित्य किसी एक सहृदय पाठक के मर्म को किस प्रकार आंदोलित करता है। भूमिका और यवनिका से आबद्ध ग्यारह अध्यायों के शीर्षक मात्र आपको यह आभास करा देंगे कि यह पाठ सर्वथा अधुनातन और अनौपचारिक शैली में लिखा गया है। लेखक से अधिक उसके लेखन पर केंद्रित प्रस्तुत अध्ययन का जब आप पाठ करेंगे तो आप स्वयं भी समूची साहित्य-रचना प्रक्रिया की शास्त्रीय समझ विकसित करते चले जाएँगे। हिंदी साहित्य के संपूर्ण सर्जनात्मक संसार से विश्वसनीय और प्रामाणिक तथ्य-सामग्री जुटाकर और उसमें निशंकजी के साहित्यिक योगदान को स्थापित और रेखांकित करती यह पुस्तक आपको विरल भी लगेगी और अनूठी भी।
Nirvasit
- Author Name:
Ilachandra Joshi
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत उपन्यास की कथा का आरम्भ उस समय से होता है जब द्वितीय महायुद्ध अपनी प्रारम्भिक अवस्था में था और उसकी छाया भारत में पूरी तरह से नहीं पड़ी थी। तब मध्यवर्गीय समाज के जीवन से रोमान्स की रंगीनी एकदम उठ नहीं गई थी। इसमें सन्देह नहीं कि उस रंगीनी को युद्धजनित प्रतिक्रिया की विभीषिका का अस्पष्ट आभास किंचित् म्लान करने लगा था, पर अभी उस म्लान छायाभास ने सघन रूप धारण नहीं किया था।
एक ओर मध्यवर्गीय समाज अभी तक उसी युग की भावनाओं, संस्कारों और मान्यताओं से बँधा हुआ था जब प्रथम महायुद्धजनित प्रतिक्रियाओं की पूर्ण समाप्ति के बाद प्रतिदिन के जीवन की साधारण सुख-सुविधाओं में एक प्रकार की ऊपरी स्थिरता-सी मालूम होने लगी थी, और यद्यपि समाज के भीतर-ही-भीतर स्वयं उसके अज्ञात में—आग निरन्तर धधकती चली जा रही थी।
कहानी जब द्वितीय स्थिति पर पहुँचती है, तब एक ओर सन् बयालीस के अगस्त आन्दोलन का दमनचक्रपूर्ण सघन वातावरण भारतीय आकाश को भाराक्रान्त किए हुए था। दूसरी ओर महायुद्ध की प्रतिक्रिया का परिपूर्ण प्रकोप पूरे प्रवेग से देश की जनता के ऊपर टूट पड़ा था। केवल पूँजीपति और ज़मींदा़र वर्ग को छोड़कर और सभी वर्ग इन दो पाटों के बीच में बुरी तरह पिसने लगे थे।
उपन्यास की तीसरी और अन्तिम स्थिति तब आती है जब द्वितीय महायुद्ध तो समाप्त हो जाता है, किन्तु समाप्ति के साथ ही अणु-बम के आविष्कार द्वारा तृतीय महायुद्ध के छायापात की सूचना भी दे जाता है।
उपन्यास के नायक का जीवन उन तीनों परिस्थितियों से होकर गुज़रता है। उन तीनों परिस्थितियों में, अपने संघर्षमय जीवन के बीच में, वह किन-किन और किस प्रकार के पात्रों तथा यात्रियों के सम्पर्क में आता है, जीवन के किन जटिल-जाल-संकुल पथों से होकर विचरण करता है, किन-किन घटना-चक्रों का सामना उसे करना पड़ता है और उनकी क्या-क्या और कैसी प्रतिक्रियाएँ उसके भीतर होती हैं, इन्हीं सब बातों का चित्रण करने का प्रयत्न इस उपन्यास में किया गया है।
Katlgaah
- Author Name:
Robert Payne
- Book Type:

- Description: रॉबर्ट पेन का उपन्यास ‘क़त्लगाह’ बांग्लादेश के मुक्ति-संघर्ष की पृष्ठभूमि पर रचा गया सम्भवत: एकमात्र उपन्यास है। बांग्लादेश का मुक्ति-संघर्ष दुनिया के इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है जो बताता है कि तानाशाही और फ़ौजी दमन का बडे से बड़ा उपक्रम किसी देश की मुक्तिकामी जनता के संघर्ष के आगे किस तरह पराजित हो जाता है। ‘क़त्लगाह’ इस संघर्ष को दुबारा अपने पृष्ठों पर साकार करता है। इसे पढ़ते हुए हम महसूस करते हैं कि संघर्ष सिर्फ़ एक शब्द नहीं होता। वह व्यापक धैर्य और त्याग की माँग करता है। संघर्ष कर रही जनता को अकल्पनीय दमन और अत्याचार से गुज़रना पड़ता है। उसके छात्रों और बुद्धिजीवियों को गोली मार दी जाती है। उसके घर-गाँव जलाकर राख कर दिए जाते हैं। उसकी औरतों को सामूहिक बलात्कार की यातना से गुज़रना पडता है। अंग-भंग, अत्याचार और तबाही का एक पूरा चक्र उसे अपने सीने पर झेलना पड़ता है। ‘क़त्लगाह' यह भी बताता है कि इतने सारे अत्याचारों की चट्टान के नीचे भी, मुक्ति के संघर्ष का एक पौधा लहलहाता रहता है। वह भिंची हुईं मुट्ठियों, तने हुए माथों, उठे हुए हाथों की शक्ल में धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। एक दिन सारी चट्टानें दरक जाती हैं और सिर्फ़ पौधा बचा रहता है। ‘क़त्लगाह’ जितना उपन्यास है, उतना ही इतिहास भी। रॉबर्ट पेन ने ब्यौरे में जाकर, सारे तथ्य इकट्ठा करते हुए जितनी प्रामाणिकता के साथ इस इतिहास को सामने रखा है, वह चमत्कृत करता है। यह लेखकीय कौशल का ही प्रमाण है कि न उपन्यास इतिहास के साथ छेड़छाड़ करता है, और न ही इतिहास उपन्यास के प्रवाह को बाधित करता है। तथ्य और कल्पना इस तरह घुले-मिले हैं कि वे एक-दूसरे को सहारा देते हैं। लेखकीय तटस्थता तथ्य के साथ पूरा न्याय करते हुए भी उस मानवीय संवेदना का स्पर्श करती है जो इस संघर्ष को एक उदात्त स्वरूप देती है। इस उपन्यास के ब्यौरों से गुज़रते हुए एक थरथराहट बहुत भीतर तक महसूस की जा सकती है, जो धीरे-धीरे तल्लीनता में बदलती है और आख़िर में इस विश्वास में कि मुक्ति की कामना अगर सच्ची हो तो वह कभी पराजित नहीं होती।
Aquarium
- Author Name:
Rajeev Pundir
- Book Type:

- Description: दोस्तों, जीवन क्या है ? एक उत्सव, एक संघर्ष, एक उलझन, या फिर एक यात्रा. आइये मैं आपको ले चलता हूँ एक ऐसी यात्रा पर जो आपके दिल को चीर कर मन को स्तब्ध और मस्तिष्क को सुन्न कर देगी...बस एक पन्ना पलटिये और सवार हो जाइए एक्वेरियम की नाव में.
Awastha
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Odisha Ki Lokkathayen
- Author Name:
Dr. Shankar Lal Purohit
- Book Type:

- Description: ओड़ीशा की कला, साहित्य और संस्कृति में शास्त्रीय (वैदिक परंपरा) देव श्रीजगन्नाथजी के तत्त्व और कथानक भी जुड़े हैं। श्रीजगन्नाथ के लोकतात्त्विक स्वरूप से जुड़ी अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। ओड़ीशा में राज-परिवारों का शासन रहा है। अतः लोकजीवन उनसे पर्याप्त रूप में जुड़ा रहा है। कुछ अंशों को छोड़ दें तो इस लोकजीवन में राजघरानों या राज परिवारों का अत्यंत उत्कृष्ट रूप मिलता है। वे समृद्ध करते हैं, उन्हें सताते नहीं। वैसे वाणिज्य और व्यवसायी वर्ग भी अत्यंत उज्ज्वल रूप में रहे हैं। विदेशी वाणिज्य से उत्कल की समृद्धि संभव हुई। जीवन का यह अभिन्न अंग भी रहा है। इन लोककथाओं में उनका चरित्र उभरकर आ रहा है। उत्कल की लोककथाओं का भंडार विराट् है। उसके एक बहुत छोटे से अंश का संकलन यहाँ प्रस्तुत है, जिससे ओड़ीशा की समृद्ध लोकसंस्कृति और लोकजीवन की झाँकी मिल पाएगी।
McCluskieganj
- Author Name:
Vikas Kumar Jha
- Book Type:

-
Description:
“बचे खुचे एंग्लो-इंडियन लोगों की मौत के साथ यह गाँव भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
मि. मैकलुस्की के सपनों का कब्रिस्तान...। एंग्लो-इंडियंस के दर्दनाक इतिहास की कहानी कहता एक बेपनाह सन्नाटा भर रह जाएगा यहाँ...। उस दर्द को आनेवाले समय में कौन महसूस करेगा?” मि. मिलर की आवाज़ अँधेरे में डूब रही है।रॉबिन को लगा, इस गाँव की चौहद्दी के भीतर की धरती ज़ोरों से धड़क रही है। महसूस कर रहा है वह, इसकी तेज़ धड़कन को। मनुष्य मूर्च्छित हो सकता है, संज्ञाशून्य हो सकता है, उसके विचार विक्षिप्त हो सकते हैं, पर धरती...मातृभूमि कभी मूर्च्छित...संज्ञाशून्य और विक्षिप्त नहीं हो सकती। इसका अनुराग...प्यार-भरी गुनगुनी-सी मीठी उष्मा, धड़कती रहेगी अनन्त काल तक।
Anaro
- Author Name:
Manjul Bhagat
- Book Type:

- Description: ''कहाँ गया गंजी का बाप?...दिल डूब रहा है...अनारो, तू डूब चली...उड़ चली तू...अनारो, उड़ मत...धरती? धरती कहाँ गई?...पाँव टेक ले...हिम्मत कर...थाम ले रे...नन्दलाल! हमें बेटी ब्याहनी है!...यहाँ तो दलदल बन गया!...मैं सन गई पूरी की पूरी...हाय! नन्दलाल...गंजी...छोटू!'' महानगरीय झुग्गी कॉलोनी में रहकर कोठियों में खटनेवाली अनारो की इस चीख़ में किसी एक अनारो की नहीं, बल्कि प्रत्येक उस स्त्री की त्रासदी छुपी है जो आर्थिक अभावों, सामाजिक रूढ़ियों और पुरुष अत्याचार के पहाड़ ढोते हुए भी सम्मान सहित जीने का संघर्ष करती है। सौत, ग़रीबी और बच्चे; नन्दलाल ने उसे क्या नहीं दिया? फिर भी वह उसकी ब्याहता है, उस पर गुमान करती है और चाहती है कि कारज-त्यौहार में वह उसके बराबर तो खड़ा रहे। दरअसल अनारो दु:ख और जीवट से एक साथ रची गई ऐसी मूरत है, जिसमें उसके वर्ग की सारी भयावह सच्चाइयाँ पूँजीभूत हो उठी हैं।
Smile
- Author Name:
Sandeep Kumar Yadav
- Book Type:

- Description: यह उपन्यास ऐसे वर्ग के विषय में है, जिनके प्रति समाज की मनोदशा भद्दी व नकारात्मक है। यह कहानी एयर होस्टेस की पर्सनल व प्रोफेशनल जिंदगी को एक साथ दिखाएगी। यह कहानी आपको समझाएगी कि कैसे प्लेन की गैलरी में आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लिये हमारे ही समाज की लड़की मुसकान के साथ घंटों सेवा में खड़ी रहती हैं, जो अपने घर से दूर निरंतर साज-सज्जा के साथ न केवल आपके स्वास्थ्य का खयाल रखती हैं, बल्कि आपके खाने-पीने और मानसिक व्यवहार का भी खयाल रखती हैं। अतः इनका यह कार्य इन्हें देश की सुरक्षा में खड़े सैनिकों के समान यों कहें कि सैनिकों का दर्जा दिलाता है। शुभी सक्सेना का यह जीवन आपको बताएगा कि प्लेन की गैलरी में खड़ी लड़की के चेहरे पर हर रोज लगातार 14-15 घंटे खिली मुसकान के पीछे क्या और कितना कुछ छुपा है! यह कहानी आपको समझाएगी कि नारी के बलिदान की कोई सीमा नहीं होती तथा नारी का धैर्य सबकुछ छिन जाने के बाद भी कितना विशाल होता है। यह कहानी आपको बताएगी कि नारी सशक्तीकरण का मेडल लिये कोई लड़की अपने जीवन से कितना कुछ देती है समाज को...।
Sej Per Sanskrit
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

-
Description:
समाज और व्यवस्था के कटु-तिक्त अनुभवों से सम्पन्न उपन्यासकार हैं मधु कांकरिया। उनका यह उपन्यास बेधक, जुझारू, धैर्यवान और अन्ततः विद्रोही स्त्री की आन्तरिक पीड़ा का बड़ा ही मार्मिक विश्लेषण-अंकन करता है। धार्मिक चिन्तन और व्यवहार से आप्लावित संसार में स्त्री-जीवन कितना कठोर, क्रूर और भयावह हो सकता है, ‘सेज पर संस्कृत’ के बहाने इस यातना-गाथा का हमें पोर-पोर परिचय मिलता है।
उपन्यास में आर्थिक विपन्नता में जकड़ी ऐसी माँ का चित्रण है जो अध्यात्म को मुक्तिमार्ग मान, यह चाहती है कि उसकी जवान बेटियाँ भी उसी मार्ग को अपना लें, ताकि उनके जीवन को नया आयाम मिले, क्योंकि उसकी धारणा है कि किसी स्त्री के साध्वी बन जाने पर परिवार का मान-सम्मान अनायास बढ़ जाता है, आर्थिक विपन्नता दूर हो जाती है। छोटी बेटी तो माँ के पद-चिह्नों पर चल पड़ती है लेकिन बड़ी बेटी शुरू से अन्त तक धर्माडम्बरों का घोर विरोध करती है।
साध्वियों की जीवन-स्थिति एवं उनके अन्तर्बाह्य संघर्ष को मार्मिक शब्द देनेवाले इस उपन्यास में जहाँ सामाजिक-आर्थिक विषमता को विस्तार दिया गया है, वहीं अन्याय और शोषण की अभिव्यक्ति को नई भाव-भूमि।
Parishishta
- Author Name:
Giriraj Kishore
- Book Type:

-
Description:
‘दिनमान’ (5-11 अगस्त, 1984) के ‘फ़िलहाल’ स्तम्भ में, ‘परिशिष्ट’ के बारे में गिरिराज किशोर का कथन छपा था, “अनुसूचित कोई जाति नहीं, मानसिकता है। जिसे अभिजातवर्ग (जिसका वर्चस्व हो) परे ढकेल देता है, वह अनुसूचित हो जाता है।” ‘परिशिष्ट’ इसी भयानक मानसिकता को उद्घाटित करनेवाला एक महाअभियोग है। अपने बहुचर्चित उपन्यास ‘यथा प्रस्तावित’ में भी गिरिराज ने इसी वर्ग की दारुण पीड़ा को चित्रित किया था। राष्ट्रीय महत्त्व की महान शिक्षा-संस्थाओं में किसी तरह दाख़िला प्राप्त करनेवाले साधनहीन और तथाकथित जातिहीन छात्रों की त्रासदी, उबलते तेल में डाल दिए जानेवाले व्यक्ति के संत्रास की तरह होती है जो पहली बार ‘परिशिष्ट’ के रूप में सामने आई है।
राष्ट्रीय स्तर पर ऊँच-नीच और छुआछूत का विष फैला है। आरक्षणवादी नीतियों के बावजूद इनसान को जिस अमानवीय स्थिति का सामना करना पड़ता है, वह हर एक को अपने गिरहबान में मुँह डालकर झाँकने के लिए मजबूर करती है। उपन्यास से पता चलता है कि लेखक उस सबका अन्तरंग साक्षी है। अपनी मुक्ति की लड़ाई लड़नेवाला हर पात्र एक ऐसे दबाव में जीने के लिए मजबूर है जो या तो उसे मरने के लिए बाध्य करता है या फिर संघर्ष को तेज़ कर देने की ख़ामोश प्रेरणा देता है। यह उपन्यास गिरिराज किशोर की पहचान को ही गहरा नहीं करता बल्कि हिन्दी उपन्यास की परम्परा को समृद्ध भी करता है।
एक लड़ाकू जहाज़ की तरह ऊपर उठते-उठते फट पड़नेवाला, उसी वर्ग का एक पात्र रामउजागर आत्महत्या से पहले नोट लिखकर जेब में रख लेता है कि “मेरा जाना स्वेच्छा से है। गवेषणात्मक है। हालाँकि उसका प्रतिफल दूसरों को बाँट पाना सम्भव नहीं होगा।...किसी घृणा या शिकायत के कारण नहीं, एक आत्मीयता और आत्म-सन्तोष के कारण मेरा केवल यही प्रश्न है कि जब प्रकृति, जिससे हम सब कुछ पाते हैं, घृणामुक्त है, तो मनुष्य मुक्त क्यों नहीं?”... उपन्यास का नायक अनुकूल एक संकल्पशील व्यक्ति है जो सहता है, भोगता है और विचलित नहीं होता। वस्तुतः ‘परिशिष्ट’ संत्रास, संघर्ष और संकल्प की महागाथा है।
SWACHCHHA BHARAT : SASHAKTA BHARAT
- Author Name:
Mahesh Sharma
- Book Type:

- Description: "स्वच्छता जीवन में उतनी ही महत्त्वपूर्ण है, जितनी जीवित रहने के लिए भोजन; लेकिन हम स्वच्छता के प्रति कितने गंभीर हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। इसका एक कारण स?त कानून का अभाव भी है। गांधीजी ने स्वच्छता के प्रति हमारे देशवासियों की उदासीनता को आरंभ में ही भाँप लिया था और यही कारण था कि वे अपने हर विचार में लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करते रहते थे। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया था कि ‘‘स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।’’ गांधीजी का कहना था कि जब तक हम बाहरी स्वच्छता नहीं अपनाते, भीतरी स्वच्छता की कल्पना तक नहीं की जा सकती। और बाहरी स्वच्छता आचरण में आते ही भीतरी स्वच्छता स्वतः आ जाती है। वर्तमान परिवेश में इन दोनों प्रकार की स्वच्छता की बड़ी आवश्यकता है और गांधी एक बार फिर मार्गदर्शक के रूप में हमारे सामने हैं। जरूरत है तो बस सच्चे मन से उनके विचारों के अनुसरण की। सुधी पाठक ही नहीं, आबालवृद्ध— सभी स्वच्छता अभियान में संवेदनापूर्वक अपना आत्मीय सहयोग दें और इसे अपनी आदत के रूप में आत्मसात् करके भारत को साफ-स्वच्छ तथा गांधीजी के स्व?न को साकार करें।"
Chidiya Bahnon Ka Bhai
- Author Name:
Anand Harshul
- Book Type:

-
Description:
चिड़िया बहनों का भाई’ के जिस कथा-संसार में आप दाख़िल होने जा रहे हैं, वह आनन्द हर्षुल का रचा हुआ एक ‘अनिर्वचनीय’ ऐन्द्रिय लोक है। यह कथानायक भुलवा का घर-संसार है। इस दुनिया की प्रकृति में पशु, वनस्पति और मनुष्य का अनिवार्य मेल है। एक से दूसरे के अस्तित्व में आवाजाही इस दुनिया में ज़िन्दगी का सहज सामान्य दैनंदिन तरीक़ा है। नवजात बेटियाँ पैदा होते ही अपने कन्धों पर पंख उगाकर खिड़की से उड़ जाती हैं—आँखों में अथाह करुणा-भरे, अपनी माँ और घर को अपने जन्म के अतिशय दु:ख से बचाने के लिए। उनके इकलौते भाई भुलवा की पकड़ी हुई मछलियाँ स्वयं उड़कर उसके घर जा पहुँचती हैं, उनकी ठठरी नदी में फिंककर फिर ज़िन्दा मछलियों में तब्दील हो जाती हैं...और भी वे सारी घटनाएँ और चरित्र जिनकी चर्चा यहाँ अनावश्यक है, क्योंकि आगामी पृष्ठों में आप उनको स्वयं इस यथार्थ को रचते और उस यथार्थ से प्रसूत होते देखेंगे।
यह भाषा के मिथकीय स्वभाव में जन्म लेने और व्यक्त होनेवाली दुनिया है। संवेदनाओं का समग्र संश्लिष्ट बोध इस दुनिया की जीवन-प्रणाली है, जैसी कि वह आदिम मनुष्य की रही होगी। आनन्द हर्षुल ने वैसी ही संश्लिष्ट सघन भाषा रचकर उस दुर्लभ अनिर्वचनीय समग्रता को वचनीय बनाया है और निस्सन्देह, यह स्वयं किसी चमत्कार से कम नहीं।
आनन्द हर्षुल के हाथों में मिथकीय भाषा केवल दर्ज करने का उपकरण नहीं रह जाती। वह वस्तुत: आँख है, अनुभव को देखती और यथातथ्य भाव से उसकी उद्दामता को पकड़ती। यह तो अनुभव की उद्दामता है जो उसको यथातथ्य नहीं रहने देती। इस भाषा के हाथों में मिथक वह रूप ले लेता है जिसे कभी कोलरिज ने प्राथमिक कल्पना की तरह पहचाना था और उसे समस्त मानवीय बोध की जीवनी शक्ति और पुरोधा माना था जो सीमित आबद्ध चेतना में अनादि अनन्त 'अस्मि' की सृजनाकांक्षा की पुनरावृत्ति कही जा सकती है।
यह संस्कृति की सुसंस्कारित प्रकृति की विकासगाथा है जो विकृति के प्रतिपक्ष की तरह स्थापित हो जाती है। प्रकृति को लौटा लाने का निर्विकल्प आह्वान अब एकमात्र बच रहा विकल्प है। 'चिडिय़ा बहनों का भाई' में आनन्द हर्षुल इसी आह्वान को साकार उपस्थित करते दिखाई देते हैं।
—अर्चना वर्मा
Samay-Ashva Belagam
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

-
Description:
कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की पृष्ठभूमि में यह उपन्यास अपनी सांस्कृतिक जड़ों से विच्छिन्न मनों की पीड़ा तथा ग्लोबलाइजेशन से बौराए हमारे मौजूदा वक़्त की कथा है। एक तरफ़ लोग कहीं मजबूरन तो कहीं नए दौर के प्रवाह में अपनी जड़ों से उखड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ़ जीना एक वैश्विक स्पर्धा होता जा रहा है।
कश्मीर से जान बचाकर निकला एक पंडित परिवार अपने जैसे अनेक लोगों के साथ राजधानी दिल्ली में आकर नए सिरे से जीवन शुरू करता है। धीरे-धीरे उनके पैर नई ज़मीन पर अपनी जगह भी बनाने लगते हैं लेकिन यह अहसास कि अगर हम अपने ही देश में शरणार्थी हैं तो फिर दुनिया में कहीं भी रहें, क्या फ़र्क़ पड़ता है; भावी पीढ़ी के लिए निर्णायक बन जाता है।
कश्मीरी संस्कृति और मूल्यों में रसे-पगे माता-पिता का प्रशिक्षण परिवार को बिखरने तो नहीं देता लेकिन अपने घर-ज़मीन से दूर, महानगरों के परायेपन में सम्बन्धों को उस तरह जीना भी सम्भव नहीं जैसे अपनी भूमि पर अपनी संस्कृति, अपने माहौल के बीच हो सकता था।
वरिष्ठ कथाकार चन्द्रकान्ता अपने इस नए उपन्यास में कश्मीर से विस्थापित परिवार की कहानी के माध्यम से जैसे वर्तमान का पूरा चित्र ही खींच देती हैं। बुज़ुर्गों का अकेलापन, नई पीढ़ी के भटकाव, सतत एक होड़ में डूबे युवाओं का तनाव, बिखरता दाम्पत्य, पश्चिमी संस्कृति और तकनीक के दबाव, विश्व के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा विस्थापन, सार्वजनिक स्पेस में स्त्रियों पर होनेवाले हमले और वह सब जो इस दौर को एक शान्त धारा नहीं, भीषण भँवर का रूप देता है; इन सबको लेकर एक गम्भीर चेतावनी यहाँ मौजूद है।
उपन्यास के मुख्य पात्र सुरेन्द्रनाथ का यह कथन कि 'यह समय बूढ़ों का नहीं है' जैसे इस पूरे परिदृश्य पर एक सम्पूर्ण टिप्पणी है। अर्थात धीरता, गम्भीरता, ठहराव, गहराई और प्रकृति के हमक़दम चलने का यह समय नहीं है। देश से लेकर विदेश तक बेलगाम बहती एक गति है जिसके बने रहने के लिए हर किसी की साँसें उखड़ी जा रही हैं। चन्द्रकान्ता की सधी हुई क़लम एक-एक पंक्ति में वैश्विक विडम्बना की एक-एक परत खोलती है।
His Flawless Love
- Author Name:
Pragna Rao
- Book Type:

- Description: Marriage! Is it a tradition? A legal agreement? A biological need? Or something besides all these? Tragedy strikes Isha’s life when she loses her fiancée to destiny. But happiness comes back into her life in the form of a good man who becomes her husband. However, the struggles of her memories and present situation go on, taking a toll on her new married life. Unable to carry on, she separates from her husband. And yet, the distance between them reminds her of her husband's unconditional love. She understands the significance of the marital vows and returns to be his best companion. Though destiny unceasingly challenges her, it also makes her stronger. Who wins the battle ultimately? Destiny or love?
Sonalun - Brave Warrior
- Author Name:
Dr. Chintan Madhu
- Book Type:

- Description: ઇજીપ્ત, ઇસાપૂર્વ ૨૬૮૬ ઇજીપ્તના ગીઝા શહેરમાં ક્રૂર ફેરો એક્ષોટેપનું શાસન છે. એક્ષોટેપે ભાઇ વિનેન સાથે દગો કર્યો હોય છે. એક્ષોટેપ ધીરે ધીરે વધુ ને વધુ શક્તિશાળી બનતો જાય છે. એક્ષોટેપ સામે યુદ્ધ કરી ગીઝાને મુક્ત કરાવવા માટે મૃદારીતીના કુખે એક વીરાંગનાનો જન્મ થાય છે. તેનું બાળપણ અને યુવાની નાઇલના કિનારે પસાર થાય છે. યુવાનીમાં પ્રવેશતાં તેનું અસ્તિત્વ સામે આવે છે. ગીઝા રાજ્ય પાછું મેળવવા યુદ્ધ જરૂરી બને છે. આ યુદ્ધમાં વીરાંગનાને મેડઝાઇ યોદ્ધા અને ગુપ્ત પ્રજા મદદ કરે છે. વિનેન રાજ્ય પાછું મેળવવા પ્રભુ અનુબીશની તલવારનો સહારો લેવા માંગે છે. પિતા અને વીરાંગનાના સંઘર્ષમાં વિજય વીરાંગનાનો થાય છે. વીરાંગનાની સૌમ્યતાથી શૂરવીરતા સુધીની સફરમાં મિત્રતા, પ્રેમ, સમુદ્રની મુસાફરી, હિંદુકુશની મુલાકાત, સાહસ, સિનાઇ દ્વીપકલ્પનું યુદ્ધ અને એક્ષોટેપના વધનો સમાવેશ થાય છે.
Love 2 : A Sweet Poison
- Author Name:
Rajeev Pundir
- Book Type:

- Description: What’s love? Since the dawn of life itself, this question has continuously baffled humanity. And this puzzle has not been solved yet. This cannot because the day This abracadabra is known, the very purpose of life and to live will cease to exist. Therefore, the mystery must go on… this is such a factor that where some find it quite encouraging, inspirational, soothing like a balm for the day-to-day problems, and prepare them to strive hard against all odds of life; the others feel it worse even than poisoning them down and ruining their lives. However—people will continue to fall in love! Sixteen excellent writers have tried to explore the world of this governing force of life—love, through their unique stories. Grab this anthology par excellence and indeed, you’ll not only feel and love but—live them!!
Huckulburry Finn
- Author Name:
Mark Twain
- Book Type:

-
Description:
विश्व साहित्य के महान उपन्यासों को किशारों के लिए संक्षिप्त-रूपान्तरित संस्करणों की शृंखला में यह मार्क ट्वेन के प्रसिद्ध उपन्यास ‘द एडवेंचर्स ऑफ़ हकलबरी फ़िन’ का रूपान्तरण है। 1884 में प्रकाशित यह उपन्यास अपने रंगभेद-विरोध तथा भाषा-प्रयोगों के लिए कुछ लोगों की आलोचना का निशाना भी बना, लेकिन इसे मार्क ट्वेन की श्रेष्ठतम रचनाओं में एक माना जाता है।
उपन्यास की कहानी के केन्द्र में हकलबरी फ़िन नाम का एक किशोर है जिसे उसके दोस्त हक कहते हैं। नशेड़ी पिता द्वारा पाला गया हक अपने दोस्त जिम, जो एक ग़ुलाम है, के साथ मिसिसिपी नदी की रोमांचक यात्रा पर निकल जाता है। समाज के बन्धन उसे नहीं भाते। प्राकृतिक और सभ्य जीवन-शैली के बीच उसका रुझान प्राकृतिक की ओर है।
मिसिसिपी नदी की यात्रा के दौरान वह जीवन के अनेक सबक़ सीखता है और धीरे-धीरे उसका व्यक्तित्व भी निखरता जाता है। रंगभेद और 19वीं सदी के सभ्य अमेरिकी समाज के दोहरे चरित्र पर तीखी दृष्टि डालनेवाले इस उपन्यास को बाल साहित्य की धारा को एक नए स्तर पर ले जानेवाली रचना कहा जाता है।
Chandrakanta Santati : Vols. 1-6
- Author Name:
Devakinandan Khatri
- Book Type:

-
Description:
‘चन्द्रकान्ता’ का प्रकाशन 1888 में हुआ। ‘चन्द्रकान्ता’, ‘सन्तति’, ‘भूतनाथ’—यानी सब मिलाकर एक ही किताब। पिछली पीढ़ियों का शायद ही कोई पढ़ा-बेपढ़ा व्यक्ति होगा जिसने छिपाकर, चुराकर, सुनकर या ख़ुद ही गर्दन ताने आँखें गड़ाए इस किताब को न पढ़ा हो। चन्द्रकान्ता पाठ्य-कथा है और इसकी बुनावट तो इतनी जटिल या कल्पना इतनी विराट है कि कम ही हिन्दी उपन्यासों की हो।
अद्भुत और अद्वितीय याददाश्त और कल्पना के स्वामी हैं—बाबू देवकीनन्दन खत्री। पहले या तीसरे हिस्से में दी गई एक रहस्यमय गुत्थी का सूत्र उन्हें इक्कीसवें हिस्से में उठाना है, यह उन्हें मालूम है। अपने घटना-स्थलों की पूरी बनावट, दिशाएँ उन्हें हमेशा याद रहती हैं। बीसियों दरवाज़ों, झरोखों, छज्जों, खिड़कियों, सुरंगों, सीढ़ियों...सभी की स्थिति उनके सामने एकदम स्पष्ट है। खत्री जी के नायक-नायिकाओं में ‘शास्त्रसम्मत’ आदर्श प्यार तो भरपूर है ही।
कितने प्रतीकात्मक लगते हैं ‘चन्द्रकान्ता’ के मठों-मन्दिरों के खँडहर और सुनसान, अँधेरी, ख़ौफ़नाक रातें।—ऊपर से शान्त, सुनसान और उजाड़-निर्जन, मगर सब कुछ भयानक जालसाज हरकतों से भरा...हर पल काले और सफ़ेद की छीना-झपटी, आँख-मिचौनी।
खत्री जी के ये सारे तिलिस्मी चमत्कार, ये आदर्शवादी परम नीतिवान, न्यायप्रिय सत्यनिष्ठावान राजा और राजकुमार, परियों जैसी ख़ूबसूरत और अबला नारियाँ या बिजली की फुर्ती से ज़मीन-आसमान एक कर डालनेवाले ऐयार सब एक ख़ूबसूरत स्वप्न का ही प्रक्षेपण हैं।
‘चन्द्रकान्ता’ को आस्था और विश्वास के युग से तर्क और कार्य-कारण के युग में संक्रमण का दिलचस्प उदाहरण भी माना जा सकता है।
—राजेन्द्र यादव
Apne Khilaone
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book