Ghungroo
(0)
Author:
Shankar PuntambekerPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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श्रीमती शान्ति कुमारी बाजपेयी का उपन्यास ‘घुँघरू’ अर्द्धनारीश्वर की वाङ्मयी साधना में अर्पित एक पुष्प है। प्रकृति ने मानव को स्त्री और पुरुष—दो रूपों में अभिव्यक्ति दी है। इन दोनों स्वरूपों की क्षमताएँ, कार्यपद्धति और उपलब्धियाँ भिन्न-भिन्न हैं। परन्तु वे एक साथ मिलकर ही परिपूर्ण हो पाती हैं और सृष्टि में अपनी सार्थकता प्रकट करती हैं। पुरुष अपने पौरुष से सर्वस्व प्राप्त कर सकता है तो नारी अपने प्रेम से सर्वस्व त्याग कर सकती है। पुरुष का धर्म—साहस, सिद्धि और शक्ति है तो नारी का धर्म—ममता, विश्वास और सेवा है। पुरुष की सार्थकता अर्जन में और नारी की सार्थकता समर्पण में दिखाई पड़ती है। ये दोनों विभूतियाँ जब एक साथ मिलकर अपनी भूमिकाओं को चरितार्थ करती हैं तो विधाता की कल्याणी सृष्टि विकसित होकर मंगल के महासमुद्र में पर्यवसित होती है। दोनों के सम्मिलन में ही परिपूर्णता है—अर्द्धनारीश्वर स्वरूप का रहस्य यही है और प्रस्तुत उपन्यास में इसी की प्रतिष्ठा है।</p> <p>भारतीय संस्कृति में जिन उदात्त मानवीय विभूतियों और मूल्यों की प्रतिष्ठा है, उनकी सार्थकता भी प्रस्तुत उपन्यास में दिखाई गई है। शिव बिना शक्ति के शव है और शक्ति जब उसके साथ मिलती है तो शिवत्व आश्चर्यजनक ढंग से संसार में अभिव्यक्त हो सकता है—भारतीय जीवन में पुरुष और नारी इसी भूमिका में प्रतिष्ठित किए गए हैं। प्रस्तुत उपन्यास के पात्र इसी रूप में जीकर लोक-कल्याण की साधना में निरत हैं। प्रेम का अत्यन्त उदात्त, संयत और धर्म से ध्रुव निश्चित स्वरूप यहाँ विद्यमान है जो आँसुओं से चरितार्थ होकर कल्याण के महासमुद्र में मिलता है। उपन्यास की भाषा-शैली और वर्णन सौष्ठव की अपनी गरिमा है जो अपने मन्तव्य को पूर्णरूपेण अभिव्यक्त करने में सफल है।</p> <p>प्रस्तुत उपन्यास के द्वारा हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि तो होती ही है, साथ ही भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की अमर प्रतिष्ठा का भी यह अन्यतम साधन है। भारतीय मनीषा को इससे परितोष मिल सकेगा।
Read moreAbout the Book
श्रीमती शान्ति कुमारी बाजपेयी का उपन्यास ‘घुँघरू’ अर्द्धनारीश्वर की वाङ्मयी साधना में अर्पित एक पुष्प है। प्रकृति ने मानव को स्त्री और पुरुष—दो रूपों में अभिव्यक्ति दी है। इन दोनों स्वरूपों की क्षमताएँ, कार्यपद्धति और उपलब्धियाँ भिन्न-भिन्न हैं। परन्तु वे एक साथ मिलकर ही परिपूर्ण हो पाती हैं और सृष्टि में अपनी सार्थकता प्रकट करती हैं। पुरुष अपने पौरुष से सर्वस्व प्राप्त कर सकता है तो नारी अपने प्रेम से सर्वस्व त्याग कर सकती है। पुरुष का धर्म—साहस, सिद्धि और शक्ति है तो नारी का धर्म—ममता, विश्वास और सेवा है। पुरुष की सार्थकता अर्जन में और नारी की सार्थकता समर्पण में दिखाई पड़ती है। ये दोनों विभूतियाँ जब एक साथ मिलकर अपनी भूमिकाओं को चरितार्थ करती हैं तो विधाता की कल्याणी सृष्टि विकसित होकर मंगल के महासमुद्र में पर्यवसित होती है। दोनों के सम्मिलन में ही परिपूर्णता है—अर्द्धनारीश्वर स्वरूप का रहस्य यही है और प्रस्तुत उपन्यास में इसी की प्रतिष्ठा है।</p>
<p>भारतीय संस्कृति में जिन उदात्त मानवीय विभूतियों और मूल्यों की प्रतिष्ठा है, उनकी सार्थकता भी प्रस्तुत उपन्यास में दिखाई गई है। शिव बिना शक्ति के शव है और शक्ति जब उसके साथ मिलती है तो शिवत्व आश्चर्यजनक ढंग से संसार में अभिव्यक्त हो सकता है—भारतीय जीवन में पुरुष और नारी इसी भूमिका में प्रतिष्ठित किए गए हैं। प्रस्तुत उपन्यास के पात्र इसी रूप में जीकर लोक-कल्याण की साधना में निरत हैं। प्रेम का अत्यन्त उदात्त, संयत और धर्म से ध्रुव निश्चित स्वरूप यहाँ विद्यमान है जो आँसुओं से चरितार्थ होकर कल्याण के महासमुद्र में मिलता है। उपन्यास की भाषा-शैली और वर्णन सौष्ठव की अपनी गरिमा है जो अपने मन्तव्य को पूर्णरूपेण अभिव्यक्त करने में सफल है।</p>
<p>प्रस्तुत उपन्यास के द्वारा हिन्दी साहित्य की श्रीवृद्धि तो होती ही है, साथ ही भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की अमर प्रतिष्ठा का भी यह अन्यतम साधन है। भारतीय मनीषा को इससे परितोष मिल सकेगा।
Book Details
-
ISBN9788180316555
-
Pages184
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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मॉरिशस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित इस उपन्यास में उन भारतीय मज़दूरों के जीवन-संघर्षों की कहानी है, जिन्हें चालाक फ़्रांसीसी और ब्रिटिश उपनिवेशवादी सोना मिलने के सब्जबाग दिखाकर मॉरिशस ले गए थे। वे भोले-भाले निरीह मज़दूर अपनी ज़रूरत की मामूली-सी चीज़ें लेकर अपने परिवारों के साथ वहाँ पहुँच गए। उन्होंने वहाँ की चट्टानों को तोड़कर समतल बनाया, और उनकी मेहनत से वह धरती रसीले और ठोस गन्ने के रूप में सचमुच सोना उगलने लगी। आज मॉरिशस की समृद्ध अर्थव्यवस्था का आधार गन्ने की यह खेती ही है। लेकिन जिन भारतीयों के खून और पसीने से वहाँ की चट्टानें उपजाऊ मिट्टी के रूप में परिवर्तित हुईं, उन्हें क्या मिला? यह उपन्यास मॉरिशस के इतिहास के उन्हीं पन्नों का उत्खनन है जिन पर भारतीय मज़दूरों का ख़ून छिटका हुआ है, और जिन्हें वक़्त की आग जला नहीं पाई। आज मॉरिशस एक सुखी-सम्पन्न मुल्क के रूप में देखा जाता है।
Baraha Ghante
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

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‘बारह घंटे’ यशपाल का अपने पाठकों के लिए एक वैचारिक आमंत्रण है। ईसाई समाज की पृष्ठभूमि में घटित इस उपन्यास के केन्द्र में विधवा विनी और विधुर फेंटम हैं जो कुछ विशेष परिस्थितियों में परस्पर भावनात्मक बन्धन में बँध जाते हैं।
उपन्यास की नायिका विनी की ओर से इस वृत्तान्त को ‘पाठकों के सम्मुख एक अपील के रूप में’ रखते हुए यशपाल इस उपन्यास के माध्यम से अनुरोध करते हैं कि ‘विनी को प्रेम अथवा दाम्पत्य निष्ठा निबाह न सकने का कलंक देने का निर्णय करते समय, विनी के व्यवहार को केवल परम्परागत धारणाओं और संस्कारों से ही न देखें। उसके व्यवहार को नर–नारी के व्यक्तिगत जीवन की आवश्यकता और पूर्ति की समस्या के रूप में तर्क तथा अनुभूति के दृष्टिकोण से, मानव में व्याप्त प्रेम की प्राकृतिक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में भी देखें।’
वे पूछते हैं कि क्या नर–नारी के परस्पर आकर्षण अथवा दाम्पत्य सम्बन्ध को केवल सामाजिक कर्तव्य के रूप में ही देखना अनिवार्य है? आर्यसमाजी वर्जनाओं और दृष्टि की तर्कपूर्ण आलोचना करनेवाला यशपाल का एक विचारोत्तेजक उपन्यास।
Thistle & Weeds
- Author Name:
Prachi Priyanka
- Book Type:

- Description: Thistle and weeds is an enjoyable collection of eleven stories that explore love, lust and loyalties from surprising perspectives. These stories celebrate the mysterious inner lives of ordinary people who are stuck in moments of crisis and struggle to unravel their lives in a world where certainties are tested and often found wanting. A young girl locates the defiant undercurrent of individual expression shackled by societal norms; a Lonely old widow finds a Ray of hope; a disillusioned wife redefines notions of fidelity; an agonised husband chooses freedom over his wife; a woman encounters love from her past; a rapist feels the need to unburden... Binding these acutely observed and emotionally intelligent stories are complex, confused and yet beautifully fascinating characters. Prachi Priyanka subverts the familiar themes of family, love and cultural identity and provides a rare glimpse into the strange workings of the human heart.
Dhukani Evam Anya Kahaniyan
- Author Name:
Neeraj Neer
- Book Type:

- Description: "नीरज नीर ने कुछ ही समयावधि में एक संभावनाशील कथाकार के रूप में अपनी पुख्ता पहचान बना ली है। उनका यह पहला कथा-संग्रह इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि उनके पास कहने को भी बहुत कुछ है और कहने की भंगिमा भी। दरअसल लेखक की परख इस बात से भी होती है कि वह किन चीजों को कहाँ से देख रहा है। इस मामले में नीरज नीर की पोजिशनिंग बिल्कुल स्पष्ट है। तकरीबन सभी पात्र निम्नवर्गीय या निम्नमध्यवर्गीय हैं, जिनके हर्ष-विषाद, संबंधों के घात-प्रतिघात, सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने से उनके संघर्ष की कल्पना होती है, जैसे हर चरित्र असीम दुःख के पहाड़ को पूरी ताकत के साथ ठेलने की कोशिश कर रहा है और इस कोशिश में लहूलुहान हो रहा है। इन कहानियों में कथ्य की वैविध्यता अपने ऐश्वर्य के साथ मौजूद है। नीरज नीर की कहानियों की डिटेलिंग कभी-कभी चमत्कृत कर देती है कि लेखक अपने पात्रों के जीवन तल में कितने गहरे उतरा है और पाठक को भी हाथ पकड़कर उन गहराइयों में ले जाने को बाध्य भी करता है। नीरज नीर न तो जटिल शिल्प के आग्रही हैं और न ही अलंकृत भाषा की चकाचौंध के। बिल्कुल उनकी कहानियों के चरित्रों की तरह सादगी ही शिल्प है और जीवन की तरह प्रवाहमयी भाषा-निर्द्वंद्व, झलमल, यथानाम नीर की तरह बहती हुई। —पंकज मित्र सुप्रसिद्ध कथाकार "
Bharatiyata Ki Pahchan
- Author Name:
Manoj Kumar Rai
- Book Type:

- Description: हम भारत की संपूर्ण सत्ता को समझने के लिए उसे तीन कोणों से देखें तो ठीक-ठीक समझ सकते हैं। वे कोण हैं— (1) ‘मृण्मय’ (अर्थात भौगोलिक-आर्थिक-जैविक दृष्टि से), (2) ‘शाश्वत’ (ऐतिहासिक अविच्छिन्न विकास की दृष्टि से), (3) ‘चिन्मय’ (श्रुति अर्थात ‘अचल’ मूल्यों की दृष्टि से, यानी ‘मूल प्रकृति’ या essence की दृष्टि से)। इन तीन कोणों से भारत का अध्ययन करके संपूर्ण भारतीय ‘सत्ता’ और भारतीय पुरुषार्थ को हम समझ सकते हैं। भारत का मृण्मय रूप हमारे गाँव-नगर, खेत-खलिहान, नदी-पहाड़, हाट-बाजार में उपस्थित है और इस रूप द्वारा भारत ‘काम’ और ‘अर्थ’ की साधना कर रहा है। भारत का ‘शाश्वत रूप’ काल-प्रवाह अर्थात इतिहास में हजार-हजार वर्षों से, सैंधव सभ्यता के पूर्व से, निषाद-द्रविड़-किरात आर्य—इन चार महान् प्रवाहों के क्रमागत आगमन से निरंतर चलायमान है। यह ‘शाश्वत’ इस अर्थ में है कि यह अविच्छिन्न रहा है। अत: भारत का ‘शाश्वत रूप’ इतिहास की विकास-यात्रा में नित्य देहांतर करते हुए, निरंतर चलते हुए ‘धर्म’ नामक तृतीय पुरुषार्थ की अखंड, अविच्छिन्न उपासना कर रहा है। भारत का ‘चिन्मय रूप’ इस शाश्वत रूप से भी सूक्ष्म है। इस रूप का लक्ष्य है ‘मोक्ष धर्म’, अर्थात ‘शुद्ध आनंद’।
Lajja
- Author Name:
Ilachandra Joshi
- Book Type:

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कमलिनी (सेक्रेटरी का यही नाम था) इस ढंग से मुस्कराने लगी जैसे वह मेरे दिल की सब बातें ताड़ गई हो। बोली, “ऐसे गुणवान पुरुष को स्त्रियों की महफ़िल में लाना क्या ख़तरे की बात नहीं है?” मैंने पूछा, “ख़तरा कैसा?” “अरी पगली, समझती नहीं? तेरे अनुमोदित और इच्छित पुरुष की आँखें जब इतनी अलबेली नारियों पर दौड़ेंगी तो क्या फिर वह तेरी परवाह करेगा?” “दुर। कहके मैंने, गुस्से में आकर उसकी पीठ पर एक धौल जमा दी। पर उसकी इस बात से मेरे हृदय में भय का संचार होने लगा। कमलिनी ने कहा, “अच्छी बात है। मुझे कोई एतराज़ नहीं। पर मैं सावधान किए देती हूँ। पीछे पछताना पड़ेगा।" यूनिवर्सिटी के लड़कों और प्रोफ़ेसरों के साथ कमलिनी की बड़ी घनिष्ठता थी। बहुत सम्भव है, उन लोगों के स्वभाव से परिचित होने पर वह पुरुषों की प्रकृति से अभिज्ञ हो चुकी थी। उसकी बात से कुछ भय होने पर भी मुझे विशेष चिन्ता नहीं हुई। मुझे अपने रूप-गुण का बड़ा घमंड था। किसी व्यक्ति को मुझे छोड़कर अन्यत्र जाने का लोभ हो सकता है, यह आशंका मेरे हृदय में उत्पन्न नहीं हो सकती थी।
—इसी पुस्तक से।
Patiya
- Author Name:
Kedarnath Agrawal
- Book Type:

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‘पतिया’ यशस्वी कवि केदारनाथ अग्रवाल का उपन्यास है। अब तक अनुपलब्ध होने के कारण केदार-साहित्य के सहृदय पाठक और आलोचक इस उल्लेखनीय कृति से वंचित रहे। उनके लिए वस्तुत: ‘पतिया’ एक अनमोल उपहार है।
हिन्दी साहित्य में स्त्री-विमर्श की औपचारिक रूप से चर्चा प्रारम्भ होने से बहुत पहले रची गई कृति ‘पतिया’ में स्त्री-जीवन की जाने कितनी विडम्बनाएँ चित्रित हो चुकी थीं। परिवार, दाम्पत्य, यौन स्वातंत्र्य, शोषण और अलगाव आदि से जुड़े प्रसंगों के छायाचित्र ‘पतिया’ को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं। उपन्यास की नायिका का जीवन-संघर्ष स्वयं बहुत कुछ कहता है। स्त्री समलैंगिकता की स्थितियाँ भी प्रस्तुत उपन्यास में हैं। इससे सिद्ध होता है कि कोई भी प्रवृत्ति या घटना सामाजिक स्थिति और व्यक्तिगत मन:स्थिति का संयुक्त परिणाम होती है।
इस उपन्यास का गद्य विशिष्ट है...एक कवि का गद्य। छोटे-छोटे वाक्य। बिम्ब, प्रतीक समृद्ध भाषा। संवेदनशील और प्रवाहपूर्ण। यथार्थवादी गद्य का उदाहरण। पतिया की ननद मोहिनी का यह चित्र कितना व्यंजक है, “मैली-सी चौड़े किनारे की धोती पहिने है। हाथ और पैरों में चाँदी के गहने खनक रहे हैं। धोती का पल्ला सिर से उतरकर गरदन पर आ गया है। पीछे से एक बड़ा-सा जूड़ा उठा दिखता है। जूड़ा गोल घेरे में बँधा है। सामने से देखने पर सिर में सिन्दूर भरी चौड़ी-सी माँग दिखती है। कानों में तरकियाँ, नाक में पीतल की फुल्ली और गले में रंगीन काँच और मूँगे के दानों से बनी दुलरी पड़ी है। बड़ी-बड़ी आँखों में काजल खिंचा है। दाहिनी ओर गाल पर एक तिल है। चेहरे पर तेल की चिकनाहट जवानी को चमका रही है। कोई कुरती या सलूका नहीं पहने है। बर्तन माँजते वक़्त, उसके दोनों उरोज, छलक पड़ते हैं। रंग ज़्यादा गोरा नहीं, पर साँवले से कुछ निखरा हुआ है।
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