Nyay Ka Sangharsh
Author:
YashpalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics0 Ratings
Price: ₹ 316
₹
395
Available
न्याय की धारणा और समाज की व्यवस्था के समान रूखे विषय की विवेचना को भी रंजक बना देना इन लेखों की सार्थकता है। भाषा प्रवाह के ऊपर तैरते हुए विद्रूप की तह में सिद्धान्तों की शिलाएँ मौजूद हैं। मनोरंजन और विद्रूप का अभिप्राय रूखे और गम्भीर विषय को रोचक बना देना ही है। इन लेखों को पढ़कर आपके होंठों पर जो मुस्कराहट आएगी, वह आत्म-विस्मृत और आनन्दोल्लास की न होकर क्षोभ, परिताप और करुणा की होगी।</p>
<p>इन लेखों में लेखक ने आत्म-विस्मृत समाज को क़लम की नोक से गुदगुदाकर जगाने की चेष्टा की है और समाज को करवट बदलते न देखकर कई जगह उसने क़लम की नोक समाज के शरीर में गड़ा दी है।</p>
<p>—नरेन्द्र देव
ISBN: 9788119996247
Pages: 91
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: सन् 1994 में बीस साल की गुंजन सक्सेना पायलट कोर्स के लिए चौथे शॉर्ट सर्विस कमिशन (महिलाओं के लिए) की चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए मैसूर जानेवाली ट्रेन पर सवार होती है। चौहत्तर सप्ताह की कमरतोड़ ट्रेनिंग के बाद वह डिंडीगुल स्थित एयरफोर्स एकेडमी से पायलट ऑफिसर गुंजन सक्सेना के रूप में पास आउट होती है। 3 मई, 1999 को स्थानीय चरवाहों ने कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ की खबर दी। मध्य मई तक घुसपैठियों को खदेड़ने के मकसद से हजारों भारतीय सैनिक पहाड़ पर लड़े जानेवाले युद्ध में शामिल थे। भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ का आगाज किया, जिसमें उसके सभी पायलट मोर्चे पर थे। महिला पायलटों को जहाँ अब तक युद्ध क्षेत्र में नहीं उतारा गया था, वहीं उन्हें घायलों के बचाव, रसद गिराने और टोह लेने के लिए भेजा गया। गुंजन सक्सेना को अपनी क्षमता प्रमाणित करने का यह स्वर्णिम अवसर था। द्रास और बटालिक क्षेत्रों में बेहद जरूरी आपूर्ति को हवा से गिराने और लड़ाई के बीच से घायलों का बचाव करने से लेकर, पूरी सावधानी से दुश्मनों के ठिकानों की जानकारी अपने सीनियर अधिकारियों तक पहुँचाने और एक बार तो अपनी एक उड़ान के दौरान पाकिस्तानी रॉकेट मिसाइल से बाल-बाल बचने तक, सक्सेना ने निर्भीकतापूर्वक अपने दायित्वों को निभाया, जिससे उन्होंने यह नाम अर्जित किया—कारगिल गर्ल। महिलाओं की सामर्थ्य, क्षमताओं और अद्भुत जिजीविषा की कहानी है गुंजन सक्सेना की यह प्रेरणाप्रद पुस्तक
Nirala Kriti Se Sakshatkar
- Author Name:
Nandkishore Naval
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Description:
हिन्दी आलोचना में डॉ. नंदकिशोर नवल का मुख्य कार्य-भार रहा है पाठ से हटी हुई आलोचना को पाठाधारित करना। यह काम उन्होंने इस तरह किया है कि आलोचना पाठ-केन्द्रित भी हो और वह अपने भीतर रचना के अदृश्य विस्तार को भी समेट सके। वे निराला-काव्य के समर्पित अध्येता रहे हैं और उन्होंने निराला पर शोध करने के साथ विश्वविद्यालय में लम्बे समय तक निराला-काव्य का अध्यापन भी किया है। हिन्दी संसार उनके द्वारा सम्पादित ‘निराला रचनावली’ के आठ खंडों में उनका श्रम और निष्ठा देख चुका है। प्रस्तुत पुस्तक के दो खंडों में उन्होंने निराला की महत्त्वपूर्ण काव्य-कृतियों का ऐसा पाठाधारित विश्लेषण किया है, जो जितना ही पांडित्य के पाखंड से शून्य है, उतना ही सरस और रचनात्मक। उचित ही उन्होंने कहा है कि उन्होंने निराला की कविता की पंखुड़ियाँ छिन्न-भिन्न नहीं कीं, सिर्फ़ इसके लिए प्रयास किया है कि वह अपनी नाल पर प्रस्फुटित हो जाए।
‘कृति से साक्षात्कार’ के प्रथम खंड में निराला की कालजयी पूर्ववर्ती कविताओं का विवेचन है और द्वितीय खंड में गीतों के साथ उनकी मध्यवर्ती और परवर्ती उन कविताओं का, जिन्होंने हिन्दी कविता में नए-नए वाग्द्वार खोले। 1936 में निराला ऐसा मानते थे कि उनकी शमा पूरी-पूरी नहीं जली, उसमें हज़ार-दो हज़ार बत्तियों की ताक़त नहीं आई। उनके पूर्ववर्ती कृतित्व के साथ मध्यवर्ती और परवर्ती कृतित्व को भी दृष्टि में रखने पर वह अपनी रोशनी से आँखें चौंधियाती दिखलाई पड़ती हैं।
डॉ. नवल के इस अध्ययन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह परवर्ती पीढ़ी के एक आलोचक द्वारा किया गया अध्ययन है, जिसमें दृष्टि की वस्तुपरकता तो है ही, नई काव्य-संवेदना की दीप्ति भी है।
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