🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Baraha Ghante

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

‘बारह घंटे’ यशपाल का अपने पाठकों के लिए एक वैचारिक आमंत्रण है। ईसाई समाज की पृष्ठभूमि में घटित इस उपन्यास के केन्द्र में विधवा विनी और विधुर फेंटम हैं जो कुछ विशेष परिस्थितियों में परस्पर भावनात्मक बन्धन में बँध जाते हैं। उपन्यास की नायिका विनी की ओर से इस वृत्तान्त को ‘पाठकों के सम्मुख एक अपील के रूप में’ रखते हुए यशपाल इस उपन्यास के माध्यम से अनुरोध करते हैं कि ‘विनी को प्रेम अथवा दाम्पत्य निष्ठा निबाह न सकने का कलंक देने का निर्णय करते समय, विनी के व्यवहार को केवल परम्परागत धारणाओं और संस्कारों से ही न देखें। उसके व्यवहार को नर–नारी के व्यक्तिगत जीवन की आवश्यकता और पूर्ति की समस्या के रूप में तर्क तथा अनुभूति के दृष्टिकोण से, मानव में व्याप्त प्रेम की प्राकृतिक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में भी देखें।’ वे पूछते हैं कि क्या नर–नारी के परस्पर आकर्षण अथवा दाम्पत्य सम्बन्ध को केवल सामाजिक कर्तव्य के रूप में ही देखना अनिवार्य है? आर्यसमाजी वर्जनाओं और दृष्टि की तर्कपूर्ण आलोचना करनेवाला यशपाल का एक विचारोत्तेजक उपन्यास।

Read more

₹ 90

₹ 72 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Baraha Ghante This book ₹72
Abhishapt Yashpal ₹299
Amita Yashpal ₹250
3 books selected ₹639 ₹621

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

‘बारह घंटे’ यशपाल का अपने पाठकों के लिए एक वैचारिक आमंत्रण है। ईसाई समाज की पृष्ठभूमि में घटित इस उपन्यास के केन्द्र में विधवा विनी और विधुर फेंटम हैं जो कुछ विशेष परिस्थितियों में परस्पर भावनात्मक बन्धन में बँध जाते हैं।

उपन्यास की नायिका विनी की ओर से इस वृत्तान्त को ‘पाठकों के सम्मुख एक अपील के रूप में’ रखते हुए यशपाल इस उपन्यास के माध्यम से अनुरोध करते हैं कि ‘विनी को प्रेम अथवा दाम्पत्य निष्ठा निबाह न सकने का कलंक देने का निर्णय करते समय, विनी के व्यवहार को केवल परम्परागत धारणाओं और संस्कारों से ही न देखें। उसके व्यवहार को नर–नारी के व्यक्तिगत जीवन की आवश्यकता और पूर्ति की समस्या के रूप में तर्क तथा अनुभूति के दृष्टिकोण से, मानव में व्याप्त प्रेम की प्राकृतिक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में भी देखें।’

वे पूछते हैं कि क्या नर–नारी के परस्पर आकर्षण अथवा दाम्पत्य सम्बन्ध को केवल सामाजिक कर्तव्य के रूप में ही देखना अनिवार्य है? आर्यसमाजी वर्जनाओं और दृष्टि की तर्कपूर्ण आलोचना करनेवाला यशपाल का एक विचारोत्तेजक उपन्यास।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
1963
Weight
130 grams
ISBN-13
9788180315046
Pages
112
Reading time
~4 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13.6 × 21.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp