Baraha Ghante
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‘बारह घंटे’ यशपाल का अपने पाठकों के लिए एक वैचारिक आमंत्रण है। ईसाई समाज की पृष्ठभूमि में घटित इस उपन्यास के केन्द्र में विधवा विनी और विधुर फेंटम हैं जो कुछ विशेष परिस्थितियों में परस्पर भावनात्मक बन्धन में बँध जाते हैं।</p> <p>उपन्यास की नायिका विनी की ओर से इस वृत्तान्त को ‘पाठकों के सम्मुख एक अपील के रूप में’ रखते हुए यशपाल इस उपन्यास के माध्यम से अनुरोध करते हैं कि ‘विनी को प्रेम अथवा दाम्पत्य निष्ठा निबाह न सकने का कलंक देने का निर्णय करते समय, विनी के व्यवहार को केवल परम्परागत धारणाओं और संस्कारों से ही न देखें। उसके व्यवहार को नर–नारी के व्यक्तिगत जीवन की आवश्यकता और पूर्ति की समस्या के रूप में तर्क तथा अनुभूति के दृष्टिकोण से, मानव में व्याप्त प्रेम की प्राकृतिक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में भी देखें।’</p> <p>वे पूछते हैं कि क्या नर–नारी के परस्पर आकर्षण अथवा दाम्पत्य सम्बन्ध को केवल सामाजिक कर्तव्य के रूप में ही देखना अनिवार्य है? आर्यसमाजी वर्जनाओं और दृष्टि की तर्कपूर्ण आलोचना करनेवाला यशपाल का एक विचारोत्तेजक उपन्यास।
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‘बारह घंटे’ यशपाल का अपने पाठकों के लिए एक वैचारिक आमंत्रण है। ईसाई समाज की पृष्ठभूमि में घटित इस उपन्यास के केन्द्र में विधवा विनी और विधुर फेंटम हैं जो कुछ विशेष परिस्थितियों में परस्पर भावनात्मक बन्धन में बँध जाते हैं।</p>
<p>उपन्यास की नायिका विनी की ओर से इस वृत्तान्त को ‘पाठकों के सम्मुख एक अपील के रूप में’ रखते हुए यशपाल इस उपन्यास के माध्यम से अनुरोध करते हैं कि ‘विनी को प्रेम अथवा दाम्पत्य निष्ठा निबाह न सकने का कलंक देने का निर्णय करते समय, विनी के व्यवहार को केवल परम्परागत धारणाओं और संस्कारों से ही न देखें। उसके व्यवहार को नर–नारी के व्यक्तिगत जीवन की आवश्यकता और पूर्ति की समस्या के रूप में तर्क तथा अनुभूति के दृष्टिकोण से, मानव में व्याप्त प्रेम की प्राकृतिक अनिवार्य आवश्यकता के रूप में भी देखें।’</p>
<p>वे पूछते हैं कि क्या नर–नारी के परस्पर आकर्षण अथवा दाम्पत्य सम्बन्ध को केवल सामाजिक कर्तव्य के रूप में ही देखना अनिवार्य है? आर्यसमाजी वर्जनाओं और दृष्टि की तर्कपूर्ण आलोचना करनेवाला यशपाल का एक विचारोत्तेजक उपन्यास।
Book Details
-
ISBN9788180315046
-
Pages112
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘वर्द्धमान' शीर्षक यह उपन्यास लिच्छवियों के विशाल समृद्ध गणराज्य की राजधानी वैशाली में महाराजा चेटक के राजमहल के इन्द्रभवन जैसे मणिकांचन जड़ित स्फटिक भवन में वैशाली की महारानी सुभद्रा और सुभद्रा की ननद राजकुमारी त्रिशला के मनोविनोदपूर्ण परिहास से शुरू होकर पावापुरी में महाप्रभु के निर्वाण पर पूर्ण विराम लेता है। यही राजकुँवरी त्रिशला कुंडपुर में ब्याही गई और वर्द्धमान महावीर की माँ बनी।
महावीर के आयुकाल में विभाजन रेखाएँ स्पष्ट हैं। अपनी आयु के 28 वर्ष उन्होंने कुंडपुर में बिताए। बाल्यकाल से ही वे वीतराग होते चले गए। फिर 2 वर्ष वह अग्रज नन्दीवर्द्धन के आग्रह पर स्वयं को वहीं रोके रहे। 30 वर्ष की आयु में राजमहल से चल पड़े। ज्ञात खंड उद्यान के अशोक वृक्ष की छाया में उन्होंने सारे वस्त्र और आभूषण उतार दिए। तपस्या काल यहीं से शुरू हुआ। पूरे साढ़े बारह वर्ष परीषह और उपसर्ग सहते हुए सस्मित मौन तपस्वी रहे। पावापुरी से जंभियग्राम और वहीं ऋजुबालुका नदी के पास शालवृक्ष के नीचे उन्हें कैवल्य प्राप्त हुआ। वे केवली बने।
बाद के तीस वर्ष उन्होंने धर्मलाभ और पुण्यलाभ के निमित्त सारे संसार पर न्योछावर कर दिए।
उपन्यास के कथानक, उपन्यासों के पात्रों, राजनगरों, राजधानियों, राज्यशैलियों, प्रचलित परम्पराओं, पात्रों के नामों, सामाजिक स्थितियों, परिस्थितियों, सामान्य नागरिकों की मन:स्थितियों, यात्राओं, धर्मसभाओं, न्यायालयों, नारी जगत की संवेदनाओं, ईर्ष्याओं, वैर-बदलों, उपसर्गों, परीषहों, मन्दिरों, मदिरालयों आदि का अध्ययन करने पर लगता है कि मनस्वी डॉ. रत्नेश ने पचासों उपन्यासों को इस एक उपन्यास में महावीर को अपना कथानायक बनाकर लिखने की कोशिश की है। श्री रत्नेश अपनी प्रवाहमयी भाषा के लिए जाने जाते हैं। उस काल के अनुरूप संवादों और व्यवहारगत भाषा का ध्यान उन्होंने बराबर रखा है।
डॉ. राजेन्द्र रत्नेश की पुस्तक ‘वर्द्धमान’ का समग्र लेखन जैन आगम, जैन इतिहास, जैन पुराण और जैन मान्यताओं के अध्ययन तथा आधारभूमि पर है। डॉ. रत्नेश ने अपनी आयु का स्वर्णकाल एक जैन श्रमण या जैन मुनि के रूप में जिया है। उन्होंने साधु जीवन और मुनि जन्म का शैलीगत पालन किया है। आज वे एक सद्गृहस्थ और मेधावी पत्रकार तथा लेखक हैं। अपने दीर्घ अनुभव और अध्ययन से वे यदि 'वर्द्धमान' जैसा मात्र पठनीय ही नहीं, अपितु मननीय ग्रन्थ अपने समाज को सौंपते हैं तो यह बहुत सुखद फलित है।
Kadambari devi ka sucide note
- Author Name:
Ranjan bandyopadhyay
- Book Type:

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Description:
‘कादम्बरी देवी का सुसाइड नोट’ विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर की भाभी के त्रासद जीवन की मार्मिक कथा है।
महज पचीस वर्ष की उम्र में कादम्बरी ने आत्महत्या कर ली थी। बंगाल के विख्यात ठाकुर घराने में यह दुर्घटना तेईस वर्षीय रवीन्द्रनाथ के विवाह के मात्र चार महीने बाद घटी। क्या रवीन्द्रनाथ के विवाह ने उन दोनों के बीच के किसी सूत्र को छिन्न-भिन्न कर दिया था, जिसके बाद कादम्बरी का जीवित रहना असम्भव हो गया? फिर इसमें ऐसा क्या था कि ठाकुर घराने के मुखिया, महर्षि देवेन्द्रनाथ ने अपनी बहू की आत्महत्या के एक-एक साक्ष्य को नष्ट करा देना अपरिहार्य समझा?
कादम्बरी की मृत्यु के सवा सौ साल से भी अधिक समय बाद प्रकाशित यह उपन्यास ऐसे तमाम प्रश्नों के उत्तर देता है। वस्तुत: यह ऐसी कृति है जो उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध की एक घटना के बहाने बांग्ला नवजागरण के अन्तर्विरोधों को जबरदस्त ढंग से उजागर करती है...
अत्यन्त विवादित और उतना ही लोकप्रिय उपन्यास!
Nishkasan
- Author Name:
Doodhnath Singh
- Book Type:

-
Description:
...'दाँये देखना ठीक नहीं। 'गुरू जी ने कहा।'
और अगर दाँये गड्ढा-गुड्ढी हो तो गुरू जी?'
तो ज़्यादा बाँयें झुक जाओ।' गुरू जी बोले।
'और अगर उधर भी हो तो?'
'तो आगे-पीछे हो जाओ।'
'और आगे-पीछे भी हो तो?'
'तो सवाल यह होगा कि तुम उस सुरक्षित, विचारहीन जगह पर पहुँचे ही कैसे?' गुरू जी ने कहा।
'यही तो मेरी भी समझ में नहीं आता गुरू जी!'
...'मान लीजिये आपकी बेटी है तब? मुफ़्ती की बेटी थी तब? तब तो सारा प्रशासन सिर के बल खड़ा हो गया था! अपहरण और आपूर्ति में ज़्यादा फ़र्क नहीं है पंडित जी! दोनों में अनिच्छित शोषण है। दोनों में हिंसा है। जबर्दस्त शारीरिक और मानसिक अपमान है। दोनों में बल-प्रयोग है, सिर्फ़ उसके तरीके में अन्तर है। दोनों में फिरौती है–एक में प्रत्यक्ष, दूसरे में परोक्ष। आप क्या समझते हैं, जो देवी जी वहाँ प्रतिष्ठित पद पर आसीन हैं और इस कुकर्म में लिप्त हैं उनका कोई निहित स्वार्थ नहीं होगा? सिर्फ़ एक घिनौने मज़े के लिए वे ऐसा करती होंगी?...लेकिन नहीं, किसी खटिक की बेटी होने का क्या मतलब? उसे नरक में डालो और हँसो। या उसे आपकी तरह 'अन्य मामलों' के घूरे पर डालकर रफ़ा-दफ़ा कर दो। 'महामहिम खाँसने लगे।'
...कटुए, क्रिश्चियन और कम्यूनिस्ट, तीनों देशद्रोही हैं–अन्तत: यह उनका और उनकी पार्टी का खुला-छिपा राजनैतिक नारा है।
...'यह कम्यूनिस्टों की साजिश है सर! 'कुलपति ने कहा। महामहिम ने पीछे खड़े अपने प्रमुख सचिव को देखा, जैसे कह रहे हों, उस दिन लॉन में टहलते हुए मैंने आपको बेकार ही डाँटा था।
'ये फ़ाइल है सर।' कुलपति ने फ़ाइल प्रमुख सचिव की ओर बढ़ायी। 'नहीं, उसकी अब कोई ज़रूरत नहीं।' महामहिम ने हाथ के इशारे से मना किया।
Ruskin Bond Ki BestSeller Pustak (Best of Ruskin Bond) Set of 4 Books
- Author Name:
Ruskin Bond
- Book Type:

- Description: 9789355214096 - Suno Bachcho, Meri Priya Kahaniyan (Hindi Translation of Collected Short Stories) सुप्रसिद्ध कहानीकार रस्किन बॉण्ड की बाल कहानियाँ न केवल मनोरंजक होती हैं, बल्कि प्रेरणादायी भी| हर कहानी में बच्चों के लिए अनुकरणीय सीख अवश्य रहती है| 9789355214157 - 21 Baal Kahaniyan प्रस्तुत संग्रह की 21 बाल कहानियाँ एक से बढ़कर एक हैं, जिनमें बच्चों के मनोविज्ञान, कल्पना लोक और वास्तविक धरातल की मिली-जुली कहानियाँ हैं, जो शिक्षाप्रद तो हैं ही, मनोरंजन और पठनरस से भरपूर भी हैं। 9789355210494 - Ruskin Bond Ki Diary (Hindi Translation of A Book of Simple Living) यह पुस्तक ऐसे अनेक छोटे-छोटे पलों को दर्ज करती है, जो स्वयं के साथ ही इस प्राकृतिक जगत्, दोस्तों और परिवार ही नहीं आने-जानेवालों को मिलाकर भी एक सामंजस्यपूर्ण जीवन की रचना करती है। इन पन्नों में हम एक जंगली बेर को फलते और देवदार के पेड़ों के बीच से चंद्रमा को निकलते देखते हैं। हम रेडस्टार्ट पक्षियों को चहचहाते और टिन की छत पर बारिश को ढोल बजाते सुनते हैं। हम क्षति के परिणामों और पुराने साथियों की सांत्वना को समझते हैं। 9789355214102 - Pariyonwali Pahadi Aur Anya Kahaniyan सुप्रसिद्ध किस्सागो रस्किन बॉण्ड की कहानियों का यह संग्रह बालक-तरुण पाठकों को परियों की हसीन दुनिया की सैर कराता है; ये भी परियों के साथ बिना परों के ही उड़ने लगते हैं । मनोरंजन से भरपूर कहानी-संग्रह|
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